निम्नलिखित अनुच्छेदों के कौन से समूह द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार केवल भारत के ‘नागरिकों’ को अनुदत्त हैं ?
- (1)अनुच्छेद 14, 20, 23 और 30
- (2)अनुच्छेद 15, 21, 25 और 28
- (3)अनुच्छेद 20, 21, 25 और 30
- (4)अनुच्छेद 15, 16, 19 और 30
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), अनुच्छेद 15, 16, 19 और 30.
कसौटी हर अनुच्छेद की भाषा है। कुछ मौलिक अधिकार "नागरिकों" के लिए लिखे गए हैं; दूसरे "किसी व्यक्ति" या "सभी व्यक्तियों" के लिए, जिनमें भारत में रह रहे विदेशी भी आते हैं।
अनुच्छेद 15(1) राज्य को किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद करने से रोकता है।
अनुच्छेद 16(1) लोक नियोजन में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समता की गारंटी देता है।
अनुच्छेद 19(1) सभी नागरिकों को सूचीबद्ध स्वतंत्रताओं का अधिकार देता है — वाक्, सम्मेलन, संगम, संचरण, निवास और वृत्ति की स्वतंत्रता।
अनुच्छेद 30 धर्म या भाषा पर आधारित अल्पसंख्यक-वर्गों को अपनी शिक्षा संस्थाएँ चलाने का अधिकार देता है। यह संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकारों में अनुच्छेद 29 के साथ है, जो "नागरिकों के किसी अनुभाग" की बात करता है, और इन दोनों को केवल नागरिकों वाले अधिकारों में गिना जाता है।
इसलिए अनुच्छेद 15, 16, 19 और 30 ही वह समूह है जो पूरी तरह केवल नागरिकों के अधिकारों से बना है। अनुच्छेद के अपने पाठ में "नागरिक" शब्द खोजिए।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)अनुच्छेद 14, 20, 23 और 30 — इन चार में से तीन भारत में हर व्यक्ति की रक्षा करते हैं, केवल नागरिकों की नहीं। अनुच्छेद 14 कहता है कि राज्य किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से वंचित नहीं करेगा।
अनुच्छेद 20 अपराध के लिए दोषसिद्धि के संबंध में किसी भी व्यक्ति को संरक्षण देता है; अनुच्छेद 23 मानव दुर्व्यापार और बलात्श्रम का सीधा प्रतिषेध करता है।
केवल अनुच्छेद 30 नागरिकों के अधिकारों में आता है। यह समूह उन अधिकारों की सूची के अधिक निकट है जिनका दावा भारत में विदेशी भी कर सकते हैं।
- (2)अनुच्छेद 15, 21, 25 और 28 — अनुच्छेद 15 केवल नागरिकों के लिए है, पर बाकी तीन नहीं। अनुच्छेद 21 के अनुसार किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता, सिवाय विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के; अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अंतःकरण और धर्म की स्वतंत्रता का समान हक देता है।
अनुच्छेद 28(3) मान्यता-प्राप्त संस्था में उपस्थित होने वाले किसी व्यक्ति को अनिवार्य धार्मिक शिक्षा से बचाता है। इस तरह यह मिला-जुला समूह है, जिसका आधार धर्म की स्वतंत्रता वाले अनुच्छेद (25–28) हैं, जो सभी व्यक्तियों पर लागू होते हैं।
- (3)अनुच्छेद 20, 21, 25 और 30 — इसमें अनुच्छेद 30 तो है, पर उसके साथ "किसी व्यक्ति" या "सभी व्यक्तियों" के लिए लिखे गए तीन अनुच्छेद हैं: अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण), अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 25 (अंतःकरण और धर्म की स्वतंत्रता)।
अनुच्छेद 20 और 21 वे अधिकार हैं जिन्हें अनुच्छेद 359 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल में निलंबित नहीं किया जा सकता, और ये नागरिकों और विदेशियों दोनों की समान रूप से रक्षा करते हैं।
अवधारणा
संविधान का भाग 3 हर मौलिक अधिकार एक ही वर्ग के लोगों को नहीं देता। हर अनुच्छेद की भाषा से पता चलता है कि वह किसकी रक्षा करता है।
पाँच अधिकार केवल नागरिकों तक सीमित हैं: अनुच्छेद 15 (विभेद का प्रतिषेध), अनुच्छेद 16 (लोक नियोजन में अवसर की समता), अनुच्छेद 19 (वाक्, सम्मेलन, संगम, संचरण, निवास और वृत्ति की स्वतंत्रताएँ), अनुच्छेद 29 (अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण) और अनुच्छेद 30 (अल्पसंख्यक-वर्गों की शिक्षा संस्थाएँ)।
बाकी में से अधिकांश "किसी व्यक्ति" या "सभी व्यक्तियों" के लिए लिखे गए हैं, या किसी धारक का नाम लिए बिना लिखे गए हैं।
इनमें विधि के समक्ष समता (अनुच्छेद 14), दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण (अनुच्छेद 20), प्राण और दैहिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21), बलात्श्रम का प्रतिषेध (अनुच्छेद 23) और धर्म की स्वतंत्रता वाले अनुच्छेद (25–28) आते हैं। भारत में कोई विदेशी भी इनका सहारा ले सकता है।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में भारतीय संविधान के अंतर्गत "उद्देशिका, मूल अधिकार, राज्य नीति के निदेशक तत्व, मूल कर्तव्य" शामिल हैं। मौलिक अधिकारों के प्रश्न अनुच्छेद संख्याओं पर टिक सकते हैं, इसलिए केवल नागरिकों वाले पाँच अनुच्छेदों को एक समूह के रूप में याद रखना उपयोगी है: 15, 16, 19, 29, 30।
यही समूह व्यावहारिक सीमाएँ भी समझाता है। भारत में कोई विदेशी नागरिक अनुच्छेद 16 के अंतर्गत सरकारी नौकरी या अनुच्छेद 19 की स्वतंत्रताओं का दावा नहीं कर सकता, पर विधि के समक्ष समता और प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण का दावा कर सकता है।
यही भेद निदेशक तत्वों में भी दिखता है: उदाहरण के लिए, अनुच्छेद 39A किसी नागरिक को न्याय से वंचित न किए जाने की बात करता है।
मुख्य तथ्य
- केवल नागरिकों को उपलब्ध मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 और 30।
- अनुच्छेद 14 भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता की गारंटी देता है।
- अनुच्छेद 21: किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है, अन्यथा नहीं।
- अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक देता है।
- संपत्ति का अधिकार, अनुच्छेद 19(1)(च), 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा हटाया गया, जिससे अनुच्छेद 19(1) में छह स्वतंत्रताएँ बचीं।
विकल्प (4) ही वह समूह है जिसका हर अनुच्छेद केवल नागरिकों का अधिकार है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अनुच्छेद 30 की भाषा "नागरिकों" की नहीं, "सभी अल्पसंख्यक-वर्गों" की है, फिर भी वह अनुच्छेद 29 के साथ केवल नागरिकों वाले समूह में आता है। केवल उसकी भाषा पढ़ना भ्रम में डाल सकता है।
- अनुच्छेद 14 और 15 समता के अधिकार में साथ-साथ हैं, पर उनके धारक अलग हैं: 14 किसी भी व्यक्ति पर लागू है, 15 केवल नागरिकों पर।
- किसी विकल्प में एक अनुच्छेद केवल नागरिकों वाला हो, तो पूरा समूह केवल नागरिकों वाला नहीं हो जाता। चारों संख्याएँ जाँचिए; विकल्प (1), (2) और (3) में से हर एक में ऐसा एक अनुच्छेद है।
एक रूप अनुच्छेद संख्याओं के समूह देकर पूछता है कि कौन-सा समूह केवल नागरिकों को, या विदेशियों को भी, उपलब्ध है।
दूसरा रूप एक अधिकार का नाम लेता है — लोक नियोजन, वाक्-स्वातंत्र्य, प्राण और स्वतंत्रता — और पूछता है कि कोई विदेशी नागरिक उसका दावा कर सकता है या नहीं।
तीसरा रूप इसे आपात उपबंधों से जोड़कर पूछता है कि आपात की उद्घोषणा के दौरान कौन-से अधिकार बने रहते हैं।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से किस मौलिक अधिकार का दावा भारत में कोई विदेशी नागरिक कर सकता है?
- (a)अनुच्छेद 16 — लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता
- (b)अनुच्छेद 19 — वाक्-स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण
- (c)अनुच्छेद 21 — प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण
- (d)अनुच्छेद 29 — अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण
उत्तर(3) — अनुच्छेद 21 किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से वंचित किए जाने से बचाता है, इसलिए यह विदेशियों पर भी लागू है। विकल्प (1) गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 16 सभी नागरिकों के लिए अवसर की समता की गारंटी देता है। विकल्प (2) गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 19 सभी नागरिकों को अधिकार देता है। विकल्प (4) गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 29 नागरिकों के किसी अनुभाग की रक्षा करता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत वाक्-स्वातंत्र्य और अभिव्यक्ति-स्वातंत्र्य का अधिकार किसे प्राप्त है?
- (a)भारत के राज्यक्षेत्र में सभी व्यक्तियों को
- (b)भारत के सभी नागरिकों को
- (c)भारत के नागरिकों और निवासी विदेशियों को
- (d)केवल उन नागरिकों को जो पंजीकृत मतदाता हैं
उत्तर(2) — अनुच्छेद 19(1) सभी नागरिकों को ये अधिकार देता है। विकल्प (1) अनुच्छेद 14 और 21 जैसे अधिकारों का दायरा बताता है, अनुच्छेद 19 का नहीं। विकल्प (3) अनुच्छेद 19 को गलत तरीके से विदेशियों तक फैलाता है। विकल्प (4) मतदाता-पंजीकरण की ऐसी शर्त जोड़ता है जो अनुच्छेद में नहीं है।