निम्नलिखित में से रियासती राज्यों के किस समूह ने स्वाधीनता से पहले पंचायतों पर विधेयक पारित कर दिया था ?
- (1)अलवर, बाँसवाड़ा, करौली, सिरोही
- (2)बाँसवाड़ा, बीकानेर, भरतपुर, बूँदी
- (3)जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, सिरोही
- (4)करौली, बूँदी, अलवर, जैसलमेर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, सिरोही.
राजस्थान सरकार का जिला गजेटियर (करौली खंड, स्थानीय स्वशासन का अध्याय) यह इतिहास दर्ज करता है। उसके अनुसार जोधपुर, भरतपुर, जयपुर, सिरोही, उदयपुर और करौली रियासतों ने पंचायतों पर कानून बनाए।
गजेटियर आगे बताता है कि बीकानेर रियासत का अपना ग्राम पंचायत अधिनियम इससे बहुत पहले, 1928 में, आ गया था। स्वाधीनता के समय कुछ रियासतों में पंचायतें काम कर रही थीं, जबकि अन्य रियासतों में ऐसी कोई संस्था नहीं थी।
विकल्प (3) का हर राज्य — जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, सिरोही — उस अभिलेख में नामित है। बाकी किसी विकल्प में चारों के चारों राज्य उस अभिलेख में नहीं मिलते।
समूह वाला प्रश्न राज्य-दर-राज्य हल होता है। अभिलेख से बाहर का एक भी नाम पूरे समूह को बाहर कर देता है, भले ही बाकी नाम कितने भी मेल खाएँ।
एकीकरण के बाद राजस्थान पंचायत अधिनियम, 1953 ने पूरे नए राज्य में ग्राम पंचायतें स्थापित कीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)अलवर, बाँसवाड़ा, करौली, सिरोही — इस समूह का आधा हिस्सा मेल खाता है। करौली और सिरोही उन रियासतों में हैं जिन्हें गजेटियर पंचायतों पर कानून बनाने वाली रियासतों में गिनाता है।
अलवर और बाँसवाड़ा उस अभिलेख में नहीं हैं। विकल्प के लिए चारों राज्यों का सही होना ज़रूरी है, इसलिए ये दो नाम इसे बाहर कर देते हैं।
- (2)बाँसवाड़ा, बीकानेर, भरतपुर, बूँदी — इस समूह में अभिलेख का सबसे पुराना कानून है: बीकानेर का 1928 का ग्राम पंचायत अधिनियम। भरतपुर का नाम भी दर्ज है।
पर बाँसवाड़ा और बूँदी गजेटियर की सूची में नहीं हैं। दो सही नाम पूरे समूह को सही नहीं बनाते।
- (4)करौली, बूँदी, अलवर, जैसलमेर — इसमें केवल एक राज्य अभिलेख में है: करौली, जो पंचायतों पर कानून बनाने वाली रियासतों में नामित है।
बूँदी, अलवर और जैसलमेर नामित नहीं हैं। चार में से तीन नाम सूची से बाहर होने के कारण यह समूह अभिलेख से सबसे दूर है।
अवधारणा
राजस्थान में ग्राम पंचायतें पुरानी हैं, पर पंचायतों के लिखित कानून रियासतों में शुरू हुए। बीकानेर ने 1928 में ग्राम पंचायत अधिनियम बनाया, और कई अन्य रियासतों ने बाद में अपने कानून बनाए।
रियासतों के एकीकरण के बाद राजस्थान पंचायत अधिनियम, 1953 ने पूरे राज्य में ग्राम पंचायतें बनाईं।
इसके बाद त्रिस्तरीय व्यवस्था आई। राजस्थान पंचायत समिति तथा जिला परिषद अधिनियम, 1959 ने खंड और जिला स्तर जोड़े, और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में पंचायती राज का उद्घाटन किया।
73वें संशोधन के बाद, 23 अप्रैल 1994 से लागू राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 ने 1953 और 1959 के दोनों अधिनियमों की जगह एक ही कानून दिया।
यह विषय पाठ्यक्रम के शीर्षक "राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था" से जुड़ता है, जिसमें "पंचायती राज संस्थाएं" सूचीबद्ध हैं, पर इसकी सामग्री ऐतिहासिक है। यह आधुनिक पंचायती राज व्यवस्था को उन रियासतों से जोड़ता है जिनसे राजस्थान बना।
राजस्थान का गठन 1948 से चरणों में रियासतों के एकीकरण से हुआ; अजमेर 1 नवम्बर 1956 को मिलाया गया। हर रियासत के अपने कानून थे, इसलिए स्वाधीनता के समय पंचायत जैसी संस्थाएँ कुछ रियासतों में थीं और कुछ में नहीं।
एकीकरण के बाद राजस्थान पंचायत अधिनियम, 1953 आया, फिर 1959 में नागौर में पंचायती राज का उद्घाटन हुआ, और बाद में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 आया।
गजेटियर का अभिलेख बीकानेर (1928) के साथ जोधपुर, भरतपुर, जयपुर, सिरोही, उदयपुर और करौली के नाम लेता है।
मुख्य तथ्य
- बीकानेर रियासत का अपना ग्राम पंचायत अधिनियम 1928 में था, जिसे गजेटियर अपने द्वारा नामित अन्य रियासतों के पंचायत कानूनों से बहुत पहले का बताता है।
- राजस्थान का गजेटियर जोधपुर, भरतपुर, जयपुर, सिरोही, उदयपुर और करौली को पंचायतों पर कानून बनाने वाली रियासतों के रूप में नामित करता है।
- राजस्थान पंचायत अधिनियम, 1953 ने पूरे राज्य में ग्राम पंचायतें स्थापित कीं।
- प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में त्रिस्तरीय पंचायती राज का उद्घाटन किया।
- 23 अप्रैल 1994 से लागू राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 ने पंचायत अधिनियम, 1953 और पंचायत समिति तथा जिला परिषद अधिनियम, 1959 का निरसन किया।
विकल्प (3) के चारों राज्य स्वाधीनता से पहले वाली पंक्ति में हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- कुछ नाम मेल खाने पर पूरा समूह स्वीकार कर लेना। विकल्प (1) में करौली और सिरोही हैं और विकल्प (2) में बीकानेर और भरतपुर, पर दोनों में अभिलेख से बाहर के राज्य भी हैं।
- बीकानेर वाला कोई भी समूह चुन लेना। गजेटियर के विवरण में बीकानेर का 1928 का अधिनियम सबसे पुराना है, फिर भी विकल्प (2) बाँसवाड़ा और बूँदी के कारण गलत ठहरता है।
- रियासतों के कानूनों को बाद के राजस्थान के कानूनों से मिला देना। 1953 का पंचायत अधिनियम और 1959 की त्रिस्तरीय व्यवस्था एकीकरण के बाद आए, स्वाधीनता से पहले नहीं।
स्थानीय शासन के इतिहास पर प्रश्न पूछ सकता है कि 1947 से पहले किन रियासतों में पंचायत कानून था, किस रियासत ने पहले कदम उठाया, या त्रिस्तरीय पंचायती राज कब और कहाँ शुरू हुआ।
जब विकल्प राज्यों के समूह हों, तो हर नाम को अभिलेख से मिलाकर जाँचना होता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान की किस रियासत का अपना ग्राम पंचायत अधिनियम 1928 में था?
- (a)जयपुर
- (b)बीकानेर
- (c)उदयपुर
- (d)जोधपुर
उत्तर(2) — राजस्थान का गजेटियर बीकानेर का 1928 का ग्राम पंचायत अधिनियम दर्ज करता है। जयपुर (1), उदयपुर (3) और जोधपुर (4) ने भी पंचायत कानून बनाए, पर गजेटियर बीकानेर के अधिनियम को उनसे बहुत पहले का बताता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान में 2 अक्टूबर 1959 को त्रिस्तरीय पंचायती राज का उद्घाटन कहाँ हुआ?
- (a)नागौर
- (b)जयपुर
- (c)बीकानेर
- (d)अजमेर
उत्तर(1) — प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नागौर में इसका उद्घाटन किया। जयपुर (2), बीकानेर (3) और अजमेर (4) उद्घाटन के स्थान नहीं थे।