शिशु मृत्यु दर के बारे में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. यह शिशु के जन्म से लेकर ठीक 1 वर्ष की आयु के बीच मृत्यु की सम्भावना है, जो प्रति 10000 जीवित जन्मों पर व्यक्त की जाती है। 2. वर्ष 1950 में शिशु मृत्यु दर 189·6 थी। 3. वर्ष 2019 में शिशु मृत्यु दर 30 थी। 4. रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इन्डिया (आर० जी० आइ०) के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एस० आर० एस०) के बुलेटिन के अनुसार उत्तर प्रदेश, वर्ष 2019 में सबसे अधिक शिशु मृत्यु दर वाला राज्य था। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
- (a)1, 2 और 3
- (b)2, 3 और 4
- (c)केवल 2 और 3
- (d)1 और 4
सही — C, केवल 2 और 3। महारजिस्ट्रार की अपनी नमूना पंजीकरण प्रणाली की 2019 की सांख्यिकीय रिपोर्ट चार में से दो कथनों को प्रश्नपत्र के विरुद्ध और एक को उसके पक्ष में तय कर देती है। कथन 1 एक ही संख्या पर विफल होता है। रिपोर्ट सूत्र यों छापती है: 'शिशु मृत्यु दर (आई० एम० आर०) = वर्ष के दौरान शिशु मृत्युओं की संख्या ÷ वर्ष के दौरान जीवित जन्मों की संख्या × 1000', और पैरा 4.11 उसे शब्दों में दोहराता है — 'शिशु मृत्यु दर को प्रति हज़ार जीवित जन्मों पर शिशु मृत्युओं (एक वर्ष से कम) के रूप में परिभाषित किया जाता है'। कथन प्रति 10,000 कहता है, जो दस गुने का दोष है; उस उपवाक्य से पहले का सब कुछ मानक अंतर्राष्ट्रीय शब्दावली है, और ठीक इसीलिए यह भूल आँख से छूट जाना आसान है। कथन 3 सही है: रिपोर्ट दर्ज करती है कि 'राष्ट्रीय स्तर पर शिशु मृत्यु दर (आई० एम० आर०) ने भी 2018 के 32 से घटकर 2019 में 30 होकर 2 अंक की गिरावट दर्ज की है', जिसमें ग्रामीण 34 और शहरी 20 है। कथन 4 राज्य पर विफल होता है: वही रिपोर्ट कहती है कि 'अधिकतम शिशु मृत्यु दर मध्य प्रदेश (46) में और न्यूनतम केरल (6) में देखी गई है', और उसकी विवरणी 46 वाली तालिका उत्तर प्रदेश को 41 पर रखती है — बड़े राज्यों में दूसरे स्थान पर, पहले पर नहीं। बचता है कथन 2, यानी 1950 का 189·6 वाला आँकड़ा। उसे इस रिपोर्ट से जाँचा ही नहीं जा सकता, क्योंकि एस० आर० एस० की शृंखला 1971 से ही शुरू होती है, जहाँ शिशु मृत्यु दर 129 है। जाँचने की ज़रूरत भी नहीं: कथन 1 और 4 दोनों असत्य होने से विकल्प (a), (b) और (d) में से हर एक कोई न कोई असत्य ढोता है, और 'केवल 2 और 3' अकेला आंतरिक रूप से संगत उत्तर बचता है। यहाँ हमारे उत्तर का ईमानदार आधार यही है — एस० आर० एस० रिपोर्ट के विरुद्ध दो स्वतंत्र सत्यापन, और बाक़ी काम छँटाई का।
- (a)1, 2 और 3 — निकट-चूक। यह कथन 2 और 3 को सही रखता है और फिर कथन 1 जोड़ देता है, जिसका अकेला दोष हर है — महारजिस्ट्रार का सूत्र 1,000 कहता है जबकि कथन 10,000 कहता है। जो अभ्यर्थी आरंभिक शब्दों को शिशु मृत्यु दर की पाठ्यपुस्तकीय परिभाषा के रूप में पहचान लेते हैं वे प्राय: वाक्य के अंत तक पढ़े बिना इस पर निशान लगा देते हैं।
- (b)2, 3 और 4 — यह भी दोनों सच्चे कथन रखता है और फिर यह दावा जोड़ देता है कि 2019 में सबसे अधिक शिशु मृत्यु दर उत्तर प्रदेश की थी। यह इसलिए लुभाता है कि उत्तर प्रदेश का 41 सचमुच देश के सबसे बुरे आँकड़ों में है, और इसलिए भी कि भारत के सबसे ख़राब स्वास्थ्य-संकेतक वाले किसी भी प्रश्न का प्रतिवर्त-उत्तर उत्तर प्रदेश ही होता है — पर मध्य प्रदेश उससे ऊपर था, 46 पर।
- (d)1 और 4 — उत्तर का ठीक-ठीक उलटा: यह ठीक वही दो कथन चुनता है जिनका खंडन एस० आर० एस० रिपोर्ट करती है — प्रति 10,000 वाला हर और उत्तर प्रदेश वाला दावा — और दोनों टिकने वाले कथन छोड़ देता है। जो भी प्रति हज़ार वाला नियम या मध्य प्रदेश वाला आँकड़ा जानता है वह इसे तुरंत हटा सकता है।
शिशु मृत्यु दर किसी पंचांग वर्ष में एक वर्ष से कम आयु के बालकों की मृत्युओं की संख्या है, जिसे उस वर्ष के जीवित जन्मों से भाग देकर 1,000 से गुणा किया जाता है। यह किसी आबादी के स्वास्थ्य का सबसे संवेदनशील एकल संकेतक है, क्योंकि शिशु का जीवित रहना एक साथ पोषण, स्वच्छता, मातृ स्वास्थ्य, टीकाकरण और देखभाल तक पहुँच पर निर्भर करता है। यह आगे टूटती भी है: नवजात मृत्यु दर 29 दिन से कम की मृत्युओं को समेटती है और आगे प्रारंभिक नवजात (सात दिन से कम) तथा उत्तरवर्ती नवजात में बँटती है, जबकि उत्तर-नवजात दर पहले वर्ष के बाक़ी हिस्से को समेटती है। भारत में ये संख्याएँ नमूना पंजीकरण प्रणाली से आती हैं, जिसे गृह मंत्रालय के अधीन महारजिस्ट्रार कार्यालय चलाता है और जो 1971 से लगातार गणना की जाने वाली बड़ी नमूना इकाइयों से जन्म दर, मृत्यु दर, शिशु मृत्यु और प्रजनन के वार्षिक आकलन देता आया है। यह 1971 वाला आरंभ-बिंदु इस प्रश्न के लिए मायने रखता है: 1971 से पहले का कोई भी भारतीय आँकड़ा किसी अन्य स्रोत का अनुमान है, एस० आर० एस० का पाठ नहीं।
इन ख़ास विकल्पों वाले चार-कथन समुच्चय से पार पाने का कारगर तरीक़ा असत्य ढूँढ़ना है, क्योंकि एक अकेला असत्य कई विकल्प एक साथ गिरा देता है। यह जान लीजिए कि शिशु मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर व्यक्त होती है और कथन 1 मर जाता है, और अपने साथ विकल्प (a) तथा (d) ले जाता है — एक याद रखे गए हर पर आधा प्रश्नपत्र निपट गया। बचते हैं (b) और (c), जो केवल कथन 4 पर अलग होते हैं, इसलिए पूरा प्रश्न एक ही तथ्य पर आ जाता है: 2019 में सबसे बुरी शिशु मृत्यु दर किस राज्य की थी। एस० आर० एस० रिपोर्ट उसका उत्तर एक वाक्य में देती है — मध्य प्रदेश 46, केरल 6 — और उत्तर प्रदेश 41 पर। तो (b) गिरता है और (c) खड़ा रहता है, और आपको कथन 2 के 1950 वाले आँकड़े का मूल्यांकन करना ही नहीं पड़ा। यह सौभाग्य की बात है, क्योंकि कथन 2 इस प्रश्न की सबसे कमज़ोर कड़ी है: 1950 के लिए 189·6 एस० आर० एस० से दो दशक पहले का है, और महारजिस्ट्रार जो सबसे पुरानी संख्या प्रकाशित करते हैं वह 1971 के लिए 129 है। परीक्षक ने ऐसा आँकड़ा बो दिया है जिसे उसी स्रोत के विरुद्ध नहीं जाँचा जा सकता जिसका नाम प्रश्न स्वयं लेता है, और विकल्प-समुच्चय उसे अप्रासंगिक बनाकर चुपचाप प्रश्न को बचा लेता है। बिहार वाला पाठ भी नोट कीजिए, क्योंकि BPSC उसका प्रयोग करेगा: 2019 में बिहार की शिशु मृत्यु दर 29 थी, जो राष्ट्रीय 30 से थोड़ी बेहतर है।
- एस० आर० एस० सांख्यिकीय रिपोर्ट 2019 का सूत्र: शिशु मृत्यु दर = (वर्ष के दौरान शिशु मृत्युएँ ÷ वर्ष के दौरान जीवित जन्म) × 1000। प्रति हज़ार, कभी प्रति दस हज़ार नहीं — प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर व्यक्त होने वाला संकेतक मातृ मृत्यु अनुपात है।
- 2019 में भारत की शिशु मृत्यु दर 30 थी — ग्रामीण 34, शहरी 20 — जो 2018 के 32 से 2 अंक कम है और 2014 के 39 से नीचे, यानी पाँच वर्ष में 9 अंक की गिरावट, औसतन लगभग 1.8 अंक प्रति वर्ष।
- 2019 में बड़े राज्यों में परास केरल 6 से मध्य प्रदेश 46 तक थी; उत्तर प्रदेश 41 पर था, असम और छत्तीसगढ़ 40 पर, ओडिशा 38, राजस्थान 35, तमिलनाडु 15, दिल्ली 11।
- 2019 में बिहार की शिशु मृत्यु दर 29 थी (ग्रामीण 29, शहरी 27), जो अखिल भारतीय 30 से ठीक नीचे है और 2014 के 42 से घटी है। रिपोर्ट की विवरणी 47 दिखाती है कि बिहार की औसत शिशु मृत्यु दर 2007-09 के 55.0 से घटकर 2017-19 में 32.2 हो गई, यानी 41.5 प्रतिशत की गिरावट, जबकि भारत की 40.1 प्रतिशत रही।
- शिशु मृत्यु दर अपने पड़ोसी संकेतकों जैसी नहीं है: 2019 में भारत के लिए पाँच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर 35 थी, नवजात मृत्यु दर 22, प्रारंभिक नवजात दर 16 और उत्तर-नवजात दर 8। शिशु मृत्युएँ सभी मृत्युओं की 9.9 प्रतिशत थीं, और 54.0 प्रतिशत शिशु मृत्युएँ जीवन के पहले सप्ताह के भीतर हुईं।
- बचे हुए बोझ को रिपोर्ट अपने शब्दों में यों रखती है: 'राष्ट्रीय स्तर पर हर 33 में से एक शिशु, ग्रामीण क्षेत्रों में हर 29 में से एक शिशु और शहरी क्षेत्रों में हर 50 में से एक शिशु आज भी जीवन के एक वर्ष के भीतर मर जाता है'।
- एस० आर० एस० शृंखला 1971 में 129 की शिशु मृत्यु दर से शुरू होती है, और इसीलिए कथन 2 के 1950 वाले 189·6 का स्रोत महारजिस्ट्रार नहीं हो सकता। वही 2019 की रिपोर्ट यह भी दर्ज करती है कि उस वर्ष भारत की सबसे ऊँची कुल प्रजनन दर बिहार की थी, 3.1, जबकि राष्ट्रीय 2.1 थी।
कथन 4 दावा करता है कि 2019 में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर था। उभरी हुई जोड़ी ही भेदक है: मध्य प्रदेश 46 पर उत्तर प्रदेश के 41 से ऊपर था, इसलिए कथन 4 असत्य है और केवल 'केवल 2 और 3' बचता है।
- हर। शिशु मृत्यु दर, नवजात मृत्यु दर और पाँच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्म हैं; मातृ मृत्यु अनुपात प्रति 100,000 है। गुणक बदल देने वाला कथन इस विषय का सबसे आम अकेला असत्य है।
- यह मान लेना कि उत्तर प्रदेश हर स्वास्थ्य-संकेतक पर सबसे बुरा है। 2019 की शिशु मृत्यु दर पर बड़े राज्यों में सबसे बुरा मध्य प्रदेश था, 46 पर, और उत्तर प्रदेश 41 पर।
- शिशु मृत्यु दर को पाँच वर्ष से कम या नवजात मृत्यु दर से गड्डमड्ड कर देना। 2019 में भारत के लिए ये क्रमश: 30, 35 और 22 थीं — तीन अलग आयु-खिड़कियों के लिए तीन अलग संख्याएँ।
- 1971 से पहले की किसी भारतीय शिशु मृत्यु दर को एस० आर० एस० का आँकड़ा बताकर उद्धृत कर देना। एस० आर० एस० शृंखला 1971 में 129 से खुलती है; उससे पुराना कुछ भी किसी दूसरे आकलन से आता है।
- एक ही वर्ष के लिए एस० आर० एस० और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आँकड़े मिला देना। वे अलग-अलग औज़ार हैं और उनका मेल खाना ज़रूरी नहीं।
BPSC इन्हें चार-कथन समुच्चयों के रूप में बनाता है जिनमें एक कथन ग़लत गुणक ढोता है और दूसरा ग़लत राज्य, इसलिए प्रश्नपत्र वस्तुत: यह जाँच रहा है कि आपने वाक्य अंत तक पढ़ा या नहीं और आप कोई एक राज्यवार छोर जानते हैं या नहीं। UPSC यही सामग्री साफ़-सुथरे परिभाषा-प्रश्न के रूप में पूछता है — कुल प्रजनन दर ठीक-ठीक है क्या, क्या शिशु मृत्यु दर केवल पहले महीने को समेटती है, वह प्रति 100 पर है या प्रति 1,000 पर — और किसी राज्य का संख्यात्मक मान याद करने को लगभग कभी नहीं कहता। परिभाषाएँ हर तक सीख लीजिए और दोनों छोर, केरल तथा मध्य प्रदेश, याद रखिए, तो दोनों प्रारूप सध जाते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. शिशु मृत्यु दर जन्म के बाद एक महीने के भीतर हुई शिशु मृत्युओं को ध्यान में रखती है। 2. शिशु मृत्यु दर किसी विशेष वर्ष में हुई शिशु मृत्युओं की संख्या है, जो उस वर्ष के प्रति 100 जीवित जन्मों पर होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर(d) न तो 1 और न ही 2
वही जाल, चौदह वर्ष पहले और हड्डियों तक उतारा हुआ। UPSC ने एक ग़लत आयु-खिड़की और एक ग़लत हर बोया — प्रति 1,000 के बजाय प्रति 100 — और यही यहाँ कथन 1 का दोष है। यदि आप 2009 वाले प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं तो आप इस BPSC समुच्चय का आधा हिस्सा पहले ही निपटा चुके हैं।
किसी अर्थव्यवस्था में कुल प्रजनन दर को इस रूप में परिभाषित किया जाता है :
- (a) किसी वर्ष में जनसंख्या के प्रति 1000 लोगों पर जन्मे बच्चों की संख्या
- (b) किसी दी गई जनसंख्या में किसी दंपति के जीवनकाल में जन्मे बच्चों की संख्या
- (c) जन्म दर घटा मृत्यु दर
- (d) किसी स्त्री के प्रजनन-आयु पूरी होने तक उसके जीवित जन्मों की औसत संख्या
उत्तर(d) किसी स्त्री के प्रजनन-आयु पूरी होने तक उसके जीवित जन्मों की औसत संख्या
उसी नमूना पंजीकरण प्रणाली परिवार का पड़ोसी संकेतक, UPSC की मनपसंद शैली में जाँचा गया — मान से नहीं, परिभाषा से, जिसमें ग़लत विकल्प कच्ची जन्म दर और प्राकृतिक वृद्धि दर से गढ़े गए हैं। हर जीवन-दर क्या नापती है और किस आधार पर, इस बारे में सटीकता ही वह अकेला कौशल है जिसे दोनों प्रश्न पुरस्कृत करते हैं।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
भारत के महारजिस्ट्रार की एस० आर० एस० सांख्यिकीय रिपोर्ट 2019 के अनुसार बड़े राज्यों में सबसे अधिक शिशु मृत्यु दर किस राज्य ने दर्ज की?
- (a)मध्य प्रदेश
- (b)उत्तर प्रदेश
- (c)असम
- (d)ओडिशा
उत्तर(a) मध्य प्रदेश — 2019 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 46, जबकि उत्तर प्रदेश 41, असम 40 और ओडिशा 38 पर था; सबसे कम केरल में 6 थी।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
नमूना पंजीकरण प्रणाली द्वारा प्रकाशित शिशु मृत्यु दर कितने जीवित जन्मों पर व्यक्त की जाती है?
- (a)100
- (b)1,000
- (c)10,000
- (d)100,000
उत्तर(b) 1,000 — एस० आर० एस० का सूत्र शिशु मृत्युओं और जीवित जन्मों के अनुपात को 1,000 से गुणा करता है; प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर तो मातृ मृत्यु अनुपात व्यक्त होता है।