निम्नलिखित में से किसमें परिवर्तन के कारण मोतियाबिन्द में आँखों का प्राकृतिक लेंस धुँधला हो जाता है ?
- (1)प्रोटीन
- (2)कार्बोहाइड्रेट
- (3)वसा
- (4)अश्रु ग्रन्थि
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), प्रोटीन.
लेंस आँख का पारदर्शी भाग है जो प्रकाश को फोकस करने में मदद करता है। अमेरिका के नेशनल आई इंस्टीट्यूट (NEI) के अनुसार लगभग 40 वर्ष की आयु से लेंस के प्रोटीन टूटने और आपस में चिपककर गुच्छे बनाने लगते हैं। ये गुच्छे लेंस पर एक धुँधला भाग बनाते हैं — यही मोतियाबिन्द है।
इसलिए धुँधलेपन के पीछे का परिवर्तन लेंस के प्रोटीन में होता है। NEI धुँधलेपन को प्रोटीन में परिवर्तन के रूप में समझाता है, और अश्रु ग्रन्थि तो लेंस का भाग ही नहीं है।
रेटिना तक पहुँचने के लिए प्रकाश को लेंस से होकर गुजरना पड़ता है। इसलिए धुँधला लेंस दृष्टि को धुँधली या अस्पष्ट बना देता है, और रंग फीके दिख सकते हैं।
याद रखने की बात: मोतियाबिन्द प्रोटीन के गुच्छे बनने से लेंस का धुँधलापन है, और शल्यक्रिया धुँधले लेंस की जगह कृत्रिम लेंस लगा देती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)कार्बोहाइड्रेट — कार्बोहाइड्रेट लेंस का वह घटक नहीं है जिसके परिवर्तन से लेंस धुँधला होता है; NEI लेंस के प्रोटीन के टूटने और गुच्छे बनने का वर्णन करता है।
रक्त शर्करा दूसरी ओर से जुड़ती है: NEI मधुमेह को उन स्वास्थ्य समस्याओं में गिनाता है जो मोतियाबिन्द का जोखिम बढ़ाती हैं। जोखिम कारक और लेंस में बदलने वाला पदार्थ एक ही चीज़ नहीं हैं।
- (3)वसा — वसा वह घटक नहीं है जिसके परिवर्तन से मोतियाबिन्द होता है; वह घटक लेंस का प्रोटीन है।
वसा आँख से दूसरे तरीके से जुड़ती है: विटामिन A, जो वसा में घुलनशील विटामिन है, कम रोशनी में देखने के लिए आवश्यक है, और इसकी कमी से रतौंधी होती है। यह पोषण की समस्या है, लेंस का धुँधलापन नहीं।
- (4)अश्रु ग्रन्थि — अश्रु ग्रन्थियाँ नेत्र-कोटर में, नेत्रगोलक के बाहर स्थित होती हैं और वे आँसू बनाती हैं जो आँख की सतह को नम रखते हैं। वे लेंस का भाग नहीं हैं, इसलिए उनमें परिवर्तन लेंस को धुँधला नहीं कर सकता।
आँसुओं से जुड़ी गड़बड़ी एक अलग स्थिति है — ड्राई आई (शुष्क नेत्र)।
अवधारणा
लेंस परितारिका (आइरिस) के पीछे स्थित होता है और प्रकाश को रेटिना पर फोकस करता है। इसके लिए उसका पारदर्शी रहना आवश्यक है, और उसकी पारदर्शिता इस पर निर्भर है कि उसके प्रोटीन व्यवस्थित बने रहें।
मोतियाबिन्द में ये प्रोटीन टूटकर आपस में गुच्छे बना लेते हैं, जिससे एक धुँधला भाग बनता है। NEI बताता है कि यह परिवर्तन लगभग 40 वर्ष की आयु से शुरू होता है।
NEI की जोखिम कारकों की सूची: मधुमेह और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ, धूम्रपान, अत्यधिक शराब, परिवार में मोतियाबिन्द का इतिहास, आँख की चोट, आँख की शल्यक्रिया या शरीर के ऊपरी भाग पर विकिरण उपचार, धूप में बहुत समय बिताना, और स्टेरॉयड दवाएँ।
NEI जिन लक्षणों का वर्णन करता है उनमें धुँधली या अस्पष्ट दृष्टि, फीके रंग, रात में देखने में कठिनाई, रोशनी का बहुत तेज़ लगना, रोशनी के चारों ओर प्रभामंडल और दोहरी दृष्टि शामिल हैं।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत "स्वास्थ्य देखभाल; संक्रामक, असंक्रामक एवं पशुजन्य रोग" शामिल है। मोतियाबिन्द आँख के लेंस का एक असंक्रामक रोग है, और मुख्यतः बढ़ती आयु का रोग।
यह दृष्टि के सामान्य दोषों से स्वभाव में अलग है। निकट दृष्टि दोष और दूर दृष्टि दोष फोकस करने की त्रुटियाँ हैं, जो अवतल और उत्तल लेंस से ठीक होती हैं; मोतियाबिन्द पारदर्शिता का नष्ट होना है, जिसे NEI के अनुसार केवल शल्यक्रिया से हटाया जा सकता है।
आँख की समस्याओं को प्रभावित भाग के अनुसार छाँटना — लेंस, कॉर्निया, रेटिना, दृष्टि तंत्रिका, आँसुओं की परत — उन्हें अलग-अलग रखता है।
मुख्य तथ्य
- मोतियाबिन्द आँख के लेंस में बना धुँधला भाग है; लेंस आँख का पारदर्शी भाग है जो प्रकाश को फोकस करने में मदद करता है (नेशनल आई इंस्टीट्यूट)।
- धुँधलापन लेंस के प्रोटीन के टूटने और आपस में गुच्छे बनाने से आता है; NEI के अनुसार यह परिवर्तन लगभग 40 वर्ष की आयु से शुरू होता है।
- NEI के जोखिम कारकों में मधुमेह, धूम्रपान, अत्यधिक शराब, पारिवारिक इतिहास, धूप में बहुत समय, स्टेरॉयड दवाएँ, और पहले की आँख की चोट, आँख की शल्यक्रिया या शरीर के ऊपरी भाग पर विकिरण उपचार शामिल हैं।
- मोतियाबिन्द की शल्यक्रिया धुँधले लेंस को हटाकर उसकी जगह कृत्रिम इंट्राऑक्युलर लेंस (IOL) लगाती है।
- निकट दृष्टि दोष अवतल लेंस से और दूर दृष्टि दोष उत्तल लेंस से ठीक होता है; ये फोकस करने की त्रुटियाँ हैं, लेंस का धुँधलापन नहीं।
स्रोत: नेशनल आई इंस्टीट्यूट (अमेरिका), मोतियाबिन्द (Cataracts) पृष्ठ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- मोतियाबिन्द लेंस को धुँधला करता है; यह निकट दृष्टि दोष जैसी अपवर्तन त्रुटि नहीं है। चश्मा फोकस की त्रुटियाँ ठीक करता है, जबकि NEI के अनुसार मोतियाबिन्द से छुटकारा पाने का एकमात्र तरीका धुँधले लेंस को बदलने वाली शल्यक्रिया है।
- मधुमेह मोतियाबिन्द का जोखिम बढ़ाता है, पर वह जोखिम कारक है, बदलने वाला पदार्थ नहीं। प्रश्न जिस परिवर्तन के बारे में पूछता है वह लेंस के प्रोटीन में है।
- ग्लूकोमा आँख का एक अलग रोग है, जिसमें दृष्टि तंत्रिका क्षतिग्रस्त होती है। ग्लूकोमा को लेंस से या मोतियाबिन्द को दृष्टि तंत्रिका से न जोड़ें।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि लेंस में क्या बदलता है, जैसा यह प्रश्न करता है। कोई प्रश्न आँख की स्थितियों को प्रभावित भाग से भी मिलवा सकता है: मोतियाबिन्द को लेंस से, ग्लूकोमा को दृष्टि तंत्रिका से।
कोई प्रश्न यह पूछ सकता है कि मोतियाबिन्द की शल्यक्रिया प्राकृतिक लेंस की जगह क्या लगाती है, या मोतियाबिन्द की तुलना निकट दृष्टि दोष या दूर दृष्टि दोष से करवा सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मोतियाबिन्द की शल्यक्रिया में धुँधले प्राकृतिक लेंस को हटाकर उसकी जगह क्या लगाया जाता है?
- (a)चश्मे का अवतल लेंस
- (b)कृत्रिम इंट्राऑक्युलर लेंस
- (c)दाता का कॉर्निया
- (d)कॉन्टैक्ट लेंस
उत्तर(2) — शल्य चिकित्सक धुँधले लेंस को हटाकर आँख के भीतर कृत्रिम इंट्राऑक्युलर लेंस (IOL) लगाता है। विकल्प (1) और (4) आँख के बाहर रहते हैं और फोकस ठीक करते हैं, और विकल्प (3) कॉर्निया को बदलता है, लेंस को नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
आँख की निम्नलिखित स्थितियों में से कौन-सी स्थिति उससे प्रभावित होने वाले आँख के भाग के साथ सही सुमेलित है?
- (a)मोतियाबिन्द – लेंस
- (b)ग्लूकोमा – लेंस
- (c)मोतियाबिन्द – दृष्टि तंत्रिका
- (d)ड्राई आई – दृष्टि तंत्रिका
उत्तर(1) — मोतियाबिन्द लेंस का धुँधलापन है। विकल्प (2) गलत है क्योंकि ग्लूकोमा दृष्टि तंत्रिका को क्षति पहुँचाता है, विकल्प (3) भागों को आपस में बदल देता है, और विकल्प (4) गलत है क्योंकि ड्राई आई आँख की सतह पर आँसुओं से संबंधित है।