राम उत्तर दिशा में जाता है, फिर दाएं मुड़ता है, फिर दुबारा दाएं चलता है और अन्त में बाएं जाता है। अब राम किस दिशा में है ?
- (a)पूर्व
- (b)दक्षिण
- (c)उत्तर
- (d)पश्चिम
सही उत्तर — (a) पूर्व। एक-एक निर्देश लेकर राम जिस दिशा की ओर मुँह किए है उसे पकड़िए, यह याद रखते हुए कि दिक्-चक्र (कम्पास रोज़) पर मुख्य दिशाएँ घड़ी की दिशा में चलती हैं — उत्तर (0 डिग्री), पूर्व (90), दक्षिण (180), पश्चिम (270)। राम आरम्भ में उत्तर की ओर है। दाएं मुड़ना घड़ी की दिशा में चौथाई घुमाव है, इसलिए उत्तर बदलकर पूर्व हो जाता है। वह दुबारा दाएं जाता है, अर्थात् घड़ी की दिशा में दूसरा चौथाई घुमाव, इसलिए पूर्व बदलकर दक्षिण हो जाता है। फिर वह बाएं जाता है, अर्थात् घड़ी की उल्टी दिशा में चौथाई घुमाव, और दक्षिण से यह उसे वापस पूर्व पर ले आता है। अब जाँच के लिए इसे तेज़ तरीके से भी कीजिए, क्योंकि चरण-दर-चरण विधि में ही अभ्यर्थी अपनी जगह खो बैठते हैं। दाएं मुड़ने को +90 डिग्री और बाएं मुड़ने को −90 डिग्री मानिए और बस जोड़ दीजिए: +90, +90, −90 का कुल योग +90 है। राम 0 डिग्री अर्थात् उत्तर से आरम्भ हुआ था, इसलिए वह 90 डिग्री अर्थात् पूर्व पर समाप्त होता है। दोनों विधियाँ सहमत हैं, और बीजगणितीय विधि का लाभ यह है कि क्रम गिनने की चूक से वह पटरी से नहीं उतरती। शब्दावली के बारे में एक बात और ध्यान देने योग्य है, क्योंकि यही तय करती है कि पूछा क्या जा रहा है: प्रश्न में दूरी कहीं दी ही नहीं गई, केवल घुमाव दिए गए हैं। इसलिए राम की आरम्भिक बिंदु के सापेक्ष स्थिति के बारे में कुछ भी निकाला नहीं जा सकता, और 'अब राम किस दिशा में है' का अर्थ केवल वह दिशा हो सकती है जिस ओर उसका अब मुँह है। (यदि आप यह मान भी लें कि चारों चरण बराबर लंबाई के थे, तो कुल विस्थापन आरम्भिक बिंदु से ठीक पूर्व की ओर दो इकाई निकलेगा, अर्थात् यहाँ दोनों पाठ पूर्व पर ही आते हैं — परन्तु प्रश्नपत्र जो देता है उसके आधार पर केवल मुख-दिशा वाला पाठ ही उत्तर-योग्य है।)
- (b)दक्षिण — दूसरी बार दाएं मुड़ने के बाद राम ठीक इसी दिशा में मुँह किए होता है — उत्तर से पूर्व, पूर्व से दक्षिण — और यह उस अभ्यर्थी का उत्तर है जो एक निर्देश पहले ही रुक जाता है। प्रश्न की बनावट इसे न्योता देती है: 'फिर दाएं मुड़ता है, फिर दुबारा दाएं चलता है और अन्त में बाएं जाता है' तीन अलग-अलग घुमावों को एक ही अल्पविराम-जुड़े उपवाक्य में ठूँस देता है, और तीनों में अंतिम को ही वाक्य के ढलते हुए सिरे के हिस्से की तरह पढ़ लेना सबसे आसान है, न कि एक नए निर्देश की तरह। कुछ भी गणना करने से पहले घुमाव गिन लीजिए: वे तीन हैं।
- (c)उत्तर — यह आरम्भिक दिशा है, और यहाँ लापरवाही से नहीं बल्कि एक विशिष्ट गलत पाठ से पहुँचा जाता है: 'फिर दुबारा दाएं चलता है' को दूसरा घुमाव मानने के बजाय उसी पूर्व की ओर जाती सड़क पर चलते रहना समझ लेना। उस पाठ पर राम एक बार दाएं मुड़ने के बाद पूर्व की ओर होता है, पूर्व में ही बना रहता है, और फिर अंतिम बायाँ घुमाव उसे पूर्व से उत्तर पर ले जाता है। यह उस व्यक्ति का भी उत्तर है जो यह मान लेता है कि दो दाएं और एक बायाँ घुमाव मोटे तौर पर एक-दूसरे को काट देंगे। वे नहीं काटते — शुद्ध परिणाम घड़ी की दिशा में एक ही चौथाई घुमाव है।
- (d)पश्चिम — यह दर्पण-प्रतिबिंब वाला उत्तर है, जो बाएं और दाएं को आपस में बदल देने से बनता है। दाएं मुड़ने को घड़ी की उल्टी दिशा और बाएं को घड़ी की दिशा मान लीजिए तो उत्तर से पश्चिम, पश्चिम से दक्षिण, दक्षिण से पश्चिम मिलेगा। यही विकल्प उस अभ्यर्थी को भी पकड़ता है जो केवल अंतिम घुमाव को उल्टी दिशा में कर बैठता है, क्योंकि दक्षिण से घड़ी की दिशा में मुड़ने पर पश्चिम मिलता है। इस भूल के दोनों रूप दिक्-चक्र को ऐसी वस्तु मान लेने से आते हैं जिसके सामने खड़े होकर आप उसे देख रहे हों, न कि ऐसी वस्तु जिस पर आप स्वयं खड़े होकर चल रहे हों।
दिशा-बोध के प्रश्न वास्तव में घूर्णन के प्रश्न हैं, जो चलने-फिरने का वेश धारण किए रहते हैं। उपकरण है दिक्-चक्र: चार मुख्य दिशाएँ 90 डिग्री की दूरी पर, घड़ी की दिशा में चलती हुई — उत्तर 0 डिग्री पर, पूर्व 90 पर, दक्षिण 180 पर और पश्चिम 270 पर, और उनके बीच चार उप-दिशाएँ — उत्तर-पूर्व 45, दक्षिण-पूर्व 135, दक्षिण-पश्चिम 225 और उत्तर-पश्चिम 315। दाएं मुड़ना +90 डिग्री है, बाएं मुड़ना −90, पीछे मुड़ना 180, और हर मुख-दिशा 360 के मापांक में ली जाती है, इसलिए 405 डिग्री बस 45 ही है। दो नियम पूरे कुल को ढक लेते हैं। पहला, घुमाव सदैव चलने वाले की अपनी वर्तमान मुख-दिशा से नापे जाते हैं, कभी छपे हुए पन्ने से नहीं — दक्षिण की ओर मुँह किए व्यक्ति के बाएं पूर्व होता है और दाएं पश्चिम, जो पन्ने पर दिखने वाले दृश्य से ठीक उल्टा है। दूसरा, मुख-दिशा और विस्थापन अलग-अलग प्रश्न हैं और उनके लिए अलग-अलग आँकड़े चाहिए: कितने भी घुमावों के बाद मुख-दिशा निकालने के लिए केवल घुमाव चाहिए, जबकि आरम्भिक बिंदु से विस्थापन के लिए दूरियाँ भी चाहिए, जो उत्तर-दक्षिण चरणों और पूर्व-पश्चिम चरणों को अलग-अलग जोड़कर मिलती हैं और सीधी रेखा की दूरी चाहिए तो दोनों योगों पर पाइथागोरस लगाना पड़ता है। जो प्रश्न कोई दूरी नहीं देता वह केवल मुख-दिशा ही पूछ सकता है, और जो प्रश्न 'आरम्भ से कितनी दूर और किस दिशा में' पूछता है उसे दूरियाँ देनी ही होंगी।
दो विधियाँ हैं, और अनुशासन यह है कि एक चलाइए और दूसरी से जाँचिए। चरण-विधि: उत्तर की ओर मुँह किए हुए, दाएं मुड़ने से वह पूर्व पर आता है, फिर दाएं मुड़ने से दक्षिण पर, फिर बाएं मुड़ने से वापस पूर्व पर। बीजगणितीय विधि: दाएं +90 है और बाएं −90, इसलिए घुमावों का कुल योग +90 हुआ, और उत्तर 0 डिग्री में 90 डिग्री जोड़ने पर 90 डिग्री अर्थात् पूर्व मिलता है। बीजगणितीय विधि को आदत बनाना उपयोगी है, क्योंकि वह चार-पाँच घुमावों तक टिकी रहती है और आपको मन में चित्र सँभालना नहीं पड़ता। इस प्रश्न में विभेद करने वाली एकमात्र बात यह है कि आप 'फिर दुबारा दाएं चलता है' को कैसे पढ़ते हैं। चारों विकल्पों में से प्रत्येक प्रश्न के एक निश्चित पाठ से मेल खाता है, जो BPSC के तर्कशक्ति प्रश्न के लिए असामान्य रूप से स्वच्छ रचना है और इसीलिए यह प्रश्न केवल हल करने योग्य नहीं, पढ़ने योग्य भी है। पूर्व तब मिलता है जब तीनों घुमाव ठीक-ठीक लगाए जाएँ। दक्षिण तब, जब अंतिम बायाँ घुमाव छूट जाए। उत्तर तब, जब 'दुबारा दाएं' को दूसरे घुमाव के बजाय पूर्व की ओर चलते रहना पढ़ लिया जाए। पश्चिम तब, जब बाएं और दाएं आपस में बदल जाएँ। ध्यान दीजिए कि चारों गलत उत्तरों में एक भी यादृच्छिक नहीं है — इसलिए यहाँ अनुमान लगाने से कुछ नहीं मिलता, और पुस्तिका के निर्देश 9 के अनुसार गलत अनुमान एक-तिहाई अंक की हानि कराता है। एक व्यावहारिक आदत उस दर्पण-भूल को, जिससे पश्चिम निकलता है, किसी भी मात्रा में कल्पना करने से अधिक भरोसे के साथ रोक देती है: हाशिये में एक छोटा दिक्-चक्र बनाइए जिसमें उत्तर ऊपर हो, उस पर राम की वर्तमान मुख-दिशा का एक तीर लगाइए, और हर निर्देश पर पन्ने को या अपनी कलम को सचमुच चौथाई घुमाव दे दीजिए। लगभग हर अभ्यर्थी कम-से-कम एक बार यह भूल करता है कि बाएं-दाएं का निर्णय पन्ने से करता है, जहाँ बायाँ हमेशा पश्चिम जैसा दिखता है, न कि चलने वाले से, जिसके लिए बायाँ वही है जो उसकी वर्तमान मुख-दिशा से चौथाई घुमाव घड़ी की उल्टी दिशा में पड़े।
- दिक्-चक्र पर मुख्य दिशाएँ 90 डिग्री की दूरी पर बैठती हैं और घड़ी की दिशा में चलती हैं: उत्तर 0 डिग्री, पूर्व 90, दक्षिण 180, पश्चिम 270। आठ-बिंदु वाला चक्र इनमें उत्तर-पूर्व 45, दक्षिण-पूर्व 135, दक्षिण-पश्चिम 225 और उत्तर-पश्चिम 315 जोड़ देता है।
- दाएं मुड़ना +90 डिग्री है, बाएं मुड़ना −90 और पीछे मुड़ना 180; अंतिम मुख-दिशा = आरम्भिक मुख-दिशा + सभी चिह्नयुक्त घुमावों का योग, जिसे 360 के मापांक में घटा लिया जाता है।
- इस प्रश्न के लिए यह योग +90 (दाएं), +90 (दाएं), −90 (बाएं) = +90 है। उत्तर अर्थात् 0 डिग्री से आरम्भ करने पर अंतिम मुख-दिशा 90 डिग्री बनती है, जो पूर्व है।
- मुख-दिशा और विस्थापन अलग-अलग राशियाँ हैं। मुख-दिशा के लिए केवल घुमाव चाहिए; विस्थापन के लिए दूरियाँ भी चाहिए, जिन्हें उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम अक्षों पर अलग-अलग जोड़ा जाता है और सीधी दूरी पाइथागोरस से मिलती है। यह प्रश्न कोई दूरी देता ही नहीं, इसलिए केवल मुख-दिशा ही पूछी जा सकती है।
- घुमाव सदैव चलने वाले की अपनी मुख-दिशा के सापेक्ष होते हैं, कभी पन्ने के सापेक्ष नहीं। उन्हें पन्ने से पढ़ना — मानो दिक्-चक्र को दूसरी ओर से देखा जा रहा हो — बाएं और दाएं को आपस में बदल देता है और हर उत्तर को उसके दर्पण-प्रतिबिंब में बदल देता है, और ठीक इसी रास्ते से विकल्प (d) तक पहुँचा जाता है।

- बाएं और दाएं को चलने वाले से नहीं बल्कि पन्ने से पढ़ना, जो उस क्षण उलट जाता है जब उसका मुँह दक्षिण की ओर होता है और दर्पण-उत्तर बना देता है
- दूसरे घुमाव के बाद रुककर दक्षिण उत्तर दे देना, क्योंकि तीनों घुमाव एक ही उपवाक्य में ठुँसे हुए हैं
- यह मान लेना कि दो दाएं और एक बायाँ घुमाव एक-दूसरे को काट देते हैं और आरम्भिक दिशा ही उत्तर के रूप में दे देना
BPSC अपने दिशा वाले प्रश्न को विशुद्ध रूप से घूर्णन तक सीमित रखता है — घुमावों का एक छोटा क्रम, कोई दूरी नहीं, कोई आरेख नहीं, और एक शब्द में मुख्य दिशा वाला उत्तर — और अधिकांश चक्रों में ऐसा एक प्रश्न आरम्भिक तर्कशक्ति खंड में रखता है। UPSC ने 2010 तक सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-I में इसका कठिन रूप पूछा, जहाँ घुमावों के साथ दूरियाँ सदैव आती थीं और प्रश्न सीधी रेखा का विस्थापन माँगता था, जैसे 2000 के उस प्रश्न में जहाँ एक व्यक्ति 3 किमी पूर्व चलकर फिर दो बार बाएं मुड़ता है, अथवा समस्या को मानचित्र को ही घुमाकर नए ढाँचे में रख दिया जाता था, जैसे 2010 में जब दक्षिण-पूर्व को उत्तर बना दिया गया। 2011 से यह प्रकार CSAT प्रश्नपत्र-II में रहता आया है। जो अभ्यर्थी UPSC वाला विस्थापन-रूप हल कर लेता है, वह BPSC वाला रूप पाँच सेकंड में कर देता है; उल्टा सच नहीं है।
एक व्यक्ति बिंदु A से चलकर पूर्व की ओर 3 किमी जाकर B पहुँचता है और फिर बाएं मुड़कर उससे तिगुनी दूरी तय करके C पर पहुँचता है। वह पुनः बाएं मुड़ता है और A तथा B के बीच तय की गई दूरी से पाँच गुनी दूरी चलकर अपने गंतव्य D पर पहुँचता है। आरम्भिक बिंदु और गंतव्य के बीच न्यूनतम दूरी है
- (a) 18 किमी
- (b) 16 किमी
- (c) 15 किमी
- (d) 12 किमी
उत्तर(c) 15 किमी
वही घुमाव पकड़ने का कौशल, पर दूरियों के साथ: पूर्व की ओर मुँह किए बाएं मुड़ने पर उत्तर मिलता है, और उत्तर से फिर बाएं मुड़ने पर पश्चिम, इसलिए मार्ग A(0,0) से B(3,0), फिर C(3,9), फिर D(−12,9) तक जाता है और सीधी रेखा की दूरी 144 और 81 के योग का वर्गमूल अर्थात् 15 किमी है। इसे हल कीजिए और देखिए कि BPSC वाला प्रश्न कैसा दिखता यदि वह मुख-दिशा के बजाय विस्थापन पूछता।
एक बैठक में किसी गाँव का मानचित्र इस प्रकार रखा गया कि दक्षिण-पूर्व उत्तर बन जाता है, उत्तर-पूर्व पश्चिम बन जाता है, और इसी प्रकार आगे भी। दक्षिण क्या बन जाएगा?
- (a) उत्तर
- (b) उत्तर-पूर्व
- (c) उत्तर-पश्चिम
- (d) पश्चिम
उत्तर(b) उत्तर-पूर्व
वही दिक्-चक्र का अंकगणित, पर चलने वाले के बजाय ढाँचा स्वयं घुमाकर: दक्षिण-पूर्व (135 डिग्री) को उत्तर (0 डिग्री) की तरह पढ़वाना हर दिशा पर −135 का खिसकाव लगाना है, इसलिए दक्षिण जो 180 डिग्री पर है, 45 डिग्री बन जाता है, जो उत्तर-पूर्व है। जाँच इसी में समाई है — उत्तर-पूर्व 45 डिग्री पर है, जो −90 अर्थात् 270 डिग्री बनता है, यानी पश्चिम, ठीक वैसा ही जैसा प्रश्न कहता है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
एक व्यक्ति दक्षिण की ओर 5 किमी चलता है, फिर बाएं मुड़कर 3 किमी चलता है, फिर दुबारा बाएं मुड़कर 5 किमी चलता है। अब वह अपने आरम्भिक बिंदु से किस दिशा में है?
- (a)पूर्व
- (b)पश्चिम
- (c)उत्तर
- (d)दक्षिण
उत्तर(a) पूर्व — दक्षिण की ओर का 5 किमी और उत्तर की ओर का 5 किमी आपस में कट जाते हैं, जिससे वह अपने आरम्भिक स्थान से ठीक पूर्व की ओर 3 किमी पर रह जाता है। ध्यान दीजिए कि उसकी अंतिम मुख-दिशा उत्तर है जबकि उसका विस्थापन पूर्व की ओर है, और इसीलिए इन दोनों प्रश्नों को कभी आपस में नहीं मिलाना चाहिए।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
पश्चिम की ओर मुँह किया हुआ एक व्यक्ति 45 डिग्री घड़ी की दिशा में घूमता है, फिर 180 डिग्री घड़ी की उल्टी दिशा में, और अंत में 270 डिग्री घड़ी की दिशा में। अब उसका मुँह किस दिशा में है?
- (a)उत्तर-पूर्व
- (b)दक्षिण-पूर्व
- (c)उत्तर-पश्चिम
- (d)दक्षिण-पश्चिम
उत्तर(a) उत्तर-पूर्व — पश्चिम 270 डिग्री है; 270 में 45 जोड़ने पर 315 (उत्तर-पश्चिम), उसमें से 180 घटाने पर 135 (दक्षिण-पूर्व), उसमें 270 जोड़ने पर 405, जिसे 360 के मापांक में घटाने पर 45 डिग्री अर्थात् उत्तर-पूर्व मिलता है।