भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का सितम्बर 1920 में कलकत्ता में जो विशेष अधिवेशन आयोजित किया गया था और जिसमें असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव पारित किया गया उसके अध्यक्ष कौन थे ?
- (1)दादाभाई नौरोजी
- (2)मौलाना अबुल कलाम आजाद
- (3)लाला लाजपत राय
- (4)विजय राघवाचारी
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), लाला लाजपत राय.
कांग्रेस का विशेष अधिवेशन 4 से 9 सितम्बर 1920 तक कलकत्ता में हुआ। कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1935 में प्रकाशित बी. पट्टाभि सीतारमैया की हिस्ट्री ऑफ़ द इंडियन नेशनल कांग्रेस दर्ज करती है कि लाला लाजपत राय उस अधिवेशन के अध्यक्ष चुने गए।
इसी अधिवेशन में असहयोग का प्रस्ताव पारित हुआ। सीतारमैया दर्ज करते हैं कि गांधी ने इसे प्रस्तुत किया और यह 884 के विरुद्ध 1,886 प्रतिनिधियों के मत से पारित हुआ।
प्रस्ताव ने गांधी की क्रमिक, अहिंसक असहयोग की नीति अपनाई, जो तब तक चलनी थी जब तक पंजाब और ख़िलाफ़त के अन्यायों का निवारण न हो जाए और स्वराज्य स्थापित न हो जाए।
सीतारमैया जोड़ते हैं कि कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता असहयोग के एक घोषित विरोधी ने की थी। दिसम्बर 1920 में नागपुर में यह प्रस्ताव सी. आर. दास ने प्रस्तुत किया और लाला लाजपत राय ने इसका समर्थन किया।
याद रखने की बात: कलकत्ता, सितम्बर 1920 (विशेष अधिवेशन) = लाजपत राय; नागपुर, दिसम्बर 1920 (वार्षिक अधिवेशन) = सी. विजय राघवाचारी।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)दादाभाई नौरोजी — सीतारमैया दर्ज करते हैं कि दादाभाई नौरोजी ने तीन बार, 1886, 1893 और 1906 में, कांग्रेस की अध्यक्षता की। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षों की सूची इन्हें कलकत्ता (दूसरा अधिवेशन), लाहौर (नौवाँ) और कलकत्ता (बाईसवाँ) में रखती है।
विकल्प (1) 1886 और 1906 के कलकत्ता अधिवेशनों और 1893 के लाहौर अधिवेशन का उत्तर है। सितम्बर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन की अध्यक्षता लाला लाजपत राय ने की।
- (2)मौलाना अबुल कलाम आजाद — सीतारमैया मौलाना अबुल कलाम आजाद को कलकत्ता से तीन वर्ष बाद, सितम्बर 1923 में दिल्ली के विशेष अधिवेशन का अध्यक्ष बताते हैं। कांग्रेस का उन पर अपना परिचय 1923 को उनका पहला कार्यकाल बताता है और 1940 से दूसरा कार्यकाल जोड़ता है, जो 1946 तक चला।
वही परिचय कहता है कि 1920 में आजाद कलकत्ता अधिवेशन में अखिल भारतीय ख़िलाफ़त समिति के अध्यक्ष चुने गए। वह पद ख़िलाफ़त समिति का था, कांग्रेस का नहीं।
- (4)विजय राघवाचारी — सेलम के सी. विजय राघवाचारी ने दिसम्बर 1920 में नागपुर के वार्षिक अधिवेशन की अध्यक्षता की। कांग्रेस का उन पर अपना परिचय उनकी अध्यक्षता नागपुर, 1920 बताता है।
नागपुर अधिवेशन कलकत्ता के तीन महीने बाद हुआ और उसने वहाँ पारित असहयोग प्रस्ताव की पुनः पुष्टि की। दोनों अधिवेशन एक ही वर्ष और एक ही कार्यक्रम के हैं, पर सितम्बर के विशेष अधिवेशन की अध्यक्षता लाला लाजपत राय ने की।
अवधारणा
कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन होता था और, कोई तात्कालिक मुद्दा उठने पर, दो वार्षिक अधिवेशनों के बीच विशेष अधिवेशन होता था। बिपन चन्द्र की मॉडर्न इंडिया (NCERT, 1971) दर्ज करती है कि 1886 से कांग्रेस हर वर्ष दिसम्बर में मिलती थी।
इन वर्षों के विशेष अधिवेशनों में अगस्त 1918 में हसन इमाम की अध्यक्षता में बम्बई, सितम्बर 1920 में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में कलकत्ता, और सितम्बर 1923 में मौलाना अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में दिल्ली शामिल हैं।
1920 में तात्कालिक मुद्दा असहयोग था। बिपन चन्द्र लिखते हैं कि ख़िलाफ़त समिति ने 31 अगस्त 1920 को एक असहयोग आन्दोलन शुरू किया। कलकत्ता के विशेष अधिवेशन ने यह कार्यक्रम अपनाया, और दिसम्बर में नागपुर के वार्षिक अधिवेशन ने इसका अनुमोदन किया।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "स्वतंत्रता संघर्ष एवं भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन– विभिन्न अवस्थाएँ, धाराएँ, महत्वपूर्ण योगदानकर्ता एवं देश के अलग–अलग हिस्सों का योगदान" सूचीबद्ध है।
1920 के दोनों अधिवेशन एक नए चरण का संकेत हैं। बिपन चन्द्र लिखते हैं कि कांग्रेस का स्वरूप अब बदल गया और वह जनता की संगठनकर्ता और नेता बन गई।
नागपुर अधिवेशन ने कांग्रेस का संविधान भी बदला। प्रांतीय कांग्रेस समितियों का पुनर्गठन भाषायी क्षेत्रों के आधार पर हुआ, और संगठन का नेतृत्व 15 सदस्यों की एक कार्यसमिति को करना था।
बिपन चन्द्र इस दौर में कांग्रेस छोड़ने वाले प्रमुख नेताओं में मोहम्मद अली जिन्ना, जी. एस. खापर्डे, बिपिन चन्द्र पाल और एनी बेसेंट के नाम लेते हैं।
मुख्य तथ्य
- सीतारमैया की हिस्ट्री ऑफ़ द इंडियन नेशनल कांग्रेस (1935) कलकत्ता विशेष अधिवेशन को 4–9 सितम्बर 1920 में रखती है, जिसके अध्यक्ष लाला लाजपत राय चुने गए।
- सीतारमैया के अनुसार कलकत्ता में गांधी का असहयोग प्रस्ताव 884 के विरुद्ध 1,886 प्रतिनिधियों के मत से पारित हुआ।
- सेलम के सी. विजय राघवाचारी ने दिसम्बर 1920 के नागपुर अधिवेशन की अध्यक्षता की, जिसने असहयोग प्रस्ताव की पुनः पुष्टि की।
- सीतारमैया के अनुसार नागपुर में असहयोग प्रस्ताव सी. आर. दास ने प्रस्तुत किया और लाला लाजपत राय ने उसका समर्थन किया।
- मौलाना अबुल कलाम आजाद ने सितम्बर 1923 के दिल्ली विशेष अधिवेशन की अध्यक्षता की, और 1940 से 1946 तक वे फिर कांग्रेस अध्यक्ष रहे।
स्रोत: बी. पट्टाभि सीतारमैया (1935); बिपन चन्द्र, मॉडर्न इंडिया (NCERT, 1971)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 1920 के दोनों अधिवेशनों को मिला देना: सितम्बर के कलकत्ता विशेष अधिवेशन की अध्यक्षता लाजपत राय ने की, दिसम्बर के नागपुर वार्षिक अधिवेशन की सी. विजय राघवाचारी ने।
- 'कलकत्ता' को दादाभाई नौरोजी का संकेत मान लेना: उन्होंने कलकत्ता में 1886 और 1906 में अध्यक्षता की, 1920 में नहीं।
- यह मान लेना कि अध्यक्ष ने प्रस्ताव का समर्थन किया होगा: सीतारमैया कलकत्ता के अध्यक्ष को असहयोग का विरोधी बताते हैं; नागपुर में लाजपत राय ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
कोई प्रश्न किसी अधिवेशन का नगर, मास और वर्ष देकर उसका अध्यक्ष पूछ सकता है, या पूछ सकता है कि किसी नामित प्रस्ताव को किस अधिवेशन ने पारित किया।
कोई प्रश्न 1918 से 1923 के अधिवेशनों का क्रम भी पूछ सकता है, या हर अध्यक्ष का उसके अधिवेशन से मिलान करवा सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2018 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
दिसम्बर 1920 में नागपुर में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की?
- (a)लाला लाजपत राय
- (b)सी. विजय राघवाचारी
- (c)मौलाना अबुल कलाम आजाद
- (d)दादाभाई नौरोजी
उत्तर(2) — सेलम के सी. विजय राघवाचारी ने दिसम्बर 1920 में नागपुर में अध्यक्षता की। विकल्प (1) ने सितम्बर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन की, विकल्प (3) ने सितम्बर 1923 के दिल्ली विशेष अधिवेशन की, और विकल्प (4) ने 1886, 1893 और 1906 के अधिवेशनों की अध्यक्षता की। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सितम्बर 1920 में कलकत्ता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विशेष अधिवेशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. असहयोग का प्रस्ताव गांधी ने प्रस्तुत किया। B. अधिवेशन की अध्यक्षता सी. विजय राघवाचारी ने की। सही विकल्प चुनिए:
- (a)केवल A सही है।
- (b)केवल B सही है।
- (c)A और B दोनों सही हैं।
- (d)न तो A और न ही B सही है।
उत्तर(1) — सीतारमैया दर्ज करते हैं कि कलकत्ता में प्रस्ताव गांधी ने प्रस्तुत किया, इसलिए A सही है। B गलत है: कलकत्ता में अध्यक्षता लाला लाजपत राय ने की, जबकि सी. विजय राघवाचारी ने दिसम्बर 1920 में नागपुर में अध्यक्षता की। इससे विकल्प (2), (3) और (4) बाहर हो जाते हैं।