राजस्थान में लिग्नाइट के सबसे महत्वपूर्ण संसाधन स्थित हैं :
- (1)पलाना, अगूचा एवं मेड़ता
- (2)पलाना, कसनऊ एवं जगपुरा
- (3)कपूरड़ी, मेड़ता एवं कसनऊ
- (4)कपूरड़ी, पलाना एवं जगपुरा
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (3), कपूरड़ी, मेड़ता एवं कसनऊ.
राजस्थान का लिग्नाइट पश्चिम की अवसादी द्रोणियों में मध्य इयोसीन युग की टर्शियरी चट्टानों में है। खान एवं भूविज्ञान विभाग (DMG) बाड़मेर, बीकानेर, नागौर, जैसलमेर और जालौर जिलों के 78 स्थानों में लगभग 5,720 मिलियन टन लिग्नाइट का अनुमान लगाता है।
कपूरड़ी, मेड़ता एवं कसनऊ तीनों लिग्नाइट के स्थान हैं। कपूरड़ी बाड़मेर में है, जहाँ कपूरड़ी–जालीपा में लिग्नाइट का खनन होता है। कसनऊ नागौर के मातासुख–कसनऊ–इग्यार खनन क्षेत्र का भाग है, और नागौर जिले का कस्बा मेड़ता रोड DMG के नागौर और पाली समूह के एक लिग्नाइट ब्लॉक (मेड़ता रोड एवं मीरानगर) का नाम है।
बीकानेर का पलाना भी लिग्नाइट का स्थान है। पर पलाना वाले हर विकल्प में किसी दूसरे खनिज के लिए जाना जाने वाला स्थान भी है: अगूचा (रामपुरा–अगूचा) सीसा-जस्ता का है, और जगपुरा सोने का।
विकल्प के हर स्थान को जाँचिए; गलत खनिज वाला एक स्थान पूरे विकल्प को गलत कर देता है। केवल विकल्प (3) में तीनों स्थान लिग्नाइट के हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (1)पलाना, अगूचा एवं मेड़ता — पलाना (बीकानेर) और मेड़ता रोड (नागौर) लिग्नाइट के स्थान हैं, पर अगूचा नहीं।
अगूचा से आशय भीलवाड़ा जिले के रामपुरा–अगूचा से है, जिसे DMG राजस्थान के महत्त्वपूर्ण सीसा-जस्ता-चाँदी निक्षेपों में गिनता है। भीलवाड़ा उन जिलों में नहीं है जहाँ DMG लिग्नाइट दर्ज करता है।
- (2)पलाना, कसनऊ एवं जगपुरा — पलाना और कसनऊ लिग्नाइट के स्थान हैं, पर जगपुरा नहीं।
जगपुरा बाँसवाड़ा की भूकिया–जगपुरा–देलवाड़ा स्वर्ण पट्टी का भाग है, जिसे DMG राज्य के 118.88 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क संसाधनों में से 105.81 मिलियन टन का श्रेय देता है। यह दक्षिण में है, पश्चिमी लिग्नाइट द्रोणियों से दूर।
- (4)कपूरड़ी, पलाना एवं जगपुरा — कपूरड़ी (बाड़मेर) और पलाना (बीकानेर) दोनों लिग्नाइट के स्थान हैं और दोनों के पास लिग्नाइट-आधारित बिजलीघर हैं, पर जगपुरा इस समूह को गलत कर देता है।
जगपुरा बाँसवाड़ा जिले की भूकिया–जगपुरा स्वर्ण पट्टी का है। तीन में से दो लिग्नाइट नाम इसे सही समूह नहीं बनाते।
अवधारणा
लिग्नाइट, या भूरा कोयला, निम्न कोटि का कोयला है, जिसमें नमी अधिक और कार्बन बिटुमिनस कोयले से कम होता है। इसे सामान्यतः बिजली बनाने के लिए खनन-स्थल के पास ही जलाया जाता है।
राजस्थान का लिग्नाइट टर्शियरी काल (मध्य इयोसीन) में बना और बाड़मेर–सांचोर, जैसलमेर और नागौर द्रोणियों में है, जो बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर और जालौर जिलों तक फैली हैं। ये पश्चिम की नई अवसादी द्रोणियाँ हैं, राज्य के धात्विक अयस्कों वाली पुरानी अरावली चट्टानों से भिन्न।
DMG लिग्नाइट खनन गिरल और कपूरड़ी–जालीपा (बाड़मेर), पलाना–बरसिंगसर (बीकानेर) और मातासुख–कसनऊ–इग्यार (नागौर) में बताता है।
RPSC के 2024 के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में "राजस्थान का भूगोल" के अंतर्गत "खनिज– धात्विक एवं अधात्विक" और "ऊर्जा संसाधन– परम्परागत एवं गैर–परम्परागत" शामिल हैं। लिग्नाइट दोनों शीर्षकों में आता है, खनिज के रूप में भी और बिजलीघरों के ईंधन के रूप में भी।
राजस्थान का खनिज मानचित्र दो भागों में बँटता है। अरावली क्षेत्र की पुरानी चट्टानों में सीसा-जस्ता और सोना जैसे धात्विक अयस्क हैं; पश्चिम की नई अवसादी द्रोणियों में लिग्नाइट, तेल और गैस। किसी स्थान को इस विभाजन के सही ओर रखना उसके खनिज का संकेत देता है।
खनन क्षेत्रों के नाम में प्रायः दो-तीन गाँवों के नाम जुड़े होते हैं। रामपुरा–अगूचा एक सीसा-जस्ता निक्षेप है, और DMG की लिग्नाइट तालिका मेड़ता रोड को मीरानगर के साथ दर्ज करती है।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान का लिग्नाइट बाड़मेर–सांचोर, जैसलमेर और नागौर द्रोणियों की मध्य इयोसीन (टर्शियरी) चट्टानों में मिलता है।
- DMG बाड़मेर, बीकानेर, नागौर, जैसलमेर और जालौर जिलों के 78 स्थानों में लगभग 5,720 मिलियन टन लिग्नाइट संसाधनों का अनुमान लगाता है।
- लिग्नाइट का खनन गिरल और कपूरड़ी–जालीपा (बाड़मेर), पलाना–बरसिंगसर (बीकानेर) और मातासुख–कसनऊ–इग्यार (नागौर) में होता है।
- DMG लिग्नाइट-आधारित बिजलीघर कपूरड़ी–जालीपा और गिरल (बाड़मेर) तथा पलाना–बरसिंगसर और गुढ़ा (बीकानेर) में बताता है।
- बाँसवाड़ा की भूकिया–जगपुरा–देलवाड़ा पट्टी में राजस्थान के 118.88 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क संसाधनों में से 105.81 मिलियन टन हैं।
विकल्प (1), (2) और (4) में से हर एक में एक स्थान लिग्नाइट का नहीं है। स्रोत: खान एवं भूविज्ञान विभाग, राजस्थान।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पलाना सचमुच लिग्नाइट का स्थान है, फिर भी उसका नाम लेने वाले हर विकल्प में एक ऐसा स्थान भी है जो लिग्नाइट का नहीं। एक सही नाम विकल्प को सही नहीं बनाता।
- "अगूचा" भीलवाड़ा के रामपुरा–अगूचा का छोटा रूप है, जो सीसा-जस्ता-चाँदी निक्षेप है। स्थान का छोटा किया गया नाम यह छिपा सकता है कि वह किस खनिज का है।
- लिग्नाइट पश्चिम की नई अवसादी द्रोणियों का है। बाँसवाड़ा और भीलवाड़ा दोनों में से कोई भी उन जिलों में नहीं है जहाँ DMG लिग्नाइट दर्ज करता है।
कोई प्रश्न स्थानों के समूह देकर पूछ सकता है कि किस समूह में एक ही खनिज है, जैसा यह प्रश्न करता है। कोई प्रश्न खानों को खनिजों से सुमेलित करवाकर गलत युग्म भी पूछ सकता है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि राजस्थान में किस प्रकार का कोयला है, या उसके लिग्नाइट-आधारित बिजलीघर कहाँ स्थित हैं।
संबंधित PYQ
RAS प्री 2016 और 2013 के मिलते-जुलते प्रश्न, उन प्रश्न-पत्रों के इस साइट पर प्रकाशित होने पर UnlockIAS यहाँ जोड़ेगा।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सा राजस्थान का सीसा-जस्ता निक्षेप है?
- (a)कपूरड़ी
- (b)रामपुरा–अगूचा
- (c)पलाना
- (d)गिरल
उत्तर(2) — भीलवाड़ा का रामपुरा–अगूचा सीसा-जस्ता-चाँदी निक्षेप है। विकल्प (1), कपूरड़ी, और विकल्प (4), गिरल, बाड़मेर के लिग्नाइट स्थान हैं। विकल्प (3), पलाना, बीकानेर का लिग्नाइट स्थान है। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भूकिया–जगपुरा स्वर्ण पट्टी राजस्थान के किस जिले में स्थित है?
- (a)बाँसवाड़ा
- (b)भीलवाड़ा
- (c)बाड़मेर
- (d)नागौर
उत्तर(1) — भूकिया–जगपुरा–देलवाड़ा स्वर्ण पट्टी बाँसवाड़ा में है। विकल्प (2), भीलवाड़ा, में रामपुरा–अगूचा सीसा-जस्ता निक्षेप है। विकल्प (3), बाड़मेर, में कपूरड़ी और गिरल का लिग्नाइट है। विकल्प (4), नागौर, में कसनऊ–इग्यार का लिग्नाइट है।