अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में निम्नांकित में से कौन सा कथन सही नहीं है ?
- (1)15 अगस्त, 2023 तक 27 अविश्वास प्रस्ताव, 9 विश्वास प्रस्ताव रखे गए हैं ।
- (2)लाल बहादुर शास्त्री ने अपने कार्यकाल के प्रतिवर्ष अधिकतम अविश्वास प्रस्तावों का सामना किया ।
- (3)जो सदस्य अविश्वास प्रस्ताव रखना चाहता है, उसे उसकी सूचना लिखित में लोक सभा स्पीकर को देनी होती है ।
- (4)अविश्वास प्रस्ताव केवल लोक सभा में रखा जा सकता है ।
उत्तर
क्यों
RPSC ने अपनी अंतिम उत्तर कुंजी में यह प्रश्न विलोपित कर दिया, इसलिए कोई विकल्प सही नहीं दिखाया गया है।
चारों कथन उस प्रस्ताव के बारे में हैं जिसके द्वारा लोक सभा मंत्रिपरिषद् से अपना समर्थन वापस ले सकती है। इनमें से दो प्रक्रिया और सदन का वर्णन करते हैं; दो ऐसे प्रस्तावों के अभिलेखों का, और उनमें से एक अपनी गिनती 15 अगस्त 2023 की तिथि पर रखता है।
इसका आधार अनुच्छेद 75(3) है, जिसके अनुसार मंत्रिपरिषद् लोक सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी। संविधान का अंग्रेज़ी पाठ स्वयं ‘no-confidence motion’ (अविश्वास प्रस्ताव) शब्दों का प्रयोग नहीं करता; इसकी प्रक्रिया लोक सभा के प्रक्रिया नियमों में है।
लोक सभा के प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमों का नियम 198 मंत्रिपरिषद् में अविश्वास प्रकट करने वाले प्रस्ताव को नियंत्रित करता है। सदस्य अध्यक्ष (स्पीकर) द्वारा पुकारे जाने पर अनुमति माँगता है, और उसी दिन 10.00 बजे तक प्रस्ताव की लिखित सूचना महासचिव को देता है।
अध्यक्ष प्रस्ताव सदन को पढ़कर सुनाता है। अनुमति तभी मिलती है जब कम से कम पचास सदस्य समर्थन में खड़े हों, और तब प्रस्ताव अध्यक्ष द्वारा नियत ऐसे दिन लिया जाता है जो दस दिन से अधिक दूर न हो।
ऐसे प्रस्तावों की गिनती और दरें अभिलेख हैं, नियम नहीं। हर नए प्रस्ताव के साथ ये बदलती हैं, और इन्हें किसी तिथि-युक्त आधिकारिक अभिलेख से मिलाकर ही पढ़ा जा सकता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)15 अगस्त, 2023 तक 27 अविश्वास प्रस्ताव, 9 विश्वास प्रस्ताव रखे गए हैं । — यह कथन 15 अगस्त 2023 की तिथि वाला एक अभिलेख है, जिसमें दो अलग-अलग गिनतियाँ हैं। अविश्वास प्रस्ताव मंत्रिपरिषद् में अविश्वास प्रकट करता है (नियम 198); विश्वास प्रस्ताव सदन से अपना विश्वास व्यक्त करने को कहता है।
दोनों प्रकार के प्रस्ताव अलग-अलग गिने जाते हैं, इसलिए ऐसे किसी आँकड़े की जाँच के लिए बताई गई तिथि तक का लोक सभा का अपना अभिलेख चाहिए।
- (2)लाल बहादुर शास्त्री ने अपने कार्यकाल के प्रतिवर्ष अधिकतम अविश्वास प्रस्तावों का सामना किया । — यह कथन प्रधानमंत्रियों की तुलना कुल प्रस्तावों से नहीं, कार्यकाल के प्रति वर्ष सामना किए गए प्रस्तावों से करता है।
लाल बहादुर शास्त्री 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक प्रधानमंत्री रहे, लगभग उन्नीस महीने। प्रति वर्ष की दर में छोटा कार्यकाल हर प्रस्ताव का भार उससे अधिक कर देता है जितना वह लंबे कार्यकाल में होता।
- (3)जो सदस्य अविश्वास प्रस्ताव रखना चाहता है, उसे उसकी सूचना लिखित में लोक सभा स्पीकर को देनी होती है । — यह कथन सूचना देने के ढंग के बारे में है। नियम 198(1) में दो चरण हैं: सदस्य अध्यक्ष द्वारा पुकारे जाने पर अनुमति माँगता है, और उसी दिन 10.00 बजे तक महासचिव को लिखित सूचना देता है।
नियम के परंतुक के अंतर्गत 10.00 बजे के बाद मिली सूचना को सदन की अगली बैठक के दिन 10.00 बजे मिली हुई माना जाता है।
- (4)अविश्वास प्रस्ताव केवल लोक सभा में रखा जा सकता है । — यह कथन इस बारे में है कि कौन-सा सदन इस प्रस्ताव का प्रयोग कर सकता है। अनुच्छेद 75(3) मंत्रिपरिषद् को लोक सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी बनाता है, और नियम 198 लोक सभा का नियम है।
अनुच्छेद 75(3) में राज्य सभा का नाम नहीं है। राज्यों में अनुच्छेद 164(2) मंत्रिपरिषद् को विधान सभा के प्रति उत्तरदायी बनाता है।
अवधारणा
संसदीय शासन सामूहिक उत्तरदायित्व पर टिका है। अनुच्छेद 75(3) संघ की मंत्रिपरिषद् को लोक सभा के प्रति, और अनुच्छेद 164(2) किसी राज्य की मंत्रिपरिषद् को उसकी विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी बनाता है।
अविश्वास प्रस्ताव वह साधन है जिससे सदन इस उत्तरदायित्व को परखता है। नियम 198 के अंतर्गत सदस्य अनुमति माँगता है; यदि कम से कम पचास सदस्य समर्थन में खड़े हों, तो अध्यक्ष दस दिन के भीतर कोई दिन नियत करता है और चर्चा के लिए समय आवंटित करता है।
अंतिम आवंटित दिन के नियत समय पर अध्यक्ष प्रस्ताव पर निर्णय के लिए प्रश्न सदन के समक्ष रखता है। विश्वास प्रस्ताव उलटी दिशा में चलता है: सदन से सरकार में विश्वास व्यक्त करने को कहा जाता है।
राज्यों की विधान सभाएँ भी यही साधन अपनाती हैं। राजस्थान विधान सभा के अभिलेख में पाँच विश्वास प्रस्ताव दर्ज हैं: 1990 में दो, और 1993, 2009 तथा 2020 में एक-एक।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "भारतीय राजनीतिक व्यवस्था" के अंतर्गत "राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद्, संसद, उच्चतम न्यायालय और न्यायिक पुनरावलोकन" शामिल है, और "राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था" के अंतर्गत "राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद्, विधानसभा, उच्च न्यायालय"।
सामूहिक उत्तरदायित्व दोनों स्तरों पर कार्यपालिका को विधायिका से जोड़ता है: नई दिल्ली में भी और जयपुर में भी, मंत्रिपरिषद् निर्वाचित सदन के प्रति जवाबदेह है।
नियम और अभिलेख अलग प्रकार के तथ्य हैं। नियम 198 तभी बदलता है जब लोक सभा अपने नियमों में संशोधन करे। प्रस्तावों की गिनती हर नए प्रस्ताव के साथ बदलती है, इसलिए वह अपनी तिथि के साथ ही सही होती है।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 75(3): मंत्रिपरिषद् लोक सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है।
- लोक सभा प्रक्रिया नियमों का नियम 198: अविश्वास प्रस्ताव की लिखित सूचना उसी दिन 10.00 बजे तक महासचिव को दी जाती है जिस दिन अनुमति माँगी जाती है।
- प्रस्ताव रखने की अनुमति के लिए कम से कम पचास सदस्यों का समर्थन में खड़ा होना आवश्यक है; प्रस्ताव दस दिन के भीतर लिया जाता है।
- लाल बहादुर शास्त्री 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।
- राजस्थान विधान सभा के अभिलेख में पाँच विश्वास प्रस्ताव दर्ज हैं: 1990 में दो, और 1993, 2009 तथा 2020 में एक-एक।
लोक सभा के प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमों (पंद्रहवाँ संस्करण, 2014) के नियम 198 से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- सूचना गलत अधिकारी को भेज देना। नियम 198 लिखित सूचना के लिए महासचिव का नाम लेता है; अध्यक्ष सदस्य को पुकारता है और प्रस्ताव सदन को पढ़कर सुनाता है।
- राज्य सभा को ऐसा सदन मान लेना जिसके प्रति सरकार उत्तरदायी है। अनुच्छेद 75(3) केवल लोक सभा का नाम लेता है।
- कुल संख्या और दर को मिला देना। कार्यकाल के प्रति वर्ष की गिनती किसी प्रधानमंत्री द्वारा सामना किए गए प्रस्तावों को उसके पद पर बिताए वर्षों से भाग देती है।
कोई प्रश्न अविश्वास प्रस्ताव — उसके नियम, उसकी सूचना, उसके सदन और उसके इतिहास — पर कथन देकर वह कथन पूछ सकता है जो सही नहीं है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि अनुमति के लिए कितने सदस्यों का समर्थन चाहिए, या किसी बताई गई तिथि तक किसी राज्य की विधान सभा में कितने विश्वास प्रस्ताव आए हैं।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2016 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
लोक सभा के प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमों के नियम 198 के अंतर्गत, मंत्रिपरिषद् में अविश्वास का प्रस्ताव रखने की अनुमति तब मिलती है जब कम से कम कितने सदस्य उसके समर्थन में खड़े हों ?
- (a)20
- (b)50
- (c)100
- (d)सदन के सदस्यों की कुल संख्या का दसवाँ भाग
उत्तर(2) — नियम 198(2) के अनुसार कम से कम पचास सदस्यों का खड़ा होना आवश्यक है। 20 (1) और 100 (3) इस नियम के आँकड़े नहीं हैं। सदस्यों की कुल संख्या का दसवाँ भाग (4) अनुच्छेद 100(3) के अंतर्गत सदन की गणपूर्ति है, अनुमति के लिए आवश्यक समर्थन नहीं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान विधान सभा के अभिलेख के अनुसार 1 अक्टूबर 2023 तक विधान सभा में कितने विश्वास प्रस्ताव रखे गए थे ?
- (a)तीन
- (b)चार
- (c)पाँच
- (d)छह
उत्तर(3) — अभिलेख में पाँच दर्ज हैं: 23 मार्च 1990, 8 नवम्बर 1990, 31 दिसम्बर 1993, 3 जनवरी 2009 और 14 अगस्त 2020। चार (2) 2020 के प्रस्ताव से पहले की गिनती थी। तीन (1) दो सूचीबद्ध प्रस्तावों को छोड़ देता है, और छह (4) अभिलेख की सूची से अधिक है।