निम्नलिखित में से कौन-सा दिये गये तार का प्रतिरोध है ?
- (a)R = I/2V
- (b)R = IV
- (c)R = I/V
- (d)R = V/I
सही — (d) R = V/I। यह ओम के नियम का ही पुनर्विन्यास है। नियम कहता है कि स्थिर ताप पर रखे किसी चालक से बहने वाली धारा उसके सिरों के बीच के विभवांतर के समानुपाती होती है, यानी V = IR, इसलिए प्रतिरोध इन दोनों का अनुपात है: R = V/I। इस अनुपात को रटने वाले सूत्र के बजाय परिभाषा की तरह पढ़िए — प्रतिरोध यह है कि आप जितने ऐम्पियर धकेलना चाहते हैं उसके लिए कितने वोल्ट लगाने पड़ेंगे, और इसकी एस० आई० इकाई ठीक यही कहती है: एक ओम यानी एक वोल्ट प्रति ऐम्पियर। प्रश्न V और I की परिभाषाएँ नहीं छापता, इसलिए ये संकेत अपने प्रचलित अर्थ — विभवांतर और धारा — ही रखते हैं, और विकल्प स्वयं इस पाठ को पक्का कर देते हैं; उसके बाद विमीय जाँच बिना किसी स्मरण के काम पूरा कर देती है। वोल्ट को ऐम्पियर से भाग देने पर ओम मिलता है। ऐम्पियर को वोल्ट से भाग देने पर सीमेंस — वह चालकता है, प्रतिरोध का व्युत्क्रम, यानी विकल्प (c)। वोल्ट को ऐम्पियर से गुणा करने पर वॉट — वह विद्युत् शक्ति है, यानी विकल्प (b), बस उलटे क्रम में लिखा हुआ। और विकल्प (a) के अनुपात के भीतर एक नंगा अंक बैठा है, इसलिए वह कोई भौतिक राशि हो ही नहीं सकता। इसके साथ यह भी थामे रखिए: R = V/I बताता है कि प्रतिरोध मापा कैसे जाता है, यह नहीं कि उसे तय क्या करता है। उसे तय तार स्वयं करता है, R = ρL/A के ज़रिये — प्रतिरोधकता गुणा लंबाई भाग अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल — और इसीलिए एक ही पदार्थ का लंबा तार अधिक प्रतिरोध करता है और मोटा तार कम।
- (a)R = I/2V — यह कोई भौतिक संबंध है ही नहीं। धारा और वोल्टता के अनुपात के भीतर 2 का नंगा गुणक घुसा देने से ऐसा कुछ नहीं बनता जिसकी इकाइयाँ प्रतिरोध की हों, और परिपथों के किसी नियम में यह आता भी नहीं। यह केवल भराव है, ताकि विकल्प-सूची में तीन असली भ्रमों के बजाय चार प्रविष्टियाँ हो जाएँ।
- (b)R = IV — धारा गुणा वोल्टता विद्युत् शक्ति है, P = VI, जिसे वॉट में मापा जाता है — वही राशि जो किसी उपकरण की रेटिंग प्लेट पर लिखी होती है, उसका प्रतिरोध नहीं। जिस अभ्यर्थी ने V, I और R को तीन अक्षरों का गुच्छा मानकर सीखा है और अनुपात के बजाय गुणनफल की ओर हाथ बढ़ाता है, वह यहीं आ गिरता है।
- (c)R = I/V — यह ओम का नियम उलटा कर देना है। धारा को वोल्टता से भाग देने पर चालकता मिलती है, G = 1/R, जिसे सीमेंस में मापा जाता है — एक वास्तविक और उपयोगी राशि, पर जो प्रश्न में माँगी गई राशि का व्युत्क्रम है। यह सबसे लुभावना गलत विकल्प है, क्योंकि इसमें दोनों सही संकेत हैं, बस उलटे क्रम में।
ओम का नियम, जिसे गेओर्ग सिमोन ओम ने 1827 में प्रकाशित किया, यह आनुभविक कथन है कि किसी चालक से बहने वाली धारा उसके सिरों के विभवांतर के सीधे समानुपाती होती है, बशर्ते उसकी भौतिक परिस्थितियाँ — और सबसे बढ़कर उसका ताप — स्थिर रहें। V = IR के रूप में लिखने पर समानुपात का स्थिरांक R ही प्रतिरोध है, और उसकी एस० आई० इकाई ओम को एक वोल्ट प्रति ऐम्पियर के रूप में परिभाषित किया गया है। दो और संबंध चित्र पूरा करते हैं और इसी प्रश्न के भटकाने वाले विकल्प देते हैं: चालकता G = I/V = 1/R, जिसे सीमेंस में मापते हैं, और विद्युत् शक्ति P = VI = I²R = V²/R, जिसे वॉट में। जो पदार्थ इस समानुपात का पालन करते हैं उन्हें ओमीय कहते हैं — जैसे स्थिर ताप पर धातुएँ — जबकि डायोड, ट्रांजिस्टर, विद्युत्-अपघट्य और वह लैंप-तंतु जिसका ताप धारा के साथ चढ़ता है, अनओमीय हैं; उनके लिए V/I का अनुपात हर क्षण प्रतिरोध तो रहता है, पर स्थिरांक नहीं रहता। अलग से, किसी दिए गए तार का प्रतिरोध R = ρL/A से तय होता है, इसलिए वह लंबाई के साथ बढ़ता है, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के साथ घटता है, और पदार्थ पर उसकी प्रतिरोधकता ρ के ज़रिये निर्भर करता है।
यह ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर बिना कुछ याद किए दिया जा सकता है, बशर्ते आप इकाइयाँ जाँच लें। प्रतिरोध ओम में मापा जाता है, और ओम का अर्थ है वोल्ट प्रति ऐम्पियर — इसलिए उत्तर वोल्टता बटा धारा ही होना चाहिए, और केवल एक विकल्प ऐसा है। यही एक कदम तीनों भटकाने वाले विकल्प निपटा देता है और परीक्षा के दबाव में यह याद करने की कोशिश से कहीं भरोसेमंद है कि V = IR किस ओर पुनर्विन्यस्त होता है। यदि भौतिक तर्क अधिक भाता हो तो व्यवहार से सोचिए: अधिक प्रतिरोध वाला तार किसी दी गई वोल्टता पर केवल थोड़ी धारा जाने देता है, इसलिए धारा घटने पर प्रतिरोध बढ़ना चाहिए, यानी धारा को हर में बैठना ही होगा। विकल्प (c) इस कसौटी पर तुरंत विफल हो जाता है — उससे प्रतिरोध धारा के साथ बढ़ने लगता, यानी लघु परिपथ, जो विशाल धारा खींचता है, उच्च-प्रतिरोध वाला मार्ग होता, जबकि सच इसका उल्टा है। यही तर्क आगे भी काम आता है: चूँकि I = V/R है, प्रतिरोध आधा कर देने पर धारा दोगुनी हो जाती है, और लघु परिपथ ठीक इसीलिए ख़तरनाक है कि लगभग शून्य प्रतिरोध लगभग असीमित धारा और उसके साथ आने वाली ऊष्मा पैदा कर देता है।
- ओम का नियम: V = IR, इसलिए R = V/I; प्रतिरोध की एस० आई० इकाई ओम (Ω) को एक वोल्ट प्रति ऐम्पियर के रूप में परिभाषित किया गया है
- चालकता प्रतिरोध का व्युत्क्रम है, G = I/V = 1/R, और इसकी एस० आई० इकाई सीमेंस (S) है
- विद्युत् शक्ति P = VI = I²R = V²/R है, जिसे वॉट में मापा जाता है — यह वोल्टता और धारा का गुणनफल है, उनका अनुपात नहीं
- तार का प्रतिरोध R = ρL/A से मिलता है: यह लंबाई के साथ बढ़ता है, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के साथ घटता है, और पदार्थ की प्रतिरोधकता ρ पर निर्भर करता है
- ओम का नियम केवल स्थिर ताप पर और केवल ओमीय चालकों के लिए लागू होता है; डायोड, विद्युत्-अपघट्य और गर्म लैंप-तंतु अनओमीय हैं, इसलिए उनका V–I ग्राफ़ सरल रेखा नहीं होता
- गेओर्ग सिमोन ओम ने यह संबंध 1827 में प्रकाशित किया; उन्हीं के नाम पर ओम को प्रतिरोध की एस० आई० इकाई के रूप में अपनाया गया
ओम का अर्थ है वोल्ट प्रति ऐम्पियर। यह अकेली परिभाषा उत्तर पहचान लेती है और बीजगणित याद किए बिना तीनों भटकाने वाले विकल्प हटा देती है।
- अनुपात उलटकर I/V चुन लेना, जो सीमेंस में चालकता है, ओम में प्रतिरोध नहीं
- गुणनफल VI को, जो वॉट में शक्ति है, अनुपात V/I से गड्डमड्ड कर देना
- यह भूल जाना कि ओम का नियम स्थिर ताप मानकर चलता है; तंतु-लैंप का प्रतिरोध गर्म होने पर बढ़ता है, इसलिए उसका V–I ग्राफ़ मुड़ जाता है
बी० पी० एस० सी० विद्यालयी स्तर की भौतिकी को सपाट परिभाषा या सूत्र के रूप में पूछता है, साथ में चार छोटे सांकेतिक विकल्प, और वह बिजली वाला गुच्छा — ओम का नियम, फ़्यूज़, लघु परिपथ, प्रत्यावर्ती धारा का उत्पादन — संस्करण-दर-संस्करण दोहराता है, इसलिए मूल बातें पक्की हों तो ये अंक भरोसेमंद हैं। यू० पी० एस० सी० वही भौतिकी संख्यात्मक या कथन-कारण के रूप में गढ़ता है: दो तार जिनकी लंबाई, व्यास और प्रतिरोधकता किसी दिए अनुपात में हों, या यह दावा कि धारा बहने पर धातु का तार गर्म क्यों होता है — जिसके लिए केवल सूत्र नहीं, क्रियाविधि चाहिए।
दो तारों की लंबाई, व्यास और प्रतिरोधकता, तीनों 1 : 2 के अनुपात में हैं। यदि पतले तार का प्रतिरोध 10 ओम है, तो मोटे तार का प्रतिरोध है
- (a) 10 ओम
- (b) 5 ओम
- (c) 20 ओम
- (d) 40 ओम
उत्तर(a) 10 ओम
वही राशि — तार का प्रतिरोध — एक कदम आगे ले जाई गई, परिभाषक अनुपात R = V/I से उस बात तक जो उसे भौतिक रूप से तय करती है, R = ρL/A।
मानव शरीर (शुष्क) के विद्युत् प्रतिरोध का परिमाण-क्रम क्या है?
- (a) 10² ओम
- (b) 10⁴ ओम
- (c) 10⁶ ओम
- (d) 10⁸ ओम
उत्तर(b) 10⁴ ओम
फिर वही विद्युत् प्रतिरोध, पर इस बार सूत्र के बजाय ओम में परिमाण के रूप में — और यही कारण भी कि सूखी त्वचा गीली से सुरक्षित है: V/I का अनुपात ऊँचा होने पर उसी वोल्टता पर कम धारा भीतर जाती है।
लघु परिपथ में, परिपथ में विद्युत् धारा का मान :
- (a) बहुत कम
- (b) नहीं बदलता
- (c) बहुत अधिक बढ़ जाता है
- (d) लगातार बदलता रहता है
उत्तर(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है
अगले प्रश्नपत्र पर वही संबंध लागू: लघु परिपथ लगभग शून्य प्रतिरोध वाला मार्ग है, और चूँकि I = V/R है, धारा बहुत बड़ी हो जाती है — यही ओम का नियम दूसरी ओर से पढ़ा गया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
विद्युत् चालकता की एस० आई० इकाई है
- (a)ओम
- (b)सीमेंस
- (c)वॉट
- (d)कूलॉम
उत्तर(b) सीमेंस — चालकता प्रतिरोध का व्युत्क्रम है, G = I/V = 1/R, इसलिए उसकी इकाई भी ओम की व्युत्क्रम है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
यदि किसी तार की लंबाई दोगुनी कर दी जाए और उसकी अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल आधा कर दिया जाए, तो उसका प्रतिरोध हो जाएगा
- (a)आधा
- (b)अपरिवर्तित
- (c)दो गुना
- (d)चार गुना
उत्तर(d) चार गुना — R = ρL/A से, L दोगुना करने पर R दोगुना होता है और A आधा करने पर फिर दोगुना, इसलिए प्रतिरोध चार गुना हो जाता है।