कौन से वर्ष में राजस्थान सौर ऊर्जा नीति घोषित की गई थी?
- (1)2015
- (2)2017
- (3)2019
- (4)2018
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), 2019.
ऊर्जा विभाग, राजस्थान सरकार ने यह नीति राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2019 के नाम से प्रकाशित की। इसका खंड 3.2 कहता है (हिन्दी आशय) कि नीति 18.12.2019 से प्रभावी होगी और किसी दूसरी नीति द्वारा प्रतिस्थापित किए जाने तक लागू रहेगी।
खंड 1.13 नई नीति का कारण बताता है (हिन्दी आशय): सौर ऊर्जा क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं के साथ चलने के लिए राज्य सरकार ने मौजूदा राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2014 की समीक्षा करने का निर्णय लिया।
नीतियों का क्रम दस्तावेज़ में ही दिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्राक्कथन के अनुसार राज्य ने अपनी पहली सौर नीति 2011 में बनाई; खंड 1.13 में 2014 की नीति का नाम है; और नई नीति 2019 की है।
परीक्षा के बाद प्रकाशित आर्थिक समीक्षा 2021-22 इसी दस्तावेज़ को निवेशक-अनुकूल राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2019 कहती है। इसलिए नीति का वर्ष 2019 है।
याद रखने का विचार: राजस्थान की सौर नीतियाँ: 2011 (पहली), 2014, और 2019 (18 दिसंबर 2019 से प्रभावी)।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)2015 — 2019 का दस्तावेज़ जिस नीति की समीक्षा की गई, उसका नाम राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2014 बताता है, 2015 की कोई नीति नहीं।
इसका खंड 14.6 नई नीति शुरू होने से पहले के तीन वर्षों में 2014 की नीति के अंतर्गत पंजीकृत परियोजनाओं को उसी पंजीकरण संख्या के साथ 2019 की नीति के अंतर्गत पंजीकृत मानता है।
- (2)2017 — 2017 उन दो नीतियों के बीच का वर्ष है जिनका नाम 2019 का दस्तावेज़ लेता है: राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2014, जिसकी उसने समीक्षा की, और नई नीति।
नई नीति का अपना खंड 3.2 उसकी शुरुआत तय करता है: 18 दिसंबर 2019 से प्रभावी।
- (4)2018 — नई नीति की घोषणा 2018 के बाद हुई। दस्तावेज़ में ऊर्जा मंत्री बी. डी. कल्ला का संदेश कहता है कि मुख्यमंत्री ने नई सौर नीति की घोषणा 2019-20 के बजट भाषण में की।
फिर खंड 3.2 के अनुसार नीति 18 दिसंबर 2019 से प्रभावी हुई।
अवधारणा
राज्य की सौर नीति राज्य में सौर ऊर्जा के लिए लक्ष्य और नियम तय करती है: परियोजनाओं का पंजीकरण और अनुमोदन कौन करेगा, भूमि का आवंटन कैसे होगा, और कौन-से प्रोत्साहन लागू होंगे।
2019 की नीति का खंड 5.1 वर्ष 2024-25 तक 30,000 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाओं का लक्ष्य रखता है: 24,000 मेगावाट यूटिलिटी या ग्रिड-स्तरीय सौर पार्क, 4,000 मेगावाट वितरित उत्पादन, 1,000 मेगावाट सौर रूफटॉप और 1,000 मेगावाट सौर पंप। ये लक्ष्य हैं, पहले से बनी क्षमता नहीं।
खंड 6 राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RREC) को परियोजनाओं के पंजीकरण और अनुमोदन तथा सौर पार्कों के विकास के लिए नोडल एजेंसी नामित करता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान का भूगोल के अंतर्गत "ऊर्जा संसाधन– परम्परागत एवं गैर–परम्परागत" सूचीबद्ध है।
नीति राज्य की प्राकृतिक क्षमता से शुरू होती है। मुख्यमंत्री का प्राक्कथन कहता है कि राजस्थान की सौर उत्पादन क्षमता 142 GW आँकी गई है, और खंड 1.7 तीव्र सौर विकिरण, सबसे अधिक धूप वाले दिनों में से एक, और विशाल बंजर या अकृष्य भूमि की ओर संकेत करता है।
नीति खुद को भारत सरकार के 2022 तक 175 GW अक्षय ऊर्जा, जिसमें 100 GW सौर, के राष्ट्रीय लक्ष्य से भी जोड़ती है (खंड 1.8)। परीक्षा के बाद प्रकाशित आर्थिक समीक्षा 2021-22 दर्ज करती है कि पवन एवं हाइब्रिड ऊर्जा पर राजस्थान की 2019 की नीति 18 दिसंबर 2019 को जारी की गई।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2019, खंड 3.2: 18 दिसंबर 2019 से प्रभावी, किसी दूसरी नीति द्वारा प्रतिस्थापित किए जाने तक लागू।
- खंड 1.13: राज्य ने मौजूदा राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2014 की समीक्षा की।
- मुख्यमंत्री का प्राक्कथन: राज्य ने अपनी पहली सौर नीति 2011 में बनाई; सौर उत्पादन क्षमता 142 GW आँकी गई।
- खंड 5.1: 2024-25 तक 30,000 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाओं का लक्ष्य, जिसमें 24,000 मेगावाट यूटिलिटी या ग्रिड-स्तरीय सौर पार्क शामिल।
- खंड 6: राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RREC) नीति के अंतर्गत नोडल एजेंसी है।
स्रोत: राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2019, ऊर्जा विभाग, राजस्थान सरकार (प्राक्कथन, संदेश और खंड 1.13, 3.2, 5.1)।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- नीति तैयार होने वाले वर्ष को चुन लेना: नई नीति की घोषणा 2019-20 के बजट भाषण में हुई और वह 18 दिसंबर 2019 से प्रभावी हुई।
- 30,000 मेगावाट को बनी हुई क्षमता समझ लेना: खंड 5.1 इसे 2024-25 तक का लक्ष्य रखता है।
- सौर और पवन नीति के दस्तावेज़ मिला देना: पवन एवं हाइब्रिड ऊर्जा पर राजस्थान की 2019 की नीति एक अलग दस्तावेज़ है, जो 18 दिसंबर 2019 को जारी हुई।
कोई प्रश्न पूछ सकता है कि कोई राज्य नीति किस वर्ष घोषित हुई, या उसका लक्ष्य किस वर्ष तक पूरा होना है।
कोई प्रश्न किसी नीति का क्षमता लक्ष्य, उसकी नोडल एजेंसी, या उसने कौन-सी पुरानी नीति की जगह ली, यह भी पूछ सकता है।
संबंधित PYQ
राजस्थान में किस एजेंसी को पी.एम.–कुसुम योजना (कम्पोनेंट A) के क्रियान्वयन के जिम्मेदारी दी गई है, जिसमें 0.5 मेगावॉट से 2 मेगावॉट क्षमता तक के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किये जाने हैं ?
- (1) ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिऐंसी
- (2) राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड
- (3) राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड
- (4) राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम
उत्तर(2)
वही एजेंसी, एक दूसरा सौर कार्यक्रम: वह प्रश्न पूछता है कि राजस्थान में किस एजेंसी को पी.एम.–कुसुम योजना (कम्पोनेंट A) के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है (RPSC की कुंजी: विकल्प (2), राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड)। यह प्रश्न उस सौर नीति का वर्ष पूछता है जिसके अंतर्गत RREC नोडल एजेंसी है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2019 के अंतर्गत नोडल एजेंसी कौन-सा निकाय है?
- (a)राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड
- (b)राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड
- (c)राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड
- (d)ऊर्जा दक्षता ब्यूरो
उत्तर(2) — नीति का खंड 6 परियोजनाओं के पंजीकरण और अनुमोदन तथा सौर पार्कों के विकास के लिए RREC को नोडल एजेंसी नामित करता है। विकल्प (1), (3) और (4) विद्युत क्षेत्र के अन्य निकाय हैं, जिन्हें खंड 6 नोडल एजेंसी नामित नहीं करता। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2019 वर्ष 2024-25 तक कितनी क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाओं का लक्ष्य रखती है?
- (a)10,000 मेगावाट
- (b)24,000 मेगावाट
- (c)30,000 मेगावाट
- (d)1,42,000 मेगावाट
उत्तर(3) — खंड 5.1 वर्ष 2024-25 तक 30,000 मेगावाट का लक्ष्य रखता है। विकल्प (2), 24,000 मेगावाट, केवल यूटिलिटी या ग्रिड-स्तरीय सौर पार्क वाला हिस्सा है। विकल्प (4) आँकी गई 142 GW क्षमता के बराबर है, लक्ष्य नहीं। विकल्प (1) इस खंड का कोई आँकड़ा नहीं है।