समाचार पत्र ‘मज़हरूल सरूर’ कहाँ से और कब प्रकाशित हुआ?
- (1)भरतपुर, 1849
- (2)जयपुर, 1856
- (3)अजमेर, 1840
- (4)उदयपुर, 1879
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — विकल्प (1), भरतपुर, 1849.
मनोहर प्रभाकर की राजस्थान में हिन्दी पत्रकारिता (1981) के अनुसार मज़हरूल सरूर राजस्थान का पहला समाचार पत्र माना जाता है: उर्दू और हिन्दी का एक द्विभाषी पत्र, जो 1849 में भरतपुर से प्रकाशित होता था।
वे यह भी बताते हैं कि इसकी कोई प्रति उपलब्ध नहीं है। फ़्रांसीसी विद्वान गार्सां द तासी ने अपने व्याख्यानों में इसका केवल उल्लेख किया है, इसलिए इसके स्वरूप के बारे में अधिक नहीं कहा जा सकता।
रामरतन भटनागर की द राइज़ एंड ग्रोथ ऑफ़ हिन्दी जर्नलिज़्म भी राजपूताना और मध्य भारत के आरंभिक पत्रों में भरतपुर (1849, मज़हरूल सरूर) को गिनाती है। पंडित झाबरमल्ल शर्मा अभिनंदन ग्रंथ (1977) के अनुसार भरतपुर के राजा ने इसे 1849 में मासिक रूप में निकलवाया।
स्थान और वर्ष विकल्प (1), भरतपुर, 1849, हैं।
हर स्रोत में वर्ष एक-सा नहीं है। भटनागर की अपनी पुस्तक में ही, एक अन्य स्थान पर, आरंभिक मासिक पत्रों की सूची मज़हरूल सरूर को 1852 का बताती है। किसी भी विकल्प में भरतपुर के साथ 1852 नहीं है, इसलिए यह भिन्नता उत्तर नहीं बदलती।
याद रखने की बात: मज़हरूल सरूर — भरतपुर, 1849, उर्दू और हिन्दी, महाराजा के संरक्षण में।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (2)जयपुर, 1856 — जयपुर, 1856 एक दूसरे पत्र का है। प्रभाकर दर्ज करते हैं कि 1856 में हेडमास्टर कन्हैयालाल के संपादन में जयपुर का द्विभाषी रोज़तुल तालीम, यानी राजपूताना अखबार, प्रकाशित होना शुरू हुआ।
वे इसे राजस्थान का वह प्राचीनतम पत्र बताते हैं जिसकी फ़ाइल जयपुर के महाराजा सार्वजनिक पुस्तकालय में सुरक्षित है। मज़हरूल सरूर सात वर्ष पहले भरतपुर से निकला था।
- (3)अजमेर, 1840 — न अजमेर मेल खाता है, न 1840। प्रभाकर अजमेर के पहले पत्रों को 1860 के दशक में रखते हैं: 1861 में जगलाभ चिंतक और 1863 में जगहितकारक। भटनागर भी अजमेर (1861, जगलाभ चिंतक) देते हैं।
1840 स्वयं मज़हरूल सरूर से भी पहले का वर्ष है, जिसे ये स्रोत भरतपुर से निकला राजस्थान का पहला पत्र मानते हैं।
- (4)उदयपुर, 1879 — उदयपुर, 1879 एक अन्य पत्र की शुरुआत है। प्रभाकर के अनुसार मेवाड़ के महाराणा सज्जन सिंह ने स्वामी दयानन्द के प्रभाव में 1879 में हिन्दी साप्ताहिक सज्जन कीर्ति सुधाकर शुरू किया।
वे बताते हैं कि भटनागर का शोध-प्रबंध इसके लिए 1876 देता है, जिसे प्रभाकर भ्रामक कहते हैं। मज़हरूल सरूर 1849 का भरतपुर का पत्र है।
अवधारणा
राजस्थान के सबसे आरंभिक पत्र रियासतों के संरक्षण में पनपे। पंडित झाबरमल्ल शर्मा अभिनंदन ग्रंथ उनके इतिहास को राज्याश्रित पत्रकारिता का इतिहास कहता है, जिसकी शुरुआत 1849 में भरतपुर के द्विभाषी मज़हरूल सरूर से होती है।
भटनागर 4 दिसंबर 1854 के गार्सां द तासी के व्याख्यान का उद्धरण देते हैं, जिसके अनुसार यह पत्र महाराजा के संरक्षण में भरतपुर में छपता था और इंदौर के मालवा अखबार की तरह इसमें साथ-साथ दो स्तंभ होते थे, एक हिन्दी का और एक उर्दू का।
प्रभाकर के बाद के पत्रों के क्रम में रोज़तुल तालीम (जयपुर, 1856), जगलाभ चिंतक (अजमेर, 1861), मारवाड़ गजट (जोधपुर, 1866), जयपुर गजट (1868) और उदयपुर गजट (1869) शामिल हैं।
उदयपुर गजट के एक दशक बाद महाराणा सज्जन सिंह के अधीन हिन्दी साप्ताहिक सज्जन कीर्ति सुधाकर (1879) आया।
RPSC के प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम में राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत के अंतर्गत "राजनीतिक जागरण : समाचार पत्रों एवं राजनीतिक संस्थाओं की भूमिका।" सूचीबद्ध है।
आरंभिक राज्य-पत्र राजनीतिक प्रेस से पहले आए। प्रभाकर बताते हैं कि जिस युग में रियासतों के गजट फ़ारसी-मिश्रित उर्दू में छपते थे, उसमें राजस्थान से थोड़ा-सा हिन्दी प्रकाशन भी महत्त्व रखता था।
प्रभाकर को मज़हरूल सरूर की कोई बची हुई प्रति ज्ञात नहीं थी, केवल तासी का उसका उल्लेख। इसका वर्ष भी बदलता है: प्रभाकर और भटनागर की दो सूचियाँ 1849 देती हैं, और भटनागर की मासिक पत्रों की सूची 1852 देती है।
मुख्य तथ्य
- प्रभाकर (1981): 1849 में भरतपुर से निकला उर्दू–हिन्दी का द्विभाषी पत्र मज़हरूल सरूर राजस्थान का पहला समाचार पत्र माना जाता है; इसकी कोई प्रति उपलब्ध नहीं है।
- भटनागर राजपूताना और मध्य भारत के आरंभिक पत्रों में भरतपुर (1849, मज़हरूल सरूर) को गिनाते हैं; ये सभी द्विभाषी थे।
- गार्सां द तासी (1854, भटनागर द्वारा उद्धृत): मज़हरूल सरूर महाराजा के संरक्षण में भरतपुर में हिन्दी और उर्दू के दो स्तंभों में छपता था।
- प्रभाकर: जयपुर का द्विभाषी रोज़तुल तालीम या राजपूताना अखबार 1856 में हेडमास्टर कन्हैयालाल के संपादन में शुरू हुआ।
- प्रभाकर: महाराणा सज्जन सिंह ने 1879 में उदयपुर में हिन्दी साप्ताहिक सज्जन कीर्ति सुधाकर शुरू किया।
विकल्प (2) और (4) दूसरे पत्रों के वर्ष हैं। भटनागर की मासिक पत्रों की सूची मज़हरूल सरूर को 1852 का बताती है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- जयपुर, 1856 को पहला पत्र मान लेना। रोज़तुल तालीम वह प्राचीनतम पत्र है जिसकी फ़ाइल बची है, पर मज़हरूल सरूर (1849) उससे पहले आया।
- सज्जन कीर्ति सुधाकर के भली-भाँति दर्ज होने के कारण उदयपुर, 1879 चुन लेना। यह मज़हरूल सरूर के तीन दशक बाद शुरू हुआ।
- बिना स्रोत के मज़हरूल सरूर का वर्ष तय कर देना। प्रभाकर 1849 देते हैं; भटनागर दो सूचियों में 1849 और मासिक पत्रों की सूची में 1852 देते हैं।
कोई प्रश्न किसी आरंभिक समाचार पत्र का नाम देकर पूछ सकता है कि वह कहाँ से और कब प्रकाशित हुआ, जैसा यहाँ है।
कोई प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि राजस्थान का पहला समाचार पत्र कौन-सा था, या अलग-अलग रियासतों के आरंभिक पत्रों को कालक्रम में रखवा सकता है।
संबंधित PYQ
बिजोलिया किसान आन्दोलन के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : A. बिजोलिया किसान आन्दोलन सम्बन्धी जानकारी देने हेतु विजय सिंह पथिक गांधीजी से मिलने वर्धा गये थे । B. प्रयाग के अभ्युदय एवं कलकत्ता के भारत मित्र समाचार–पत्रों ने बिजोलिया किसान आन्दोलन सम्बन्धी समाचारों का नियमित रूप से प्रकाशन किया था । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर को चुनिये :
- (1) केवल A सही है ।
- (2) केवल B सही है ।
- (3) A और B दोनों सही हैं ।
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उत्तर(2)
फिर से समाचार पत्र, एक आंदोलन में: वह प्रश्न पूछता है कि क्या विजय सिंह पथिक बिजोलिया किसान आन्दोलन सम्बन्धी जानकारी देने हेतु गांधीजी से मिलने वर्धा गये थे और क्या प्रयाग के अभ्युदय एवं कलकत्ता के भारत मित्र ने इसके समाचारों का नियमित प्रकाशन किया (RPSC की कुंजी: विकल्प (2), केवल B सही है)। यह प्रश्न राजस्थान के पहले समाचार पत्र के बारे में है।
अभ्यास
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मनोहर प्रभाकर के अनुसार राजस्थान का वह प्राचीनतम समाचार पत्र कौन-सा है जिसकी फ़ाइल अब भी उपलब्ध है?
- (a)मज़हरूल सरूर
- (b)रोज़तुल तालीम (राजपूताना अखबार)
- (c)सज्जन कीर्ति सुधाकर
- (d)जगलाभ चिंतक
उत्तर(2) — प्रभाकर रोज़तुल तालीम (जयपुर, 1856) को प्राचीनतम उपलब्ध पत्र बताते हैं, जिसकी फ़ाइल जयपुर के महाराजा सार्वजनिक पुस्तकालय में सुरक्षित है। मज़हरूल सरूर (1) पुराना है, पर उसकी कोई प्रति नहीं बची। जगलाभ चिंतक (4) 1861 में और सज्जन कीर्ति सुधाकर (3) 1879 में आया। - अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
हिन्दी साप्ताहिक 'सज्जन कीर्ति सुधाकर' 1879 में कहाँ से शुरू हुआ?
- (a)भरतपुर
- (b)जयपुर
- (c)उदयपुर
- (d)जोधपुर
उत्तर(3) — प्रभाकर के अनुसार मेवाड़ के महाराणा सज्जन सिंह ने इसे 1879 में उदयपुर से शुरू किया। भरतपुर (1) मज़हरूल सरूर का, जयपुर (2) रोज़तुल तालीम का, और जोधपुर (4) मारवाड़ गजट का स्थान है।