एकी आन्दोलन प्रारम्भ करने के पहले मोतीलाल तेजावत किस राजपूत ठिकाने में कामदार के पद पर कार्यरत थे ?
- (1)झाड़ोल
- (2)सलूम्बर
- (3)कोठारिया
- (4)देवगढ़
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), झाड़ोल।
मोतीलाल तेजावत मेवाड़ में झाड़ोल ठिकाने के कामदार थे। बी.एल. पानगड़िया की ‘राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम’ के अनुसार 1886 में मेवाड़ के आदिवासी क्षेत्र फलासिया के कोलियारी गाँव में एक ओसवाल परिवार में जन्मे तेजावत थोड़ा पढ़-लिखकर झाड़ोल ठिकाने के कामदार बन गए।
पानगड़िया लिखते हैं कि थोड़े ही समय में ठिकाने और राज्य द्वारा आदिवासियों पर किए जाने वाले अत्याचारों ने उन्हें वह नौकरी छोड़कर आदिवासियों की सेवा में लगने को प्रेरित किया।
1921 में उन्होंने झाड़ोल, कोटड़ा, मादड़ी और आस-पास के क्षेत्रों के भीलों को जागीरदारों द्वारा ली जाने वाली बेगार और लागों के विरुद्ध संगठित किया। फिर यह आंदोलन सिरोही, दांता, पालनपुर, ईडर और विजयनगर तक फैल गया।
याद रखने की बात: तेजावत: झाड़ोल के कामदार, फिर भीलों के एकी आन्दोलन के नेता।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)सलूम्बर — सलूम्बर मेवाड़ के सामंतों का एक ठिकाना था, पर पानगड़िया तेजावत की नौकरी झाड़ोल में बताते हैं।
सलूम्बर का संबंध 1857 से है: साहित्य अकादेमी की ‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर’ सलूम्बर और कोठारिया के सरदारों को अंग्रेज़-विरोधी पक्ष की सहायता करने वालों में गिनाती है, और कहती है कि उनके सम्मान में लोकगीत, डिंगल कविताएँ और गाथाएँ रची गईं।
- (3)कोठारिया — कोठारिया मेवाड़ का एक ठिकाना था, पर वह ठिकाना नहीं जहाँ तेजावत ने काम किया; पानगड़िया उनकी नौकरी झाड़ोल में बताते हैं।
सलूम्बर की तरह कोठारिया का संबंध भी 1857 से है: ‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ इंडियन लिटरेचर’ इसके सरदार को अंग्रेज़-विरोधी पक्ष की सहायता करने वालों में गिनाती है।
- (4)देवगढ़ — देवगढ़, जो अब राजसमंद ज़िले का एक नगर है, पहले चूंडावत राजपूतों की जागीर थी।
तेजावत के आरंभिक जीवन के पानगड़िया के विवरण में वह ठिकाना झाड़ोल बताया गया है, देवगढ़ नहीं, जहाँ वे कामदार थे।
अवधारणा
ठिकाना मेवाड़ जैसी किसी देशी रियासत के भीतर किसी जागीरदार की जागीर होता था, और उसका कामदार वह अधिकारी होता था जो उसका प्रबंध करता था।
तेजावत ने पहले एक ठिकाने की सेवा की और फिर जागीरदारों द्वारा भीलों से ली जाने वाली बेगार और लागों के विरुद्ध उनका नेतृत्व किया।
1923 के आरंभ में पोशीना और सिरोही के भीलों में तेजावत द्वारा संगठित आंदोलन के लिए के.एस. सक्सेना अपनी अंग्रेज़ी पुस्तक में ऐकी (Aiki) नाम का प्रयोग करते हैं; हिन्दी प्रश्न इसे एकी आन्दोलन लिखता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत" के अंतर्गत "20वीं शताब्दी में जनजाति तथा किसान आन्दोलन, 20वीं शताब्दी के दौरान विभिन्न देशी रियासतों में प्रजामण्डल आन्दोलन। राजस्थान का एकीकरण।" सूचीबद्ध है।
आंदोलन का कठोर दमन हुआ। पानगड़िया विजयनगर राज्य के नीमड़ा में भीलों के एक जमावड़े पर सेना की गोलीबारी का वर्णन करते हैं, जिसमें 1,200 लोग मारे गए और तेजावत के पैर में गोली लगी। सिरोही ज़िला गज़ेटियर मई 1922 में रोहेड़ा तहसील में उनके नेतृत्व में हुए एक विद्रोह को दर्ज करता है, जिसे कुचल दिया गया।
पानगड़िया के अनुसार इसके बाद तेजावत 1929 तक भूमिगत रहे।
मुख्य तथ्य
- पानगड़िया: मोतीलाल तेजावत का जन्म 1886 में मेवाड़ के आदिवासी क्षेत्र फलासिया के कोलियारी में एक ओसवाल परिवार में हुआ।
- पानगड़िया: वे झाड़ोल ठिकाने के कामदार थे, और आदिवासियों पर अत्याचारों के कारण उन्होंने वह नौकरी छोड़ी।
- 1921 में उन्होंने झाड़ोल, कोटड़ा, मादड़ी और आस-पास के क्षेत्रों के भीलों को बेगार और लागों के विरुद्ध संगठित किया; आंदोलन सिरोही, दांता, पालनपुर, ईडर और विजयनगर तक फैला।
- सिरोही ज़िला गज़ेटियर मई 1922 में रोहेड़ा तहसील में तेजावत के नेतृत्व में हुए एक विद्रोह को दर्ज करता है, जिसे अंग्रेज़ों की सहायता से कुचला गया।
- 1929 पर स्रोत भिन्न हैं: पानगड़िया कहते हैं कि उन्होंने गांधी की सलाह पर ईडर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया; के.एस. सक्सेना कहते हैं कि ईडर राज्य के एक हवलदार ने उन्हें 4 जून 1929 को गिरफ़्तार किया।
झाड़ोल की नौकरी आंदोलन से पहले थी, उसके दौरान नहीं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- मेवाड़ का कोई अन्य ठिकाना चुन लेना: सलूम्बर और कोठारिया 1857 से जुड़े हैं, तेजावत की नौकरी से नहीं।
- उनके काम के स्थान को आंदोलन के फैलाव से मिला देना: वे झाड़ोल में कामदार थे, जबकि आंदोलन सिरोही, दांता, पालनपुर, ईडर और विजयनगर तक पहुँचा।
- 1929 की घटनाओं को निर्विवाद मान लेना: पानगड़िया गांधी की सलाह पर आत्मसमर्पण का वर्णन करते हैं, जबकि के.एस. सक्सेना ईडर के एक हवलदार द्वारा गिरफ़्तारी का।
कोई प्रश्न किसी जनजातीय या किसान आंदोलन के नेता का नाम देकर पूछ सकता है कि उसने कहाँ काम किया, आंदोलन कहाँ शुरू हुआ, या उसने किस समुदाय को संगठित किया।
कोई प्रश्न नेताओं को आंदोलनों से सुमेलित भी करवा सकता है, या किसी विशेष राज्य में किसी आंदोलन के दमन के बारे में पूछ सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2016 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बी.एल. पानगड़िया और के.एस. सक्सेना दोनों के अनुसार मोतीलाल तेजावत किस वर्ष ईडर राज्य की हिरासत में आए ?
- (a)1922
- (b)1929
- (c)1936
- (d)1919
उत्तर(2) — दोनों इसे 1929 में रखते हैं, यद्यपि पानगड़िया आत्मसमर्पण का और सक्सेना गिरफ़्तारी का वर्णन करते हैं। विकल्प (1) सिरोही में रोहेड़ा विद्रोह का वर्ष है; विकल्प (3) वह वर्ष है जो पानगड़िया उदयपुर जेल से उनकी रिहाई के लिए देते हैं; विकल्प (4) 1921 में उनके द्वारा संगठित भील आंदोलन से पहले का है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मोतीलाल तेजावत के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : A. भीलों का नेतृत्व करने से पहले वे झाड़ोल ठिकाने के कामदार थे। B. उन्होंने भीलों को बेगार और जागीरदारों द्वारा ली जाने वाली लागों के विरुद्ध संगठित किया। सही विकल्प चुनिए :
- (a)केवल A सही है।
- (b)केवल B सही है।
- (c)A और B दोनों सही हैं।
- (d)न तो A और न ही B सही है।
उत्तर(3) — पानगड़िया दोनों बातें दर्ज करते हैं: तेजावत झाड़ोल ठिकाने के कामदार थे, और 1921 में उन्होंने भीलों को बेगार और लागों के विरुद्ध संगठित किया। इसलिए विकल्प (1), (2) और (4) गलत हैं।