नीचे दिए गए प्रश्न में, कथन तथा दो अभिधारणाएँ (I) तथा (II) दी गई हैं । निम्न में से सही विकल्प को चुनिए : कथन : मिट्टी में पोषक–तत्त्वों की पूर्ति के क्रम में, यह आवश्यक है कि प्रत्येक दूसरी ऋतु में अलग प्रकार की फसलों को उगाना चाहिए । अभिधारणाएँ : (I) एक फसल उसी खेत में कभी भी दूसरी बार नहीं उगाई जा सकती । (II) यदि लगातार ऋतु में अलग प्रकार की फसल उगाई जाती है, तो मिट्टी में किसी भी प्रकार के अतिरिक्त पोषक–तत्त्वों जैसे खाद को मिलाने की बिलकुल भी आवश्यकता नहीं रहती ।
- (1)केवल अभिधारणा (I) अन्तर्निहित है ।
- (2)केवल अभिधारणा (II) अन्तर्निहित है ।
- (3)(I) तथा (II) दोनों अभिधारणाएँ अन्तर्निहित हैं ।
- (4)ना तो अभिधारणा (I) और ना ही अभिधारणा (II) अन्तर्निहित है ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (4), ना तो अभिधारणा (I) और ना ही अभिधारणा (II) अन्तर्निहित है ।
कोई अभिधारणा तभी अन्तर्निहित होती है जब उसके बिना कथन का कोई अर्थ न बने। जाँच का तरीका: अभिधारणा को उलटिए और देखिए कि कथन फिर भी टिकता है या नहीं।
अभिधारणा (I) कहती है कि एक फसल उसी खेत में कभी भी दूसरी बार नहीं उगाई जा सकती। उलटिए: फसल उसी खेत में लौट सकती है। कथन फिर भी टिकता है, क्योंकि प्रत्येक दूसरी ऋतु में अलग प्रकार की फसलें उगाने की बात में किसी फसल के अंतराल के बाद लौटने की गुंजाइश बनी रहती है।
अभिधारणा (II) कहती है कि लगातार ऋतु में अलग फसल उगाने पर खाद जैसे अतिरिक्त पोषक–तत्त्वों की बिलकुल भी आवश्यकता नहीं रहती। उलटिए: कुछ खाद फिर भी चाहिए हो सकती है। कथन फिर भी टिकता है, क्योंकि वह फसल बदलने को पोषक–तत्त्वों की पूर्ति के लिए आवश्यक बताता है, पर्याप्त नहीं।
कथन को किसी भी अभिधारणा की ज़रूरत नहीं है, इसलिए उत्तर है ना तो अभिधारणा (I) और ना ही अभिधारणा (II) अन्तर्निहित है।
याद रखने की बात: अभिधारणा वह है जिसकी कथन को ज़रूरत हो, कथन के ऊपर खड़ा किया गया कोई अधिक कठोर दावा नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)केवल अभिधारणा (I) अन्तर्निहित है । — विकल्प (1) अभिधारणा (I) को स्वीकार करता है — कि एक फसल उसी खेत में कभी भी दूसरी बार नहीं उगाई जा सकती।
कथन केवल यह कहता है कि प्रत्येक दूसरी ऋतु में फसलें बदली जाएँ। यह योजना किसी फसल को बाद में लौटने से नहीं रोकती। (I) को उलटने पर — फसल लौट सकती है — कथन का कुछ नहीं बिगड़ता, इसलिए कथन (I) पर निर्भर नहीं है।
- (2)केवल अभिधारणा (II) अन्तर्निहित है । — विकल्प (2) अभिधारणा (II) को स्वीकार करता है — कि फसल बदलने से खाद की बिलकुल भी आवश्यकता नहीं रहती।
कथन कहता है कि पोषक–तत्त्वों की पूर्ति के लिए अलग प्रकार की फसलें उगाना आवश्यक है। आवश्यक होना पर्याप्त होना नहीं है। (II) को उलटने पर — कुछ खाद फिर भी चाहिए हो सकती है — कथन का अर्थ बना रहता है, इसलिए (II) कथन से आगे जाती है।
- (3)(I) तथा (II) दोनों अभिधारणाएँ अन्तर्निहित हैं । — विकल्प (3) के लिए दोनों अभिधारणाओं का जाँच में खरा उतरना ज़रूरी है, और दोनों अलग-अलग विफल होती हैं।
(I) "कभी भी" जोड़ती है, जिसकी कथन को ज़रूरत नहीं; (II) "बिलकुल भी" जोड़ती है, जिसकी भी कथन को ज़रूरत नहीं। इस विकल्प को खारिज करने के लिए एक अभिधारणा का विफल होना काफ़ी है; यहाँ दोनों विफल हैं।
अवधारणा
अभिधारणा एक अनकहा आधार-वाक्य है: ऐसी बात जिसे वक्ता कहे बिना मानकर चलता है। तर्क में यह तभी अन्तर्निहित मानी जाती है जब कथन उस पर निर्भर हो।
निषेध-जाँच यही परखती है। अभिधारणा को उलटिए और कथन फिर पढ़िए। यदि अब कथन का अर्थ नहीं बनता, तो अभिधारणा अन्तर्निहित थी। यदि कथन टिका रहता है, तो नहीं थी।
कभी, हमेशा, केवल और बिलकुल भी जैसे शब्द अभिधारणा को अधिक कठोर बना देते हैं। कठोर रूप तभी अन्तर्निहित होता है जब स्वयं कथन को उतनी कठोरता की ज़रूरत हो। किसी प्रथा की सलाह देना अपने-आप में वक्ता को "कभी भी" या "बिलकुल भी" से नहीं बाँधता।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "तार्किक विवेचन एवं मानसिक योग्यता" के अंतर्गत "तार्किक दक्षता (निगमनात्मक, आगमनात्मक, अपवर्तनात्मक)" में "कथन एवं मान्यताएं" शामिल है, साथ में "कथन एवं तर्क", "कथन एवं निष्कर्ष" और "कथन–कार्यवाही" भी हैं।
इन चारों में वाक्य जो कहता है, उसे पाठक द्वारा जोड़ी गई बात से अलग करना पड़ता है। अभिधारणा किसी दावे और उस विश्वास के बीच की खाली जगह में रहती है जो दावे को तर्कसंगत बनाता है।
पृष्ठभूमि में खेती की प्रथा फसल चक्र है। चना और मूँग जैसी दलहनी फसलों की मूल ग्रंथिकाओं में राइज़ोबियम जीवाणु रहते हैं, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं। इसलिए फसल चक्र में दलहनों को शामिल करना, मृदा की उर्वरता बनाए रखने के अन्य साधनों के साथ, मिट्टी में नाइट्रोजन जोड़ सकता है।
मुख्य तथ्य
- अन्तर्निहित अभिधारणा वह अनकहा आधार-वाक्य है जिस पर कथन निर्भर हो; यदि उसके बिना भी कथन का अर्थ बनता है, तो वह अन्तर्निहित नहीं है।
- निषेध-जाँच: अभिधारणा को उलटिए; यदि तब कथन का अर्थ नहीं बनता, तो अभिधारणा अन्तर्निहित थी।
- कथन पोषक–तत्त्वों की पूर्ति के लिए अलग प्रकार की फसलें उगाने को आवश्यक बताता है; वह इसे पर्याप्त नहीं बताता।
- प्रत्येक दूसरी ऋतु में फसल बदलने से कोई फसल बाद में उसी खेत में फिर उगाने से नहीं रुकती।
- दलहनी फसलों की मूल ग्रंथिकाओं में राइज़ोबियम जीवाणु रहते हैं, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं।
यदि अभिधारणा उलटने पर भी कथन बना रहता है, तो कथन उस पर निर्भर नहीं था।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- "आवश्यक" का अर्थ "पर्याप्त" नहीं है। कथन फसल बदलने को आवश्यक मानता है; अभिधारणा (II) इसे इस दावे में बदल देती है कि और कुछ नहीं चाहिए।
- अभिधारणा से सहमत होना जाँच नहीं है। कोई वाक्य खेती के बारे में सच होकर भी ऐसा नहीं हो सकता जिस पर यह कथन निर्भर हो।
- अभिधारणा (I) कहती है कि फसल कभी भी उसी खेत में नहीं लौट सकती। कथन केवल फसलों में विविधता माँगता है, जो लौटने की संभावना को नहीं नकारता।
कोई प्रश्न एक कथन और दो अभिधारणाएँ देकर चार निश्चित विकल्प — केवल (I), केवल (II), दोनों, कोई नहीं — दे सकता है, जैसा यह प्रश्न करता है। कोई प्रश्न तीन या चार अभिधारणाएँ देकर संयोजन वाले कूट भी दे सकता है।
कोई प्रश्न ऐसा कथन दे सकता है जो सलाह हो, सशर्त हो ("यदि… तो") या विरोधाभास ("यद्यपि… फिर भी") वाला हो।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2023, 2018 और 2016 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कथन : ज़िले के किसानों को भूजल बचाने के लिए ड्रिप सिंचाई अपनानी चाहिए। अभिधारणाएँ : (I) ड्रिप सिंचाई में किसानों द्वारा अभी अपनाई जा रही विधियों से कम पानी लगता है। (II) ज़िले में भूजल का संरक्षण आवश्यक है।
- (a)केवल अभिधारणा (I) अन्तर्निहित है ।
- (b)केवल अभिधारणा (II) अन्तर्निहित है ।
- (c)(I) तथा (II) दोनों अभिधारणाएँ अन्तर्निहित हैं ।
- (d)ना तो अभिधारणा (I) और ना ही अभिधारणा (II) अन्तर्निहित है ।
उत्तर(3) — (I) को उलटिए: यदि ड्रिप सिंचाई में कम पानी न लगे, तो उसे अपनाने से भूजल नहीं बचेगा, और सलाह ढह जाती है। (II) को उलटिए: यदि भूजल बचाने की ज़रूरत ही न हो, तो बताया गया उद्देश्य अर्थहीन है। दोनों आवश्यक हैं। विकल्प (1) और (2) एक-एक आवश्यक अभिधारणा छोड़ देते हैं; विकल्प (4) दोनों छोड़ देता है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कथन : विद्यार्थियों की एकाग्रता बढ़ाने के लिए विद्यालय ने सुबह का योग सत्र शुरू किया है। अभिधारणाएँ : (I) योग एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। (II) जो विद्यार्थी योग नहीं करते, वे कभी भी एकाग्र नहीं हो सकते।
- (a)केवल अभिधारणा (I) अन्तर्निहित है ।
- (b)केवल अभिधारणा (II) अन्तर्निहित है ।
- (c)(I) तथा (II) दोनों अभिधारणाएँ अन्तर्निहित हैं ।
- (d)ना तो अभिधारणा (I) और ना ही अभिधारणा (II) अन्तर्निहित है ।
उत्तर(1) — (I) को उलटिए: यदि योग एकाग्रता में सहायक न हो सके, तो इस उद्देश्य से सत्र शुरू करना अर्थहीन है, अतः (I) अन्तर्निहित है। (II) को उलटिए: कुछ विद्यार्थी योग के बिना भी एकाग्र होते हैं — कदम फिर भी तर्कसंगत है, अतः (II) अन्तर्निहित नहीं। विकल्प (2) गलत अभिधारणा चुनता है, विकल्प (3) (II) को गलत जोड़ता है, और विकल्प (4) (I) को गलत छोड़ता है।