सूची - I को सूची - II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए : सूची - I A. जजमानी B. बारा बलूट C. मिरासि D. अडाडे सूची - II 1. उत्तर भारत 2. कर्नाटक 3. महाराष्ट्र 4. तमिलनाडु कूट : A, B, C, D
- (a)A-1, B-2, C-3, D-4
- (b)A-1, B-3, C-2, D-4
- (c)A-1, B-4, C-2, D-3
- (d)A-1, B-3, C-4, D-2
आधिकारिक UPPSC कुंजी के अनुसार चिह्नित उत्तर — (b) A-1, B-3, C-2, D-4। इन चार युग्मों में से दो पुख्ता रूप से प्रलेखित हैं: (A) जजमानी व्यवस्था, ग्राम-सेवा की वंशानुगत संरक्षक-आश्रित प्रणाली, उत्तर भारत का नाम है → 1-उत्तर भारत; तथा (B) बारा बलूट/बलूटेदार व्यवस्था, ग्राम के बारह वंशानुगत सेवकों की प्रणाली, महाराष्ट्र से संबंधित है → 3-महाराष्ट्र। इन दोनों आधार-स्तंभों से ही विकल्प (a) व (c) खारिज हो जाते हैं। कुंजी फिर (C) मिरासि को कर्नाटक (2) से तथा (D) अडाडे को तमिलनाडु (4) से जोड़ती है, जिससे विकल्प (b) प्राप्त होता है। ईमानदार सावधानी: मानक स्रोत सामान्यतः मिरासि (मिरासदारी) व्यवस्था को तमिल क्षेत्र/मद्रास क्षेत्र से, तथा अडाडे प्रथा को कर्नाटक से जोड़ते हैं — अर्थात कुंजी के अंतिम युग्म का उल्टा (यह पठन विकल्प (d) होता)। मिरासि/अडाडे का यह विनिर्धारण विवादास्पद है; उत्तर (b) केवल इसलिए बनाए रखा गया है क्योंकि आधिकारिक कुंजी इसे ही दर्ज करती है।
- (a)A-1, B-2, C-3, D-4 — बारा बलूट (बलूटेदार) व्यवस्था को गलत ढंग से कर्नाटक (B-2) में रखता है। बारह-सेवक बलूटेदार व्यवस्था दृढ़ता से एक महाराष्ट्रीय संस्था है, अतः B को 3 होना चाहिए — यह विकल्प निरस्त है।
- (c)A-1, B-4, C-2, D-3 — बारा बलूट व्यवस्था को गलत ढंग से तमिलनाडु (B-4) में रखता है। यह महाराष्ट्र (B-3) से संबंधित है, अतः यह विकल्प उसी एक युग्म पर विफल हो जाता है जिस पर सभी सहमत हैं।
- (d)A-1, B-3, C-4, D-2 — दो पुख्ता आधार-स्तंभों (जजमानी-उत्तर भारत, बलूट-महाराष्ट्र) को सही रखता है, तथा मिरासि को तमिलनाडु से व अडाडे को कर्नाटक से जोड़ता है — जो वस्तुतः अधिकांश संदर्भ स्रोतों द्वारा दिया गया विनिर्धारण है। यह वह विकल्प नहीं है जिसे आधिकारिक UPPSC कुंजी चिह्नित करती है (कुंजी ने (b) चुना, जिसने अंतिम युग्म मिरासि/अडाडे को उलट दिया)। यहाँ इसे उस अंतिम युग्म पर कुंजी-बनाम-स्रोत टकराव के रूप में चिह्नित किया गया है।
पूर्व-आधुनिक ग्रामीण भारत में एक ही विचार — फसल के प्रचलित हिस्से के बदले वंशानुगत, जाति-आधारित ग्राम-सेवा — विभिन्न क्षेत्रीय नामों से जाना जाता था। उत्तर भारत में इसे जजमानी कहा जाता है; महाराष्ट्र में बारह ग्राम-सेवकों की बारा बलूट (बलूटेदार) व्यवस्था; तथा दक्षिण में मिरासि (मिरासदारी) व अडाडे जैसे अन्य रूप उद्धृत किए जाते हैं। यह व्यवस्था शिल्पकार व सेवा जातियों (कमीन) को भूस्वामी संरक्षकों (जजमान) से एक आत्मनिर्भर ग्राम-अर्थव्यवस्था में बांधती थी।
यह प्रश्न प्रत्येक क्षेत्रीय नाम को एक राज्य से जोड़ता है। दो युग्म सुरक्षित पाठ्य-तथ्य हैं — जजमानी = उत्तर भारत, बारा बलूट = महाराष्ट्र — और ये दोनों विकल्प (a) व (c) को खारिज करने के लिए पर्याप्त हैं। (b) व (d) के बीच शेष चयन पूरी तरह मिरासि/अडाडे विभाजन पर निर्भर करता है, जिसे साहित्य असंगत रूप से रिपोर्ट करता है; आधिकारिक कुंजी मिरासि-कर्नाटक, अडाडे-तमिलनाडु (विकल्प b) चुनती है।
- जजमानी = वंशानुगत संरक्षक (जजमान)-आश्रित (कमीन) ग्राम-सेवा व्यवस्था का उत्तर भारतीय नाम।
- बारा बलूट / बलूटेदार = महाराष्ट्र की बारह वंशानुगत ग्राम-सेवकों की व्यवस्था, जिन्हें अनाज में भुगतान किया जाता था।
- मिरासि (मिरासदारी) व अडाडे इसी ग्राम-सेवा विचार के दक्षिण भारतीय रूप हैं; उनका सटीक राज्य-विनिर्धारण असंगत रूप से रिपोर्ट किया गया है।
- आधिकारिक कुंजी मिरासि-कर्नाटक व अडाडे-तमिलनाडु दर्शाती है (विकल्प b); अनेक स्रोत इसे उलट देते हैं (मिरासि-तमिलनाडु, अडाडे-कर्नाटक)।
जजमानी-उत्तर भारत तथा बलूट-महाराष्ट्र पुख्ता हैं; आधिकारिक कुंजी का मिरासि-कर्नाटक/अडाडे-तमिलनाडु युग्म (विकल्प b) सामान्यतः उद्धृत विनिर्धारण को उलट देता है।
- बारा बलूट व्यवस्था को महाराष्ट्र के अतिरिक्त किसी अन्य राज्य से जोड़ देना — यह वह एक आधार-स्तंभ है जिसे न चूकें।
- विवादास्पद मिरासि/अडाडे क्षेत्रीय नामों को स्थिर तथ्य मान लेना; स्रोत भिन्न हैं, और आधिकारिक कुंजी का युग्मन स्वयं विवादास्पद है।
UPPSC क्षेत्रीय/सामाजिक संस्थाओं (ग्राम-सेवा व्यवस्थाएँ, भू-धारण प्रणालियाँ) पर सूची-सुमेलन पसंद करता है — पहले निश्चित युग्मों (जजमानी-उत्तर, बलूट-महाराष्ट्र) को स्थिर करें और उन्हें विवादास्पद दक्षिण-भारतीय नामों पर उलझने के बजाय विकल्प निरस्त करने दें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
बारह वंशानुगत ग्राम-सेवकों की 'बारा बलूटेदार' व्यवस्था ऐतिहासिक रूप से किस क्षेत्र से संबद्ध है ?
- (a)उत्तर भारत
- (b)महाराष्ट्र
- (c)तमिलनाडु
- (d)असम
उत्तर(b) महाराष्ट्र — अनाज में भुगतान पाने वाले बारह ग्राम-सेवकों की बारा बलूट (बलूटेदार) व्यवस्था महाराष्ट्र की संस्था है, उत्तर भारतीय जजमानी व्यवस्था के समान।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जजमानी व्यवस्था में, सेवाएँ प्राप्त करने वाले भूस्वामी संरक्षक को 'जजमान' कहा जाता है। उसकी सेवा करने वाली सेवा/शिल्पकार जातियों को सामान्यतः क्या कहा जाता है ?
- (a)मिरासदार
- (b)कमीन (या पुरजन)
- (c)बलूटेदार
- (d)रैयत
उत्तर(b) कमीन (या पुरजन) — जजमानी व्यवस्था में सेवा-जातियाँ कमीन/पुरजन कहलाती हैं, जबकि उनकी सेवा प्राप्त करने वाला संरक्षक जजमान कहलाता है।