नीचे दो कथन दिये गये हैं, जिनमें एक को कथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है : कथन (A) : हमें चोलों के विषय में उनके पूर्ववर्ती राजवंशों की अपेक्षा अधिक जानकारी है । कारण (R) : चोल शासकों ने मंदिरों की दीवारों पर अभिलेख उत्कीर्ण करने का चलन प्रारम्भ किया जिनमें उनकी विजयों के ऐतिहासिक विवरण दिये जाते थे । नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिए । कूट :
- (a)(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है
- (b)(A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
- (c)(A) सत्य है परन्तु (R) गलत है
- (d)(A) गलत है परन्तु (R) सही है
सही उत्तर — (a), दोनों कथन सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है। हमें वस्तुतः अधिकांश पूर्ववर्ती दक्षिण भारतीय राजवंशों की तुलना में चोलों के विषय में कहीं अधिक जानकारी है, और इसका मुख्य कारण ठीक उनका विपुल अभिलेखीय संग्रह है: चोल राजाओं ने मन्दिरों की पत्थर की दीवारों पर लम्बे अभिलेख उत्कीर्ण करवाए जिनमें वंशावली, सैन्य विजय, भूमि-अनुदान तथा ग्राम सभाओं के चुनाव की प्रक्रिया तक (जैसे परान्तक प्रथम के उत्तरमेरुर अभिलेखों में) दर्ज हैं। ये मेय्क्कीर्ति/प्रशस्ति अभिलेख ही चोल इतिहास के पुनर्निर्माण का मुख्य स्रोत हैं, अतः (R), (A) की महज़ संयोगवश जुड़ी बात नहीं बल्कि सीधी व्याख्या है।
- (b)(A) और (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है — गलत — (R) कोई असम्बद्ध सत्य तथ्य नहीं है; चोलों के विषय में इतनी अधिक जानकारी बचे रहने का मूल कारण ही यह मन्दिर-दीवार अभिलेखन की प्रथा है, अतः (R) वस्तुतः (A) की व्याख्या करता है।
- (c)(A) सत्य है परन्तु (R) गलत है — गलत — (R) तथ्यात्मक रूप से सत्य है: चोलों ने वास्तव में मन्दिरों की दीवारों पर ऐतिहासिक विवरण उत्कीर्ण करवाए थे (जैसे तंजावुर का बृहदीश्वर मन्दिर, उत्तरमेरुर अभिलेख)।
- (d)(A) गलत है परन्तु (R) सही है — गलत — (A) सत्य है: समृद्ध अभिलेखीय अभिलेखागार चोलों को प्रारम्भिक-मध्यकालीन दक्षिण भारत के सर्वाधिक सुदस्तावेज़ीकृत राजवंशों में से एक बनाता है।
अभिलेख (एपिग्राफी) प्रारम्भिक-मध्यकालीन भारतीय इतिहास के सर्वाधिक विश्वसनीय प्राथमिक स्रोतों में से हैं। चोल (लगभग 850-1279 ई.) असाधारण रूप से विपुल थे: उनके हजारों अभिलेख मन्दिरों की दीवारों पर बचे हैं, जो राजा की विजयों की प्रशस्ति (मेय्क्कीर्ति) से आरम्भ होकर प्रशासनिक व आर्थिक विवरण दर्ज करते हैं। यही प्रचुरता है जिसके कारण इतिहासकार चोल राजव्यवस्था, भूमि-सम्बन्धों व ग्राम-शासन का इतना पूर्ण पुनर्निर्माण कर पाते हैं।
अभिकथन-कारण प्रश्नों में दोनों भाग सत्य होते हुए भी असम्बद्ध हो सकते हैं; यहाँ आपको यह आँकना है कि क्या अभिलेखन की प्रथा वास्तव में हमारी अधिक जानकारी का कारण है। हाँ, यह है — मन्दिर-दीवार अभिलेख ही वे साक्ष्य हैं जिनका उपयोग इतिहासकार करते हैं — अतः उत्तर सबसे प्रबल विकल्प (a) है, न कि 'दोनों सत्य पर असम्बद्ध' वाला भ्रामक विकल्प (b)।
- चोल अभिलेख मन्दिरों की दीवारों पर उत्कीर्ण किए जाते थे, जो मेय्क्कीर्ति (विजयों की प्रशस्ति) से आरम्भ होते थे
- राजराज प्रथम द्वारा निर्मित तंजावुर का बृहदीश्वर मन्दिर व्यापक राजकीय अभिलेख धारण करता है
- उत्तरमेरुर अभिलेख परान्तक प्रथम के अधीन ग्राम सभा के चुनाव नियमों को दर्ज करते हैं
- चोल प्रशासन, भूमि-अनुदान व स्थानीय स्वशासन का मुख्य प्राथमिक स्रोत एपिग्राफी है

- (b) चुन लेना — (R) को वास्तविक कारण न मानकर एक सत्य-परन्तु-असम्बद्ध तथ्य मान लेना
- चोल मन्दिर-दीवार अभिलेखों को अशोक के शिला/स्तम्भ अभिलेखों से गड्डमड्ड करना
UPPSC/UPSC इसे अभिकथन-कारण के रूप में या 'चोलों के बारे में हमें सबसे अधिक किस स्रोत से जानकारी मिलती है' के रूप में पूछते हैं — याद रखें कि एपिग्राफी ही उत्तर है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
चोल काल के उत्तरमेरुर अभिलेख विशेष रूप से किस जानकारी के लिए महत्वपूर्ण हैं ?
- (a)ग्राम सभा (सभा) व उसकी चुनाव प्रक्रिया
- (b)दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए चोल नौसैनिक अभियान
- (c)बृहदीश्वर मन्दिर का निर्माण
- (d)रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार
उत्तर(a) ग्राम सभा (सभा) व उसकी चुनाव प्रक्रिया — स्थानीय स्वशासन का एक ऐतिहासिक अभिलेख।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जिस मन्दिर की दीवारों पर चोल शासक राजराज प्रथम के व्यापक अभिलेख हैं, वह है
- (a)बृहदीश्वर मन्दिर, तंजावुर
- (b)कैलाश मन्दिर, एलोरा
- (c)सूर्य मन्दिर, कोणार्क
- (d)लिंगराज मन्दिर, भुवनेश्वर
उत्तर(a) बृहदीश्वर मन्दिर, तंजावुर — राजराज प्रथम द्वारा निर्मित, चोल एपिग्राफी का प्रमुख स्रोत।