निम्नलिखित नेताओं में से कौन द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग नहीं लिया था ?
- (a)एम.के. गाँधी
- (b)सरोजिनी नायडु
- (c)पंडित मदन मोहन मालवीय
- (d)डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
सही उत्तर — (d) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद। द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (लंदन, 7 सितम्बर – 1 दिसम्बर 1931) एकमात्र वह सम्मेलन था जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भाग लिया, और गांधी-इरविन समझौते (मार्च 1931) के बाद इसमें महात्मा गांधी को इसके एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भेजा गया। गांधी के साथ सरोजिनी नायडु और मदन मोहन मालवीय सहित कांग्रेस के सहयोगी भी थे। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वितीय गोलमेज सम्मेलन के प्रतिनिधिमंडल का भाग नहीं थे — अतः वे वह नेता हैं जिन्होंने भाग नहीं लिया।
- (a)एम.के. गाँधी — गांधी ने भाग लिया — वे गांधी-इरविन समझौते के बाद द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि थे। इस सम्मेलन से सबसे अधिक पहचाना जाने वाला व्यक्ति वही हैं।
- (b)सरोजिनी नायडु — सरोजिनी नायडु ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया; वे गांधी के साथ जाने वाले समूह का भाग होकर लंदन गईं।
- (c)पंडित मदन मोहन मालवीय — मदन मोहन मालवीय ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया — वे 1931 के सत्र में उपस्थित भारतीय नेताओं में शामिल थे।
संवैधानिक सुधार पर विचार-विमर्श हेतु लंदन में तीन गोलमेज सम्मेलन (1930-32) आयोजित हुए। कांग्रेस ने प्रथम (1930-31) व तृतीय (1932) का बहिष्कार किया, तथा केवल द्वितीय (1931) में भाग लिया, जिसमें गांधी-इरविन समझौते के अंतर्गत गांधी ने अकेले उसका प्रतिनिधित्व किया। द्वितीय गोलमेज सम्मेलन साम्प्रदायिक प्रश्न (अल्पसंख्यक निर्वाचक-मंडल) पर विफल रहा, जिसके परिणामस्वरूप 1932 का साम्प्रदायिक अधिनिर्णय तथा पूना समझौता हुआ।
सभी चारों नाम प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेताओं के हैं, अतः यह प्रश्न यह परखता है कि वास्तव में 1931 के प्रतिनिधिमंडल में कौन था। निश्चितताओं पर आधार बनाएं: गांधी (कांग्रेस का एकमात्र प्रतिनिधि) निश्चित रूप से गए, और साथ ही सरोजिनी नायडु व मालवीय भी। शेष रहने पर, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद — जो बाद में भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने — वे हैं जो द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में नहीं गए।
- द्वितीय गोलमेज सम्मेलन: लंदन, 7 सितम्बर – 1 दिसम्बर 1931; कांग्रेस द्वारा भाग लिया गया एकमात्र गोलमेज सम्मेलन।
- गांधी-इरविन समझौते (मार्च 1931) के बाद गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया।
- सरोजिनी नायडु और मदन मोहन मालवीय द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में उपस्थित भारतीय नेताओं में शामिल थे।
- यह सम्मेलन साम्प्रदायिक (अल्पसंख्यक-प्रतिनिधित्व) प्रश्न पर विफल हो गया, जिसके कारण 1932 का साम्प्रदायिक अधिनिर्णय तथा पूना समझौता हुआ।

- यह मान लेना कि हर प्रमुख कांग्रेस नेता द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में गया — गांधी वस्तुतः अकेले ही आधिकारिक कांग्रेस प्रतिनिधि के रूप में गए।
- यह भ्रमित करना कि कांग्रेस ने किस गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया: केवल द्वितीय में (प्रथम या तृतीय में नहीं)।
UPPSC/UPSC गोलमेज सम्मेलनों की परीक्षा यह पूछकर लेते हैं कि किस सत्र में कौन उपस्थित था, प्रत्येक में कांग्रेस का रुख क्या था, तथा शृंखला प्रथम गोलमेज सम्मेलन → गांधी-इरविन समझौता → द्वितीय गोलमेज सम्मेलन → साम्प्रदायिक अधिनिर्णय/पूना समझौता → भारत सरकार अधिनियम 1935।
1930-32 के दौरान लंदन में भारतीय और ब्रिटिश राजनीतिक नेताओं की बैठकों को प्रायः प्रथम, द्वितीय व तृतीय गोलमेज सम्मेलन कहा जाता है। इन्हें इस प्रकार संदर्भित करना गलत होगा क्योंकि
- (a) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इनमें से दो में भाग नहीं लिया
- (b) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अतिरिक्त सम्मेलन में भाग लेने वाले भारतीय दल सांप्रदायिक हितों का प्रतिनिधित्व करते थे, न कि पूरे भारत का
- (c) ब्रिटिश लेबर पार्टी ने सम्मेलन से हट कर कार्यवाही को पक्षपाती बना दिया था
- (d) यह तीन पृथक सम्मेलनों के बजाय तीन सत्रों में आयोजित एक सम्मेलन का उदाहरण था
उत्तर(d) यह तीन पृथक सम्मेलनों के बजाय तीन सत्रों में आयोजित एक ही सम्मेलन था (UPSC की कुंजी का उत्तर)।
एक ही विषय — 1930-32 के लंदन गोलमेज सम्मेलन — जो इन सत्रों की प्रकृति व कांग्रेस की भागीदारी की परीक्षा लेता है, जिसकी जाँच यह प्रश्न भी करता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रथम गोलमेज सम्मेलन में डॉ. अम्बेडकर ने दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक-मंडल की मांग की। 2. पूना समझौते में स्थानीय निकायों व सिविल सेवाओं में दलित लोगों के प्रतिनिधित्व हेतु विशेष प्रावधान किए गए। 3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने तृतीय गोलमेज सम्मेलन में भाग नहीं लिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) 1 और 2
- (b) 2 और 3
- (c) 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(c) 1 और 3 — प्रथम गोलमेज सम्मेलन में अम्बेडकर की मांग तथा तृतीय गोलमेज सम्मेलन से कांग्रेस की अनुपस्थिति सही हैं; कथन 2 पूना समझौते को गलत ढंग से प्रस्तुत करता है।
यह सीधे गोलमेज सम्मेलनों की भागीदारी की परीक्षा लेता है — जिसमें कांग्रेस का तृतीय गोलमेज सम्मेलन से दूर रहना शामिल है — यह प्रश्न भी उसी 'किसने किस गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया' विषय की परीक्षा लेता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने तीन गोलमेज सम्मेलनों में से किसमें भाग लिया ?
- (a)केवल प्रथम में
- (b)केवल द्वितीय में
- (c)प्रथम और द्वितीय में
- (d)तीनों में
उत्तर(b) केवल द्वितीय में — कांग्रेस ने प्रथम व तृतीय गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार किया तथा केवल द्वितीय (1931) में शामिल हुई, जिसमें गांधी को अपने एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भेजा।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
महात्मा गांधी किस समझौते के परिणामस्वरूप कांग्रेस प्रतिनिधि के रूप में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में गए ?
- (a)पूना समझौता
- (b)लखनऊ समझौता
- (c)गांधी-इरविन समझौता
- (d)साम्प्रदायिक अधिनिर्णय
उत्तर(c) गांधी-इरविन समझौता (मार्च 1931) — इसके अंतर्गत कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा स्थगित कर द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने पर सहमति दी।