आई सी ए आर – सी आई आर सी ओ टी मुम्बई द्वारा विकसित भारत का पहला नैनो–सेलुलोस संयंत्र संबंधित है
- (1)कपास से
- (2)जूट से
- (3)बाँस से
- (4)चावल से
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), कपास से.
मुम्बई स्थित आई सी ए आर – सी आई आर सी ओ टी (ICAR-CIRCOT), यानी केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान, ने नैनो–सेलुलोस का एक पायलट संयंत्र स्थापित किया, जो कच्चे माल के रूप में कपास लिंटर और कपास अपशिष्ट का उपयोग करता है।
CIRCOT इस संयंत्र को भारत में अपनी तरह का पहला और कपास लिंटर का उपयोग कर सकने में विश्व में अनूठा बताता है। इसकी क्षमता 8 घंटे की प्रति पाली 10 kg नैनो–सेलुलोस है।
ICAR ने राष्ट्रीय कृषि नवोन्मेष परियोजना (NAIP) के माध्यम से ₹400 लाख के बजट से इस संयंत्र का वित्तपोषण किया। संस्थान की ऊर्जा-दक्ष रासायनिक-यांत्रिक प्रक्रिया को तीन प्रक्रिया पेटेंट मिले।
संस्थान का नाम भी इसी ओर संकेत करता है: 1966 से CIRCOT के अधिदेश में कपास की कटाई-उपरांत प्रौद्योगिकी और कपास के उप-उत्पादों का मूल्य संवर्धन तथा अपशिष्टों का प्रसंस्करण शामिल रहा है।
याद रखने की बात: CIRCOT का नैनो–सेलुलोस कपास लिंटर से बनता है — ओटाई के बाद बिनौले पर बचे छोटे रेशे।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)जूट से — जूट पौधे के तने का रेशा है जिसमें सेलुलोस होता है, इसलिए सिद्धांततः उससे नैनो–सेलुलोस बनाया जा सकता है। पर प्रश्न में दिया गया CIRCOT का पायलट संयंत्र कपास लिंटर और कपास अपशिष्ट पर चलता है।
जूट के लिए ICAR का फसल अनुसंधान संस्थान पश्चिम बंगाल में स्थित केंद्रीय पटसन एवं समवर्गीय रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर है।
- (3)बाँस से — बाँस काष्ठीय जैवभार है, और CIRCOT नैनो–सेलुलोस के सामान्य कच्चे मालों में काष्ठीय जैवभार को गिनाता है। पर प्रश्न में दिया गया पायलट संयंत्र कपास लिंटर के उपयोग के लिए बनाया गया था।
वनस्पति-विज्ञान की दृष्टि से बाँस पोएसी कुल की एक विशाल घास है — वही कुल जिसमें चावल और गेहूँ आते हैं।
- (4)चावल से — धान का पुआल और भूसी सेलुलोस-युक्त फसल अवशेष हैं, और CIRCOT नैनो–सेलुलोस के सामान्य कच्चे मालों में कृषि-जैवभार को गिनाता है। पर प्रश्न में दिया गया पायलट संयंत्र कपास लिंटर और कपास अपशिष्ट पर चलता है।
ICAR के चावल अनुसंधान संस्थानों में राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक और भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद शामिल हैं।
अवधारणा
सेलुलोस पादप कोशिका भित्ति की मुख्य संरचनात्मक सामग्री है: ग्लूकोज़ इकाइयों की लंबी शृंखलाएँ, जो हाइड्रोजन बंधों से जुड़ी रहती हैं। कपास का रेशा इसके सबसे शुद्ध प्राकृतिक स्रोतों में से एक है।
नैनो–सेलुलोस वह सेलुलोस है जिसे नैनोमीटर पैमाने (1 nm = 10⁻⁹ m) तक तोड़ा गया हो। CIRCOT इसकी विशेषताएँ बताता है: उच्च यांत्रिक सामर्थ्य, आयतन की तुलना में बड़ा पृष्ठ क्षेत्रफल, जैव-निम्नीकरणीयता, और नए प्रकार के प्रवाह (अपरूपण-तनुकरण) व प्रकाशीय गुण।
आयामों के आधार पर CIRCOT इसे नैनो क्रिस्टलीय सेलुलोस (पहलू अनुपात 100 से कम) या नैनो तंतुकीय सेलुलोस (पहलू अनुपात 100 से अधिक) में बाँटता है।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत "नैनो–प्रौद्योगिकी, जैव–प्रौद्योगिकी एवं अनुवंशिक–अभियांत्रिकी" शामिल है। कपास से बना नैनो–सेलुलोस नैनो–प्रौद्योगिकी को एक कृषि उत्पाद से जोड़ता है।
CIRCOT की स्थापना 1924 में भारतीय केंद्रीय कपास समिति ने प्रौद्योगिकीय प्रयोगशाला के रूप में की थी। 1966 में यह कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में ICAR के अधीन आई, और 1 अप्रैल 1991 से इसका नाम CIRCOT हुआ।
CIRCOT नैनो–सेलुलोस के जो उपयोग बताता है, उनमें जैव-सम्मिश्रों में सुदृढ़ीकरण, उच्च गुणवत्ता के कागज़ और पेंट में योजक, खरोंच-रोधी लेप, और कपास के रेशे की कताई के लिए स्नेहक फ़ॉर्मूलेशन शामिल हैं।
मुख्य तथ्य
- मुम्बई स्थित ICAR-CIRCOT का नैनो–सेलुलोस पायलट संयंत्र कच्चे माल के रूप में कपास लिंटर और कपास अपशिष्ट का उपयोग करता है।
- यह पायलट संयंत्र 8 घंटे की प्रति पाली 10 kg नैनो–सेलुलोस बना सकता है।
- ICAR ने राष्ट्रीय कृषि नवोन्मेष परियोजना (NAIP) के माध्यम से ₹400 लाख के बजट से इस संयंत्र का वित्तपोषण किया।
- CIRCOT 1924 में प्रौद्योगिकीय प्रयोगशाला के रूप में शुरू हुआ और 1 अप्रैल 1991 से इसका नाम केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान हुआ।
- CIRCOT नैनो–सेलुलोस को नैनो क्रिस्टलीय सेलुलोस (पहलू अनुपात 100 से कम) या नैनो तंतुकीय सेलुलोस (100 से अधिक) में बाँटता है।
पायलट संयंत्र की क्षमता: 8 घंटे की प्रति पाली 10 kg। स्रोत: ICAR-CIRCOT।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- जूट, बाँस और धान के अवशेष — सभी में सेलुलोस होता है, इसलिए सिद्धांततः हर एक से नैनो–सेलुलोस बन सकता है। प्रश्न एक कपास प्रौद्योगिकी संस्थान के एक विशेष संयंत्र का नाम देता है, और वह संयंत्र कपास लिंटर का उपयोग करता है।
- संस्थान का पूरा नाम पढ़िए। CIRCOT केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान है, इसलिए उसका नाम ही फसल की ओर संकेत करता है।
- एक नैनोमीटर 10⁻⁹ m है। नैनो पदार्थों की सामान्य परिभाषा में कम-से-कम एक आयाम लगभग 1–100 nm की सीमा में होता है; इकाई और आकार-सीमा को अलग-अलग याद रखिए।
कोई प्रश्न किसी संस्थान की सुविधा या उत्पाद का नाम देकर उसकी फसल या कच्चा माल पूछ सकता है, या यह पूछ सकता है कि ICAR का कोई संस्थान कहाँ स्थित है।
कोई प्रश्न नैनो पदार्थों के प्रकार, इकाइयाँ और उपयोग पूछ सकता है। कोई प्रश्न सुमेलन सूची में संस्थानों को फसलों से भी सुमेलित करवा सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
ICAR-केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (CIRCOT) का मुख्यालय कहाँ स्थित है ?
- (a)नागपुर
- (b)मुम्बई
- (c)कोयंबटूर
- (d)सिरसा
उत्तर(2) — CIRCOT का मुख्यालय मुम्बई में है। विकल्प (1) नागपुर में CIRCOT का ओटाई प्रशिक्षण केंद्र और ICAR का केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान है; विकल्प (3) और (4), कोयंबटूर और सिरसा, में CIRCOT की क्षेत्रीय गुणवत्ता मूल्यांकन इकाइयाँ हैं, मुख्यालय नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
नैनो क्रिस्टलीय सेलुलोस और नैनो तंतुकीय सेलुलोस को एक-दूसरे से किस आधार पर अलग किया जाता है ?
- (a)पहलू अनुपात
- (b)रंग
- (c)पादप स्रोत
- (d)गलनांक
उत्तर(1) — CIRCOT नैनो–सेलुलोस को आयामों के आधार पर बाँटता है: नैनो क्रिस्टलीय के लिए पहलू अनुपात 100 से कम और नैनो तंतुकीय सेलुलोस के लिए 100 से अधिक। विकल्प (2), (3) और (4) इस वर्गीकरण का आधार नहीं हैं, जो केवल आयामों पर टिका है।