निम्नलिखित में से कौन सी एक स्वापक पीड़ाहारी (नारकोटिक ऐनेलजेसिक) औषध है ?
- (1)मॉर्फीन
- (2)आर्सफेनेमीन
- (3)ऐस्पिरिन
- (4)पैरासिटामॉल
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), मॉर्फीन.
पीड़ाहारी (ऐनेलजेसिक) वह औषध है जो दर्द से राहत देती है। स्वापक पीड़ाहारी अफ़ीम-प्रकार की दर्दनिवारक औषधें हैं, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर काम करती हैं और नींद तथा निर्भरता (लत) पैदा कर सकती हैं।
मॉर्फीन एक ओपिएट है जो प्राकृतिक रूप से अफ़ीम में मिलती है, और अफ़ीम पोस्त का सूखा हुआ लेटेक्स (दूधिया रस) ही अफ़ीम है। यह दर्द से राहत के लिए सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर काम करती है, और बार-बार उपयोग से शारीरिक और मानसिक निर्भरता हो सकती है।
भारतीय कानून भी इसे इसी तरह रखता है। स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ (NDPS) अधिनियम, 1985 अपने मूल रूप में मॉर्फीन को अफ़ीम व्युत्पन्नों में गिनता है; ये विनिर्मित ओषधियाँ हैं, जिन्हें अधिनियम स्वापक ओषधि की परिभाषा में शामिल करता है। इसलिए स्वापक पीड़ाहारी मॉर्फीन है।
याद रखने योग्य बात: अफ़ीम से प्राप्त मॉर्फीन स्वापक पीड़ाहारी है; ऐस्पिरिन और पैरासिटामॉल ओपिऑइड हुए बिना दर्द घटाती हैं; आर्सफेनेमीन संक्रमण का उपचार करती है, दर्द का नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)आर्सफेनेमीन — आर्सफेनेमीन दर्दनिवारक नहीं है। इसे साल्वर्सन या यौगिक 606 भी कहते हैं; यह आर्सेनिक युक्त प्रतिसूक्ष्मजैविक औषध है, जो 1910 के दशक के आरंभ में सिफ़लिस (उपदंश) के उपचार के लिए, और पुनरावर्ती ज्वर तथा अफ्रीकी ट्रिपैनोसोमिएसिस के लिए भी, लाई गई।
इसे पहली बार 1907 में पॉल एर्लिक की प्रयोगशाला में अल्फ्रेड बर्थाइम ने संश्लेषित किया, और हेक्स्ट कंपनी ने 1910 में इसे साल्वर्सन नाम से बाज़ार में उतारा।
- (3)ऐस्पिरिन — ऐस्पिरिन (ऐसीटिलसैलिसिलिक अम्ल) एक नॉन-स्टेरॉयडल प्रदाहरोधी औषध (NSAID) है। यह दर्द, ज्वर और प्रदाह (सूजन) घटाती है, और रक्त के थक्के बनने के विरुद्ध भी काम करती है, इसीलिए उच्च जोखिम वाले रोगियों में हृदयाघात और स्ट्रोक का जोखिम घटाने के लिए इसका लंबे समय तक उपयोग होता है।
यह मॉर्फीन से अलग मार्ग से दर्द घटाती है और ओपिऑइड नहीं है।
- (4)पैरासिटामॉल — पैरासिटामॉल (ऐसीटामिनोफेन) एक पीड़ाहारी और ज्वरनाशी है, जिसका उपयोग ज्वर और हल्के से मध्यम दर्द में होता है, और यह बिना डॉक्टरी पर्चे के मिलती है।
यह उन्नीसवीं शताब्दी में पहली बार बनाया गया संश्लेषित यौगिक है, अफ़ीम का ऐल्केलॉइड नहीं, इसलिए यह स्वापक पीड़ाहारियों में नहीं आती।
अवधारणा
दर्दनिवारक औषधें कुछ व्यापक समूहों में आती हैं। मॉर्फीन जैसे ओपिऑइड केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर काम करते हैं; ये दर्द घटाते हैं पर उनींदापन और निर्भरता पैदा कर सकते हैं, और इनके गंभीर दुष्प्रभावों में साँस लेने के प्रयास का घट जाना शामिल है।
अस्वापक (नॉन-ओपिऑइड) पीड़ाहारियों में ऐस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी NSAID औषधें हैं, जो प्रदाह भी घटाती हैं, और पैरासिटामॉल, जो दर्द और ज्वर घटाती है।
मॉर्फीन नाम स्वप्नों के यूनानी देवता मॉर्फियस से आया है: 1804 में इसे पहली बार पृथक करने वाले फ्रेडरिक सर्टर्नर ने इसे "मॉर्फियम" कहा, क्योंकि यह नींद लाती है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत "दैनिक जीवन में विज्ञान के मूलभूत तत्व" शामिल हैं।
मॉर्फीन आवश्यक दवा भी है और नियंत्रित पदार्थ भी। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की आवश्यक दवाओं की सूची में है, और हृदयाघात तथा गुर्दे की पथरी जैसे दर्द में प्रयुक्त होती है।
लत लगाने वाली होने के कारण भारत इसे NDPS अधिनियम, 1985 के अंतर्गत नियंत्रित करता है, जिसे 16 सितम्बर 1985 को राष्ट्रपति की अनुमति मिली।
मुख्य तथ्य
- मॉर्फीन एक ओपिएट है जो प्राकृतिक रूप से अफ़ीम में मिलती है; अफ़ीम, अफ़ीम पोस्त (Papaver somniferum) का सूखा हुआ लेटेक्स है।
- फ्रेडरिक सर्टर्नर ने 1804 में पहली बार मॉर्फीन पृथक की और स्वप्नों के यूनानी देवता मॉर्फियस के नाम पर इसे मॉर्फियम कहा।
- NDPS अधिनियम, 1985 अपने मूल रूप में मॉर्फीन, कोडीन और थीबेन को अफ़ीम व्युत्पन्न बताता है, जो अधिनियम के अंतर्गत स्वापक ओषधियाँ मानी जाती हैं।
- ऐस्पिरिन एक NSAID है जो दर्द, ज्वर और प्रदाह घटाती है और रक्त के थक्के बनने के विरुद्ध भी काम करती है।
- आर्सफेनेमीन (साल्वर्सन, यौगिक 606) 1910 के दशक के आरंभ में सिफ़लिस के उपचार के रूप में लाई गई।
वर्ग इन औषधों पर विकिपीडिया लेखों के वर्णन के अनुसार; NDPS अधिनियम, 1985 मॉर्फीन को अफ़ीम व्युत्पन्नों में गिनता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- हर दर्दनिवारक को स्वापक मान लेना: ऐस्पिरिन और पैरासिटामॉल पीड़ाहारी हैं, पर ओपिऑइड नहीं।
- आर्सफेनेमीन नाम से दर्दनिवारक जैसी लगती है, पर यह सिफ़लिस के उपचार के लिए लाई गई आर्सेनिक-आधारित प्रतिसूक्ष्मजैविक है।
- अफ़ीम से जुड़ा पदार्थ केवल मॉर्फीन ही नहीं है: NDPS अधिनियम अपने मूल रूप में कोडीन, थीबेन और डाइएसिटाइलमॉर्फीन (हेरोइन) को भी अफ़ीम व्युत्पन्नों में गिनता है।
कोई प्रश्न कुछ औषधों की सूची देकर पूछ सकता है कि उनमें से कौन-सी स्वापक पीड़ाहारी, ज्वरनाशी या प्रतिसूक्ष्मजैविक है।
कोई प्रश्न ऐस्पिरिन जैसी किसी एक औषध पर कथन देकर यह भी पूछ सकता है कि कौन-सा कथन सत्य नहीं है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
आर्सफेनेमीन, जिसे साल्वर्सन भी कहते हैं, बीसवीं शताब्दी के आरंभ में किसके उपचार के रूप में लाई गई थी ?
- (a)मलेरिया
- (b)सिफ़लिस
- (c)क्षयरोग
- (d)माइग्रेन
उत्तर(2) — आर्सफेनेमीन 1910 के दशक के आरंभ में सिफ़लिस के, और पुनरावर्ती ज्वर तथा अफ्रीकी ट्रिपैनोसोमिएसिस के भी, उपचार के रूप में लाई गई। विकल्प (1), (3) और (4) वे रोग नहीं हैं जिनके उपचार के लिए इसे लाया गया। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सी औषध दर्द, ज्वर और प्रदाह घटाती है और रक्त के थक्के बनने के विरुद्ध भी काम करती है ?
- (a)मॉर्फीन
- (b)ऐस्पिरिन
- (c)कोडीन
- (d)आर्सफेनेमीन
उत्तर(2) — ऐस्पिरिन प्रदाहरोधी और थक्कारोधी क्रिया वाली NSAID है। विकल्प (1) और (3) अफ़ीम के ऐल्केलॉइड हैं जिन्हें NDPS अधिनियम अफ़ीम व्युत्पन्न बताता है, और विकल्प (4) सिफ़लिस के विरुद्ध प्रयुक्त प्रतिसूक्ष्मजैविक है।