चौथी पीढ़ी का जैव–ईंधन प्राप्त होता है, आनुवंशिक रूप से संशोधित
- (1)आर्किबैक्टीरिया से
- (2)स्टार्च देने वाली फसलों से
- (3)लिग्नो–सेलुलोस देने वाली फसलों से
- (4)शैवाल से
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), शैवाल से.
जैव–ईंधनों को इस आधार पर पीढ़ियों में बाँटा जाता है कि वे किससे बनते हैं। PLOS Biology में प्रकाशित 2023 की एक समीक्षा यह वर्गीकरण देती है: पहली पीढ़ी खाद्य फसलों से, दूसरी लिग्नो–सेलुलोस वाले बायोमास और अपशिष्ट से, तीसरी मुख्यतः सूक्ष्म शैवाल और सायनोबैक्टीरिया से, और चौथी ईंधन बनाने वाले जीवों की आनुवंशिक अभियांत्रिकी से।
यह अभियांत्रिकी अधिक लिपिड संश्लेषण, अधिक प्रकार की शर्कराओं के उपयोग, या बेहतर प्रकाश संश्लेषण और कार्बन स्थिरीकरण जैसे गुणों को लक्ष्य बनाती है।
चारों विकल्पों में इस प्रकार संशोधित किया जाने वाला जीव शैवाल है; स्टार्च देने वाली फसलें और लिग्नो–सेलुलोस देने वाली फसलें पहली दो पीढ़ियों की हैं।
Chemosphere में प्रकाशित 2021 के एक शोध-पत्र के शीर्षक में भी यही जोड़ी है: 'Fourth generation biofuel from genetically modified algal biomass' (आनुवंशिक रूप से संशोधित शैवाल बायोमास से चौथी पीढ़ी का जैव–ईंधन)।
याद रखने की बात: तीसरी पीढ़ी = शैवाल; चौथी पीढ़ी = आनुवंशिक रूप से संशोधित शैवाल और अन्य संशोधित उत्पादक जीव।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)आर्किबैक्टीरिया से — आर्किबैक्टीरिया वह फीडस्टॉक (कच्चा माल) नहीं हैं जिससे किसी जैव–ईंधन पीढ़ी की पहचान होती है। जैव-ऊर्जा में ये सूक्ष्मजीवों के रूप में आते हैं: मीथेनोजेनिक आर्किया अवायवीय पाचन में मीथेन छोड़ते हैं, और यही प्रक्रिया बायोगैस के पीछे है।
PLOS Biology की समीक्षा यह भी बताती है कि मीथेनोजेनिक आर्किया सिनगैस का उपापचय कर सकते हैं, पर वह इस मार्ग को चौथी नहीं, दूसरी पीढ़ी के तरीकों में रखती है।
- (2)स्टार्च देने वाली फसलों से — गेहूँ और मक्का जैसी स्टार्च देने वाली फसलें पहली पीढ़ी का फीडस्टॉक हैं: इनके स्टार्च का किण्वन करके बायोएथेनॉल बनाया जाता है। इससे ईंधन उत्पादन खाद्य फसलों और कृषि भूमि से बँध जाता है।
बाद की पीढ़ियाँ खाद्य फसलों से दूर जाती हैं, और चौथी पीढ़ी शैवाल जैसे आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों तक पहुँचती है।
- (3)लिग्नो–सेलुलोस देने वाली फसलों से — लिग्नो–सेलुलोस वाला बायोमास — कृषि और वनों के अवशेष तथा अन्य अपशिष्ट — दूसरी पीढ़ी का फीडस्टॉक है। इसमें भोजन का उपयोग नहीं होता, पर लिग्निन जैसे यौगिक किण्वन की दक्षता घटा सकते हैं, इसलिए अतिरिक्त पूर्व-उपचार से समय और लागत बढ़ती है।
चौथी पीढ़ी इससे दो चरण आगे है — शैवाल जैसे आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों पर।
अवधारणा
जैव–ईंधन बायोमास से या जीवित जीवों द्वारा बनाया गया ईंधन है; बायोएथेनॉल, बायोडीज़ल, बायोब्यूटेनॉल और बायोगैस इसके उदाहरण हैं।
पीढ़ी का नाम फीडस्टॉक से जुड़ा है। पहली पीढ़ी के ईंधन स्टार्च, शर्करा या तेल से भरपूर खाद्य फसलों का उपयोग करते हैं। दूसरी पीढ़ी के ईंधन लिग्नो–सेलुलोस वाले अवशेषों, अपशिष्ट और जट्रोफा जैसे अखाद्य पौधों का। तीसरी पीढ़ी के ईंधन मुख्यतः सूक्ष्म शैवाल और सायनोबैक्टीरिया से आते हैं।
चौथी पीढ़ी के ईंधन उत्पादक जीवों पर आनुवंशिक अभियांत्रिकी लागू करते हैं — अधिक लिपिड उत्पादन, अधिक प्रकार की शर्कराओं के उपयोग, या बेहतर प्रकाश संश्लेषण और कार्बन स्थिरीकरण जैसे गुणों के लिए।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत "नैनो–प्रौद्योगिकी, जैव–प्रौद्योगिकी एवं अनुवंशिक–अभियांत्रिकी" और "भारत का भूगोल" के अंतर्गत "ऊर्जा संसाधन– परम्परागत एवं गैर–परम्परागत" शामिल हैं। चौथी पीढ़ी के जैव–ईंधन आनुवंशिक अभियांत्रिकी को ऊर्जा से जोड़ते हैं।
हर पीढ़ी की अपनी सीमाएँ हैं: पहली पीढ़ी के ईंधन भोजन से प्रतिस्पर्धा करते हैं, दूसरी पीढ़ी के फीडस्टॉक को अतिरिक्त पूर्व-उपचार चाहिए, और तीसरी पीढ़ी के शैवाल की कटाई कठिन है तथा उनके प्रसंस्करण में अधिक ऊर्जा लगती है। आनुवंशिक अभियांत्रिकी जीव से ही उत्पादन बढ़ाने का चौथी पीढ़ी का तरीका है।
स्रोतों में विवरण अलग-अलग हैं। उदाहरण के लिए, PLOS Biology की समीक्षा संशोधित बैक्टीरिया और यीस्ट, और प्रायोगिक इलेक्ट्रोबायोफ्यूल को भी चौथी पीढ़ी में गिनती है।
मुख्य तथ्य
- पहली पीढ़ी के जैव–ईंधन खाद्य फीडस्टॉक से बनते हैं: गेहूँ, मक्का और गन्ना जैसी स्टार्च और शर्करा से भरपूर फसलें, और रेपसीड, सोया व पाम जैसे खाद्य तेल।
- दूसरी पीढ़ी के जैव–ईंधन कृषि और वनों के अवशेषों, अन्य अपशिष्ट, और जट्रोफा जैसे अखाद्य पौधों के लिग्नो–सेलुलोस वाले बायोमास का उपयोग करते हैं।
- तीसरी पीढ़ी के जैव–ईंधन मुख्यतः सूक्ष्म शैवाल और सायनोबैक्टीरिया से प्राप्त होते हैं।
- चौथी पीढ़ी के जैव–ईंधन, ईंधन बनाने वाले जीवों को सुधारने के लिए आनुवंशिक अभियांत्रिकी का उपयोग करते हैं, जैसे आनुवंशिक रूप से संशोधित शैवाल।
- PLOS Biology की 2023 की समीक्षा के अनुसार शैवाल में प्रकाश संश्लेषण की दर स्थलीय पौधों से 2 से 4 गुना अधिक होती है, और उन्हें कृषि योग्य भूमि की आवश्यकता नहीं होती।
स्रोत: Cavelius et al., 'The potential of biofuels from first to fourth generation', PLOS Biology, 2023। विवरण स्रोतों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अकेले शैवाल तीसरी पीढ़ी की ओर संकेत करते हैं; आनुवंशिक रूप से संशोधित शैवाल चौथी की ओर। 'आनुवंशिक रूप से संशोधित' विशेषण ही उत्तर को एक पीढ़ी ऊपर ले जाता है।
- स्टार्च और लिग्नो–सेलुलोस दोनों पादप पदार्थ हैं, पर स्टार्च वाली फसलें पहली पीढ़ी (भोजन) की हैं और लिग्नो–सेलुलोस दूसरी पीढ़ी (अवशेष और अपशिष्ट) का। दोनों को आपस में न बदलें।
- मीथेनोजेनिक आर्किया बायोगैस की मीथेन बनाते हैं, जिससे आर्किबैक्टीरिया जैव–ईंधन की पीढ़ियों से जुड़े लग सकते हैं। वे चारों में से किसी भी पीढ़ी को परिभाषित करने वाला फीडस्टॉक नहीं हैं।
कोई प्रश्न कोई पीढ़ी बताकर उसका फीडस्टॉक पूछ सकता है, जैसा यह प्रश्न करता है, या फीडस्टॉक देकर उसकी पीढ़ी पूछ सकता है। कोई प्रश्न सुमेलन सूची में चारों पीढ़ियों को उनके फीडस्टॉक से भी मिलवा सकता है।
कोई प्रश्न यह पूछ सकता है कि किस फसल-समूह का उपयोग जैव–ईंधन उत्पादन के लिए नहीं किया जा सकता।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
फसल के भूसे जैसे लिग्नो–सेलुलोस वाले कृषि अवशेषों से बने जैव–ईंधन किस वर्ग में आते हैं?
- (a)पहली पीढ़ी के जैव–ईंधन
- (b)दूसरी पीढ़ी के जैव–ईंधन
- (c)तीसरी पीढ़ी के जैव–ईंधन
- (d)चौथी पीढ़ी के जैव–ईंधन
उत्तर(2) — लिग्नो–सेलुलोस वाले अवशेष और अपशिष्ट दूसरी पीढ़ी का फीडस्टॉक हैं। विकल्प (1) खाद्य फसलों का, विकल्प (3) मुख्यतः सूक्ष्म शैवाल और सायनोबैक्टीरिया का, और विकल्प (4) आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों का उपयोग करता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जैव–ईंधन की पीढ़ी को उसके विशिष्ट फीडस्टॉक से सुमेलित कीजिए : A. पहली पीढ़ी – i. सूक्ष्म शैवाल और सायनोबैक्टीरिया B. दूसरी पीढ़ी – ii. स्टार्च और शर्करा वाली खाद्य फसलें C. तीसरी पीढ़ी – iii. आनुवंशिक रूप से संशोधित शैवाल D. चौथी पीढ़ी – iv. लिग्नो–सेलुलोस वाले अवशेष कूट :
- (a)A-ii, B-iv, C-i, D-iii
- (b)A-iv, B-ii, C-i, D-iii
- (c)A-ii, B-iv, C-iii, D-i
- (d)A-i, B-iv, C-ii, D-iii
उत्तर(1) — खाद्य फसलें (A-ii), लिग्नो–सेलुलोस (B-iv), शैवाल और सायनोबैक्टीरिया (C-i), आनुवंशिक रूप से संशोधित शैवाल (D-iii)। विकल्प (2) A और B को आपस में बदलता है, विकल्प (3) C और D को, और विकल्प (4) A और C को।