राजस्थान सरकार ने एम–सैण्ड नीति वर्ष 2024 में घोषित की है । यह प्रभावी रहेगी –
- (1)31 मार्च, 2029 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक
- (2)31 मार्च, 2030 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक
- (3)31 मार्च, 2032 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक
- (4)30 जून, 2029 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), 31 मार्च, 2029 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक.
राजस्थान एम-सैण्ड नीति 2024 के खंड 3.1 (नीति की अवधि) के अनुसार नीति अपने प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होती है और 31 मार्च 2029 तक, अथवा नई नीति की घोषणा होने तक, प्रभावी रहती है। यही विकल्प (1) है: 31 मार्च, 2029 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक।
31 मार्च 2029 वित्त वर्ष 2028-29 का अंतिम दिन है। नीति के अपने लक्ष्य भी 2028-29 के लिए तय हैं: प्रति वर्ष 30 मिलियन टन एम-सैण्ड उत्पादन, और राज्य-वित्तपोषित निर्माण कार्यों में प्रयुक्त रेत में 50 प्रतिशत एम-सैण्ड।
बाकी विकल्प "अथवा नई नीति की घोषणा होने तक" वाला अंश वही रखते हैं, पर वर्ष (2030, 2032) या दिन (30 जून) बदल देते हैं।
याद रखने की बात: एम-सैण्ड नीति 2024, 31 मार्च 2029 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक प्रभावी है; यह तिथि 2028-29 का अंत है, जिस वर्ष के लिए उसके लक्ष्य तय हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)31 मार्च, 2030 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक — नीति 31 मार्च 2029 तक (अथवा नई नीति की घोषणा होने तक) प्रभावी है, यानी इससे एक वर्ष पहले तक।
2029-30 का पड़ाव एक संबंधित दस्तावेज़ में ज़रूर आता है: राजस्थान खनिज नीति 2024 अपने पहले लक्ष्य 2029-30 के लिए तय करती है, जैसे GSDP में खनिज क्षेत्र का 5 प्रतिशत हिस्सा। वह खनिज नीति का लक्ष्य-वर्ष है, एम-सैण्ड नीति की अवधि नहीं।
- (3)31 मार्च, 2032 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक — नीति 31 मार्च 2029 तक (अथवा नई नीति की घोषणा होने तक) प्रभावी है, इस तिथि से तीन वर्ष पहले तक।
एम-सैण्ड नीति के लक्ष्य — प्रति वर्ष 30 मिलियन टन उत्पादन और राज्य-वित्तपोषित कार्यों में 50 प्रतिशत एम-सैण्ड — दोनों 2028-29 के लिए तय हैं, और इसकी घोषित अवधि उसी वित्त वर्ष के अंत तक है।
- (4)30 जून, 2029 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक — वर्ष सही है, पर दिन नहीं। नीति 31 मार्च 2029 तक (अथवा नई नीति की घोषणा होने तक) प्रभावी है, जो वित्त वर्ष 2028-29 का अंत है।
30 जून 2029 अगले वित्त वर्ष के तीन महीने बीतने पर पड़ता है, जो न नीति के पाठ से मेल खाता है और न उसके 2028-29 के लक्ष्यों से।
अवधारणा
विनिर्मित रेत (एम-सैण्ड) चट्टान, खनन के ओवरबर्डन या निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट को तोड़कर, फिर आकार देकर, छानकर और श्रेणीबद्ध करके बनाई जाती है। यह कंक्रीट और प्लास्टर में नदी की रेत (बजरी) की जगह लेती है।
नीति ज़रूरत को संख्याओं में बताती है। राजस्थान में नदी की रेत की माँग लगभग 70 मिलियन टन प्रति वर्ष है, जबकि कार्यरत 36 एम-सैण्ड इकाइयाँ केवल लगभग 13 मिलियन टन उत्पादन करती हैं।
नीति नदी रेत खनन पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का भी उल्लेख करती है: दीपक कुमार बनाम हरियाणा राज्य (2012), जिसने पर्यावरणीय स्वीकृति के बिना खनन पर रोक लगाई, और वैज्ञानिक पुनर्भरण अध्ययन के बिना खनन के विरुद्ध 2017 का एक आदेश।
RPSC के 2024 के प्रारंभिक पाठ्यक्रम में "राजस्थान की अर्थव्यवस्था" के अंतर्गत "कृषि, उद्योग व सेवा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे" और "राजस्थान का भूगोल" के अंतर्गत "खनिज– धात्विक एवं अधात्विक" सूचीबद्ध हैं। रेत और उसके स्थानापन्न खनन, निर्माण और पर्यावरण को जोड़ते हैं।
इस तरह की राज्य नीति एक अवधि, लक्ष्य और प्रोत्साहन तय करती है। एम-सैण्ड नीति 2024 में तीनों हैं: 31 मार्च 2029 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक की अवधि, 2028-29 के उत्पादन और उपयोग लक्ष्य, और एम-सैण्ड इकाइयों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन।
2024 की नीति राज्य की 2020 की एम-सैण्ड नीति को आगे बढ़ाती है। यह राजस्थान खनिज नीति 2024 का आधार लेती है, और मुख्यमंत्री की प्रस्तावना इसे राइजिंग राजस्थान शिखर सम्मेलन 2024 से जोड़ती है।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान एम-सैण्ड नीति 2024 प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होती है और 31 मार्च 2029 तक, अथवा नई नीति की घोषणा होने तक, प्रभावी रहती है।
- लक्ष्य: एम-सैण्ड उत्पादन हर वर्ष 20% बढ़ाकर 2028-29 तक 30 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुँचाना।
- राज्य-वित्तपोषित निर्माण कार्यों में प्रयुक्त रेत में कम से कम 25% एम-सैण्ड होनी चाहिए, जो चरणों में 2028-29 तक 50% होगी।
- प्रोत्साहनों के लिए एम-सैण्ड इकाई वह है जो अपने कुल उत्पादन का कम से कम 50% एम-सैण्ड के रूप में बनाती है।
- एम-सैण्ड के लिए सरकारी भूमि पर पड़े ओवरबर्डन ढेरों के उपयोग पर रॉयल्टी में 50% छूट है; ओवरबर्डन ढेरों को एम-सैण्ड में उपयोग करने पर ज़िला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट निधि में अंशदान से छूट है।
स्रोत: राजस्थान एम-सैण्ड नीति 2024, खान एवं भूविज्ञान विभाग, राजस्थान सरकार।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 31 मार्च 2029 वित्त वर्ष 2028-29 को समाप्त करता है। राजस्थान खनिज नीति 2024 लक्ष्य-वर्षों के रूप में 2029-30 और 2046-47 का उपयोग करती है, इसलिए 2030 वाली तिथि उस नीति के लक्ष्यों से जुड़ती है, एम-सैण्ड नीति की अवधि से नहीं।
- राज्य-वित्तपोषित निर्माण के लिए 25 प्रतिशत एम-सैण्ड का न्यूनतम नीति की आरंभिक शर्त है; 50 प्रतिशत 2028-29 का चरणबद्ध लक्ष्य है। 50 प्रतिशत को आरंभिक नियम न समझें।
- नीति में 50 प्रतिशत का आँकड़ा कई जगह आता है — जैसे एम-सैण्ड इकाई की परिभाषा वाला उत्पादन हिस्सा, ओवरबर्डन ढेरों पर रॉयल्टी छूट, और कीननेस मनी में कटौती। जाँचें कि कथन किस प्रावधान के बारे में है।
किसी नीति पर कोई प्रश्न उसकी वैधता अवधि, उसके उत्पादन या उपयोग लक्ष्य, या उसके प्रोत्साहन पूछ सकता है।
कोई प्रश्न सभी विकल्पों में आधिकारिक शब्दावली वही रखकर केवल वर्ष, दिन या प्रतिशत बदल सकता है।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2021 और 2018 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान एम-सैण्ड नीति 2024 के तहत राज्य सरकार और उससे वित्तपोषित निकायों के निर्माण कार्यों में प्रयुक्त रेत का न्यूनतम कितना हिस्सा एम-सैण्ड होना चाहिए?
- (a)10 प्रतिशत
- (b)25 प्रतिशत
- (c)50 प्रतिशत
- (d)75 प्रतिशत
उत्तर(2) — नीति न्यूनतम 25 प्रतिशत तय करती है।विकल्प (3), 50 प्रतिशत, वह स्तर है जिस तक इसे 2028-29 तक चरणों में पहुँचना है, आरंभिक न्यूनतम नहीं। विकल्प (1) और (4) ऐसे आँकड़े हैं जिनका नीति इस शर्त के लिए उपयोग नहीं करती।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
राजस्थान एम-सैण्ड नीति 2024 का लक्ष्य 2028-29 तक राज्य में एम-सैण्ड उत्पादन को प्रति वर्ष कितना करना है?
- (a)13 मिलियन टन
- (b)30 मिलियन टन
- (c)50 मिलियन टन
- (d)70 मिलियन टन
उत्तर(2) — लक्ष्य हर वर्ष 20 प्रतिशत वृद्धि के माध्यम से 2028-29 तक प्रति वर्ष 30 मिलियन टन है।विकल्प (1) कार्यरत 36 इकाइयों का लगभग वर्तमान उत्पादन है, विकल्प (4) नदी की रेत की वर्तमान माँग, और विकल्प (3) नीति का कोई आँकड़ा नहीं है।