केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के अनुसार IND-AQI 101 – 200 सीमा वाली वायु गुणवत्ता श्रेणी है
- (1)अच्छी
- (2)संतोषजनक
- (3)मध्यम
- (4)घटिया
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), मध्यम.
भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में छह श्रेणियाँ हैं, और हर श्रेणी सूचकांक मानों की एक सीमा से जुड़ी है। 101–200 का AQI तीसरी श्रेणी है, जिसे केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड (CPCB) का AQI संबंधी परिचय-नोट और 2014 की शुभारंभ विज्ञप्ति "Moderately polluted" (मध्यम प्रदूषित) कहते हैं; विकल्प का "मध्यम" इसी श्रेणी का नाम है।
पूरा पैमाना इस प्रकार है: अच्छी (Good, 0–50), संतोषजनक (Satisfactory, 51–100), मध्यम प्रदूषित (Moderately polluted, 101–200), घटिया (Poor, 201–300), बहुत घटिया (Very Poor, 301–400) और गंभीर (Severe, 401–500)।
101–200 की श्रेणी के लिए बताया गया संभावित स्वास्थ्य प्रभाव है: दमा जैसे फेफड़ों के रोग वाले लोगों को साँस लेने में असुविधा, और हृदय रोगियों, बच्चों व वृद्धों को असुविधा।
याद रखने की बात: पहली दो श्रेणियाँ 50-50 अंकों की हैं; 101 से ऊपर हर श्रेणी 100 अंकों की है — मध्यम प्रदूषित, घटिया, बहुत घटिया, गंभीर।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)अच्छी — "अच्छी" श्रेणी 0–50 के AQI की है, जहाँ संभावित स्वास्थ्य प्रभाव न्यूनतम है। 101–200 का सूचकांक इससे दो श्रेणी ऊपर है।
PM2.5 के लिए "अच्छी" श्रेणी 0–30 µg/m³ की 24-घंटे की औसत सांद्रता के अनुरूप है।
- (2)संतोषजनक — "संतोषजनक" श्रेणी 51–100 के AQI की है — प्रश्न में दी गई सीमा से ठीक नीचे की श्रेणी। इसका बताया गया प्रभाव संवेदनशील लोगों को साँस लेने में संभावित हल्की असुविधा है।
PM2.5 के लिए यह 31–60 µg/m³ के 24-घंटे के औसत के अनुरूप है। AQI 100 से ऊपर जाते ही श्रेणी मध्यम प्रदूषित हो जाती है।
- (4)घटिया — "घटिया" श्रेणी 201–300 के AQI की है — प्रश्न में दी गई सीमा से ठीक ऊपर की श्रेणी। इससे लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले लोगों को साँस लेने में असुविधा, और हृदय रोगियों को असुविधा हो सकती है।
PM2.5 के लिए यह 91–120 µg/m³ के 24-घंटे के औसत के अनुरूप है।
अवधारणा
वायु गुणवत्ता सूचकांक कई प्रदूषकों के मापों को एक संख्या, एक श्रेणी-नाम और एक रंग में बदल देता है। इसके शुभारंभ पर पर्यावरण मंत्री ने भारत के सूचकांक को "एक संख्या - एक रंग - एक विवरण" बताया था।
राष्ट्रीय AQI आठ प्रदूषकों को शामिल करता है: PM10, PM2.5, NO2, SO2, CO, O3, NH3 और Pb (सीसा)। प्रत्येक के लिए उसकी मापी गई सांद्रता की स्वास्थ्य-आधारित सीमा-बिंदुओं से तुलना करके एक उप-सूचकांक निकाला जाता है।
सबसे खराब उप-सूचकांक समग्र AQI तय करता है। इसलिए किसी स्थान का AQI उसके सबसे गंभीर प्रदूषक को दर्शाता है, आठों के औसत को नहीं।
RPSC के 2024 के पाठ्यक्रम में "विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" के अंतर्गत "पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय परिवर्तन एवं इनके प्रभाव" शामिल है। वायु प्रदूषण और उसका मापन इसी में आते हैं।
पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने 17 अक्टूबर 2014 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय AQI का शुभारंभ किया। इसे चिकित्सा विशेषज्ञों, वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, पैरवी समूहों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के एक विशेषज्ञ समूह ने आकार दिया, और IIT कानपुर ने इसका तकनीकी अध्ययन किया।
AQI का उपयोग केवल सूचना देने तक सीमित नहीं है: दिल्ली-NCR में श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) प्रदूषण-नियंत्रण उपायों के अपने चरणों को AQI श्रेणियों से जोड़ती है।
मुख्य तथ्य
- पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने 17 अक्टूबर 2014 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक का शुभारंभ किया।
- AQI की छह श्रेणियाँ (कोष्ठक में CPCB के अंग्रेज़ी नाम) हैं: अच्छी (Good), संतोषजनक (Satisfactory), मध्यम प्रदूषित (Moderately polluted), घटिया (Poor), बहुत घटिया (Very Poor) और गंभीर (Severe)।
- सूचकांक आठ प्रदूषकों को शामिल करता है: PM10, PM2.5, NO2, SO2, CO, O3, NH3 और Pb।
- प्रदूषकों में सबसे खराब उप-सूचकांक समग्र AQI तय करता है।
- सीमा-बिंदु PM10, PM2.5, NO2, SO2, NH3 और Pb के लिए 24-घंटे के औसत पर, और CO व O3 के लिए 8-घंटे के मानों पर आधारित हैं।
श्रेणियाँ और स्वास्थ्य प्रभाव 17 अक्टूबर 2014 को पर्यावरण मंत्रालय द्वारा घोषित और CPCB द्वारा निर्धारित अनुसार। कोष्ठक में CPCB के अंग्रेज़ी श्रेणी-नाम हैं; अच्छी, संतोषजनक, मध्यम और घटिया प्रश्नपत्र के विकल्पों के शब्द हैं, शेष हिन्दी नाम अनुवाद हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- सबसे नीचे की दो श्रेणियाँ 50-50 अंकों की हैं (0–50, 51–100); 101 से ऊपर हर श्रेणी 100 अंकों की है। पूरे पैमाने पर बराबर श्रेणियाँ मत मानिए।
- CPCB का AQI संबंधी परिचय-नोट 101–200 की श्रेणी को "Moderately polluted" (मध्यम प्रदूषित) कहता है। "मध्यम" लिखा विकल्प इसी श्रेणी को दर्शाता है, इसलिए छोटे नाम के कारण उसे अस्वीकार मत कीजिए।
- समग्र AQI सबसे खराब उप-सूचकांक है, औसत नहीं। एक प्रदूषक "घटिया" सीमा में हो तो AQI "घटिया" होगा, भले ही बाकी सभी प्रदूषक "अच्छी" सीमा में हों।
कोई प्रश्न AQI की कोई सीमा देकर उसकी श्रेणी पूछ सकता है, या श्रेणी देकर उसकी सीमा पूछ सकता है।
कोई प्रश्न यह पूछ सकता है कि सूचकांक में कौन-से प्रदूषक शामिल हैं, या प्रदूषकों के उप-सूचकांकों से समग्र AQI कैसे निकाला जाता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उस प्रश्न-पत्र के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के अंतर्गत किसी स्थान का समग्र AQI किससे निर्धारित होता है ?
- (a)सभी आठ प्रदूषकों के उप-सूचकांकों का औसत
- (b)प्रदूषकों में सबसे खराब (सबसे अधिक) उप-सूचकांक
- (c)केवल PM2.5 का उप-सूचकांक
- (d)PM10 और PM2.5 के उप-सूचकांकों का योग
उत्तर(2) — सबसे खराब उप-सूचकांक समग्र AQI तय करता है। विकल्प (1) गलत है क्योंकि उप-सूचकांकों का औसत नहीं लिया जाता; विकल्प (3) और (4) गलत हैं क्योंकि किसी एक प्रदूषक या प्रदूषकों के किसी जोड़े को आधार के रूप में निश्चित नहीं किया गया है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार 350 का AQI मान किस श्रेणी में आता है ?
- (a)घटिया
- (b)बहुत घटिया
- (c)गंभीर
- (d)मध्यम प्रदूषित
उत्तर(2) — "बहुत घटिया" (Very Poor) 301–400 को समेटती है। विकल्प (1) "घटिया" 201–300 की है; विकल्प (3) "गंभीर" 401–500 की; और विकल्प (4) "मध्यम प्रदूषित" 101–200 की।