निम्नलिखित आकृति PQRS में कितने त्रिभुज हैं ?

- (a)10
- (b)16
- (c)12
- (d)18
सही — C, 12। पहले छपी हुई आकृति को ठीक-ठीक पढ़िए, क्योंकि पूरा प्रश्न इसी पर टिका है कि दोनों अतिरिक्त रेखाएँ कहाँ तक जाती हैं। आयत PQRS में दोनों विकर्ण PR और QS खिंचे हैं, जो केंद्र O पर कटते हैं। एक क्षैतिज रेखाखंड बाईं भुजा PS के मध्यबिंदु M से दाईं ओर चलकर O तक आता है और वहीं रुक जाता है। एक ऊर्ध्वाधर रेखाखंड O से नीचे चलकर निचली भुजा SR के मध्यबिंदु N तक जाता है और वहीं रुक जाता है। कोई भी अतिरिक्त रेखा दूसरी ओर तक नहीं जाती, इसलिए केवल O, M और N ही नए बिंदु जुड़ते हैं और पूरी बिंदु-सूची है P, Q, R, S, M, N, O — सात बिंदु, और कहीं कोई और कटान नहीं। अब आँख से ढूँढ़ने के बजाय चार अनुशासित समूहों में गिनिए। (1) प्रत्येक पूरा विकर्ण आयत को दो हिस्सों में काटता है: PR से PQR और PRS, QS से PQS और QRS — 4 त्रिभुज। (2) दोनों विकर्ण मिलकर O के चारों ओर चार चतुर्थांश-त्रिभुज बनाते हैं, प्रत्येक एक पूरी भुजा पर खड़ा: ऊपर PQO, दाईं ओर QRO, नीचे RSO, बाईं ओर PSO — 4 और, कुल जोड़ 8। (3) रेखाखंड MO बाएँ चतुर्थांश PSO को PMO और SMO में काटता है — 2 और, कुल 10। (4) रेखाखंड ON निचले चतुर्थांश RSO को SNO और RNO में काटता है — 2 और, कुल 12। इसके अलावा कुछ नहीं बनता: P–O–R और Q–O–S सरल रेखाएँ हैं, त्रिभुज नहीं, और यही बात P–M–S तथा R–N–S पर भी लागू होती है। सातों बिंदुओं की सभी 35 त्रिकों की पूरी जाँच करने पर ठीक यही 12 निकलते हैं।
- (a)10 — ठीक यही संख्या तब मिलती है जब आप दो विभाजित चतुर्थांशों में से एक पकड़ लेते हैं और दूसरा छूट जाता है — प्रायः यह दिख जाता है कि MO बाएँ चतुर्थांश को दो में बाँटता है, पर यह नज़र से रह जाता है कि ON निचले चतुर्थांश को उसी तरह बाँटता है। दस उस उम्मीदवार का ईमानदार उत्तर है जिसने ध्यान से गिना पर एक कदम पहले रुक गया।
- (b)16 — यह गिनती तब बनती है जब दोनों अतिरिक्त रेखाओं को पूरी मध्य-रेखाएँ मान लिया जाए जो आयत के आर-पार जाती हों। O से होकर पूरी क्षैतिज और पूरी ऊर्ध्वाधर रेखा खींच देने पर दो के बजाय चारों चतुर्थांश बँट जाते हैं, दो के बजाय चार छोटे त्रिभुज जुड़ते हैं और कुल ठीक 16 हो जाता है। यह ग़लत आकृति है, जिसे सही-सही गिना गया है।
- (d)18 — इस आकृति का कोई भी पाठ 18 नहीं देता — पूरी मध्य-रेखाओं वाला रूप भी अधिक-से-अधिक 16 तक ही पहुँचता है। यह सही उत्तर से ऊपर इसलिए रखा गया है ताकि उस उम्मीदवार को पकड़ा जा सके जो मान लेता है कि उलझी दिखने वाली आकृति में सावधान गिनती से मिले त्रिभुजों से ज़्यादा त्रिभुज होने ही चाहिए, और इसलिए फिर से जाँचने के बजाय संख्या बढ़ा देता है।
आकृति-गणना के प्रश्न देखने में दृष्टि की परीक्षा लगते हैं, पर असल में विधि की परीक्षा हैं। ऐसी हर आकृति अंततः चिह्नित बिंदुओं के एक समुच्चय और उनके बीच खींचे गए सरल रेखाखंडों तक सिमट जाती है, और त्रिभुज हर उस तीन-बिंदु समुच्चय पर बनता है जो (i) आपस में जोड़े में खींची गई रेखा से जुड़ा हो, और (ii) तीनों एक ही सरल रेखा पर न हों। बिंदु-समुच्चय तय हो जाने पर गिनती सीमित और सिद्ध करने योग्य हो जाती है, आँख सिकोड़ने का विषय नहीं रहती। परीक्षा-कक्ष की भरोसेमंद तकनीक है आकार के क्रम में बढ़ना: पहले वे त्रिभुज जो पूरी भुजाओं और पूरे विकर्णों से बनते हैं, फिर वे जो उन बड़े त्रिभुजों के भीतरी रेखाओं से कटने पर बनते हैं। सबसे बड़े से शुरू करना अपने आप एक जाँच भी दे देता है, क्योंकि हर छोटा त्रिभुज किसी न किसी पहले से सूचीबद्ध बड़े त्रिभुज का ही टुकड़ा होना चाहिए।
एकमात्र निर्णायक अवलोकन यह है कि दोनों भीतरी रेखाखंड कितनी दूर तक जाते हैं। इस आकृति में वे केंद्र पर रुक जाते हैं; क्षैतिज रेखा बाईं भुजा से चलकर O तक आती है और आगे नहीं बढ़ती, और ऊर्ध्वाधर रेखा O से नीचे भुजा तक गिरती है और उससे आगे नहीं जाती। यही असमानता उत्तर को 16 के बजाय 12 बनाती है, और इसीलिए आकृति को देखना ज़रूरी है — केवल 'दो भीतरी रेखाखंड' शब्दों से दोनों गिनतियाँ बचाव-योग्य हैं। सात शीर्षों पर कुल 35 ही संभव त्रिकें बनती हैं, इसलिए यदि अपनी गिनती पर संदेह हो तो पूरी जाँच काग़ज़ पर सचमुच की जा सकती है: चार संरेख त्रिकों (P–O–R, Q–O–S, P–M–S, R–N–S) को काट दीजिए और उन त्रिकों को भी जिनके तीनों जोड़ने वाले रेखाखंड खींचे ही नहीं गए हैं — बचते हैं 12।
- पूरा शीर्ष-समुच्चय सात बिंदुओं का है: चार कोने P, Q, R, S; विकर्णों का कटान-बिंदु O; और दो पाद M (PS पर) तथा N (SR पर)
- आयत के दोनों विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं, इसलिए O केंद्र है और चारों चतुर्थांश-त्रिभुज PQO, QRO, RSO, PSO क्षेत्रफल में बराबर हैं
- बारह त्रिभुज हैं PQR, PRS, PQS, QRS (आधे भाग); PQO, QRO, RSO, PSO (चतुर्थांश); PMO, SMO (MO से बँटा बायाँ चतुर्थांश); SNO, RNO (ON से बँटा निचला चतुर्थांश)
- सात बिंदुओं में से चार त्रिकें संरेख हैं और उन्हें छोड़ना ही होगा: P–O–R, Q–O–S, P–M–S और R–N–S
- यदि दोनों भीतरी रेखाएँ आयत के आर-पार जाने वाली पूरी मध्य-रेखाएँ होतीं, तो चारों चतुर्थांश बँट जाते और गिनती 16 होती — यही विकल्प (b) का स्रोत है
दोनों उभरी हुई पंक्तियाँ ही 10, 12 और 16 के बीच का पूरा अंतर हैं: चार में से केवल दो चतुर्थांश बँटते हैं, क्योंकि हर भीतरी रेखाखंड केंद्र पर ही रुक जाता है।
- यह मान लेना कि कोई भीतरी रेखा पूरी आकृति के आर-पार जाती है जबकि वह बीच में ही रुक जाती है — यहाँ यही 12 और 16 का अंतर है
- केवल सबसे छोटे दिखने वाले टुकड़े गिनना और पूरी भुजाओं तथा पूरे विकर्णों से बने बड़े त्रिभुज भूल जाना
- एक ही त्रिभुज को दो अलग अक्षर-क्रमों में दो बार गिन लेना, जैसे PMO और OMP
BPSC प्रथम प्रश्नपत्र में दो-तीन विशुद्ध आरेख-आधारित तर्कशक्ति प्रश्न रखता है और आकृति स्वयं छापता है, इसलिए प्रश्न केवल शब्दों से हल नहीं किया जा सकता — एक मिनट रखिए और समूहों में गिनिए। UPSC प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र में आकृति-गणना पूछी ही नहीं जाती; उसके सबसे नज़दीक CSAT अर्हक प्रश्नपत्र आता है, और वहाँ भी ज़ोर आकृतियाँ गिनने पर नहीं, आँकड़ा-निर्वचन और तार्किक विवेचन पर रहता है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
ऐसे आयत में कितने त्रिभुज होते हैं जिसमें दोनों विकर्ण खींचे गए हों और कोई अन्य रेखा न जोड़ी गई हो ?
- (a)4
- (b)6
- (c)8
- (d)10
उत्तर(c) 8 — केंद्र के चारों ओर के चार चतुर्थांश-त्रिभुज और प्रत्येक पूरे विकर्ण से कटे चार आधे आयत।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
एक वर्ग में दोनों विकर्ण तथा दोनों मध्य-रेखाएँ (सम्मुख भुजाओं के मध्यबिंदुओं को जोड़ने वाली) खींची गई हैं। इस आकृति में कितने त्रिभुज हैं ?
- (a)12
- (b)14
- (c)16
- (d)20
उत्तर(c) 16 — चार आधे भाग, विकर्णों से बने चार चतुर्थांश, और प्रत्येक चतुर्थांश के मध्य-रेखा से कटने पर बने आठ सबसे छोटे त्रिभुज।