निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए तथा इन्हें प्रारंभ से कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए : 1. वेल्लोर विद्रोह 2. नाना फडणवीस की मृत्यु 3. वेलेज़ली को वापस बुलाना 4. एंग्लो-नेपाली युद्ध नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर चुनिए :
- (a)2, 3, 1, 4
- (b)4, 1, 3, 2
- (c)2, 3, 4, 1
- (d)3, 1, 2, 4
सही उत्तर — (a) 2, 3, 1, 4। चारों घटनाओं को समय-रेखा पर रखते ही क्रम स्वतः स्पष्ट हो जाता है। (2) नाना फडणवीस — वह फड़नवीस अर्थात वित्त मंत्री जिन्होंने पूना से मराठा संघ को पाव सदी तक एकजुट रखा — का निधन 13 मार्च 1800 को हुआ, जो चारों में सबसे पहली घटना है, और इतिहासकार इसे उस क्षण के रूप में देखते हैं जब मराठा राज्य ने अपना अंतिम सक्षम केंद्रीय हाथ खो दिया। (3) रिचर्ड कॉली वेलेज़ली का गवर्नर-जनरल के रूप में कार्यकाल 18 मई 1798 से 30 जुलाई 1805 तक रहा; ईस्ट इंडिया कंपनी के डायरेक्टर्स की सभा उनके विस्तारवादी युद्धों तथा वाणिज्यिक व शैक्षिक योजनाओं के खर्च और मनमानी से नाराज़ हो गई थी, और वे 1805 की शरद ऋतु में स्वदेश लौट गए, उनके स्थान पर कॉर्नवालिस को भेजा गया। (1) वेल्लोर विद्रोह 10 जुलाई 1806 को मद्रास प्रेसीडेंसी के वेल्लोर किले में फूटा, जब मद्रास नेटिव इन्फैंट्री के सिपाहियों ने नवंबर 1805 में जारी नए पोशाक नियमों के विरुद्ध विद्रोह किया — माथे पर जाति-चिह्न न लगाना, दाढ़ी मुँडवाना और पगड़ी के स्थान पर चमड़े की कलंगी वाली गोल टोपी। (4) एंग्लो-नेपाली या गोरखा युद्ध 1 नवंबर 1814 को आरंभ हुआ, जब लॉर्ड हेस्टिंग्स ने तराई सीमा को लेकर नेपाल पर युद्ध की घोषणा की, और यह 4 मार्च 1816 की सुगौली संधि के साथ समाप्त हुआ। इस प्रकार क्रम बनता है 1800 → 1805 → 1806 → 1814, अर्थात् 2, 3, 1, 4 — विकल्प (a)। परीक्षक द्वारा गढ़ा गया आंतरिक तर्क भी ध्यान देने योग्य है: वेलेज़ली को वापस बुलाया जाना (1805) वेल्लोर (1806) से पहले आता है, ठीक इसलिए क्योंकि नवंबर 1805 का आपत्तिजनक पोशाक आदेश उनके उत्तराधिकारी के मद्रास में कार्यभार के दौरान जारी हुआ था, और यही विद्रोह था जिसके कारण मद्रास के गवर्नर लॉर्ड विलियम बेंटिक और सेनापति सर जॉन क्रैडॉक को भी बारी-बारी वापस बुलाया गया।
- (b)4, 1, 3, 2 — यह वास्तविक क्रम को ठीक उलट देता है। यह 1814-16 के एंग्लो-नेपाली युद्ध को सबसे पहले और 1800 में नाना फडणवीस की मृत्यु को सबसे अंतिम रखता है, जो दोनों सिरों पर चौदह वर्ष की त्रुटि है। यह वह मानक 'उलटा क्रम' चारा है जिसे UPPSC प्रत्येक कालक्रम प्रश्न में लगाता है, और आगे पढ़ने से पहले पहली व अंतिम प्रविष्टि को किसी एक ज्ञात तिथि से जाँच लेना उचित है।
- (c)2, 3, 4, 1 — पहली दो प्रविष्टियाँ सही हैं — नाना फडणवीस (1800) फिर वेलेज़ली को वापस बुलाना (1805) — किंतु अंतिम दो को अदल-बदल देता है, एंग्लो-नेपाली युद्ध (आरंभ 1 नवंबर 1814) को वेल्लोर विद्रोह (10 जुलाई 1806) से पहले रख देता है। यह उस उम्मीदवार के लिए जाल है जिसे याद है कि दोनों उन्नीसवीं सदी के आरंभ की घटनाएँ हैं परंतु यह तय नहीं कर पाता कि कौन-सी पहले हुई। वेल्लोर विद्रोह इन दोनों में आठ वर्ष पहले की घटना है और गवर्नर-जनरल सर जॉर्ज बार्लो के समय की है, जबकि नेपाल युद्ध लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय का है।
- (d)3, 1, 2, 4 — यह वेलेज़ली को वापस बुलाए जाने (1805) से आरंभ होता है और नाना फडणवीस की मृत्यु (13 मार्च 1800) को तीसरे स्थान पर, वेल्लोर विद्रोह (1806) के बाद रख देता है। नाना फडणवीस की मृत्यु वेलेज़ली के भारत छोड़ने से पाँच वर्ष पहले हुई थी — वास्तव में उनकी 1800 में मृत्यु ही एक कारण है कि 1803-05 का द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध वेलेज़ली के लिए उस दिशा में गया। इसलिए पहली तीन प्रविष्टियों का क्रम गलत है।
1798-1818 के ये दो दशक वही काल हैं जिनमें ईस्ट इंडिया कंपनी कई शक्तियों में से एक होने से भारत की सर्वोच्च शक्ति बन गई। वेलेज़ली की सहायक संधि प्रणाली, द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध, वेल्लोर विद्रोह, नेपाल के साथ युद्ध और अंततः तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध — ये सभी इसी काल में आते हैं। UPPSC का इस काल पर कालक्रम प्रश्न वास्तव में यह परखता है कि आप कंपनी के विस्तार की तिथियाँ जानते हैं या नहीं, इसलिए परीक्षा-योग्य इकाई केवल घटना नहीं बल्कि घटना + उसका वर्ष + तत्कालीन गवर्नर-जनरल है। इन दो दशकों का गवर्नर-जनरल क्रम है: वेलेज़ली (1798-1805) → कॉर्नवालिस, जिनकी कुछ ही महीनों में मृत्यु हो गई → सर जॉर्ज बार्लो (कार्यवाहक, 1805-07) → लॉर्ड मिंटो (1807-13) → लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813-23)।
चार-मदों वाले कालक्रम प्रश्न को हल करने का सबसे तेज़ तरीका है सबसे निश्चित तिथि पर टिककर बाकी को उसके इर्द-गिर्द व्यवस्थित करना। यहाँ लगभग हर उम्मीदवार जानता है कि एंग्लो-नेपाली युद्ध 1814-16 का है और सुगौली संधि पर समाप्त हुआ — अतः मद 4 अंतिम ही होना चाहिए, जो अकेले ही विकल्प (b) और (c) को समाप्त कर देता है। बचे हुए दो, (a) और (d), में अंतर यह है कि नाना फडणवीस की मृत्यु वेलेज़ली को वापस बुलाए जाने से पहले हुई या बाद में; चूँकि नाना फडणवीस अठारहवीं सदी के पूना दरबार की शख्सियत हैं और उनकी 1800 में मृत्यु मराठा पतन की मानक पाठ्यपुस्तक-चिह्न है, वे पहले आने चाहिए, और (a) ही बचता है। लुभावनी भूल यह है कि वेल्लोर विद्रोह को धार्मिक शिकायतों पर आधारित सैनिक विद्रोह होने के कारण ढीले ढंग से '1857 के काल' से जोड़ दिया जाए — वास्तव में यह उससे आधी सदी पहले, 1806 में हुआ था, और सामान्यतः इसे कंपनी के विरुद्ध भारतीय सैनिकों का प्रथम बड़ा विद्रोह पढ़ाया जाता है।
- नाना फडणवीस (12 फरवरी 1742 - 13 मार्च 1800) पूना के मराठा संघ के फड़नवीस अर्थात वित्त मंत्री थे; उन्होंने 1773 में नारायणराव की हत्या और माधवराव द्वितीय की अल्पवयस्कता के बाद आई अस्थिरता के दौरान राज्य को संभाला। 1800 में उनकी मृत्यु पूना में प्रभावी केंद्रीय नियंत्रण की समाप्ति का पारंपरिक चिह्न मानी जाती है।
- रिचर्ड वेलेज़ली 18 मई 1798 से 30 जुलाई 1805 तक गवर्नर-जनरल रहे और उन्होंने सहायक संधि प्रणाली आरंभ की। उनकी नीतियों के खर्च और विस्तार से डायरेक्टर्स की सभा की नाराज़गी के कारण वे 1805 की शरद ऋतु में स्वदेश लौट गए; उनके उत्तराधिकारी के रूप में कॉर्नवालिस को भेजा गया।
- वेल्लोर विद्रोह 10 जुलाई 1806 को वेल्लोर किले में हुआ। इसका तात्कालिक कारण नवंबर 1805 के पोशाक नियम थे, जिनमें माथे पर जाति-चिह्न वर्जित करना, दाढ़ी मुँडवाना और पगड़ी के स्थान पर चमड़े की कलंगी वाली गोल टोपी अनिवार्य करना शामिल था। टीपू सुल्तान का परिवार, जो 1799 से इसी किले में नज़रबंद था, इसमें संलिप्त पाया गया। कर्नल रोलो गिलेस्पी के आरकाट से आए घुड़सवार दस्ते ने कुछ ही घंटों में विद्रोह कुचल दिया, जिसमें लगभग 350 सिपाही मारे गए; आदेश वापस ले लिए गए, और मद्रास के गवर्नर विलियम बेंटिक तथा सेनापति सर जॉन क्रैडॉक, दोनों को वापस बुलाया गया।
- एंग्लो-नेपाली (गोरखा) युद्ध 1 नवंबर 1814 से 4 मार्च 1816 तक चला और इसकी घोषणा लॉर्ड हेस्टिंग्स, फ्रांसिस रॉडन-हेस्टिंग्स, अर्ल ऑफ मोइरा ने की थी। यह सुगौली संधि के साथ समाप्त हुआ, जिसके तहत नेपाल ने तराई तथा काली नदी के पश्चिम की पहाड़ी भूमि — कुमाऊँ और गढ़वाल — त्याग दी और काठमांडू में स्थायी ब्रिटिश रेजिडेंट को स्वीकार किया।

- वेल्लोर विद्रोह को 1850 के दशक का मान लेना क्योंकि यह धार्मिक शिकायतों पर आधारित सैनिक विद्रोह था। यह वास्तव में 10 जुलाई 1806 का है — और इसके बाद वापस बुलाए गए कंपनी अधिकारी विलियम बेंटिक थे, जो बाद में गवर्नर-जनरल बनकर लौटे।
- रिचर्ड वेलेज़ली, गवर्नर-जनरल 1798-1805, को उनके छोटे भाई आर्थर वेलेज़ली, भावी ड्यूक ऑफ वेलिंगटन, से भ्रमित करना, जिन्होंने 1803 में असई का नेतृत्व किया था। भारतीय इतिहास-लेखन में दोनों 'वेलेज़ली' कहलाते हैं।
- वॉरेन हेस्टिंग्स (गवर्नर-जनरल 1773-85) को लॉर्ड हेस्टिंग्स, अर्ल ऑफ मोइरा (1813-23), से भ्रमित करना, जिन्होंने नेपाल तथा तृतीय मराठा युद्ध लड़े। ये दो भिन्न व्यक्ति हैं, चालीस वर्ष के अंतर पर।
UPPSC इस काल को लगभग हमेशा चार कूट-विकल्पों सहित 'कालक्रमानुसार व्यवस्थित करें' के रूप में पूछता है, इसलिए गति एक निश्चित तिथि पर टिककर बाकी को हटाने से आती है; UPSC इसी सामग्री को कारण-परिणाम कथन ('वेलेज़ली ने फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना इसलिए की क्योंकि...') या एकल-तथ्य पहचान के रूप में परखना पसंद करता है।
ब्रिटिश शासन की निम्नलिखित रियासतों पर विचार कीजिए: 1. झांसी 2. संबलपुर 3. सतारा जिस सही कालानुक्रमिक क्रम में अंग्रेज़ों ने इनका विलय किया, वह है
- (a) 1, 2, 3
- (b) 1, 3, 2
- (c) 3, 2, 1
- (d) 3, 1, 2
उत्तर(c) 3, 2, 1
उसी विषय पर वही कौशल — कंपनी विस्तार के पड़ावों की तिथियाँ जानना और उन्हें कूट-क्रम में रखना। UPPSC वाला प्रश्न हल करने से पहले यहाँ टिक-कर-हटाने की विधि का अभ्यास करें।
लॉर्ड वेलेज़ली द्वारा प्रवर्तित सहायक संधि प्रणाली पर निम्नलिखित में से कौन-सा कथन लागू नहीं होता है?
- (a) दूसरे के व्यय पर एक विशाल स्थायी सेना बनाए रखना
- (b) भारत को नेपोलियन के खतरे से सुरक्षित रखना
- (c) कंपनी के लिए एक निश्चित आय सुरक्षित करना
- (d) भारतीय रियासतों पर ब्रिटिश सर्वोच्चता स्थापित करना
उत्तर(c) कंपनी के लिए एक निश्चित आय सुरक्षित करना
इस प्रश्न के मद 3 के पीछे की नीति स्पष्ट करता है — वही नीति जिसने वेलेज़ली के कार्यकाल को इतना खर्चीला बनाया, और यही कारण था कि डायरेक्टर्स की सभा उन्हें 1805 में स्वदेश बुलाना चाहती थी।
निम्नलिखित पेशवाओं के शासनकाल पर विचार कीजिए तथा इन्हें कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित कीजिए - (I) बालाजी विश्वनाथ (II) बाजी राव प्रथम (III) नारायण राव (IV) माधव राव प्रथम नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए -
- (a) II, I, IV, III
- (b) I, II, IV, III
- (c) I, III, II, IV
- (d) I, II, III, IV
उत्तर(b) I, II, IV, III
वही पूना दरबार जिस पर इस प्रश्न का मद 2 आधारित है। नाना फडणवीस 1773 में नारायणराव की हत्या के बाद आए संकट में सत्ता में आए और 1800 में अपनी मृत्यु तक राज्य चलाते रहे, अतः पेशवा-क्रम वही ढाँचा है जिसमें यह तिथि सार्थक हो जाती है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1806 के वेल्लोर विद्रोह का तात्कालिक कारण था
- (a)चर्बीयुक्त कारतूस की शुरुआत
- (b)सिपाहियों की पोशाक व रूप-रंग पर नए नियम, जिनमें पगड़ी के स्थान पर चमड़े की कलंगी वाली गोल टोपी शामिल थी
- (c)सिपाहियों को बिना अतिरिक्त भत्ते के विदेश सेवा में भेजने का आदेश
- (d)व्यपगत के सिद्धांत के अंतर्गत अवध का विलय
उत्तर(b) नवंबर 1805 के पोशाक नियम — माथे पर जाति-चिह्न वर्जित, दाढ़ी मुँडवाना, और पगड़ी के स्थान पर चमड़े की कलंगी वाली गोल टोपी — तात्कालिक उकसावा थे। चर्बीयुक्त कारतूस 1857 से संबंधित है, और व्यपगत का सिद्धांत 1840-50 के दशक में डलहौज़ी से संबंधित है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1814-16 का एंग्लो-नेपाली युद्ध किस संधि से समाप्त हुआ, और यह किस गवर्नर-जनरल के काल में लड़ा गया?
- (a)टिटालिया की संधि — लॉर्ड मिंटो
- (b)अमृतसर की संधि — लॉर्ड वेलेज़ली
- (c)सुगौली की संधि — लॉर्ड हेस्टिंग्स
- (d)बेसीन की संधि — लॉर्ड कॉर्नवालिस
उत्तर(c) सुगौली की संधि — लॉर्ड हेस्टिंग्स। यह संधि 4 मार्च 1816 को हस्ताक्षरित हुई। टिटालिया की संधि (1817) सिक्किम के साथ, अमृतसर की संधि (1809) रणजीत सिंह के साथ, और बेसीन की संधि (1802) पेशवा बाजीराव द्वितीय के साथ हुई थी।