सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023 में किन सूचकांकों में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई ?
- (a)उपभोक्ता वस्तु और पूंजी वस्तु
- (b)उपभोक्ता वस्तु और बुनियादी ढाँचा/निर्माण वस्तु
- (c)पूंजी वस्तु और बुनियादी ढाँचा/निर्माण वस्तु
- (d)विनिर्माण और उपभोक्ता वस्तु
सही — C, पूंजी वस्तु और बुनियादी ढाँचा/निर्माण वस्तु। आँकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की अपनी विज्ञप्ति में हैं — मार्च 2023 के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के त्वरित अनुमान, जो 12 मई 2023 को प्रकाशित हुए और जिनका विवरण-III 2022-23 की पूरी अप्रैल-से-मार्च अवधि के लिए उपयोग-आधारित वृद्धि देता है। उस पंक्ति को पढ़िए: प्राथमिक वस्तुएँ 7.4 प्रतिशत बढ़ीं, पूँजीगत वस्तुएँ 12.9, मध्यवर्ती वस्तुएँ 3.7, बुनियादी ढाँचा/निर्माण वस्तुएँ 8.0, उपभोक्ता टिकाऊ 0.5 और उपभोक्ता ग़ैर-टिकाऊ 0.5। पूँजीगत वस्तुएँ लगभग तेरह प्रतिशत के साथ बेजोड़ अग्रणी हैं, और विकल्प-सूची में दी गई शेष श्रेणियों में सबसे मज़बूत बुनियादी ढाँचा/निर्माण वस्तुएँ हैं, आठ प्रतिशत पर। प्रश्न को पूरी तरह तय उसी पंक्ति का दूसरा छोर कर देता है। दोनों उपभोक्ता श्रेणियाँ आधा प्रतिशत बढ़ीं — पूरी तालिका के सबसे कमज़ोर आँकड़े — और चार में से तीन विकल्पों में उपभोक्ता वस्तुएँ हैं, इसलिए तीनों एक साथ गिर जाते हैं। विकल्प (d) में एक दूसरा दोष भी ध्यान देने लायक है: विनिर्माण उपयोग-आधारित नहीं, क्षेत्रगत शीर्ष है, और उसी विज्ञप्ति का विवरण-I उसकी अप्रैल-से-मार्च वृद्धि 4.5 प्रतिशत बताता है, जो 5.1 के सामान्य सूचकांक से नीचे और 8.9 की विद्युत से काफ़ी नीचे है। तालिका के पीछे का अर्थशास्त्र ही साथ ले जाने लायक हिस्सा है: 2022-23 वह वर्ष था जिसमें निवेश-माँग, जिसे बड़े हिस्से में सरकारी पूँजीगत व्यय चला रहा था, घरेलू उपभोग-माँग से कहीं आगे दौड़ी, और उपयोग-आधारित वर्गीकरण ठीक इसीलिए है कि यह अंतर दिखाई दे।
- (a)उपभोक्ता वस्तु और पूंजी वस्तु — उपभोक्ता वस्तु और पूंजी वस्तु — आधा सही, और इसी कारण ग़लत विकल्पों में सबसे आकर्षक। पूँजीगत वस्तुएँ सचमुच 12.9 प्रतिशत के साथ तालिका में सबसे आगे थीं। पर उसी अवधि में उपभोक्ता टिकाऊ और उपभोक्ता ग़ैर-टिकाऊ, दोनों 0.5 प्रतिशत बढ़े, जो छहों उपयोग-आधारित श्रेणियों में सबसे कमज़ोर है, इसलिए यह विकल्प सबसे अच्छे प्रदर्शन को सबसे ख़राब के साथ जोड़ देता है। जो भी विकल्प FY2023 के तेज़ी से बढ़ने वालों में उपभोक्ता वस्तुओं को रखे, वह आँकड़ों की दृष्टि से ग़लत है।
- (b)उपभोक्ता वस्तु और बुनियादी ढाँचा/निर्माण वस्तु — उपभोक्ता वस्तु और बुनियादी ढाँचा/निर्माण वस्तु — वही भूल, दूसरे सच्चे प्रदर्शक के साथ की गई। बुनियादी ढाँचा और निर्माण वस्तुएँ सचमुच 8.0 प्रतिशत बढ़ीं, जो मज़बूत आँकड़ा है, पर जोड़ी का उपभोक्ता वाला आधा फिर 0.5 प्रतिशत पर गिर जाता है। जिस अभ्यर्थी को याद है कि बुनियादी ढाँचे ने अच्छा किया और जो मान लेता है कि उपभोग भी उसके पीछे-पीछे चला होगा, वह इसी पर निशान लगाएगा।
- (d)विनिर्माण और उपभोक्ता वस्तु — विनिर्माण और उपभोक्ता वस्तु — दोनों आधों में ग़लत और उसके ऊपर दो अलग-अलग वर्गीकरण मिला देने वाला, जो स्वयं एक संकेत है। विनिर्माण IIP के क्षेत्रगत वर्गीकरण का है, उपयोग-आधारित का नहीं, और 2022-23 के लिए उसकी अप्रैल-से-मार्च वृद्धि 4.5 प्रतिशत थी, जो 5.1 के सामान्य सूचकांक से भी नीचे है। उपभोक्ता वस्तुएँ 0.5 प्रतिशत बढ़ीं। जब विकल्प-सूची बाक़ी सब एक ही तालिका से बनी हो, तो किसी दूसरी तालिका से आई प्रविष्टि प्रायः चारा होती है।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक औद्योगिक उत्पादन का मूल्य नहीं, आयतन मापता है, इसे सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय 2011-12 = 100 के आधार पर संकलित करता है, और वह हर महीने की बारह तारीख़ को लगभग छह सप्ताह के अंतराल के साथ त्वरित अनुमान के रूप में जारी होता है। वह दो वर्गीकरणों में प्रकाशित होता है और उन्हें आपस में गड्डमड्ड कर देना इस विषय की सबसे आम भूल है। क्षेत्रगत वर्गीकरण में तीन शीर्ष हैं, जिनके भार नियत हैं — विनिर्माण 77.63 प्रतिशत, खनन 14.37 और विद्युत 7.99 — और वह इस प्रश्न का उत्तर देता है कि उत्पादन आया कहाँ से। उपयोग-आधारित वर्गीकरण में छह शीर्ष हैं — प्राथमिक वस्तुएँ 34.05 प्रतिशत, मध्यवर्ती वस्तुएँ 17.22, उपभोक्ता ग़ैर-टिकाऊ 15.33, उपभोक्ता टिकाऊ 12.84, बुनियादी ढाँचा तथा निर्माण वस्तुएँ 12.34, और पूँजीगत वस्तुएँ 8.22 — और वह विश्लेषण की दृष्टि से अधिक रोचक इस प्रश्न का उत्तर देता है कि वह उत्पादन था किसलिए। वही दूसरी तालिका निवेश-माँग को, जो पूँजीगत वस्तुओं तथा बुनियादी ढाँचा और निर्माण वस्तुओं में दिखती है, उपभोग-माँग से अलग कर देती है, जो दोनों उपभोक्ता श्रेणियों में दिखती है। छहों में सबसे कम भार पूँजीगत वस्तुओं का है, फिर भी सबसे अधिक ध्यान उसी पर रहता है, क्योंकि महीने-दर-महीने अर्थव्यवस्था में निवेश के साथ क्या हो रहा है, उसका सबसे निकट उपलब्ध सूचक वही है।
एक ही प्रेक्षण इस प्रश्न का उत्तर बिना तालिका याद किए दे देता है। चार में से तीन विकल्पों में उपभोक्ता वस्तुएँ हैं, और 2022-23 में उपभोक्ता वस्तुएँ पूरे सूचकांक का सबसे कमज़ोर हिस्सा थीं — टिकाऊ और ग़ैर-टिकाऊ दोनों आधा प्रतिशत बढ़े, जबकि पूँजीगत वस्तुएँ 12.9। इसलिए यदि आपको उस वर्ष के बारे में केवल एक बात पता हो, कि उपभोग पिछड़ा जबकि निवेश उछला, तो आप एक साथ तीन विकल्प हटाकर चौथे पर पहुँच सकते हैं। और वह एक तथ्य उस काल की हर टिप्पणी में FY2023 का मानक वर्णन भी है, इसलिए वह कोई दुर्लभ जानकारी नहीं। एक दूसरी, विशुद्ध रूप से संरचनात्मक जाँच इसकी पुष्टि करती है: विकल्प-सूची उपयोग-आधारित वर्गीकरण से ली गई है, और विकल्प (d) उसमें 'विनिर्माण' घुसा देता है, जो क्षेत्रगत वर्गीकरण का है। दूसरी तालिका से आयातित प्रविष्टि लगभग हमेशा चारा होती है। इस उत्तर की ईमानदार सीमाओं के बारे में: प्रश्न पूछता है कि किन सूचकांकों में 'महत्वपूर्ण' वृद्धि हुई, पर उस शब्द को परिभाषित नहीं करता, और विज्ञप्ति स्वयं किसी को महत्वपूर्ण नहीं कहती — क्रम वृद्धि वाली पंक्ति से पढ़कर आँकना पड़ता है। यही अस्पष्टता वह कारण है कि हमारी दो स्वतंत्र व्युत्पत्तियों ने इस प्रश्न को उच्च नहीं, मध्यम विश्वास पर दर्ज किया, यद्यपि तालिका स्वयं साफ़-साफ़ एक ही दिशा में इशारा करती है।
- मार्च 2023 के IIP के त्वरित अनुमान, जो NSO ने 12 मई 2023 को जारी किए, विवरण-III (उपयोग-आधारित), 2022-23 की अप्रैल-से-मार्च वृद्धि: प्राथमिक वस्तुएँ 7.4 प्रतिशत, पूँजीगत वस्तुएँ 12.9, मध्यवर्ती वस्तुएँ 3.7, बुनियादी ढाँचा/निर्माण वस्तुएँ 8.0, उपभोक्ता टिकाऊ 0.5 और उपभोक्ता ग़ैर-टिकाऊ 0.5।
- उसी विज्ञप्ति का विवरण-I उसी अवधि की क्षेत्रगत वृद्धि देता है: खनन 5.8 प्रतिशत, विनिर्माण 4.5, विद्युत 8.9, और सामान्य सूचकांक 5.1।
- IIP सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा 2011-12 = 100 के आधार पर संकलित होता है, और त्वरित अनुमान हर महीने की बारह तारीख़ को लगभग छह सप्ताह के अंतराल के साथ जारी होते हैं।
- सूचकांक में क्षेत्रगत भार: विनिर्माण 77.63 प्रतिशत, खनन 14.37 और विद्युत 7.99।
- उपयोग-आधारित भार: प्राथमिक वस्तुएँ 34.05 प्रतिशत, मध्यवर्ती वस्तुएँ 17.22, उपभोक्ता ग़ैर-टिकाऊ 15.33, उपभोक्ता टिकाऊ 12.84, बुनियादी ढाँचा तथा निर्माण वस्तुएँ 12.34, और पूँजीगत वस्तुएँ 8.22।
- छहों उपयोग-आधारित श्रेणियों में सबसे कम भार पूँजीगत वस्तुओं का है पर उन पर नज़र सबसे अधिक रहती है, क्योंकि अर्थव्यवस्था में निवेश-माँग के लिए मासिक रूप से उपलब्ध सबसे निकट सूचक वही है।
दोनों रेखांकित पंक्तियाँ ही उत्तर हैं, और नीचे की दोनों पंक्तियाँ उसे निश्चित बना देती हैं: उपभोक्ता वस्तुएँ आधा प्रतिशत बढ़ीं, इसलिए उन्हें रखने वाला हर विकल्प गिर जाता है। तुलना के लिए, क्षेत्रगत तालिका उसी अवधि में विनिर्माण को 4.5 प्रतिशत पर रखती है।
- यह मान लेना कि अर्थव्यवस्था बढ़ी तो उपभोग भी बढ़ा होगा। 2022-23 में उपभोक्ता टिकाऊ और उपभोक्ता ग़ैर-टिकाऊ दोनों केवल 0.5 प्रतिशत बढ़े, जो उपयोग-आधारित तालिका के सबसे कमज़ोर आँकड़े हैं।
- दोनों वर्गीकरणों को मिला देना। विनिर्माण क्षेत्रगत शीर्ष है और उसकी तुलना पूँजीगत वस्तुओं जैसी उपयोग-आधारित श्रेणियों से एक-सी नहीं की जा सकती।
- सबसे बड़े भार को सबसे बड़ी वृद्धि पढ़ लेना। प्राथमिक वस्तुएँ सूचकांक का एक-तिहाई भार ढोती हैं पर 7.4 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि पूँजीगत वस्तुओं का भार केवल 8.22 प्रतिशत है और वे 12.9 प्रतिशत बढ़ीं।
BPSC सांख्यिकीय विज्ञप्तियों को उनके सटीक अंकों के बजाय उनके मुख्य ढर्रे से पूछता है — कौन-सी श्रेणियाँ चढ़ीं, कौन-सी गिरीं — और अपेक्षा करता है कि अभ्यर्थी ने उस वर्ष की आर्थिक टिप्पणियाँ इतने ध्यान से पढ़ी हों कि आँकड़ों की बनावट पता हो, और ग़लत विकल्पों में ऐसे जोड़े भर देता है जो एक सच्चे प्रदर्शक को एक कमज़ोर के साथ मिला देते हैं। UPSC उसके बदले उन्हीं सूचकांकों का स्थापत्य पूछता है: आठ मूल उद्योग क्या हैं और IIP के भीतर उनका भार कितना है, या कौन-सी संस्था कौन-सा मूल्य सूचकांक प्रकाशित करती है — इसलिए उसके लिए मंत्रालय-और-कार्यप्रणाली वाला पक्ष उतना ही मायने रखता है जितना BPSC के लिए उस वर्ष के आँकड़े।
भारत में, समग्र औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में आठ मूल उद्योगों के सूचकांकों का संयुक्त भार 37·90% है। निम्नलिखित में से कौन-से उन आठ मूल उद्योगों में हैं? 1. सीमेंट 2. उर्वरक 3. प्राकृतिक गैस 4. रिफ़ाइनरी उत्पाद 5. वस्त्र नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a) केवल 1 और 5
- (b) केवल 2, 3 और 4
- (c) केवल 1, 2, 3 और 4
- (d) 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर(c) केवल 1, 2, 3 और 4
वही सूचकांक अपनी भीतरी बनावट के रास्ते जाँचा गया। यह जानना कि आठ मूल उद्योग IIP के भीतर लगभग 38 प्रतिशत के संयुक्त भार के साथ बैठते हैं, उसी तरह का ज्ञान है जैसे यह जानना कि पूँजीगत वस्तुएँ उपयोग-आधारित भार का केवल 8.22 प्रतिशत ढोती हैं — और दोनों समझा देते हैं कि किसी श्रेणी की वृद्धि-दर और मुख्य आँकड़े पर उसका प्रभाव दो अलग चीज़ें हैं।
निम्नलिखित में से कौन 'औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या' निकालता है?
- (a) भारतीय रिज़र्व बैंक
- (b) आर्थिक कार्य विभाग
- (c) श्रम ब्यूरो
- (d) कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग
उत्तर(c) श्रम ब्यूरो
कौन-सी संस्था कौन-सा सूचकांक प्रकाशित करती है — वही प्रश्न जिसे UPSC किसी वर्ष के आँकड़ों से अधिक पसंद करता है। IIP सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय से आता है और औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक श्रम ब्यूरो से — उत्तरदायित्वों का यही बँटवारा परीक्षक किसी भी अलग-अलग आँकड़े से कहीं अधिक बार जाँचते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-से कारक भारतीय अर्थव्यवस्था में स्टैगफ़्लेशन में योगदान दे सकते हैं? 1. बढ़े हुए सरकारी व्यय के कारण ऊँचे मुद्रास्फीतिकारी दबाव 2. औद्योगिक उत्पादन में गिरावट और सुस्त आर्थिक वृद्धि 3. कुल माँग और उपभोक्ता व्यय में कमी 4. घरेलू मुद्रा के मूल्य में वृद्धि, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता घटे नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1, 3 और 4
- (d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर(a) केवल 1 और 2
69वीं ने औद्योगिक उत्पादन को अंकों की तालिका के बजाय एक आर्थिक संकेत के रूप में बरता और औद्योगिक उत्पादन में गिरावट तथा सुस्त वृद्धि को उन दशाओं में गिनाया जो स्टैगफ़्लेशन पैदा कर सकती हैं। 70वीं के प्रश्न के साथ पढ़िए तो दिखता है कि BPSC अभ्यर्थियों से यह भी अपेक्षा करता है कि उन्हें पता हो कि किसी दिए गए वर्ष में IIP ने क्या मापा, और यह भी कि उसमें आई हलचल का अर्थव्यवस्था के लिए क्या अर्थ है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
भारत में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का संकलन और प्रकाशन कौन करता है
- (a)भारतीय रिज़र्व बैंक
- (b)सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय
- (c)वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का आर्थिक सलाहकार कार्यालय
- (d)श्रम ब्यूरो
उत्तर(b) सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, 2011-12 = 100 के आधार पर, जिसके त्वरित अनुमान हर महीने की बारह तारीख़ को जारी होते हैं। आर्थिक सलाहकार कार्यालय थोक मूल्य सूचकांक संकलित करता है और श्रम ब्यूरो औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के उपयोग-आधारित वर्गीकरण में सबसे अधिक भार किस श्रेणी का है ?
- (a)पूँजीगत वस्तुएँ
- (b)प्राथमिक वस्तुएँ
- (c)उपभोक्ता ग़ैर-टिकाऊ
- (d)बुनियादी ढाँचा/निर्माण वस्तुएँ
उत्तर(b) प्राथमिक वस्तुएँ, लगभग 34 प्रतिशत पर। छहों में सबसे कम भार पूँजीगत वस्तुओं का है, लगभग 8.2 प्रतिशत, यद्यपि निवेश के सूचक के रूप में सबसे अधिक नज़र उसी श्रेणी पर रहती है।