1952 में भारत सरकार ने निम्नलिखित में से किसको माध्यमिक शिक्षा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था ?
- (1)एस. राधाकृष्णन
- (2)डी.एस. कोठारी
- (3)पी.सी. महलनोबिस
- (4)लक्ष्मण स्वामी मुदालियर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), लक्ष्मण स्वामी मुदालियर।
आयोग का अपना प्रतिवेदन इसका निर्णय कर देता है। माध्यमिक शिक्षा आयोग का प्रतिवेदन (शिक्षा मंत्रालय) कहता है कि आयोग की नियुक्ति भारत सरकार के 23 सितम्बर 1952 के संकल्प सं. F. 9-5/52-B-I द्वारा हुई।
उसकी सदस्य-सूची इस प्रकार शुरू होती है: 'डॉ. ए. लक्ष्मणस्वामी मुदालियर, कुलपति, मद्रास विश्वविद्यालय, (अध्यक्ष)'। विकल्प में छपे लक्ष्मण स्वामी मुदालियर यही व्यक्ति हैं।
प्रतिवेदन आगे बताता है कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने 6 अक्टूबर 1952 को नई दिल्ली में आयोग का उद्घाटन किया। विकिपीडिया बताता है कि अपने अध्यक्ष के नाम पर यह मुदालियर आयोग कहलाने लगा।
पहले के निकायों की प्रतिवेदन में दी गई समीक्षा अन्य नामों को सही जगह रखने में मदद करती है। वह दर्ज करता है कि भारत सरकार ने 1948 में डॉ. एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग नियुक्त किया।
इसलिए 1952 में नियुक्त अध्यक्ष विकल्प (4) हैं: लक्ष्मण स्वामी मुदालियर।
याद रखने की बात: 1948 राधाकृष्णन (विश्वविद्यालय शिक्षा), 1952 मुदालियर (माध्यमिक शिक्षा), 1964 कोठारी (समग्र शिक्षा)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)एस. राधाकृष्णन — राधाकृष्णन चार वर्ष पहले 1948 में नियुक्त विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के अध्यक्ष थे, जैसा माध्यमिक शिक्षा आयोग का प्रतिवेदन स्वयं दर्ज करता है।
उस आयोग ने मुख्यतः विश्वविद्यालयों पर प्रतिवेदन दिया, पर मुदालियर प्रतिवेदन उसकी यह टिप्पणी उद्धृत करता है कि 'हमारी माध्यमिक शिक्षा हमारे शैक्षिक तंत्र की सबसे कमज़ोर कड़ी बनी हुई है'।
- (2)डी.एस. कोठारी — भौतिकशास्त्री डी. एस. कोठारी बाद के एक निकाय के अध्यक्ष थे: राष्ट्रीय शिक्षा आयोग (1964–1966), जिसे लोकप्रिय रूप से कोठारी आयोग कहा जाता है।
विकिपीडिया दर्ज करता है कि भारत में शिक्षा के सभी पहलुओं की जाँच के लिए इसका गठन 14 जुलाई 1964 को हुआ। उन्हें 1952 में रखना बारह वर्ष की चूक है।
- (3)पी.सी. महलनोबिस — पी. सी. महलनोबिस सांख्यिकीविद् थे, शिक्षा आयोग के सदस्य नहीं। विकिपीडिया दर्ज करता है कि उन्होंने 1931 में भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना की।
बाद में वे योजना आयोग में रहे, और उनका द्वि-क्षेत्रीय मॉडल, महलनोबिस मॉडल, औद्योगीकरण पर बल वाली दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956–1961) में प्रयुक्त हुआ।
अवधारणा
स्वतंत्र भारत ने आयोगों के माध्यम से अपनी शिक्षा व्यवस्था की स्तर-दर-स्तर समीक्षा की। हर आयोग का कार्यक्षेत्र निश्चित था: 1948 के आयोग ने विश्वविद्यालयों को देखा, 1952 के आयोग ने माध्यमिक शिक्षा को, और 1964 के आयोग ने समग्र शिक्षा को।
माध्यमिक शिक्षा आयोग से माध्यमिक शिक्षा पर 'इसके सभी पहलुओं में' प्रतिवेदन देने और इसके पुनर्गठन के उपाय सुझाने को कहा गया। इसमें उसके उद्देश्य और विषय-वस्तु, और प्राथमिक, बेसिक तथा उच्च शिक्षा से उसका सम्बन्ध शामिल था।
छपे हुए स्रोतों में नाम की वर्तनी बदलती है: लक्ष्मणस्वामी, लक्ष्मणास्वामी और लक्ष्मण स्वामी, तीनों डॉ. ए. लक्ष्मणास्वामी मुदालियर के लिए हैं।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "भारत का इतिहास" के अंतर्गत "स्वातंत्र्योत्तर राष्ट्र निर्माण– राज्यों का भाषायी पुनर्गठन, नेहरू युग में सांस्थानिक निर्माण, विज्ञान एवं तकनीकी का विकास" शामिल है।
इस आयोग के गठन में समय लगा। इसका प्रतिवेदन बताता है कि केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड ने जनवरी 1948 में इसकी सिफारिश की थी, और जनवरी 1951 में यह माँग दोहराई।
इस बीच सरकार ने तत्कालीन शैक्षिक सलाहकार डॉ. ताराचंद की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की, जिसके प्रतिवेदन पर बोर्ड ने 1949 में विचार किया।
मुख्य तथ्य
- माध्यमिक शिक्षा आयोग की नियुक्ति भारत सरकार के 23 सितम्बर 1952 के संकल्प सं. F. 9-5/52-B-I द्वारा हुई।
- आयोग के प्रतिवेदन की सूची के अनुसार इसके अध्यक्ष मद्रास विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए. लक्ष्मणस्वामी मुदालियर थे।
- मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने 6 अक्टूबर 1952 को नई दिल्ली में आयोग का उद्घाटन किया।
- इसके सदस्यों में बड़ौदा विश्वविद्यालय की कुलपति हंसा मेहता और विद्या भवन टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, उदयपुर के प्राचार्य के. एल. श्रीमाली शामिल थे।
- प्रतिवेदन दर्ज करता है कि 1948 में डॉ. एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग नियुक्त हुआ।
स्रोत: माध्यमिक शिक्षा आयोग का प्रतिवेदन (शिक्षा मंत्रालय); 1964 के लिए विकिपीडिया।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- आयोग को शिक्षा के गलत स्तर से जोड़ना: राधाकृष्णन का 1948 का आयोग विश्वविद्यालयों पर था, मुदालियर का 1952 का आयोग माध्यमिक शिक्षा पर।
- कोठारी को 1950 के दशक में रखना: कोठारी आयोग का गठन 14 जुलाई 1964 को हुआ।
- मुदालियर जुड़वाँ भाइयों को मिलाना: इस आयोग के अध्यक्ष ए. लक्ष्मणास्वामी मुदालियर थे; विकिपीडिया बताता है कि वे सर आरकोट रामासामी मुदालियर के छोटे जुड़वाँ भाई थे।
कोई प्रश्न वर्ष और आयोग देकर उसका अध्यक्ष पूछ सकता है, या शिक्षा आयोगों का अध्यक्षों और वर्षों से मिलान करवा सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि किसी नामित आयोग ने शिक्षा के किस स्तर की जाँच की।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023 और 2021 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत सरकार द्वारा 1948 में नियुक्त विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के अध्यक्ष कौन थे?
- (a)एस. राधाकृष्णन
- (b)ए. लक्ष्मणास्वामी मुदालियर
- (c)डी. एस. कोठारी
- (d)ताराचंद
उत्तर(1) — माध्यमिक शिक्षा आयोग का प्रतिवेदन डॉ. एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाले 1948 के विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग को दर्ज करता है। विकल्प (2) 1952 के माध्यमिक शिक्षा आयोग के अध्यक्ष थे; विकल्प (3) 1964 के राष्ट्रीय शिक्षा आयोग के अध्यक्ष थे; विकल्प (4) माध्यमिक शिक्षा पर एक पहले की समिति के अध्यक्ष थे। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
माध्यमिक शिक्षा आयोग (1952) का कौन-सा सदस्य उस समय विद्या भवन टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, उदयपुर का प्राचार्य था?
- (a)के. एल. श्रीमाली
- (b)हंसा मेहता
- (c)के. जी. सैयदेन
- (d)ए. एन. बसु
उत्तर(1) — आयोग का प्रतिवेदन डॉ. के. एल. श्रीमाली का नाम इसी पद के साथ देता है। विकल्प (2) बड़ौदा विश्वविद्यालय की कुलपति थीं; विकल्प (3) शिक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव और पदेन सदस्य थे; विकल्प (4) सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एजुकेशन, दिल्ली के प्राचार्य और सदस्य-सचिव थे।