भारत का सबसे बड़ा द्वितीय नदी बेसिन है :
- (a)महानदी नदी बेसिन
- (b)नर्मदा नदी बेसिन
- (c)गोदावरी नदी बेसिन
- (d)कावेरी नदी बेसिन
सही — C, गोदावरी नदी बेसिन। गोदावरी 3,12,812 वर्ग किमी का अपवाह-क्षेत्र रखती है और महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में त्र्यंबकेश्वर की ब्रह्मगिरि पहाड़ी से, लगभग 920 मीटर की ऊँचाई से, 1,465 किमी चलकर पूरे प्रायद्वीप को पार करती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है — गंगा के बाद भारत की दूसरी सबसे लम्बी नदी। उसका बेसिन महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक और पुद्दुचेरी (यनम) में फैला है, जिसमें अब तक का सबसे बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र का है, लगभग आधा; बाईं ओर से पूर्णा, प्राणहिता, इंद्रावती और सबरी और दाईं ओर से प्रवरा, मंजीरा तथा मानेर उसे भरती हैं, और राजमहेंद्रवरम के पास धवलेश्वरम बैराज पर वह डेल्टा बनकर फैल जाती है, जहाँ गौतमी और वसिष्ठ गोदावरी में बँट जाती है। बाक़ी तीन विकल्पों के मुक़ाबले यह कोई नज़दीकी मुक़ाबला है ही नहीं : महानदी स्रोत के अनुसार लगभग 1.3–1.4 लाख वर्ग किमी, नर्मदा 98,796 वर्ग किमी, कावेरी 81,155 वर्ग किमी। इस प्रश्न पर आयोग की अपनी प्रकाशित टिप्पणी कहती है कि गोदावरी बेसिन ‘प्रायद्वीपीय भारत का सबसे बड़ा नदी बेसिन है और भारत में गंगा बेसिन के बाद दूसरा सबसे बड़ा है’। उसका पहला भाग नितांत स्पष्ट है और यही याद रखने लायक़ तथ्य है — कोई भी प्रायद्वीपीय बेसिन गोदावरी के आसपास नहीं फटकता, और इसीलिए उसे दक्षिण गंगा कहा जाता है। दूसरे भाग पर सटीक रहिए। गंगा बेसिन भारत के भीतर लगभग 8.61 लाख वर्ग किमी घेरता है, और सिंधु बेसिन का भारतीय हिस्सा लगभग 3.21 लाख वर्ग किमी आँका जाता है — गोदावरी के 3,12,812 से कुछ ही अधिक — इसलिए आयोग की अपनी टिप्पणी उसे ‘प्रायद्वीपीय भारत का सबसे बड़ा नदी बेसिन और भारत में गंगा बेसिन के बाद दूसरा सबसे बड़ा’ कहती है, और प्रश्नपत्र का आशय यही है; भारत के भीतर अपवाह-क्षेत्र के हिसाब से सिंधु बेसिन का भारतीय हिस्सा गोदावरी से बड़ा है, इसलिए जो क्रम उसे गिनेगा वह गोदावरी को तीसरे स्थान पर रखेगा। कुंजी पर इसका कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि सिंधु विकल्प-सूची में है ही नहीं : जो चार नदियाँ छपी हैं, उनमें गोदावरी का बेसिन दूसरे सबसे बड़े से दुगुने से भी अधिक है।
- (a)महानदी नदी बेसिन — सूची में सबसे नज़दीकी प्रतिद्वंद्वी और यही कारण है कि प्रश्न मामूली नहीं है : महानदी 900 किमी लम्बी है, छत्तीसगढ़ के धमतरी ज़िले में नगरी-सिहावा से लगभग 890 मीटर की ऊँचाई से निकलती है, मुख्यतः छत्तीसगढ़ और ओडिशा को सींचती है, और उस पर हीराकुंड बाँध है। पर उसका बेसिन लगभग 1.3–1.4 लाख वर्ग किमी है — गोदावरी के 3,12,812 के आधे से भी काफ़ी कम।
- (b)नर्मदा नदी बेसिन — यह इसलिए ललचाता है कि नर्मदा के पास एक अलग श्रेष्ठतावाचक उपाधि है — वह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी पश्चिम-वाहिनी नदी है, जो मध्य प्रदेश के अनूपपुर ज़िले में अमरकंटक पठार के नर्मदा कुंड से खम्भात की खाड़ी तक 1,312 किमी बहती है। उसका बेसिन केवल 98,796 वर्ग किमी है, क्योंकि वह विंध्य और सतपुड़ा के बीच बंद एक सँकरी भ्रंश-घाटी में चलती है और उसे लगभग कोई लम्बी सहायक नदी मिलती ही नहीं।
- (d)कावेरी नदी बेसिन — चारों में सबसे छोटा। कावेरी कर्नाटक के कोडगु ज़िले की ब्रह्मगिरि पहाड़ियों में 1,341 मीटर पर स्थित तलकावेरी से लगभग 800 किमी लम्बी है, और उसका बेसिन 81,155 वर्ग किमी है — गोदावरी के लगभग चौथाई। अंतर्राज्यीय जल-विवाद की सुर्ख़ियों में उसकी लगातार मौजूदगी उसे जो प्रमुखता देती है, उसका बेसिन के आकार से कोई नाता नहीं।
नदी बेसिन, या जलग्रहण क्षेत्र, ज़मीन का वह पूरा क्षेत्र है जिसका धरातलीय अपवाह एक ही नदी और उसकी सहायक नदियों में जाता है, और जिसकी सीमा कटक-रेखाओं के सहारे चलने वाला जल-विभाजक बनाता है। इसलिए बेसिन का आकार पार्श्व-विस्तार से तय होता है — यानी नदी की सहायक धाराएँ दोनों ओर कितनी दूर तक फैलती हैं — मुख्य धारा की लम्बाई से नहीं। भारत का अपवाह दो बहुत अलग कुलों में बँटता है। हिमालयी नदियाँ हिम और हिमनद से पोषित, बारहमासी होती हैं और उत्तरी मैदानों के आर-पार विशाल जलोढ़ बेसिन काटती हैं; प्रायद्वीपीय नदियाँ वर्षा-पोषित और मौसमी होती हैं, पुरानी कठोर चट्टान पर परिपक्व, उथली घाटियों में बहती हैं और अपने मार्गों में काफ़ी हद तक स्थिर रहती हैं। प्रायद्वीप का जल-विभाजक पश्चिमी घाट है, जो पश्चिमी तट के बहुत पास और उसके समानांतर चलता है, इसलिए प्रायद्वीपीय अपवाह का अधिकांश भाग पूरे पठार की चौड़ाई पार करके पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी में जाने को मजबूर है। गोदावरी, कृष्णा, महानदी और कावेरी सब इसी ज्यामिति की उपज हैं; नर्मदा और तापी अपवाद हैं, जो भ्रंश-सीमित दरार-घाटियों में पश्चिम की ओर उतरती हैं।
उत्तर तक पहुँचने का एक तेज़ और भरोसेमंद रास्ता है चारों को लम्बाई से क्रम में रख देना, जो आप लगभग निश्चित रूप से जानते हैं : गोदावरी 1,465 किमी, नर्मदा 1,312 किमी, महानदी 900 किमी, कावेरी लगभग 800 किमी। इससे गोदावरी पहले स्थान पर आ जाती है और अंक मिल जाता है। पर इस छोटे रास्ते का सामान्यीकरण मत कीजिए, क्योंकि यह ठीक अगली जोड़ी पर ही धोखा दे जाता है — नर्मदा महानदी से 400 किमी लम्बी है, फिर भी उसका बेसिन छोटा है (98,796 वर्ग किमी बनाम लगभग 1.3–1.4 लाख), और कारण सीधा है : दो श्रेणियों के बीच घिरी दरार-घाटी की नदी के पास दोनों ओर फैलने की जगह होती ही नहीं। गोदावरी के लिए असली विभेदक पार्श्व-विस्तार है : वही अकेली प्रायद्वीपीय नदी है जिसकी सहायक धाराएँ उत्तर-पूर्व में छत्तीसगढ़ और ओडिशा तक धकेलती हैं (इंद्रावती, सबरी), जबकि दूसरी वापस पश्चिम में महाराष्ट्र की ओर चलती हैं (पूर्णा, प्राणहिता) और कुछ दक्षिण में तेलंगाना तथा कर्नाटक तक (मंजीरा)। पाँच राज्यों तक का यही फैलाव बेसिन को 3.13 लाख वर्ग किमी बनाता है। आख़िरी अनुशासन ‘भारत में दूसरा सबसे बड़ा’ वाले वाक्यांश के साथ बरतना है — वह यहाँ केवल इसलिए सुरक्षित है कि विकल्पों में सिंधु नहीं है।
- गोदावरी : लम्बाई 1,465 किमी, बेसिन 3,12,812 वर्ग किमी; गंगा के बाद भारत की दूसरी सबसे लम्बी नदी; उद्गम महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में त्र्यंबकेश्वर की ब्रह्मगिरि पहाड़ी पर, लगभग 920 मीटर की ऊँचाई से; दक्षिण गंगा के नाम से जानी जाती है
- गोदावरी बेसिन के राज्य, आठों के आठ : महाराष्ट्र (लगभग 48.7%, कहीं सबसे बड़ा), आंध्र प्रदेश और तेलंगाना मिलाकर, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक तथा पुद्दुचेरी का यनम परिक्षेत्र। पाँच राज्यों वाली एक सूची ख़ूब चलती है, जो मध्य प्रदेश और कर्नाटक को छोड़ देती है; उसके प्रतिशत जोड़ने पर केवल लगभग 88% बनते हैं, और यही उसकी पोल खोल देता है
- जिस तुलना पर प्रश्न टिका है : गोदावरी 3,12,812 वर्ग किमी बनाम महानदी लगभग 1.3–1.4 लाख वर्ग किमी, नर्मदा 98,796 वर्ग किमी और कावेरी 81,155 वर्ग किमी
- क्रम पर चेतावनी : गंगा बेसिन भारत के भीतर लगभग 8.61 लाख वर्ग किमी और सिंधु बेसिन का भारतीय हिस्सा लगभग 3.21 लाख वर्ग किमी घेरता है, इसलिए मानक सन्दर्भ-ग्रंथ गोदावरी को भारत का तीसरा सबसे बड़ा बेसिन कहते हैं — फिर भी वह निर्विवाद रूप से प्रायद्वीपीय भारत का सबसे बड़ा बेसिन है, और आयोग की कुंजी इसलिए टिकती है कि सिंधु विकल्प है ही नहीं
- गोदावरी की सहायक नदियाँ और डेल्टा : बायाँ तट — पूर्णा, प्राणहिता, इंद्रावती और सबरी; दायाँ तट — प्रवरा, मंजीरा और मानेर; डेल्टा राजमहेंद्रवरम के पास धवलेश्वरम बैराज से शुरू होता है, जहाँ नदी गौतमी गोदावरी और वसिष्ठ गोदावरी में बँट जाती है
छपे हुए चार विकल्पों में गोदावरी दूसरे सबसे बड़े से दुगुने से भी अधिक है — रेखांकित जोड़ी ही एकमात्र तुलना है जो मायने रखती है। कोष्ठक वाली दो पंक्तियाँ दिखाती हैं कि ‘भारत में दूसरा सबसे बड़ा’ वाक्यांश में सावधानी क्यों चाहिए : पूरा गिनने पर सिंधु बेसिन का भारतीय हिस्सा गोदावरी से थोड़ा आगे निकल जाता है।
- ‘भारत का दूसरा सबसे बड़ा नदी बेसिन’ को बिना शर्त वाला क्रम मान लेना — यह आयोग की शब्दावली है और प्रायद्वीपीय भारत के लिए तथा सामान्य गणना पर सही है; सिंधु बेसिन का भारतीय हिस्सा (लगभग 3.21 लाख वर्ग किमी) गिन लिया जाए तो गोदावरी तीसरे स्थान पर चली जाएगी, और कुंजी इसलिए टिकती है कि सिंधु विकल्पों में नहीं है
- बेसिन क्षेत्रफल के लिए नदी की लम्बाई को आधार बना लेना — नर्मदा 1,312 किमी है और महानदी 900 किमी, फिर भी नर्मदा का बेसिन (98,796 वर्ग किमी) दोनों में छोटा है
- नर्मदा की असली श्रेष्ठतावाचक उपाधि — सबसे बड़ी पश्चिम-वाहिनी प्रायद्वीपीय नदी — को गोदावरी की उपाधि, यानी सबसे बड़े प्रायद्वीपीय बेसिन, के साथ गड्डमड्ड कर देना
BPSC श्रेष्ठतावाचक तथ्य सीधे पूछता है और कठिनाई का बोझ विकल्प-सूची पर डाल देता है — तीन प्रायद्वीपीय बेसिन, जो सब आराम से छोटे हैं, इसलिए एक याद किया हुआ क्रम ही काम निकाल देता है। UPSC को क्रम याद कराने के बजाय बेसिन जुड़वाना पसंद है : 2015 में उसने पूछा कि वंशधारा, इंद्रावती, प्राणहिता और पेन्नार में से कौन गोदावरी की सहायक नदियाँ हैं, और 2003 में चार प्रायद्वीपीय नदियों को लम्बाई के क्रम में लगाने को कहा।
गोदावरी, महानदी, नर्मदा और ताप्ती — इन नदियों का लम्बाई के अवरोही क्रम में सही अनुक्रम क्या है ?
- (a) गोदावरी—महानदी—नर्मदा—ताप्ती
- (b) गोदावरी—नर्मदा—महानदी—ताप्ती
- (c) नर्मदा—गोदावरी—ताप्ती—महानदी
- (d) नर्मदा—ताप्ती—गोदावरी—महानदी
उत्तर(b) गोदावरी—नर्मदा—महानदी—ताप्ती
प्रायद्वीपीय नदियों का वही परिमाण-क्रम, और चार में से तीन नाम BPSC की विकल्प-सूची जैसे ही हैं — और यह सबसे साफ़ प्रमाण है कि लम्बाई और बेसिन क्षेत्रफल को एक ही चीज़ नहीं मानना चाहिए, क्योंकि यह लम्बाई में नर्मदा को महानदी से ऊपर रखता है जबकि बेसिन के आँकड़े उलटी दिशा में चलते हैं।
निम्नलिखित नदियों पर विचार कीजिए : 1. वंशधारा 2. इंद्रावती 3. प्राणहिता 4. पेन्नार ऊपर दी गई नदियों में से कौन-सी गोदावरी की सहायक नदियाँ हैं ?
- (a) 1, 2 और 3
- (b) 2, 3 और 4
- (c) 1, 2 और 4
- (d) केवल 2 और 3
उत्तर(d) केवल 2 और 3
BPSC के उत्तर के पीछे का कारण, भीतर से पूछा गया : इंद्रावती और प्राणहिता वे लम्बी बायीं-तट भुजाएँ हैं जो गोदावरी के जलग्रहण को छत्तीसगढ़, ओडिशा और भीतरी महाराष्ट्र तक खींच लाती हैं, और यही पार्श्व-विस्तार इस बेसिन को प्रायद्वीपीय भारत का सबसे बड़ा बनाता है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित नदी बेसिनों को अपवाह-क्षेत्र के अवरोही क्रम में लगाइए : 1. नर्मदा 2. गोदावरी 3. कावेरी 4. महानदी नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)2, 1, 4, 3
- (b)2, 4, 1, 3
- (c)4, 2, 1, 3
- (d)2, 4, 3, 1
उत्तर(b) 2, 4, 1, 3 — गोदावरी 3,12,812 वर्ग किमी, महानदी लगभग 1.3–1.4 लाख वर्ग किमी, नर्मदा 98,796 वर्ग किमी, कावेरी 81,155 वर्ग किमी। प्रश्न को तय करने वाली जोड़ी महानदी बनाम नर्मदा है : नर्मदा 1,312 किमी बनाम 900 किमी के साथ लम्बी नदी है, पर विंध्य और सतपुड़ा के बीच दबी दरार-घाटी की नदी के पास लम्बी सहायक नदियों के लिए जगह नहीं होती, इसलिए उसका बेसिन दोनों में छोटा है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी पश्चिम-वाहिनी नदी कौन-सी है ?
- (a)तापी
- (b)नर्मदा
- (c)माही
- (d)पेरियार
उत्तर(b) नर्मदा — अमरकंटक पठार के नर्मदा कुंड से 1,312 किमी, जो 98,796 वर्ग किमी को सींचती हुई दरार-घाटी से होकर पश्चिम में खम्भात की खाड़ी में गिरती है। तापी दूसरी पश्चिम-वाहिनी नदी है और सतपुड़ा के दक्षिण में समानांतर दरार में बहती है; माही कहीं छोटी है; और पेरियार पश्चिमी घाट की एक छोटी केरल नदी है।