राजस्थान की वेशभूषा में प्रयुक्त ‘कसूमल’ निम्न में से कौन सा रंग होता है ?
- (1)लाल
- (2)पीला
- (3)गुलाबी
- (4)केसरिया
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), लाल.
कसूमल लाल रंग है — कसूम, यानी कुसुम (Carthamus tinctorius), का लाल।
‘जर्नल ऑफ़ इंडियन आर्ट एंड इंडस्ट्रीज़’ (1888) कोटा रियासत के बारां में बनी बंधेज की चूनरियों का वर्णन करते हुए बताता है कि कपड़े को अंत में कसूम में डुबोया जाता है, जो प्रयुक्त मात्रा के अनुसार उसे गहरा या हल्का चमकीला लाल रंग देता है।
कपड़े को कसूम के घोल में आठ-दस बार डुबोया जाता है, जब तक वह गहरा लाल न हो जाए। वही विवरण आगे बताता है कि ऐसा ही कसूमल निर्माण पाली, जोधपुर, जयपुर, अलवर, नागौर और इंदौर में भी होता था।
याद रखने की बात: कसूमल = कसूम (कुसुम) का लाल।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)पीला — पीला रंग एक अलग रंजक से आता था। बारां की बंधेज पर 1888 का विवरण बताता है कि पीली बूँदें हल्दी से, हरी हल्दी और नील से बनती थीं, और अंत में कसूम के घोल से लाल रंग आता था।
पीला उस रंग-नाम का उत्तर होता जो हल्दी से जुड़ा हो, कुसुम से नहीं।
- (3)गुलाबी — कम रंजक लेने पर कुसुम हल्के शेड भी दे सकता है, पर 1888 का विवरण कसूम के घोल को चमकीला लाल रंग देने वाला बताता है, जो आठ-दस बार डुबोने से गहरा होता है।
गुलाबी रंग का नाम गुलाब से है। गुलाबी नाम गुलाबी गणगौर में आता है, जिसे RPSC की 2016 की कुंजी नाथद्वारा से जोड़ती है।
- (4)केसरिया — केसरिया रंग का नाम केसर से आता है। कसूमल कसूम, यानी कुसुम, से आता है — एक अलग पौधा, जिससे लाल रंजक मिलता है।
केसरिया केसर का रंग-नाम है; कसूमल लाल है।
अवधारणा
राजस्थान के कुछ रंग-नाम अपने पीछे के रंजक या फूल से बने हैं। कसूमल कसूम, यानी कुसुम, से आता है, जिसकी पंखुड़ियों से लाल रंजक मिलता है।
कुसुम का लाल कच्चा रंग है। 1888 का विवरण कहता है कि ऐसी चूनरियाँ पानी से बचाकर रखी जाएँ तो एक वर्ष से अधिक अपना चमकीला रंग बनाए रखती हैं, जबकि पक्के लाल रंग की चूनरियाँ आल (मोरिंडा) की जड़ से रंगी जाती थीं।
गहराई बार-बार डुबोने से आती थी: गहरा लाल पाने के लिए कपड़े को कसूम के घोल में आठ-दस बार डुबोया जाता था।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "राजस्थान में सामाजिक जीवन" में "वेशभूषा एवं आभूषण" सूचीबद्ध हैं।
राजस्थान की कुछ वेशभूषा का नाम उसकी रंगाई की तकनीक पर है। 1888 का विवरण बंधेज वाली पगड़ी को चूनरी पाग कहता है, और दर्ज करता है कि कोटा के रंगरेज धनक और लहरिया नामों से सरल बंधेज का काम करते थे।
वही विवरण दर्ज करता है कि सावन में कोटा के महाराव की यह प्रथा थी कि वे चूनरी पगड़ी पहनते और ऐसी पगड़ियाँ अपने सरदारों, कृपापात्रों और रियासत के अधिकारियों में बाँटते थे।
मुख्य तथ्य
- कसूमल वह लाल रंग है जो कसूम, यानी कुसुम (Carthamus tinctorius), से प्राप्त होता है।
- कोटा रियासत के बारां में बंधेज पर 1888 का एक विवरण कहता है कि कुसुम प्रयुक्त मात्रा के अनुसार गहरा या हल्का चमकीला लाल रंग देता है।
- वही विवरण कहता है कि कसूमल काम पाली, जोधपुर, जयपुर, अलवर, नागौर और इंदौर में भी होता था।
- पक्के लाल रंग की चूनरियाँ आल (मोरिंडा) की जड़ से रंगी जाती थीं; कुसुम का लाल कच्चा रंग था।
- 1888 का विवरण कहता है कि गहरा लाल रंग पाने के लिए कपड़े को कसूम के घोल में आठ-दस बार डुबोया जाता था।
रंगाई का विवरण ‘जर्नल ऑफ़ इंडियन आर्ट एंड इंडस्ट्रीज़’ (1888) में बारां की बंधेज के वर्णन से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- ध्वनि से अनुमान लगाना: कसूमल और केसरिया अलग रंग हैं — कुसुम का लाल और केसर का केसरिया।
- शेड से निर्णय करना: कुसुम हल्का या गहरा रंग दे सकता है, पर कसूमल नाम का रंग लाल है।
- दो लाल रंगों को मिला देना: आल की जड़ से पक्का लाल मिलता था, जबकि कसूम से कच्चा लाल।
कोई प्रश्न कसूमल या केसरिया जैसा कोई राजस्थानी रंग या रंजक का नाम देकर रंग पूछ सकता है, या कोई रंग देकर वह पौधा पूछ सकता है जिससे वह मिलता है।
कोई प्रश्न चूनरी, लहरिया और धनक जैसे बंधेज के रूपों को उनके पैटर्न से सुमेलित भी करवा सकता है।
संबंधित PYQ
UnlockIAS ने इस प्रश्न की तुलना अन्य RAS प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न-पत्रों के प्रश्नों से की; कोई भी जोड़ने लायक मिलता-जुलता प्रश्न नहीं मिला।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान के कसूमल वस्त्रों को रंग देने वाला रंजक ‘कसूम’ किस पौधे से प्राप्त होता है ?
- (a)कुसुम
- (b)हल्दी
- (c)नील
- (d)मेहंदी
उत्तर(1) — कसूम कुसुम (Carthamus tinctorius) है, जिसकी पंखुड़ियों से लाल रंजक मिलता है। विकल्प (2) उसी बंधेज प्रक्रिया में पीला रंग देता था, विकल्प (3) नीला और हल्दी के साथ हरा, और विकल्प (4) कसूम का स्रोत नहीं है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थानी वेशभूषा में कौन-सा रंग-नाम केसर के रंग के लिए प्रयुक्त होता है ?
- (a)कसूमल
- (b)केसरिया
- (c)गुलाबी
- (d)हरा
उत्तर(2) — केसरिया नाम केसर से आता है। विकल्प (1) कुसुम का लाल है, विकल्प (3) गुलाब से बना रंग-नाम है, और विकल्प (4) हरे रंग का नाम है।