भक्ति आंदोलन के संबंध में निम्न में से कौन सा कथन सत्य नहीं है ?
- (1)वल्लभाचार्य ने पुष्टिमार्ग की स्थापना की ।
- (2)निम्बार्क ने द्वैताद्वैत के सिद्धांत का प्रतिपादन किया ।
- (3)माध्वाचार्य ने सगुण भक्ति के स्थान पर निर्गुण भक्ति सिद्धांत को प्रतिपादित किया ।
- (4)रामानंद ने राम भक्ति परंपरा का प्रचार किया ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), माध्वाचार्य ने सगुण भक्ति के स्थान पर निर्गुण भक्ति सिद्धांत को प्रतिपादित किया ।
प्रश्न वह कथन पूछता है जो सत्य नहीं है, और वह विकल्प (3) है।
साहित्य अकादेमी का 'एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर' माध्वाचार्य को 'हिन्दू दर्शन के प्रसिद्ध द्वैत सम्प्रदाय का संस्थापक प्रतिपादक' कहता है। विकिपीडिया उनकी शिक्षा का सार देता है: जीवात्मा और ब्रह्म, यानी भगवान विष्णु, भिन्न सत्ताएँ हैं, और जीवात्मा भगवान पर आश्रित है।
NCERT की कक्षा XII की पुस्तक (थीम्स इन इंडियन हिस्ट्री, भाग II) दोनों वर्गों की परिभाषा देती है। सगुण भक्ति 'शिव, विष्णु और उनके अवतारों जैसे' विशेष देवताओं पर केंद्रित थी, जिनकी कल्पना प्रायः मानवाकार रूपों में की जाती थी। निर्गुण भक्ति ईश्वर के अमूर्त रूप की उपासना थी।
माध्वाचार्य की भक्ति साकार ईश्वर के प्रति है। एनसाइक्लोपीडिया उनकी रचनाओं में द्वादशस्तोत्र, उडुपी मठ में प्रतिष्ठित कृष्ण की प्रतिमा की स्तुति, और विष्णु की स्तुति के पद्यों का एक संग्रह गिनाता है।
यह उन्हें सगुण परम्परा में रखता है, जो विकल्प (3) के कथन का उलटा है। शेष तीन कथन सही हैं, इसलिए विकल्प (3), माध्वाचार्य ने सगुण भक्ति के स्थान पर निर्गुण भक्ति सिद्धांत को प्रतिपादित किया, ही असत्य कथन है।
याद रखने की बात: माध्वाचार्य = द्वैत और साकार विष्णु की भक्ति, जो सगुण है; NCERT के अनुसार गुरु नानक ने निर्गुण भक्ति के एक रूप का समर्थन किया।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)वल्लभाचार्य ने पुष्टिमार्ग की स्थापना की । — यह कथन सत्य है, इसलिए 'सत्य नहीं' वाले प्रश्न का उत्तर नहीं हो सकता।
विकिपीडिया वल्लभाचार्य (1478–1530) को वैष्णव धर्म के कृष्ण-केंद्रित पुष्टिमार्ग सम्प्रदाय का संस्थापक और शुद्धाद्वैत का प्रतिपादक बताता है, जिसे शंकराचार्य के अद्वैत के उत्तर में प्रतिपादित किया गया। NCERT की कक्षा XII की समय-रेखा वल्लभाचार्य को लगभग 1400–1500 में गुजरात में रखती है।
- (2)निम्बार्क ने द्वैताद्वैत के सिद्धांत का प्रतिपादन किया । — यह कथन सत्य है। विकिपीडिया निम्बार्क को द्वैताद्वैत, यानी द्वैतवादी अद्वैतवाद, का प्रमुख प्रतिपादक कहता है, जिसमें जीवात्मा ईश्वर से भिन्न भी है और अभिन्न भी। उन्होंने राधा और कृष्ण की उपासना का प्रसार किया और निम्बार्क सम्प्रदाय की स्थापना की।
यहाँ जाल मिलते-जुलते नाम में है: द्वैताद्वैत निम्बार्क का है, जबकि केवल द्वैत माध्वाचार्य का।
- (4)रामानंद ने राम भक्ति परंपरा का प्रचार किया । — यह कथन सत्य है। विकिपीडिया रामानंद को एक वैष्णव कवि-संत बताता है, जिन्हें परम्परा रामानंदी सम्प्रदाय का संस्थापक मानती है, और जिन्होंने हिन्दुओं का ध्यान राम की उपासना के प्रत्यक्ष भक्ति-रूप की ओर मोड़ा।
NCERT की कक्षा XII की समय-रेखा उन्हें लगभग 1300–1400 में उत्तर प्रदेश में रखती है। उसका अध्याय उन परम्पराओं का उल्लेख करता है जिनके अनुसार कबीर के गुरु सम्भवतः रामानंद थे, पर साथ ही कहता है कि इतिहासकारों के लिए यह सिद्ध करना बहुत कठिन है कि दोनों समकालीन थे।
अवधारणा
भक्ति परम्पराओं को दो तरह से वर्गीकृत किया जा सकता है। भक्ति के विषय के आधार पर: NCERT कहता है कि धर्म के इतिहासकार इन्हें सगुण, यानी गुणों वाले देवता की भक्ति, या निर्गुण, यानी ईश्वर के अमूर्त रूप की भक्ति, में बाँटते हैं।
दर्शन के आधार पर: वैष्णव आचार्य इस पर भिन्न मत रखते हैं कि जीवात्मा का ईश्वर से क्या सम्बन्ध है। माध्वाचार्य का द्वैत दोनों को भिन्न रखता है, निम्बार्क का द्वैताद्वैत दोनों को भिन्न भी और अभिन्न भी मानता है, और वल्लभाचार्य का शुद्धाद्वैत शंकराचार्य के अद्वैत का उत्तर देता है।
दोनों वर्गीकरण अलग प्रश्नों का उत्तर देते हैं: पहला यह कि किसकी उपासना होती है, दूसरा यह कि जीवात्मा का ईश्वर से क्या सम्बन्ध है। सगुण या निर्गुण के निर्धारण के लिए देवता को देखिए: माध्वाचार्य के देवता विष्णु हैं, साकार।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "भारत का इतिहास" के अंतर्गत "भक्ति तथा सूफी आंदोलन का धार्मिक एवं साहित्यिक योगदान।" शामिल है।
माध्वाचार्य का प्रभाव उनके अपने सम्प्रदाय से आगे तक गया। 'एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर' उन्हें बंगाल में चैतन्य सम्प्रदाय और कर्नाटक में हरिदासों के माध्यम से साहित्यिक सृजन का प्रेरक मानता है।
NCERT की कक्षा XII की पुस्तक का अध्याय कहता है कि गुरु नानक ने निर्गुण भक्ति के एक रूप का समर्थन किया। यह अलवारों को विष्णु की भक्ति में डूबा हुआ बताता है, और मीराबाई को विष्णु के अवतार कृष्ण को अपना प्रियतम मानने वाली: NCERT की अपनी परिभाषा से यह सगुण भक्ति है।
मुख्य तथ्य
- साहित्य अकादेमी का 'एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर' माध्वाचार्य, जिन्हें आनन्दतीर्थ भी कहा जाता है, को द्वैत सम्प्रदाय का संस्थापक प्रतिपादक कहता है।
- NCERT (कक्षा XII): सगुण भक्ति शिव, विष्णु और उनके अवतारों जैसे देवताओं पर केंद्रित थी; निर्गुण भक्ति ईश्वर के अमूर्त रूप की उपासना थी।
- विकिपीडिया: वल्लभाचार्य (1478–1530) ने कृष्ण-केंद्रित पुष्टिमार्ग की स्थापना की और शुद्धाद्वैत का प्रतिपादन किया।
- विकिपीडिया: निम्बार्क द्वैताद्वैत के प्रमुख प्रतिपादक थे और उन्होंने राधा-कृष्ण केंद्रित निम्बार्क सम्प्रदाय की स्थापना की।
- NCERT (कक्षा XII) कहता है कि गुरु नानक के पदों से संकेत मिलता है कि उन्होंने निर्गुण भक्ति के एक रूप का समर्थन किया।
विकल्प (3) असत्य कथन है। स्रोत: एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर; NCERT कक्षा XII; विकिपीडिया।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- द्वैत और द्वैताद्वैत को मिलाना: माध्वाचार्य ने द्वैत की शिक्षा दी, निम्बार्क ने द्वैताद्वैत की।
- माध्वाचार्य को केवल उनके दर्शन से वर्गीकृत करना: सगुण या निर्गुण का निर्धारण इस पर टिका है कि उपासना किसकी होती है, और माध्वाचार्य की भक्ति साकार विष्णु के प्रति है।
- पुष्टिमार्ग का श्रेय गलत वैष्णव आचार्य को देना: यह वल्लभाचार्य का कृष्ण-केंद्रित मार्ग है, जबकि निम्बार्क ने अपने नाम वाले सम्प्रदाय की स्थापना की।
कोई प्रश्न आचार्यों को दर्शनों या सम्प्रदायों के साथ जोड़कर पूछ सकता है कि कौन-सा युग्म गलत है, या यह पूछ सकता है कि किसी नामित सिद्धांत की शिक्षा किस आचार्य ने दी।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि कोई व्यक्ति सगुण धारा का है या निर्गुण धारा का।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 और 2016 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
माध्वाचार्य वेदांत के किस सम्प्रदाय से सम्बन्धित हैं?
- (a)अद्वैत
- (b)विशिष्टाद्वैत
- (c)द्वैत
- (d)शुद्धाद्वैत
उत्तर(3) — 'एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर' माध्वाचार्य को द्वैत सम्प्रदाय का संस्थापक प्रतिपादक कहता है। विकल्प (1) शंकराचार्य का सम्प्रदाय है और विकल्प (2) रामानुज का, जिन दोनों की माध्वाचार्य ने आलोचना की; विकल्प (4) वल्लभाचार्य का दर्शन है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
NCERT निम्नलिखित में से किसे निर्गुण भक्ति के एक रूप से जोड़ता है?
- (a)माध्वाचार्य
- (b)वल्लभाचार्य
- (c)गुरु नानक
- (d)निम्बार्क
उत्तर(3) — NCERT (कक्षा XII) कहता है कि गुरु नानक के पदों से संकेत मिलता है कि उन्होंने निर्गुण भक्ति के एक रूप का समर्थन किया, जिसमें परम सत्ता का न कोई लिंग है न रूप। विकल्प (1) ने साकार विष्णु की उपासना की; विकल्प (2) ने कृष्ण-केंद्रित पुष्टिमार्ग की स्थापना की; विकल्प (4) ने राधा और कृष्ण की उपासना का प्रसार किया।