स्टेथोस्कोप में, रोगी की दिल की धड़कन की ध्वनि डॉक्टर के कानों तक पहुँचती है –
- (1)ध्वनि के बहु विवर्तन द्वारा
- (2)ध्वनि के बहु परावर्तन द्वारा
- (3)ध्वनि के ध्रुवण द्वारा
- (4)ध्वनि के बहु अपवर्तन द्वारा
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (2), ध्वनि के बहु परावर्तन द्वारा.
NCERT की कक्षा 9 विज्ञान पाठ्यपुस्तक का अध्याय ध्वनि (Sound, 2021-22 संस्करण) ध्वनि के बहु परावर्तन के उपयोगों में स्टेथोस्कोप को गिनाता है। उसके अनुसार स्टेथोस्कोप में रोगी की दिल की धड़कन की ध्वनि ध्वनि के बहु परावर्तन द्वारा डॉक्टर के कानों तक पहुँचती है।
NCERT यह विचार मेगाफ़ोन और हॉर्न से समझाता है: एक नली ध्वनि को बार-बार परावर्तित करके उसके अधिकांश भाग को फैलने देने के बजाय आगे की ओर भेजती है। स्टेथोस्कोप इसी प्रभाव से धड़कन की ध्वनि को अपनी नलियों के सहारे डॉक्टर तक पहुँचाता है।
इसलिए ध्वनि कानों तक ध्वनि के बहु परावर्तन द्वारा पहुँचती है।
याद रखने योग्य बात: स्टेथोस्कोप, मेगाफ़ोन और हॉर्न — तीनों बार-बार के परावर्तन से ध्वनि को दिशा देते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)ध्वनि के बहु विवर्तन द्वारा — विवर्तन ध्वनि का अवरोधों के किनारों से मुड़ना और छिद्रों से होकर फैलना है। NCERT की कक्षा 12 भौतिकी का अध्याय तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics) इसका रोज़मर्रा का उदाहरण देता है: कोने के पार से किसी के बोलने की आवाज़ सुनकर हमें शायद ही आश्चर्य होता है।
विवर्तन ध्वनि को उन क्षेत्रों तक फैलाता है जहाँ वह सीधी रेखा में नहीं पहुँचती। स्टेथोस्कोप इसका उलटा करता है: वह ध्वनि को नली के भीतर रखकर परावर्तन द्वारा एक ही श्रोता तक पहुँचाता है।
- (3)ध्वनि के ध्रुवण द्वारा — वायु में ध्वनि का ध्रुवण नहीं हो सकता। NCERT की कक्षा 9 का अध्याय बताता है कि ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें हैं।
NCERT की कक्षा 12 का तरंग प्रकाशिकी अध्याय आगे बताता है कि व्यतिकरण और विवर्तन के अधिकांश प्रभाव वायु में ध्वनि जैसी अनुदैर्ध्य तरंगों के लिए भी होते हैं, पर ध्रुवण की परिघटनाएँ प्रकाश तरंगों जैसी अनुप्रस्थ तरंगों की ही विशेषता हैं।
- (4)ध्वनि के बहु अपवर्तन द्वारा — अपवर्तन किसी तरंग का एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाते समय मुड़ना है। माध्यम बदलने पर ध्वनि की चाल बदलती तो है: NCERT की तालिका 25 °C पर वायु में 346 m/s और समुद्री जल में 1531 m/s देती है।
पर स्टेथोस्कोप की क्रिया को इस रूप में नहीं बताया गया है। NCERT बहु परावर्तन का नाम लेता है — वही प्रभाव जो मेगाफ़ोन की नली से ध्वनि को दिशा देता है।
अवधारणा
ध्वनि किसी ठोस या द्रव से वैसे ही टकराकर लौटती है जैसे गेंद दीवार से। NCERT के अनुसार परावर्तित ध्वनि प्रकाश की तरह ही परावर्तन के नियमों का पालन करती है: आपतित और परावर्तित दिशाएँ अभिलंब से बराबर कोण बनाती हैं, और तीनों एक ही तल में होती हैं।
जब ध्वनि बार-बार परावर्तित होती है, तो इस प्रभाव का उपयोग किया जा सकता है। NCERT मेगाफ़ोन, हॉर्न, तूर्य (ट्रम्पेट) और शहनाई; स्टेथोस्कोप; कॉन्सर्ट और सम्मेलन हॉलों की वक्राकार छतें; और मंच के पीछे रखे ध्वनि-पट्ट (साउंडबोर्ड) गिनाता है।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत "दैनिक जीवन में विज्ञान के मूलभूत तत्व" सूचीबद्ध है।
परावर्तन प्रतिध्वनि की भी व्याख्या करता है। NCERT के अनुसार ध्वनि की संवेदना मस्तिष्क में लगभग 0.1 s तक बनी रहती है, इसलिए परावर्तित ध्वनि को कम से कम 0.1 s बाद लौटना चाहिए।
344 m/s की चाल पर यह आने-जाने की 34.4 m की दूरी है, इसलिए अवरोधक कम से कम 17.2 m दूर होना चाहिए। NCERT यह भी बताता है कि बादलों की गड़गड़ाहट बादलों और भूमि से बार-बार होने वाले परावर्तनों के कारण होती है।
मुख्य तथ्य
- NCERT: स्टेथोस्कोप में रोगी की दिल की धड़कन की ध्वनि ध्वनि के बहु परावर्तन द्वारा डॉक्टर के कानों तक पहुँचती है।
- NCERT: परावर्तित ध्वनि प्रकाश की तरह ही परावर्तन के नियमों का पालन करती है।
- NCERT: मेगाफ़ोन, हॉर्न, तूर्य, शहनाई, हॉलों की वक्राकार छतें और ध्वनि-पट्ट भी ध्वनि के बहु परावर्तन का उपयोग करते हैं।
- NCERT: ध्वनि की चाल 344 m/s मानने पर स्पष्ट प्रतिध्वनि के लिए अवरोधक कम से कम 17.2 m दूर होना चाहिए।
- NCERT कक्षा 12: ध्रुवण अनुप्रस्थ तरंगों की विशेषता है, जबकि वायु में ध्वनि अनुदैर्ध्य तरंग है।
NCERT कक्षा 9 विज्ञान (ध्वनि, 2021-22 संस्करण) और NCERT कक्षा 12 भौतिकी (तरंग प्रकाशिकी) से।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- नली का अर्थ अपवर्तन नहीं: NCERT के अनुसार स्टेथोस्कोप ध्वनि को बहु परावर्तन द्वारा पहुँचाता है।
- वायु में ध्वनि का ध्रुवण नहीं हो सकता: ध्रुवण अनुप्रस्थ तरंगों का गुण है, और वायु में ध्वनि अनुदैर्ध्य है।
- विवर्तन ध्वनि को कोनों के पार फैलाता है; वह ध्वनि को नली के सहारे एक श्रोता तक नहीं पहुँचाता।
कोई प्रश्न स्टेथोस्कोप, मेगाफ़ोन या ध्वनि-पट्ट जैसे किसी उपकरण का नाम देकर पूछ सकता है कि वह ध्वनि के किस गुण का उपयोग करता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि वायु में ध्वनि कौन सी तरंग परिघटना नहीं दिखा सकती, या प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक न्यूनतम दूरी पूछ सकता है।
संबंधित PYQ
UnlockIAS ने इस प्रश्न की तुलना अन्य RAS प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न-पत्रों के प्रश्नों से की; कोई भी जोड़ने लायक मिलता-जुलता प्रश्न नहीं मिला।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन सी परिघटना वायु में ध्वनि तरंगें नहीं दर्शातीं ?
- (a)परावर्तन
- (b)विवर्तन
- (c)व्यतिकरण
- (d)ध्रुवण
उत्तर(4) — NCERT के अनुसार ध्रुवण की परिघटनाएँ अनुप्रस्थ तरंगों की विशेषता हैं, और वायु में ध्वनि अनुदैर्ध्य है। NCERT के अनुसार ध्वनि का परावर्तन होता है (विकल्प (1)), और व्यतिकरण तथा विवर्तन के प्रभाव वायु में ध्वनि के लिए भी होते हैं (विकल्प (3) और (2))। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
वायु में ध्वनि की चाल 344 m/s और श्रवण-संवेदना का स्थायित्व 0.1 s मानने पर, स्पष्ट प्रतिध्वनि के लिए परावर्तक अवरोधक की न्यूनतम दूरी है –
- (a)34.4 m
- (b)17.2 m
- (c)3.44 m
- (d)344 m
उत्तर(2) — ध्वनि को कम से कम 0.1 s में अवरोधक तक जाकर लौटना होगा: आने-जाने की दूरी 344 × 0.1 = 34.4 m है, और उसका आधा 17.2 m है। विकल्प (1) स्वयं आने-जाने की दूरी है, विकल्प (3) 0.01 s के लिए आने-जाने की दूरी है, और विकल्प (4) 1 s के लिए।