धारा घनत्व होता है
- (a)एक अदिश राशि
- (b)एक सदिश राशि
- (c)विमाविहीन
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं
सही उत्तर — (b) एक सदिश राशि। धारा घनत्व प्रवाह के लंबवत ली गई अनुप्रस्थ काट के प्रति इकाई क्षेत्रफल से बहने वाली विद्युत धारा है, और स्वयं धारा के विपरीत वह चालक के भीतर किसी बिंदु से जुड़ी होती है तथा दिशा रखती है — उस बिंदु पर धन आवेश के अपवाह (ड्रिफ्ट) की दिशा। तीनों मानक परिभाषाएँ उस दिशा को स्पष्ट कर देती हैं। पहली, सूक्ष्मदर्शी परिभाषा: J = nqv_d, जहाँ n प्रति इकाई आयतन मुक्त आवेश-वाहकों की संख्या है, q प्रत्येक पर आवेश और v_d अपवाह वेग। संख्या घनत्व और आवेश अदिश हैं, अपवाह वेग सदिश है, इसलिए J अपनी दिशा सीधे v_d से ले लेता है। दूसरी, ओम के नियम का बिंदु-रूप: J = σE, जहाँ σ चालकता है, प्रतिरोधकता का व्युत्क्रम। विद्युत क्षेत्र E सदिश है और समदैशिक चालक में J उसके समांतर पड़ता है, इसलिए जिस समीकरण के एक ओर सदिश हो उसके दूसरी ओर भी सदिश ही होना चाहिए। तीसरी, दोनों राशियों के बीच की परिभाषक संबंध: किसी पृष्ठ से पार होने वाली धारा उस पृष्ठ से धारा घनत्व का फ्लक्स है, I = ∫ J · dA। बिंदु-गुणन (डॉट प्रोडक्ट) केवल सदिशों के बीच ही होता है, और ठीक वही पृष्ठ-समाकलन सदिश J को अदिश I में बदलता है — इसीलिए व्युत्पन्न राशि सदिश है जबकि अधिक परिचित राशि नहीं। SI मात्रक J = I/A से निकलता है और वह ऐम्पियर प्रति वर्ग मीटर, A m⁻², है, जिसका विमीय सूत्र [M⁰ L⁻² T⁰ A¹] है, अर्थात् यह राशि विमाविहीन होने से बहुत दूर है। साधारण वायरिंग में भी संख्याएँ बड़ी होती हैं: 1 वर्ग मिलीमीटर के ताँबे के चालक में 5 ऐम्पियर की धारा का अर्थ है J = 5 × 10⁶ A m⁻², और यही आँकड़ा — कुल धारा नहीं — तय करता है कि चालक अधिक गरम होगा या नहीं; इसीलिए केबल केवल धारा से नहीं, बल्कि वर्ग मिलीमीटर में अनुप्रस्थ काट से निर्दिष्ट किए जाते हैं।
- (a)एक अदिश राशि — यही अभीष्ट फंदा है और अधिकांश अभ्यर्थी यही उत्तर देते हैं, क्योंकि विद्युत धारा वास्तव में अदिश है और मान लिया जाता है कि यह गुण उसके घनत्व में भी उतर आएगा। ऐसा नहीं होता। धारा अदिश एक विशिष्ट और परखने योग्य कारण से है: संधि पर मिलने वाली धाराएँ बीजगणितीय रूप से जुड़ती हैं, ठीक वैसे ही जैसे किरचॉफ का प्रथम नियम कहता है, न कि समांतर चतुर्भुज नियम से। दो तार यदि किसी संधि में 3-3 ऐम्पियर ला रहे हों तो उनके बीच का कोण चाहे जो हो, बाहर 6 ऐम्पियर ही निकलेंगे — कोई सदिश ऐसा नहीं करता। धारा घनत्व स्वभाव से ही भिन्न है — वह चालक के हर बिंदु पर परिभाषित क्षेत्र-राशि है, और धारा घनत्व सचमुच सदिशों की तरह जुड़ते हैं। परिपथ आरेख पर खींचा गया तीर एक निश्चित तार में प्रवाह की दिशा-बोध भर है, अंतरिक्ष में कोई दिशा नहीं।
- (c)विमाविहीन — सीधे-सीधे असत्य, और परिभाषा लिख देने भर से खंडित: J = I/A से ऐम्पियर बँटा वर्ग मीटर मिलता है, इसलिए SI मात्रक A m⁻² है और विमीय सूत्र [M⁰ L⁻² T⁰ A¹]। जो भी राशि कोई मात्रक ढोती है वह परिभाषा से ही विमायुक्त है। भौतिकी के इस भाग की वास्तव में विमाविहीन राशियाँ अनुपात हैं — सापेक्ष विद्युतशीलता और सापेक्ष चुंबकशीलता, शक्ति गुणांक cos φ, अपवर्तनांक, यांत्रिक विकृति, आपेक्षिक घनत्व, घर्षण गुणांक और सूक्ष्म-संरचना स्थिरांक — और काम की मानसिक जाँच यह है कि विमाविहीन राशि सदा एक भौतिक राशि को उसी प्रकार की दूसरी राशि से भाग देने पर बनती है।
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं — यह तभी उपलब्ध होता जब पहले तीनों विवरण गलत होते, जबकि उनमें से एक बिलकुल ठीक है। यह विकल्प उन प्रश्नों में अपनी जगह बनाता है जहाँ गिनाए गए सारे विकल्प दोषपूर्ण हों — इस प्रश्नपत्र में ऐसा होता भी है — पर यहाँ वह उस अभ्यर्थी का एक अंक ले जाता है जो अदिश और सदिश के बीच अनिश्चित है और परिभाषा J = nqv_d लगाने के बजाय भागने का रास्ता चुन लेता है।
विद्युत धारा और धारा घनत्व एक ही भौतिक प्रवाह को दो अलग-अलग स्तरों की बारीकी से बताते हैं, और उन्हें अलग पहचानना ही इस प्रश्न का मर्म है। धारा I एक स्थूल, पूरे परिपथ की राशि है: चालक की चुनी हुई काट से प्रति इकाई समय में पार होता शुद्ध आवेश, I = dq/dt, जो ऐम्पियर में मापा जाता है और एक ही संख्या से पूरी तरह निर्दिष्ट हो जाता है। धारा घनत्व J उसका सूक्ष्मदर्शी समकक्ष है: चालक पदार्थ के भीतर हर बिंदु पर परिभाषित एक सदिश क्षेत्र, जो बताता है कि वहाँ प्रति इकाई क्षेत्रफल कितना आवेश बह रहा है और किस दिशा में। दोनों के बीच की कड़ी एक पृष्ठ-समाकलन है, I = ∫ J · dA, और किसी सदिश क्षेत्र का पृष्ठ पर समाकलन अदिश देता है — ठीक इसीलिए बिंदु-राशि सदिश है और स्थूल राशि नहीं। यही जोड़ी भौतिकी में बार-बार लौटती है: वेग सदिश है जबकि चाल अदिश, और बल सदिश है जबकि दाब, अर्थात् प्रति इकाई क्षेत्रफल बल, अदिश है क्योंकि तरल में वह सब दिशाओं में समान रूप से कार्य करता है। सीख यह है कि किसी सदिश को क्षेत्रफल से भाग देने भर से उसका सदिश-स्वभाव न अपने आप बच जाता है, न अपने आप मिट जाता है; निर्णायक यह है कि राशि परिभाषित कैसे हुई है और, सबसे बढ़कर, उसके दो मान आपस में जुड़ते कैसे हैं।
उत्तर तक पहुँचने का सुरक्षित रास्ता यह पूछना नहीं है कि धारा घनत्व 'दिशा रखता है या नहीं' — ठीक इसी विषय पर वह अंतर्दृष्टि भटकाती है — बल्कि परिभाषक संबंध लिखकर उत्तर उसी में से पढ़ लेना है। J = nqv_d दाहिनी ओर अपवाह वेग रखता है, और वेग सदिश है, इसलिए J भी सदिश है; J = σE वहाँ विद्युत क्षेत्र रखता है और वही निर्णय देता है। भेद करने वाला तथ्य, जिसे BPSC परख रहा है, दो पड़ोसी राशियों के बीच की जानबूझकर रखी गई असमानता है: धारा अदिश है, धारा घनत्व सदिश है, और जिस अभ्यर्थी को इस वाक्य का केवल पहला आधा भाग याद है वह (a) लगा आएगा। सदिशत्व की असली कसौटी योग का नियम है, दिशा की उपस्थिति नहीं। विद्युत धारा उस कसौटी पर विफल होती है — किरचॉफ का संधि नियम तारों की ज्यामिति की परवाह किए बिना धाराओं को बीजगणितीय रूप से जोड़ता है — जबकि किसी बिंदु पर धारा घनत्व अन्य सदिशों की भाँति सिर-से-पूँछ जुड़ते हैं। विकल्प (c) इन दोनों से भी तेज़ी से, केवल मात्रकों के आधार पर हटाया जा सकता है, क्योंकि जो भी वस्तु A m⁻² में मापी जाती है वह परिभाषा से विमायुक्त है। पास ही दो और फंदे बैठे हैं जिन्हें साथ ही साफ़ कर लेना चाहिए: विद्युत धारा में प्रवाह का बोध तो है पर वह अदिश है, और दाब तथा कार्य भी साधारण भाषा में दिशात्मक लगते हैं पर अदिश ही हैं; तथा आरेख में तीर का होना एक संकेतन है, सदिश होने का प्रमाण नहीं।
- धारा घनत्व की परिभाषा लंबवत काट से एकसमान प्रवाह के लिए J = I/A है और सामान्य रूप में I = ∫ J · dA। इसका SI मात्रक ऐम्पियर प्रति वर्ग मीटर (A m⁻²) है और विमीय सूत्र [M⁰ L⁻² T⁰ A¹]।
- सूक्ष्मदर्शी परिभाषा J = nqv_d है। ताँबे में मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व n लगभग 8.5 × 10²⁸ प्रति घन मीटर है, जिससे साधारण घरेलू धारा के लिए अपवाह वेग मिलीमीटर प्रति सेकंड की कोटि का निकलता है — जबकि विद्युत संकेत स्वयं विद्युत्-चुंबकीय विक्षोभ के रूप में तार में प्रकाश की चाल के निकट चलता है।
- ओम के नियम का बिंदु-रूप J = σE है, जहाँ चालकता σ = 1/ρ है। ताँबे की प्रतिरोधकता 20 °C पर लगभग 1.68 × 10⁻⁸ ओम-मीटर है और चाँदी की उससे थोड़ी ही कम, यही कारण है कि ताँबा मानक चालक है और चाँदी प्रयोगशाला की सर्वोत्तम।
- विद्युत धारा में प्रवाह का बोध होते हुए भी वह अदिश है, क्योंकि संधि पर धाराएँ किरचॉफ के प्रथम नियम का पालन करती हैं और बीजगणितीय रूप से जुड़ती हैं, ΣI = 0, न कि समांतर चतुर्भुज नियम से। आवेश, विभव, विभवांतर, प्रतिरोध, धारिता, शक्ति और चुंबकीय फ्लक्स भी इसी तरह अदिश हैं।
- इस अध्याय के सदिश हैं — विद्युत क्षेत्र, अपवाह वेग, धारा घनत्व, चुंबकीय क्षेत्र और चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण। किसी भी 'विमाविहीन' विकल्प पर सुविधाजनक जाँच यह है कि विमाविहीन राशियाँ समान प्रकार की राशियों के अनुपात होती हैं — सापेक्ष विद्युतशीलता, शक्ति गुणांक, अपवर्तनांक, विकृति, घर्षण गुणांक।
उत्तर रेखांकित पंक्तियों में है। धारा घनत्व प्रवाह का बिंदु-दर-बिंदु सदिश विवरण है; धारा वह है जो उसे किसी पृष्ठ पर समाकलित करने के बाद मिलती है — इसीलिए दोनों स्वभाव से भिन्न हैं और इसीलिए विकल्प (a), जो धारा के लिए सत्य है, धारा घनत्व के लिए असत्य है।
- विद्युत धारा का अदिश स्वभाव धारा घनत्व पर लाद देना — धारा अदिश है, उसका घनत्व सदिश है, और यह प्रश्न बना ही इसी भेद को परखने के लिए है
- 'दिशा है' को सदिश होने का प्रमाण मान लेना; असली कसौटी यह है कि दो मान समांतर चतुर्भुज नियम से जुड़ते हैं या नहीं, और संधि पर धाराएँ ऐसा नहीं करतीं
- किसी राशि का मात्रक लिखे बिना उसे विमाविहीन ठहरा देना — A m⁻² एक ही चरण में विकल्प (c) निपटा देता है
BPSC इसे दो शब्दों के प्रश्न और तीन-तरफ़ा वर्गीकरण — अदिश, सदिश या विमाविहीन — के रूप में पूछता है, इसलिए यह शुद्ध परिभाषा-स्मरण है और जो J = nqv_d लिख सकता है उसके लिए सेकंडों में तय हो जाता है; यही प्रवृत्ति आयोग ने 2025 की 71वीं CCE में भी दिखाई थी, जब उसने किसी विद्युत राशि को किसी परिघटना के बजाय उसके परिभाषक संबंध से परखा। UPSC ने धारा घनत्व का नाम कभी नहीं लिया। वह यही वर्गीकरण सामान्य रूप में पूछता है — चार राशियाँ देकर यह कि इनमें सदिश कौन-सी है (1997) — या उन्हीं चालन-संबंधों को प्रतिरोधकता, लंबाई और अनुप्रस्थ काट के संख्यात्मक प्रश्न में छिपा देता है (2001), इसलिए BPSC के अभ्यर्थी को परिभाषा चाहिए और UPSC के अभ्यर्थी को उसका उपयोग।
निम्नलिखित में से कौन-सी एक सदिश राशि है?
- (a) संवेग
- (b) दाब
- (c) ऊर्जा
- (d) कार्य
उत्तर(a) संवेग
वही वर्गीकरण, अपने सामान्य रूप में पूछा हुआ। UPSC के तीनों गलत विकल्प ठीक उसी किस्म के हैं जो साधारण बोलचाल में दिशात्मक लगते हैं और होते नहीं — सबसे बढ़कर दाब — और यही अंतर्दृष्टि यहाँ अभ्यर्थी से धारा घनत्व को अदिश कहलवाती है।
दो तारों की लंबाइयाँ, व्यास और प्रतिरोधकताएँ, सभी 1 : 2 के अनुपात में हैं। यदि पतले तार का प्रतिरोध 10 ओम है, तो मोटे तार का प्रतिरोध है
- (a) 10 ओम
- (b) 5 ओम
- (c) 20 ओम
- (d) 40 ओम
उत्तर(a) 10 ओम
वही चालन-संबंध, दूसरे सिरे से। R = ρL/A, J = σE का स्थूल साथी है, और यह प्रश्न पूरी तरह इस बात पर टिका है कि निर्णायक अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है, व्यास नहीं — वही राशि जिससे धारा को भाग देकर धारा घनत्व निकाला जाता है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
धारा घनत्व का SI मात्रक है
- (a)ऐम्पियर
- (b)ऐम्पियर प्रति वर्ग मीटर
- (c)ऐम्पियर-मीटर
- (d)कूलॉम प्रति सेकंड
उत्तर(b) ऐम्पियर प्रति वर्ग मीटर — धारा घनत्व प्रति इकाई अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल धारा है, J = I/A, इसलिए उसका मात्रक A m⁻² है। ऐम्पियर और कूलॉम प्रति सेकंड एक ही चीज़ हैं और स्वयं धारा के मात्रक हैं, जबकि ऐम्पियर-मीटर इस अध्याय की किसी मानक राशि का मात्रक नहीं है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
विद्युत धारा को मुख्यतः अदिश राशि इसलिए माना जाता है कि
- (a)उसका अपना कोई परिमाण नहीं होता
- (b)संधि पर मिलने वाली धाराएँ बीजगणितीय रूप से जुड़ती हैं, समांतर चतुर्भुज नियम से नहीं
- (c)वह कभी ऋणात्मक नहीं हो सकती
- (d)वह केवल ठोस चालकों से ही बहती है
उत्तर(b) संधि पर मिलने वाली धाराएँ बीजगणितीय रूप से जुड़ती हैं, समांतर चतुर्भुज नियम से नहीं — यही किरचॉफ का प्रथम नियम है, ΣI = 0, और सदिश-योग की कसौटी पर विफल होना ही धारा को अदिश बनाता है, भले ही उसमें प्रवाह का निश्चित बोध हो। धारा का परिमाण अवश्य होता है, चुनी हुई दिशा के सापेक्ष वह ऋणात्मक भी हो सकती है, और वह ठोसों के अलावा विद्युत्-अपघट्यों तथा प्लाज़्मा में भी बहती है।