निम्नलिखित में से कौन-सा पूँजीवादी ''बाम्बे प्लान'' का वास्तुकार नहीं था ?
- (a)जे. आर. डी. टाटा
- (b)धीरूभाई अंबानी
- (c)जी. डी. बिड़ला
- (d)श्री राम
सही — B, धीरूभाई अंबानी। बॉम्बे प्लान, जिसका औपचारिक नाम 'A Brief Memorandum Outlining a Plan of Economic Development for India' था, जनवरी 1944 में जारी हुआ और 1945 में उसका विस्तृत दो-खंडीय संस्करण आया; उस पर ठीक आठ हस्ताक्षर थे — जे. आर. डी. टाटा, जी. डी. बिड़ला, सर पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास, अर्देशिर दलाल, लाला श्री राम, कस्तूरभाई लालभाई, ए. डी. श्रॉफ़ और जॉन मथाई। चार में से तीन विकल्प इसी सूची में हैं — टाटा, बिड़ला और श्री राम — इसलिए हस्ताक्षरकर्ताओं के नाम याद आते ही यह नकारात्मक प्रश्न सुलझ जाता है। धीरूभाई अंबानी इस सूची में हो ही नहीं सकते, और इसके लिए सूची याद होने की भी ज़रूरत नहीं: उनका जन्म 28 दिसम्बर 1932 को गुजरात के जूनागढ़ ज़िले के चोरवाड़ में हुआ था, यानी ज्ञापन के प्रकाशन के समय वे ग्यारह वर्ष के थे। पचास के दशक भर वे अदन में काम करते रहे, 1958 में भारत लौटे, बंबई के मस्जिद बंदर में 350 वर्ग फुट के दफ़्तर से सूत के व्यापारी के रूप में शुरुआत की, और बहुत बाद में रिलायंस को वस्त्र और पेट्रोरसायन समूह के रूप में खड़ा किया; 6 जुलाई 2002 को उनका निधन हुआ और उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण दिया गया। वे उस पीढ़ी के हैं जो लाइसेंस-परमिट व्यवस्था में समृद्ध हुई — वही व्यवस्था जिसे खड़ा करने में बॉम्बे प्लान की प्रेरणा भी शामिल थी — न कि उस पीढ़ी के जिसने उसका मसौदा लिखा; पूरी एक कार्य-आयु का यह अंतर ही इस प्रश्न को याद रखने का सबसे साफ़ तरीक़ा है।
- (a)जे. आर. डी. टाटा — असली हस्ताक्षरकर्ता, और आठों में प्रायः सबसे पहले लिया जाने वाला नाम। 1938 से टाटा संस के अध्यक्ष रहते हुए वे ज्ञापन का मसौदा तैयार करने वाले समूह के सबसे प्रमुख उद्योगपति थे, और योजना का यह आग्रह कि विकास का आधार भारी उद्योग हो, टाटा के इस्पात और अभियांत्रिकी हितों को सीधे दर्शाता है।
- (c)जी. डी. बिड़ला — यह भी असली हस्ताक्षरकर्ता। घनश्याम दास बिड़ला उस समूह के दूसरे दिग्गज थे और लंबे समय तक गांधी तथा कांग्रेस की गतिविधियों के अर्थ-प्रदाता रहे — यही एक कारण है कि इस योजना को केवल व्यापारियों की माँग-सूची के बजाय राष्ट्रवादी आर्थिक चिंतन के रूप में प्रस्तुत किया जा सका।
- (d)श्री राम — ये दिल्ली क्लॉथ ऐंड जनरल मिल्स के लाला श्री राम हैं, असली हस्ताक्षरकर्ता और दिए गए चार नामों में सबसे कम प्रसिद्ध — और ठीक इसीलिए यही वह विकल्प है जिसे काटने का लोभ उम्मीदवार को होता है। नाम अपरिचित होना और सूची में न होना एक बात नहीं है।
बॉम्बे प्लान भारत के अग्रणी उद्योगपतियों का यह प्रयास था कि युद्धोत्तर भारतीय अर्थव्यवस्था कैसी दिखनी चाहिए, इसका ख़ाका रखा जाए; यह उस समय प्रकाशित हुआ जब देश अब भी औपनिवेशिक शासन में था और भारत छोड़ो के बाद कांग्रेस का नेतृत्व जेल में था। इसमें पंद्रह वर्षों में लगभग 10,000 करोड़ रुपये के व्यय का प्रस्ताव था, जिसका लगभग 45 प्रतिशत उद्योग को जाता, कृषि उत्पादन दुगुना करने और औद्योगिक उत्पादन लगभग पाँच गुना बढ़ाने का लक्ष्य था। इसकी सबसे चौंकाने वाली बात — यह देखते हुए कि इसे व्यापारियों ने लिखा था — यह है कि इसमें राज्य की कितनी बड़ी भूमिका माँगी गई: विदेशी प्रतिस्पर्धा के विरुद्ध संरक्षक शुल्क, निवेश का सरकारी विनियमन, घाटे की वित्त-व्यवस्था, और उन उद्योगों में सार्वजनिक उपक्रम जहाँ निजी पूँजी नहीं जाती। यही औपनिवेशिक काल के व्यापारिक चिंतन और स्वतंत्र भारत द्वारा वास्तव में अपनाई गई मिश्रित अर्थव्यवस्था के बीच का वैचारिक पुल है, और इसीलिए यह योजना पाठ्यक्रम के आर्थिक इतिहास वाले भाग में आती है, व्यापार-इतिहास में नहीं।
इस प्रकार के नकारात्मक प्रश्नों का सबसे अच्छा उत्तर बाहरी नाम ढूँढ़ने के बजाय यह पहचानकर मिलता है कि सूची में कौन-कौन है, क्योंकि सूची छोटी और याद रखने योग्य है। पर इस प्रश्न में एक और तेज़ रास्ता है, जिसमें सूची की ज़रूरत ही नहीं: तिथियाँ जाँचिए। बॉम्बे प्लान 1944–45 का दस्तावेज़ है; धीरूभाई अंबानी का जन्म 1932 में हुआ। ग्यारह वर्ष का बालक किसी राष्ट्रीय आर्थिक योजना का वास्तुकार नहीं हो सकता, इसलिए विकल्प (b) केवल कालक्रम से गिर जाता है और बाक़ी तीन इत्मीनान से जाँचे जा सकते हैं। हर नाम को अपनी सूची-स्मृति से भिड़ाने से पहले प्रश्न में दी गई तिथि से भिड़ाने की यह आदत इतिहास के पूरे एक परिवार के प्रश्नों में आपको बचाएगी। उत्तर को छोड़ दें तो विकल्प-समुच्चय कालिक रूप से भी एकरूप है: टाटा, बिड़ला और श्री राम — तीनों 1940 के दशक के सक्रिय उद्योगपति थे, जबकि अंबानी 1960 के दशक के बाद के हैं।
- बॉम्बे प्लान के आठ हस्ताक्षरकर्ता: जे. आर. डी. टाटा, जी. डी. बिड़ला, सर पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास, अर्देशिर दलाल, लाला श्री राम, कस्तूरभाई लालभाई, ए. डी. श्रॉफ़ और जॉन मथाई
- जनवरी 1944 में 'A Brief Memorandum Outlining a Plan of Economic Development for India' के रूप में प्रकाशित; 1945 में अधिक विस्तृत दो-खंडीय संस्करण आया
- मुख्य लक्ष्य: पंद्रह वर्षों में लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश, जिसका लगभग 45 प्रतिशत उद्योग में, कृषि उत्पादन दुगुना और औद्योगिक उत्पादन लगभग पाँच गुना
- इसमें राज्य के हस्तक्षेप की माँग थी — शुल्क-संरक्षण, निवेश का विनियमन, घाटे की वित्त-व्यवस्था और वहाँ सार्वजनिक उपक्रम जहाँ निजी पूँजी अपर्याप्त हो
- आठ में से एक, जॉन मथाई, आगे चलकर स्वतंत्र भारत के वित्त मंत्री बने; अर्देशिर दलाल वायसराय की कार्यकारी परिषद् में नियोजन एवं विकास सदस्य के रूप में शामिल हुए
- धीरूभाई अंबानी: जन्म 28 दिसम्बर 1932, चोरवाड़, गुजरात; 1958 में अदन से लौटकर बंबई में सूत का व्यापार; निधन 6 जुलाई 2002; मरणोपरांत पद्म विभूषण

- सबसे अपरिचित नाम को काट देना — 'श्री राम' डीसीएम के लाला श्री राम हैं और असली हस्ताक्षरकर्ता हैं
- बॉम्बे प्लान (1944, आठ उद्योगपति) को राष्ट्रीय योजना समिति (1938, अध्यक्ष नेहरू) या पीपुल्स प्लान (1944, एम. एन. रॉय) से गड्डमड्ड कर देना
- यह मान लेना कि व्यापारियों ने राज्य-नियंत्रण का विरोध किया होगा — बॉम्बे प्लान ने राज्य के लिए बड़ी नियोजन और विनियमन भूमिका माँगी थी
BPSC इसे नामों की सूची के स्मरण के रूप में पूछता है, प्रायः नकारात्मक ढंग से — 'कौन नहीं था' — और अपेक्षा करता है कि आपको आठ हस्ताक्षरकर्ता याद हों या कम-से-कम कालक्रम की चूक पकड़ में आ जाए। UPSC भारतीय आर्थिक नियोजन को सूची के बजाय अवधारणा के स्तर पर पूछता है: योजना आयोग की संवैधानिक स्थिति, किसी पंचवर्षीय योजना को अंततः कौन स्वीकृत करता था, या किसी योजना के पीछे का मॉडल — बॉम्बे प्लान का लेखकत्व उसने नहीं पूछा है।
दिसम्बर 2004 में गठित निवेश आयोग का निम्नलिखित में से कौन सदस्य नहीं है?
- (a) रतन टाटा
- (b) दीपक पारेख
- (c) अशोक गांगुली
- (d) कुमारमंगलम बिड़ला
उत्तर(d) कुमारमंगलम बिड़ला
भारतीय पूँजीवाद के पंचांग में साठ वर्ष बाद वही काम — पहचानिए कि आर्थिक नीति गढ़ने के लिए बनी किसी नामित संस्था में कौन-सा प्रमुख उद्योगपति शामिल नहीं था। दोनों प्रश्नों का उत्तर एक छोटी सदस्य-सूची जानने से मिलता है, और दोनों उस अनुमान को दंड देते हैं कि सबसे अपरिचित नाम ही अलग होगा।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
बॉम्बे प्लान के विकल्प के रूप में सामने रखी गई 1944 की 'पीपुल्स प्लान' निम्नलिखित में से किससे जुड़ी है ?
- (a)एम. एन. रॉय
- (b)जयप्रकाश नारायण
- (c)एस. एन. अग्रवाल
- (d)एम. विश्वेश्वरैया
उत्तर(a) एम. एन. रॉय — 1944 की पीपुल्स प्लान इंडियन फ़ेडरेशन ऑफ़ लेबर के लिए तैयार की गई थी; उसी वर्ष की गांधीवादी योजना एस. एन. अग्रवाल की थी और 1950 की सर्वोदय योजना जयप्रकाश नारायण की।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
बॉम्बे प्लान के निम्नलिखित हस्ताक्षरकर्ताओं में से कौन आगे चलकर स्वतंत्र भारत के वित्त मंत्री बने ?
- (a)ए. डी. श्रॉफ़
- (b)जॉन मथाई
- (c)कस्तूरभाई लालभाई
- (d)अर्देशिर दलाल
उत्तर(b) जॉन मथाई — आठ हस्ताक्षरकर्ताओं में अर्थशास्त्री, जिन्होंने स्वतंत्रता के आरंभिक वर्षों में वित्त विभाग सँभाला।