थाडिंग्युट महोत्सव का तीन-दिवसीय उत्सव किस देश में मनाया जाता है?
- (a)चिली
- (b)नेपाल
- (c)जर्मनी
- (d)म्यांमार
सही उत्तर — (d) म्यांमार। थाडिंग्युट बर्मी चंद्र पंचांग के सातवें महीने का नाम है, और थाडिंग्युट महोत्सव — म्यांमार का दीप-महोत्सव — उसी महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो अधिकांश वर्षों में अक्तूबर में पड़ती है। उसके तीन दिन उसी पूर्णिमा से तय होते हैं: पूर्णिमा से एक दिन पहले, पूर्णिमा का दिन, और उसके अगले दिन — ठीक वही 'तीन-दिवसीय उत्सव' जिसका वर्णन प्रश्न करता है। यह उत्सव वस्स के अंत का सूचक है, अर्थात् उस तीन महीने के बौद्ध वर्षावास का, जो जुलाई में वासो की पूर्णिमा से आरंभ होता है और जिसके दौरान भिक्षु एक ही विहार में रहते हैं और गृहस्थों का आचरण भी सबसे कठोर रहता है। धार्मिक रूप से यह बुद्ध का मानव-लोक में स्वागत करता है, जो वे तीन मास तावतिंस स्वर्ग में अपनी माता माया को अभिधम्म का उपदेश देकर लौटते हैं — माया का देहांत उनके जन्म के सात दिन बाद हो गया था और वहीं उनका पुनर्जन्म हुआ था; परंपरा के अनुसार उस स्वर्ग के अधिपति सक्र ने अवतरण के लिए तीन सीढ़ियाँ बनवाई थीं, और थाडिंग्युट पर बर्मी गलियों, घरों तथा पगोडाओं पर सजाए जाने वाले दीये, मोमबत्तियाँ और रंगीन बल्ब उन्हीं तीन सीढ़ियों के प्रतीक हैं। नववर्ष के जल-उत्सव थिंज्यान के बाद यह म्यांमार का दूसरा सबसे लोकप्रिय उत्सव है। इसकी रीतियाँ स्पष्ट रूप से बर्मी हैं: पगोडाओं और विहारों में चढ़ावा और वंदना, पूर्णिमा के दिन कुछ लोगों का उपवास, गलियों में ज़त प्वे संगीत-नाटक और खान-पान के ठेले, तथा गडॉ — जिसमें युवा माता-पिता, शिक्षकों और बड़ों को आदर देते हैं, वर्ष भर की भूलों के लिए क्षमा माँगते हैं और बदले में आशीर्वाद पाते हैं। अलग-अलग नगर अपनी जल-रीतियाँ जोड़ते हैं — दावेई में फूलों, तेल के दीयों और अगरबत्तियों से भरे भिक्षापात्र शिन उपगुत्त के नाम समुद्र में बहाए जाते हैं, और श्वेज्यिन में रंगीन तेल-लालटेनें श्वेज्यिन नदी में प्रवाहित की जाती हैं, जिस प्रथा का सूत्र कोनबौंग काल तक जाता है और जिसे स्थानीय रूप से 1851 का बताया जाता है।
- (a)चिली — चिली दक्षिण अमेरिकी देश है जहाँ रोमन कैथोलिक बहुसंख्यक हैं और जिसकी अपनी कोई थेरवाद बौद्ध परंपरा नहीं है, इसलिए बौद्ध वर्षावास के अंत वाले उत्सव का वहाँ कोई घर नहीं। उसका अपना बड़ा राष्ट्रीय समारोह सितंबर में होने वाला फ़्येस्तास पात्रियास है, जो स्पेन से स्वतंत्रता की दिशा में उठाए गए पहले कदमों का स्मरण करता है। चिली के धार्मिक या नागरिक जीवन में कुछ भी किसी बर्मी चंद्र मास से तय नहीं होता।
- (b)नेपाल — यही रचा हुआ फंदा है और अकेला ऐसा भ्रामक विकल्प जिसमें तैयार अभ्यर्थी भी फँस सकता है, क्योंकि नेपाल सचमुच बौद्ध धर्म से जुड़ा देश है — बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी नेपाल में है — और नेपाल में सचमुच कई दिनों का दीप-उत्सव, तिहार, मनाया जाता है। पर तिहार पाँच दिन चलता है, तीन नहीं, और वह हिंदू पंचांग का है; नेपाल अपने उत्सव विक्रम संवत के महीनों से तय करता है, जिनमें थाडिंग्युट नाम का कोई महीना है ही नहीं। नाम स्वयं बर्मी है और वही बात तय कर देता है।
- (c)जर्मनी — जर्मनी ईसाई और धर्मनिरपेक्ष परंपराओं वाला यूरोपीय देश है और वहाँ थेरवाद बौद्ध पंचांग जैसी कोई देशज व्यवस्था नहीं है। वह विकल्प-समूह में इसलिए है कि उसके यहाँ अक्तूबर का एक प्रसिद्ध उत्सव है — म्यूनिख का ऑक्टोबरफ़ेस्ट — और थाडिंग्युट भी प्रायः अक्तूबर में ही पड़ता है, इसलिए केवल महीने से मिलान करने वाला अभ्यर्थी उधर खिंच सकता है। ऑक्टोबरफ़ेस्ट बवेरिया का लोक और बीयर उत्सव है, जिसमें कोई धार्मिक तत्त्व नहीं और किसी पूर्णिमा से कोई नियत संबंध भी नहीं।
म्यांमार थेरवाद बौद्ध देश है जिसका सार्वजनिक पंचांग बर्मी चंद्र-सौर कैलेंडर पर चलता है, जिसमें तागु, कासोन, वासो, थाडिंग्युट और तज़ौंगमोन जैसे महीने हैं; अधिकांश राष्ट्रीय उत्सव इन्हीं में से किसी महीने की पूर्णिमा से बँधे होते हैं। धार्मिक वर्ष की लय वस्स, अर्थात् वर्षावास, तय करता है: वह वासो की पूर्णिमा को खुलता है, तीन महीने चलता है जिनमें भिक्षु एक ही स्थान पर रहते हैं, और थाडिंग्युट की पूर्णिमा को बंद होता है। यही घटना पूरे थेरवाद जगत में अलग-अलग नामों से मनाई जाती है — श्रीलंका में वप पूर्णिमा पोया, थाईलैंड में वान ओक फ़ानसा, लाओस में बुन सुआंग हुआ — और तिब्बत तथा भूटान में उसका महायान-वज्रयान समकक्ष ल्हाबाब दुचेन है। म्यांमार इसके बाद अगले महीने दूसरा दीप-उत्सव तज़ौंगदाइंग मनाता है। यह जान लेना कि उत्सव के नाम में ही बर्मी महीने का नाम बैठा है, पूरा प्रश्न है। सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र के लिए उत्सव के साथ-साथ देश भी पकड़े रखना चाहिए: म्यांमार भारत का पूर्वी पड़ोसी है, जिसकी थल सीमा चार पूर्वोत्तर राज्यों — अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिज़ोरम — से लगती है, और बंगाल की खाड़ी में समुद्री सीमा भी साझा है; उसकी सीमाएँ बांग्लादेश, चीन, लाओस और थाईलैंड से भी लगती हैं। उसकी प्रशासनिक राजधानी ने पी ता है, जो 2000 के दशक के मध्य में यंगून से स्थानांतरित की गई, और यंगून आज भी सबसे बड़ा नगर है तथा वहीं श्वेडागोन पगोडा है; बागान का मंदिर-मैदान उसका सबसे प्रसिद्ध बौद्ध भूदृश्य है। परीक्षा में भारत–म्यांमार का लगभग हर प्रश्न तीन में से किसी एक पाए पर टिका होता है: यह सीमा और उससे जुड़े उग्रवाद तथा व्यापार के आयाम, उसे पार करने वाली संपर्क परियोजनाएँ, और दोनों देशों की साझा बौद्ध विरासत।
उत्तर शब्द के भीतर ही है, और यही आगे काम आने वाली सीख है। इस किस्म के उत्सव-प्रश्न शायद ही कभी उत्सव की स्मृति परखते हों; वे यह परखते हैं कि आप पहचान सकते हैं या नहीं कि नाम किस भाषा से आया है। 'थाडिंग्युट' एक बर्मी महीना है, थिंज्यान, तज़ौंगदाइंग और वासो के उसी कुल का, और विकल्पों में दिए शेष तीनों देशों में से कोई वह पंचांग काम में नहीं लेता। इसे दो चालों में साधिए। पहली, धार्मिक छलनी: प्रश्न किसी उत्सव का वर्णन करता है, और चिली, नेपाल, जर्मनी तथा म्यांमार में से केवल दो का किसी भी प्रकार का बौद्ध दावा है — इसलिए चिली और जर्मनी तुरंत बाहर हो जाते हैं, चाहे नाम का अर्थ आपके लिए कुछ भी न हो। दूसरी, पंचांग की छलनी: नेपाल और म्यांमार में से नेपाल हिंदू-बहुल है और अपने उत्सव विक्रम संवत के महीनों (कार्तिक, मंसिर) से तय करता है, और उसका दीप-उत्सव तिहार पाँच दिन का है; म्यांमार अपने उत्सव बर्मी चंद्र महीनों से तय करता है, और थाडिंग्युट उन्हीं में से एक है। अतः भेद करने वाला अकेला तथ्य यह है कि थाडिंग्युट महीने का नाम है, न कोई देवता, न स्थान, न कोई अनुष्ठान — और यही उत्सव के बारे में कुछ भी जाने बिना देश तय कर देता है।
- थाडिंग्युट बर्मी पंचांग का सातवाँ महीना है; थाडिंग्युट महोत्सव उसकी पूर्णिमा को, प्रायः अक्तूबर में, मनाया जाता है और कम से कम तीन दिन चलता है — पूर्णिमा से एक दिन पहले, पूर्णिमा का दिन और उसके अगले दिन।
- यह वस्स के अंत का सूचक है, अर्थात् उस तीन महीने के बौद्ध वर्षावास का जो वासो की पूर्णिमा से आरंभ होता है, और तावतिंस स्वर्ग से बुद्ध के अवतरण का स्वागत करता है, जहाँ उन्होंने अपनी माता माया को अभिधम्म का उपदेश दिया था; दीपक उस अवतरण के लिए बनी तीन सीढ़ियों के प्रतीक हैं।
- नववर्ष के जल-उत्सव थिंज्यान के बाद यह म्यांमार का दूसरा सबसे लोकप्रिय उत्सव है, और इसमें रोशनी से जगमगाती गलियाँ तथा पगोडा, भिक्षुओं को चढ़ावा, पूर्णिमा के दिन कुछ लोगों का उपवास, तथा गडॉ — माता-पिता, शिक्षकों और बड़ों को आदर देना और उनसे क्षमा माँगना — शामिल हैं।
- वर्षावास के अंत की उसी पूर्णिमा को श्रीलंका में वप पूर्णिमा पोया, थाईलैंड में वान ओक फ़ानसा, लाओस में बुन सुआंग हुआ तथा तिब्बत और भूटान में ल्हाबाब दुचेन के रूप में मनाया जाता है — एक ही बौद्ध घटना, चार नाम।
- यह उत्सव जिस अवतरण का स्मरण करता है, वह परंपरा के अनुसार भारत में उत्तर प्रदेश के फ़र्रुख़ाबाद ज़िले के संकिसा में हुआ माना जाता है — बौद्ध धर्म के आठ महान तीर्थस्थलों में से एक, जहाँ अशोक के स्तंभ का हाथी-शीर्ष आज भी है।
- बर्मी बौद्ध धर्म से बिहार का अपना संबंध ठोस है: बर्मी शासकों ने बोधगया के महाबोधि मंदिर परिसर में 13वीं शताब्दी में और फिर 19वीं शताब्दी में जीर्णोद्धार कराया, और उससे भी सदियों पहले राजा क्यानसित्था ने उस मंदिर के लिए पहला बर्मी मिशन भेजा था।
- उत्सव के स्थानीय रूप: दावेई में फूलों, तेल के दीयों और अगरबत्तियों से भरे भिक्षापात्र शिन उपगुत्त के नाम समुद्र में बहाए जाते हैं; श्वेज्यिन में रंगीन तेल-लालटेनें श्वेज्यिन नदी में प्रवाहित की जाती हैं, जो कोनबौंग कालीन परंपरा है और स्थानीय रूप से 1851 की मानी जाती है।
- म्यांमार की थल सीमा भारत के चार राज्यों — अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिज़ोरम — से तथा बांग्लादेश, चीन, लाओस और थाईलैंड से लगती है; उसकी राजधानी ने पी ता है और सबसे बड़ा नगर यंगून, जहाँ श्वेडागोन पगोडा खड़ा है।

- नेपाल को इसलिए चुन लेना कि वह बुद्ध की जन्मभूमि है — बौद्ध संबंध सच्चा है, पर पंचांग और उत्सव का नाम बर्मी हैं
- महीने से मिलान कर बैठना: अक्तूबर के प्रसिद्ध उत्सव कई देशों में होते हैं, और ऑक्टोबरफ़ेस्ट तो कोई धार्मिक अनुष्ठान है ही नहीं
- यह मान लेना कि 'दीपों का उत्सव' दीवाली या तिहार ही होगा — थाडिंग्युट और तज़ौंगदाइंग म्यांमार के अपने दीप-उत्सव हैं, जिनके बीच एक महीने का अंतर है
BPSC विदेशी उत्सवों को एक पंक्ति के देश-मिलान स्मरण के रूप में पूछता है, प्रायः इसलिए कि वह उत्सव उसी वर्ष समाचारों में रहा हो, और प्रश्न में दी संख्या — 'तीन-दिवसीय' — एक चुपचाप दिया गया अतिरिक्त संकेत बनी रहती है। UPSC किसी विदेशी उत्सव का नाम लगभग कभी नहीं लेता; इस क्षेत्र में घुसने पर वह युग्म-प्रारूप काम में लेता है, जिसमें किसी समुदाय या परंपरा को किसी देश या राज्य से मिलाना होता है और यह पूछा जाता है कि कितने युग्म सही हैं — कौशल वही है, पर आधी-अधूरी स्मृति की सज़ा अधिक भारी है।
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: समाचारों में कभी-कभी उल्लिखित समुदाय — किसके मामलों में 1. कुर्द — बांग्लादेश 2. मधेसी — नेपाल 3. रोहिंग्या — म्यांमार ऊपर दिए गए युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
- (a) 1 और 2
- (b) केवल 2
- (c) 2 और 3
- (d) केवल 3
उत्तर(c) 2 और 3
किसी अपरिचित नाम को सही देश से जोड़ने का वही कौशल, और वह उन्हीं दो दावेदारों — नेपाल और म्यांमार — को काम में लेता है जिनके बीच यह BPSC प्रश्न चुनाव करवाता है।
चपचार कुट किस राज्य में मनाया जाने वाला उत्सव है
- (a) अरुणाचल प्रदेश
- (b) असम
- (c) मिज़ोरम
- (d) सिक्किम
उत्तर(c) मिज़ोरम
बिलकुल वही एक-पंक्ति प्रारूप — एक उत्सव का नाम और चार स्थान — और हल भी उसी तरह होता है, यह पहचानकर कि नाम किस भाषा और समुदाय का है, न कि उत्सव को याद करके।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
म्यांमार का थाडिंग्युट महोत्सव किसके समाप्त होने का सूचक है?
- (a)थिंज्यान, बर्मी नववर्ष
- (b)वस्स, तीन महीने का बौद्ध वर्षावास
- (c)तज़ौंगदाइंग गुब्बारा उत्सव
- (d)कठिन चीवर-दान मास
उत्तर(b) वस्स, तीन महीने का बौद्ध वर्षावास — वह वासो की पूर्णिमा को आरंभ होता है और थाडिंग्युट की पूर्णिमा को समाप्त होता है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
अपनी माता को उपदेश देने के बाद बुद्ध का स्वर्ग से अवतरण — वही घटना जिसे म्यांमार का थाडिंग्युट मनाता है — परंपरा के अनुसार भारत में किस स्थल पर हुआ माना जाता है?
- (a)सारनाथ, उत्तर प्रदेश
- (b)संकिसा, उत्तर प्रदेश
- (c)वैशाली, बिहार
- (d)कुशीनगर, उत्तर प्रदेश
उत्तर(b) संकिसा, उत्तर प्रदेश — फ़र्रुख़ाबाद ज़िले में स्थित, बौद्ध धर्म के आठ महान तीर्थस्थलों में से एक, जहाँ अशोक के स्तंभ का हाथी-शीर्ष आज भी सुरक्षित है।