निम्न में से किसके लिए राजस्थानी भाषा में आड़ी, हीयाली शब्द प्रचलित हैं ?
- (1)मुहावरे
- (2)लोकोक्ति
- (3)फड़
- (4)पहेलियाँ
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), पहेलियाँ।
आड़ी और हीयाली राजस्थानी में पहेली के लिए प्रयुक्त शब्द हैं।
'परिशोध' (पंजाब विश्वविद्यालय, 1975) में छपा एक लेख गूढा, हियाली, आडी, पहाड़ी, पाली और फियाली को ऐसे शब्द बताता है जो राजस्थान में सामान्यतः पहेली के लिए प्रयुक्त होते हैं।
राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान की 'राजस्थान के नाथ सम्प्रदाय और साहित्य' (1997) हियाली को बुद्धि-परीक्षा के रूप में पहेली के समकक्ष काव्य-शैली मानती है, और इसे 12वीं–13वीं शती के राजस्थानी जैन साहित्य में देखती है।
वही पुस्तक हियाली रचनाओं के भीतर के रूपों में आडिये, गूढ़ा और अन्तर्लापिका गिनाती है। हियाली रचनाओं के लिए वह धर्मसी (धर्मवर्द्धन) और समयसुन्दर (17वीं शती) के नाम लेती है।
विजयदान देथा की 'बातां री फुलवाड़ी' की एक कहानी में ठकुरानी एक आड़ी पूछती है, और आड़ियों का अर्थ बताने में प्रवीण ठाकुर उसका अर्थ नहीं खोज पाते।
याद रखने की बात: आड़ी और हीयाली = पहेली।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)मुहावरे — मुहावरा एक बँधा हुआ वाक्यांश है जिसका अर्थ उसके शब्दों से भिन्न होता है। यह बोलचाल में प्रयुक्त होता है, किसी के सामने हल करने के लिए नहीं रखा जाता।
आड़ी और हीयाली उस पहेली के नाम हैं जो बुद्धि की परीक्षा के लिए पूछी जाती है। मुहावरे उत्तर होते यदि पूछा गया शब्द मुहावरा होता, आड़ी या हीयाली नहीं।
- (2)लोकोक्ति — लोकोक्ति, यानी कहावत, कोई बनी-बनाई सीख कहती है; पहेली एक उत्तर छिपाती है जिसे खोजना होता है।
'परिशोध' की सूची आडी और हियाली को गूढा, पहाड़ी, पाली और फियाली के साथ रखती है, जो सब पहेली के लिए प्रयुक्त शब्द हैं। लोकोक्ति कहावत का उत्तर होती।
- (3)फड़ — फड़ कोई शाब्दिक रूप नहीं है। यह चित्रित कपड़े का पट है: नागौर जिला गजेटियर पाबूजी की पड़ का वर्णन करता है, जिसमें पाबूजी के जीवन के चित्र होते हैं और जिसे भोपे लेकर चलते हैं, पट दिखाते हुए कथा गाते हैं।
फड़ लोक देवता की चित्रित कथा-पट का उत्तर होता।
अवधारणा
राजस्थानी लोक साहित्य में कई छोटे मौखिक रूप हैं। पहेली उनमें से एक है: ऐसा प्रश्न जिसे इस तरह कहा जाए कि उसका उत्तर छिपा रहे, ताकि सुनने वाले की बुद्धि परखी जा सके।
राजस्थानी में इसके कई नाम हैं। 'परिशोध' गूढा, हियाली, आडी, पहाड़ी, पाली और फियाली गिनाता है, और बताता है कि संस्कृत में पहेली के लिए प्रहेलिका शब्द है।
हियाली एक साहित्यिक रूप भी बनी। राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान का ग्रन्थ इसे 12वीं–13वीं शती के राजस्थानी जैन साहित्य में देखता है और बताता है कि गोरख-बानी में भी हियाली शब्द इसी अर्थ में आता है।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "भाषा एवं साहित्य" के अंतर्गत "राजस्थानी भाषा का साहित्य एवं लोक साहित्य" शामिल है।
पहेलियाँ कहावतों, मुहावरों, लोक कथाओं और लोक गीतों के साथ लोक साहित्य का अंग हैं। 'परिशोध' का लेख कहता है कि गाँवों में पहेलियों से बालकों का मनोरंजन होता है, वे विवाह की सौभाग्य-रात्रि का अंग हैं, और उनसे बड़े-बूढ़े नई पीढ़ी पर अपने अनुभव की छाप छोड़ते हैं।
राजस्थानी लोक कथाओं का संग्रह, देथा की 'बातां री फुलवाड़ी', किसी कहानी के भीतर आड़ी का प्रयोग दिखाता है।
मुख्य तथ्य
- आड़ी और हीयाली राजस्थानी में पहेली के लिए प्रयुक्त शब्द हैं; संस्कृत शब्द प्रहेलिका है।
- 1975 का 'परिशोध' का एक लेख गूढा, हियाली, आडी, पहाड़ी, पाली और फियाली को राजस्थान में पहेली के शब्द बताता है।
- राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान की 'राजस्थान के नाथ सम्प्रदाय और साहित्य' (1997) हियाली शैली को 12वीं–13वीं शती के राजस्थानी जैन साहित्य में देखती है।
- हियाली रचनाओं के लिए वही पुस्तक कवि धर्मसी (धर्मवर्द्धन) और समयसुन्दर (17वीं शती) के नाम लेती है।
- फड़ एक चित्रित पट है: पाबूजी की पड़ पाबूजी का जीवन दिखाती है और भोपे इसका प्रदर्शन करते हैं।
पहेली के शब्द 'परिशोध' (1975) और राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान (1997) से; फड़ नागौर जिला गजेटियर से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पहेली और लोकोक्ति को मिलाना: पहेली एक उत्तर छिपाती है जिसे बूझना होता है, जबकि लोकोक्ति एक बनी-बनाई सच्चाई कहती है।
- फड़ को साहित्यिक रूप मान लेना: यह चित्रित पट है, भले ही भोपे इसकी कथा ऊँचे स्वर में गाते हैं।
- हीयाली को केवल मौखिक मानना: राजस्थानी जैन साहित्य में यह लिखित काव्य-रूप भी थी।
कोई प्रश्न आड़ी, हीयाली या गूढा जैसा राजस्थानी लोक साहित्य का कोई शब्द देकर पूछ सकता है कि वह किसका बोध कराता है, या ऐसे शब्दों का उनके अर्थों से मिलान करवा सकता है।
कोई प्रश्न फड़ या कहावत जैसा कोई लोक रूप देकर यह भी पूछ सकता है कि वह किस प्रकार की रचना है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सा राजस्थानी में पहेली के लिए प्रयुक्त शब्द नहीं है?
- (a)गूढा
- (b)हीयाली
- (c)आड़ी
- (d)कहावत
उत्तर(4) — कहावत का अर्थ लोकोक्ति है। विकल्प (1), (2) और (3) तीनों 'परिशोध' की उस सूची में आते हैं जिसमें राजस्थान में पहेली के लिए प्रयुक्त शब्द गिनाए गए हैं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान की लोक परम्परा में 'पाबूजी की फड़' है —
- (a)पहेली
- (b)लोकोक्ति
- (c)पाबूजी का जीवन दिखाने वाला चित्रित पट
- (d)नृत्य शैली
उत्तर(3) — नागौर जिला गजेटियर पाबूजी की पड़ को पाबूजी के जीवन के चित्रों वाला पट बताता है, जिसे भोपे लेकर चलते और प्रदर्शित करते हैं। विकल्प (1) आड़ी या हीयाली होती, विकल्प (2) कहावत, और विकल्प (4) किसी चित्रित पट का वर्णन नहीं करता।