विशाखा व अन्य बनाम राजस्थान राज्य व अन्य मुकदमा संबंधित है –
- (1)महिलाओं की तबादला नीति से
- (2)कामकाजी महिलाओं के मातृत्व अवकाश से
- (3)समाज में व्याप्त दहेज प्रथा के प्रचलन की रोकथाम से
- (4)कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम से
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम से.
विशाखा व अन्य बनाम राजस्थान राज्य व अन्य का निर्णय उच्चतम न्यायालय ने 13 अगस्त 1997 को मुख्य न्यायाधीश जे. एस. वर्मा, न्यायमूर्ति सुजाता वी. मनोहर और न्यायमूर्ति बी. एन. कृपाल की पीठ द्वारा दिया।
निर्णय याचिका का उद्देश्य बताकर शुरू होता है: न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सभी कार्यस्थलों पर कामकाजी महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकना, ताकि मौजूदा कानून की कमी पूरी हो (अंग्रेज़ी निर्णय का हिन्दी रूपांतर)।
यौन उत्पीड़न से प्रभावी सुरक्षा के लिए अधिनियमित कानून के अभाव को देखते हुए न्यायालय ने ऐसे दिशानिर्देश और मानक निर्धारित किए, जिनका पालन सभी कार्यस्थलों या अन्य संस्थानों में तब तक होना था जब तक इस प्रयोजन के लिए कानून न बन जाए।
न्यायालय ने ऐसा अनुच्छेद 32 के अंतर्गत अपनी शक्ति के प्रयोग में किया, और कहा कि इन दिशानिर्देशों को अनुच्छेद 141 के अंतर्गत घोषित विधि माना जाएगा।
यही विशाखा दिशानिर्देश हैं। अन्य बातों के साथ, ये नियोक्ताओं पर यौन उत्पीड़न रोकने का कर्तव्य डालते हैं, इसे परिभाषित करते हैं, निवारक कदम गिनाते हैं, और एक महिला की अध्यक्षता वाली शिकायत समिति की अपेक्षा करते हैं।
याद रखने का विचार: विशाखा (1997) = कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के विरुद्ध दिशानिर्देश, जिनके बाद 2013 का अधिनियम आया।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)महिलाओं की तबादला नीति से — निर्णय में तबादले का उल्लेख है, पर केवल उत्पीड़न संबंधी दिशानिर्देशों के भीतर एक उपाय के रूप में। आपराधिक कार्यवाही वाले शीर्षक के अंतर्गत यह कहता है कि यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के पास उत्पीड़क का तबादला या अपना तबादला माँगने का विकल्प होना चाहिए (हिन्दी रूपांतर)।
यह मामला महिला कर्मचारियों की तबादला नीति के बारे में नहीं है; तबादला उत्पीड़न का सामना कर रही महिला के लिए एक सुरक्षा है।
- (2)कामकाजी महिलाओं के मातृत्व अवकाश से — निर्णय सुरक्षित कार्य-दशाओं से संबंधित संवैधानिक उपबंधों में से एक के रूप में अनुच्छेद 42, "काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध", उद्धृत करता है।
प्रसूति सहायता इसका विषय नहीं है। महिला कर्मियों के प्रसूति लाभ एक अलग कानून, प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961, से शासित हैं।
- (3)समाज में व्याप्त दहेज प्रथा के प्रचलन की रोकथाम से — दहेज एक अलग कानून, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961, का विषय है, और विशाखा याचिका का विषय नहीं है।
निर्णय का विषय कामकाजी महिलाएँ हैं: यह कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए अनुच्छेद 14, 15, 19(1)(छ) और 21 पर आधारित है, और संबंधित उपबंधों में अनुच्छेद 42 और 51A का उल्लेख करता है।
अवधारणा
विशाखा दिशानिर्देश यौन उत्पीड़न में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किया गया अवांछित यौन-प्रेरित व्यवहार शामिल करते हैं, जैसे शारीरिक संपर्क और पेशकदमी, यौन अनुग्रह की माँग या अनुरोध, यौन रंग वाली टिप्पणियाँ, अश्लील सामग्री दिखाना, और यौन प्रकृति का कोई अन्य अवांछित आचरण।
ये हर नियोक्ता के संगठन में शिकायत तंत्र और शिकायतों के समयबद्ध निपटारे की अपेक्षा करते हैं। दिशानिर्देशों के अनुसार शिकायत समिति की अध्यक्षता एक महिला को करनी चाहिए और इसके कम से कम आधे सदस्य महिलाएँ होनी चाहिए, साथ में किसी गैर-सरकारी संगठन जैसा कोई तृतीय पक्ष हो (हिन्दी रूपांतर)।
इस क्षेत्र में घरेलू कानून के अभाव में न्यायालय ने अनुच्छेद 14, 15, 19(1)(छ) और 21 में लैंगिक समानता और गरिमा के साथ काम करने के अधिकार की गारंटियों की व्याख्या के लिए अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों का सहारा लिया।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत लोक नीति एवं अधिकार शीर्षक में "लोक नीति, विधिक अधिकार एवं नागरिक अधिकार–पत्र।" सूचीबद्ध है।
इस मामले का मूल राजस्थान में है। निर्णय दर्ज करता है कि रिट याचिका का तात्कालिक कारण राजस्थान के एक गाँव में एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ कथित नृशंस सामूहिक बलात्कार की घटना थी, जिसे न्यायालय ने अलग आपराधिक कार्यवाही पर छोड़ा।
संसद् ने बाद में महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (2013 का अधिनियम संख्यांक 14) बनाया, जो 9 दिसम्बर 2013 को प्रवृत्त हुआ।
मुख्य तथ्य
- विशाखा व अन्य बनाम राजस्थान राज्य व अन्य: उच्चतम न्यायालय का 13 अगस्त 1997 का निर्णय; पीठ में मुख्य न्यायाधीश जे. एस. वर्मा, सुजाता वी. मनोहर और बी. एन. कृपाल।
- न्यायालय ने अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सभी कार्यस्थलों के लिए दिशानिर्देश निर्धारित किए, जिन्हें कानून बनने तक अनुच्छेद 141 के अंतर्गत घोषित विधि माना जाना था।
- दिशानिर्देश: शिकायत समिति की अध्यक्षता एक महिला करे, कम से कम आधे सदस्य महिलाएँ हों, और गैर-सरकारी संगठन जैसा कोई तृतीय पक्ष हो।
- याचिका का तात्कालिक कारण राजस्थान के एक गाँव में एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ कथित सामूहिक बलात्कार था।
- महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013: 9 दिसम्बर 2013 से प्रवृत्त।
स्रोत: विशाखा व अन्य बनाम राजस्थान राज्य व अन्य, उच्चतम न्यायालय, 13 अगस्त 1997।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'तबादले' को तबादला नीति से जोड़ देना: विशाखा में तबादला उत्पीड़न की पीड़िता का अपना या उत्पीड़क का तबादला माँगने का विकल्प है।
- निर्णय में उद्धृत अनुच्छेद 42 की 'प्रसूति सहायता' को मामले का विषय मान लेना: निर्णय इसे कार्य-दशाओं से संबंधित एक उपबंध के रूप में उद्धृत करता है।
- दिशानिर्देशों को 2013 के अधिनियम के बाद का मान लेना: न्यायालय ने इन्हें 1997 में, अधिनियमित कानून के अभाव में, जारी किया, और संसद् का अधिनियम 2013 में आया।
कोई प्रश्न किसी ऐतिहासिक मामले का नाम देकर पूछ सकता है कि वह किससे संबंधित है, या कोई विषय देकर मामले का नाम पूछ सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि न्यायालय ने किन अनुच्छेदों का सहारा लिया, या दिशानिर्देशों ने शिकायत समिति से क्या अपेक्षा की।
संबंधित PYQ
राजस्थान लोकायुक्त और उप–लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की धारा 7 के तहत, लोकायुक्त को कुछ मामलों में मंत्रियों और लोक सेवकों के खिलाफ आरोपों की जाँच करने का अधिकार है । निम्नलिखित में से कौन सा विषय उन जाँचों का हिस्सा नहीं है ?
- (1) लोक सेवकों द्वारा पहुँचाई गई अकारण हानि या पीड़ा ।
- (2) अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए अवैध लाभ प्राप्त करने के लिए एक लोक सेवक के रूप में अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग करना ।
- (3) महिलाओं का यौन उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव और बच्चों के खिलाफ हिंसा ।
- (4) लोक सेवक की हैसियत से भ्रष्टाचार का दोषी होने या पारदर्शिता की कमी से संबंधित हो सकता है ।
उत्तर(3)
राजस्थान के एक अन्य कानून में संबंधित विषय: वह प्रश्न पूछता है कि राजस्थान लोकायुक्त और उप–लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की धारा 7 के तहत कौन सा विषय लोकायुक्त की जाँचों का हिस्सा नहीं है (RPSC की कुंजी: विकल्प (3), महिलाओं का यौन उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव और बच्चों के खिलाफ हिंसा)। यह प्रश्न पूछता है कि विशाखा मुकदमा किससे संबंधित है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997) में निर्धारित दिशानिर्देशों के अंतर्गत शिकायत समिति की अध्यक्षता किसे करनी चाहिए?
- (a)संगठन के प्रमुख को
- (b)एक महिला को
- (c)एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को
- (d)जिला कलेक्टर को
उत्तर(2) — दिशानिर्देश कहते हैं कि शिकायत समिति की अध्यक्षता एक महिला करे, और इसके कम से कम आधे सदस्य महिलाएँ हों। विकल्प (1), (3) और (4) वह अध्यक्ष नहीं हैं जो दिशानिर्देश निर्धारित करते हैं। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
विशाखा बनाम राजस्थान राज्य में उच्चतम न्यायालय ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न संबंधी दिशानिर्देश किस अनुच्छेद के अंतर्गत अपनी शक्ति के प्रयोग में निर्धारित किए?
- (a)अनुच्छेद 32
- (b)अनुच्छेद 226
- (c)अनुच्छेद 143
- (d)अनुच्छेद 368
उत्तर(1) — न्यायालय ने कहा कि उसने मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए अनुच्छेद 32 के अंतर्गत कार्य किया, और दिशानिर्देशों को अनुच्छेद 141 के अंतर्गत घोषित विधि माना जाएगा। विकल्प (2) उच्च न्यायालयों की रिट शक्ति है, विकल्प (3) राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय को निर्देश, और विकल्प (4) संविधान संशोधन की शक्ति।