हाल ही में भारत सरकार ने कुछ भाषाओं को शास्त्रीय भाषाओं की सूची में शामिल करने का अनुमोदन किया है । अब, कुल कितनी भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा हासिल है ?
- (1)6
- (2)8
- (3)10
- (4)11
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), 11.
3 अक्टूबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पाँच भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का अनुमोदन किया: मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला।
छह भाषाओं को यह दर्जा पहले से प्राप्त था: तमिल (2004), संस्कृत (2005), तेलुगु और कन्नड़ (2008), मलयालम (2013) और ओड़िया (2014)।
चरण 1, निर्णय से पहले भाषाएँ: 6।
चरण 2, 3 अक्टूबर 2024 को जोड़ी गई भाषाएँ: 5।
चरण 3, दोनों को जोड़ें: 6 + 5 = 11।
संस्कृति मंत्रालय का 4 अक्टूबर 2024 का व्याख्यात्मक विवरण भी यही कुल संख्या देता है। इन पाँचों की सिफ़ारिश साहित्य अकादमी के अधीन भाषा विशेषज्ञ समिति ने की थी, जिसने 25 जुलाई 2024 को मानदंड संशोधित किए।
याद रखने की बात: 3 अक्टूबर 2024 के बाद 6 + 5 = 11 शास्त्रीय भाषाएँ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)6 — छह 3 अक्टूबर 2024 के मंत्रिमंडल निर्णय से पहले की संख्या है: तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओड़िया, जो 2004 से 2014 के बीच अधिसूचित हुईं।
प्रश्न कहता है कि सरकार ने और भाषाओं का अनुमोदन किया है और अब की कुल संख्या पूछता है, इसलिए मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला जोड़नी होंगी।
- (2)8 — आठ वह कुल संख्या है जिस तक सूची कभी पहुँची ही नहीं। संख्या तमिल (2004) से 1, संस्कृत (2005) से 2, तेलुगु और कन्नड़ (2008) से 4, मलयालम (2013) से 5 और ओड़िया (2014) से 6 हुई।
फिर 3 अक्टूबर 2024 को यह पाँच से बढ़ी, सीधे 6 से 11।
- (3)10 — दस एक कम है। यह वह कुल संख्या है जो 3 अक्टूबर 2024 को अनुमोदित पाँच में से केवल चार भाषाएँ जोड़ने पर आती है।
मंत्रिमंडल के निर्णय में मराठी, असमिया और बांग्ला के साथ पाली और प्राकृत दो अलग शास्त्रीय भाषाएँ हैं। पाँच नई भाषाओं के साथ कुल संख्या 6 + 5 = 11 है।
अवधारणा
भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित करते हुए शास्त्रीय भाषाओं की श्रेणी बनाई। संस्कृति मंत्रालय ने प्रस्तावों की जाँच के लिए नवम्बर 2004 में साहित्य अकादमी के अधीन भाषा विशेषज्ञ समिति (LEC) गठित की।
मानदंड दो बार संशोधित हुए हैं, नवम्बर 2005 में और जुलाई 2024 में। 2024 का रूप माँगता है: प्रारंभिक ग्रंथों या अभिलिखित इतिहास की 1500–2000 वर्षों की उच्च प्राचीनता; प्राचीन साहित्य का ऐसा भंडार जिसे बोलने वालों की पीढ़ियाँ धरोहर मानती हों; कविता के अतिरिक्त ज्ञान-ग्रंथ, विशेषकर गद्य, और पुरालेखीय तथा शिलालेखीय साक्ष्य।
यह भी अनुमति देता है कि शास्त्रीय रूप भाषा के बाद के रूपों से भिन्न हो या उनसे क्रम में जुड़ा न हो।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "भारत का इतिहास" के अंतर्गत "प्राचीन भारत में भाषा एवं साहित्य का विकास : संस्कृत, प्राकृत एवं तमिल" सूचीबद्ध है। इन तीनों भाषाओं को अब शास्त्रीय दर्जा प्राप्त है: तमिल को 2004 से, संस्कृत को 2005 से और प्राकृत को 2024 से।
2024 के निर्णय की पृष्ठभूमि लंबी थी। महाराष्ट्र ने 2013 में मराठी का प्रस्ताव भेजा, और LEC ने उसकी सिफ़ारिश की। 2017 में अंतर-मंत्रालयी परामर्श के दौरान गृह मंत्रालय ने मानदंडों को संशोधित और अधिक कठोर करने की सलाह दी। पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला के लिए प्रस्ताव भी बिहार, असम और पश्चिम बंगाल से प्राप्त हुए।
यह दर्जा शिक्षा मंत्रालय के माध्यम से सहायता दिलाता है, जिसमें शास्त्रीय भाषाओं के राष्ट्रीय पुरस्कार, विश्वविद्यालयों में पीठ और संवर्धन केंद्र शामिल हैं। शास्त्रीय कन्नड़, तेलुगु, मलयालम और ओड़िया के अध्ययन के उत्कृष्टता केंद्र केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूरु के तत्वावधान में स्थापित किए गए।
मुख्य तथ्य
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3 अक्टूबर 2024 को मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का अनुमोदन किया।
- पहले की छह शास्त्रीय भाषाएँ: तमिल (2004), संस्कृत (2005), तेलुगु और कन्नड़ (2008), मलयालम (2013) और ओड़िया (2014)।
- यह श्रेणी 12 अक्टूबर 2004 को बनी, जब तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
- साहित्य अकादमी के अधीन LEC ने 25 जुलाई 2024 को मानदंड संशोधित किए और पाँच नई भाषाओं की सिफ़ारिश की।
- 2024 के मानदंडों में प्रारंभिक ग्रंथों या अभिलिखित इतिहास की 1500–2000 वर्षों की अवधि की उच्च प्राचीनता शामिल है।
2004–2014 की तिथियाँ PIB द्वारा दी गई अधिसूचना तिथियाँ हैं; 2024 मंत्रिमंडल के अनुमोदन की तिथि है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 6 पर रुक जाना। यह 3 अक्टूबर 2024 से पहले की कुल संख्या थी, और प्रश्न नए अनुमोदनों के बाद की संख्या पूछता है।
- पाली और प्राकृत को एक भाषा मान लेना। दोनों को अलग-अलग अनुमोदित किया गया, जिससे नई शास्त्रीय भाषाएँ पाँच होती हैं, चार नहीं।
- शास्त्रीय दर्जे को संविधान की आठवीं अनुसूची से मिला देना, जिसमें 22 भाषाएँ हैं। शास्त्रीय दर्जा सरकार LEC की सिफ़ारिश पर देती है।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि किसी निर्णय के बाद भारत में कितनी शास्त्रीय भाषाएँ हैं, या किसी सूची में कौन-सी भाषा यह दर्जा नहीं रखती। कोई प्रश्न किसी भाषा की अधिसूचना का वर्ष, प्रस्तावों की जाँच करने वाला निकाय, या मानदंडों में अपेक्षित प्राचीनता भी पूछ सकता है।
संबंधित PYQ
UnlockIAS ने इस प्रश्न की तुलना अन्य RAS प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न-पत्रों के प्रश्नों से की; कोई भी जोड़ने लायक मिलता-जुलता प्रश्न नहीं मिला।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सी भाषा 3 अक्टूबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए अनुमोदित भाषाओं में नहीं थी?
- (a)पाली
- (b)असमिया
- (c)ओड़िया
- (d)मराठी
उत्तर(3) — ओड़िया को यह दर्जा पहले से प्राप्त था, जो 1 मार्च 2014 को अधिसूचित हुआ। विकल्प (1), (2) और (4) प्राकृत और बांग्ला के साथ 3 अक्टूबर 2024 को अनुमोदित पाँच भाषाओं में से तीन थीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जुलाई 2024 में संशोधित शास्त्रीय भाषा के मानदंडों के अनुसार किसी भाषा के प्रारंभिक ग्रंथों या अभिलिखित इतिहास की उच्च प्राचीनता कितनी अवधि की होनी चाहिए?
- (a)500–1000 वर्ष
- (b)1000–1500 वर्ष
- (c)1500–2000 वर्ष
- (d)2000–2500 वर्ष
उत्तर(3) — 2024 के मानदंड नवम्बर 2005 के संशोधन में लाई गई 1500–2000 वर्षों की सीमा को बनाए रखते हैं। 2004 का मूल मानदंड एक हज़ार वर्ष से अधिक माँगता था, जो विकल्प (2) की सीमा नहीं है; विकल्प (1) और (4) किसी भी रूप के मानदंडों में नहीं हैं।