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(a) Explain in simple Hindi any ONE of the following poetic stanzas: (i) "जाती न रही साथु री, पूछ लीजिए जान। मोक्ष करो नवतरह का, उठा रहन दो न्यान। हस्ती पतित ज्ञान कह, सहज दुनिया आरी। स्वान-स्व रूप संसार है, भूँक दे इक मारी।" OR (ii) "जो अगणित लघु दीप हमारे, तूफानों में एक किनारे, जल-जलकर बुझे गये किसी दिन- माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल! कलम, आज उनकी जय बोल! पावन जिनकी लाल शिखाएँ, उज्ज्वल रही ज्वलन्त दिशाएँ, जिनके सिंहनाद से धरनी- धरती रही अभी तक डोल! कलम, आज उनकी जय बोल!"
(b) Explain in simple Hindi any ONE of the following prose passages: (i) "क्रोध पापी-अंग करने वाला मानसिक विकार है। एक का क्रोध दूसरे में भी क्रोध का संचार करता है... इसी से धर्म, नीति और शिष्टाचार तीनों में क्रोध के विरोध का उपदेश पाया जाता है।" OR (ii) "कहीं न करना बदतमीज़ी की बात नहीं। अपनी इच्छा नहीं है या सामर्थ्य नहीं है, इसके लिये कोई हमें बुरा नहीं कह सकता... बाहर निकल आये तो बुरी है।"
This is Question 4 from HPSC Mains 2014 (Mains - Hindi 2014)..
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