बिहार राज्य ने पहली बार ग्रीन बजट कब पेश किया ?
- (a)वित्तीय वर्ष 2018-19
- (b)वित्तीय वर्ष 2020-21
- (c)वित्तीय वर्ष 2019-20
- (d)वित्तीय वर्ष 2021-22
सही — B, वित्तीय वर्ष 2020-21। बिहार का ग्रीन बजट वार्षिक राज्य बजट के साथ विधानमंडल के समक्ष रखा जाने वाला एक अलग दस्तावेज़ है, जो विभागों में बिखरी उन सभी योजनाओं को एक जगह जोड़ता है जिनका कोई पर्यावरणीय या जलवायु उद्देश्य है, और दिखाता है कि राज्य उन पर कुल कितना ख़र्च कर रहा है। यह शृंखला वित्तीय वर्ष 2020-21 से शुरू होती है : राज्य वित्त विभाग के अपने बजट पोर्टल पर सबसे पुराना ग्रीन बजट दस्तावेज़ 2020-21 का ही है, उससे पहले का कोई नहीं, और शृंखला का गणित इसकी स्वतंत्र पुष्टि करता है — 2026-27 के लिए प्रस्तुत ग्रीन बजट को बिहार का सातवाँ बताया गया है, और 2026-27 से सात पीछे गिनने पर ठीक 2020-21 आता है। उस पहले दस्तावेज़ का आकार वर्ष के साथ याद रखने लायक है, क्योंकि वही इस तथ्य को सूखी तिथि के बजाय ठोस बनाता है : लगभग 5,693 करोड़ रुपये, यानी उस वर्ष के कुल राज्य बजट का लगभग 7 प्रतिशत, जो 96 योजनाओं में फैला था। इसके बाद हरित हिस्सा 2021-22 में 9.6 प्रतिशत से ऊपर गया और 2023-24 में 12.5 प्रतिशत के शिखर पर पहुँचकर फिर कुछ नीचे आया, जबकि दस्तावेज़ में योजनाओं की संख्या 2026-27 तक बढ़कर 298 हो गई — मूल 96 से तीन गुना से भी अधिक। इसलिए उत्तर केवल '2020 के आस-पास कोई वर्ष' नहीं है; यह एक ऐसी शृंखला की पहली प्रविष्टि है जिसकी वृद्धि वर्ष-दर-वर्ष देखी जा सकती है।
- (a)वित्तीय वर्ष 2018-19 — दो वर्ष पहले। राज्य के बजट पोर्टल पर 2018-19 का कोई ग्रीन बजट दस्तावेज़ है ही नहीं, और 2018-19 बिहार की जलवायु संबंधी पहलों के पूरे गुच्छे से पहले पड़ता है — जल-जीवन-हरियाली मिशन स्वयं 2019 में ही शुरू हुआ था।
- (c)वित्तीय वर्ष 2019-20 — सबसे आकर्षक गलत उत्तर, और उसका असली कारण है : 2019-20 वही वर्ष है जब ओडिशा ने जलवायु बजट प्रस्तुत किया, और वही वर्ष है जब बिहार ने जल-जीवन-हरियाली शुरू किया, इसलिए जिस अभ्यर्थी ने '2019 के आस-पास' पर लंगर डाल रखा है वह इसे ही चुनेगा। पर बिहार का अपना ग्रीन बजट दस्तावेज़ 2020-21 से शुरू होता है।
- (d)वित्तीय वर्ष 2021-22 — यह दूसरा ग्रीन बजट है, पहला नहीं — वही वर्ष जिसमें राज्य बजट में हरित हिस्सा 9.6 प्रतिशत से ऊपर पहुँचा। जिन अभ्यर्थियों को पहले वर्ष के बजाय दूसरे वर्ष का कोई आँकड़ा याद है, यह विकल्प उन्हीं को पकड़ने के लिए रखा गया है।
ग्रीन बजट कोई नया पैसा नहीं बनाता; वह मौजूदा बजट को ही पर्यावरणीय दृष्टि से दोबारा पढ़ता है। विभाग उन योजनाओं को चिह्नित करते हैं जिनके आवंटन पर्यावरणीय या जलवायु उद्देश्य पूरे करते हैं — वनरोपण, तालाब और नदी पुनरुज्जीवन, सौर ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन, अपशिष्ट प्रबंधन, सिंचाई दक्षता — और वित्त विभाग उन चिह्नित मदों को एक विवरण में समेटकर सदन के समक्ष रखता है। यह तकनीक वही है जो लैंगिक बजटिंग में काम आती है, जहाँ महिलाओं को लाभ पहुँचाने वाले आवंटन अलग करके बताए जाते हैं, और दोनों 'बजट टैगिंग' उपकरणों के उस बड़े परिवार के हैं जिनकी सिफ़ारिश उन अनुप्रस्थ प्राथमिकताओं पर नज़र रखने के लिए की जाती है जिनका स्वामी कोई एक विभाग नहीं होता। इसका मूल्य पारदर्शिता और समय के साथ तुलना में है : चूँकि चिह्नित कुल को पूरे बजट के अनुपात में बताया जा सकता है, इसलिए विधानमंडल पूछ सकता है कि पर्यावरणीय हिस्सा बढ़ रहा है या घट रहा। इसकी सीमा भी उतनी ही वास्तविक है, और बिहार का अपना रिकॉर्ड उसे दिखाता है — चिह्नित राशि बढ़ सकती है जबकि ज़मीन पर भौतिक संकेतक बहुत कम हिलें, क्योंकि टैगिंग मंशा और व्यय मापती है, परिणाम नहीं।
इस तथ्य को थामने का तरीक़ा यह है कि उसे सूखे वर्ष की तरह रटने के बजाय उसके आस-पास के नीति-गुच्छे से बाँध दिया जाए। बिहार का पर्यावरणीय अभियान जल-जीवन-हरियाली के इर्द-गिर्द बना है, जो 2019 में शुरू हुआ राज्य का प्रमुख जल और हरियाली मिशन है, और ग्रीन बजट वह वित्तीय प्रतिवेदन-उपकरण है जो उसके ठीक बाद, 2020-21 से आया। यही क्रम — पहले 2019 में मिशन, फिर 2020-21 से ग्रीन बजट — विकल्प (c) को विकल्प (b) से अलग करता है, और परीक्षक ने ठीक इसी युग्म को आमने-सामने रखा है। एक दावा सावधानी से सँभालने लायक है : बिहार को बहुत व्यापक रूप से, राज्य सरकार की सामग्री सहित, ग्रीन बजट प्रस्तुत करने वाला पहला भारतीय राज्य कहा जाता है। इसे उस विशेष नाम वाले दस्तावेज़ के बारे में दावा मानिए, न कि तय हो चुकी प्राथमिकता, क्योंकि ओडिशा 2019-20 के लिए जलवायु बजट पहले ही प्रस्तुत कर चुका था। परीक्षा के लिए जिस तथ्य की जाँच हो रही है वह बिहार के अपने पहले ग्रीन बजट का वर्ष — 2020-21 — है, और 'पहला कौन' वाली बहस उसे नहीं हिलाती।
- बिहार का पहला ग्रीन बजट वित्तीय वर्ष 2020-21 का था; राज्य वित्त पोर्टल पर सबसे पुराना ऐसा दस्तावेज़ उसी वर्ष का है।
- वह लगभग 5,693 करोड़ रुपये का था, यानी 2020-21 के बिहार के कुल बजट का लगभग 7 प्रतिशत, और उसमें 96 योजनाएँ शामिल थीं।
- हरित हिस्सा 2021-22 में 9.6 प्रतिशत से ऊपर गया और 2023-24 में 12.5 प्रतिशत के शिखर पर पहुँचा; 2026-27 का ग्रीन बजट बिहार का सातवाँ है और उसमें 298 योजनाएँ हैं।
- बिहार का प्रमुख जल-संरक्षण और हरियाली मिशन जल-जीवन-हरियाली 2019 में शुरू हुआ — पहले ग्रीन बजट से एक वर्ष पहले, और इसीलिए 2019-20 लुभावना गलत उत्तर है।
- बिहार को प्रायः ग्रीन बजट प्रस्तुत करने वाला पहला भारतीय राज्य कहा जाता है, पर ओडिशा 2019-20 के लिए जलवायु बजट पहले ही प्रस्तुत कर चुका था, इसलिए 'पहला' वाला दावा इस पर निर्भर करता है कि दस्तावेज़ को कहा क्या जा रहा है।

- जल-जीवन-हरियाली के आरंभ (2019) को पहले ग्रीन बजट (वित्तीय वर्ष 2020-21) से गड्डमड्ड कर देना
- 'बिहार ग्रीन बजट प्रस्तुत करने वाला भारत का पहला राज्य है' को बिना शर्त तथ्य की तरह दोहराना — ओडिशा का 2019-20 का जलवायु बजट पहले आ चुका था
- ग्रीन बजट को पर्यावरण के लिए अतिरिक्त धन समझ लेना; वह मौजूदा योजना-आवंटनों का पुनः चिह्नांकन और समेकन है
BPSC बिहार की योजनाओं और वित्तीय उपकरणों को सीधे वर्ष-पहचान वाले प्रश्नों के रूप में पूछता है, और भ्रामक विकल्प सच्चाई के दोनों ओर एक-एक वर्ष पर रखता है, इसलिए मोटी-मोटी स्मृति का कोई मोल नहीं और ठीक वर्ष का पूरा एक अंक। UPSC किसी राज्य के बजट का वर्ष लगभग कभी नहीं पूछता; वह पूछता है कि कोई योजना किसलिए है, और ऐसे कथन-समुच्चय बनाता है जिनमें कोई विश्वसनीय लगता उद्देश्य — जैसे बजट में हरित लेखांकन — इसलिए अस्वीकार करना पड़ता है कि वह किसी दूसरे उपकरण का काम है।
निम्नलिखित में से कौन-सा/से भारत सरकार के 'हरित भारत मिशन' के लक्ष्य का सर्वोत्तम वर्णन करता है/करते हैं ? 1. पर्यावरणीय लाभों और लागतों को संघ तथा राज्य बजटों में सम्मिलित करना और इस प्रकार 'हरित लेखांकन' लागू करना 2. भविष्य में सबके लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए दूसरी हरित क्रांति शुरू करना 3. वन आवरण को पुनर्स्थापित तथा संवर्धित करना और अनुकूलन एवं शमन उपायों के मेल से जलवायु परिवर्तन का उत्तर देना नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर(c) केवल 3
उसका कथन 1 ठीक वही बताता है जो ग्रीन बजट करता है — पर्यावरणीय लाभों और लागतों को संघ तथा राज्य बजटों में सम्मिलित करना, यानी हरित लेखांकन — और UPSC की बात यह है कि वह एक अलग उपकरण है, हरित भारत मिशन का काम नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जल-जीवन-हरियाली अभियान, जो प्रमुख जल-संरक्षण और हरियाली मिशन है, किस राज्य का है ?
- (a)ओडिशा
- (b)बिहार
- (c)झारखंड
- (d)मध्य प्रदेश
उत्तर(b) बिहार — 2019 में शुरू हुआ यह अभियान तालाब तथा आहर-पइन के जीर्णोद्धार, पौधरोपण, वर्षा जल संचयन और सौर ऊर्जा को समेटता है, और इसकी योजनाएँ 2020-21 से बिहार के ग्रीन बजट में जाती हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत 'ग्रीन बजट' का सबसे सही वर्णन क्या है ?
- (a)पर्यावरणीय कार्यों के लिए संचित निधि से बाहर बनाई गई एक अलग निधि
- (b)विभागों में पहले से बिखरे पर्यावरण-संबंधी आवंटनों को समेटने वाला एक विवरण
- (c)बजट का वह हिस्सा जो बाज़ार में जारी हरित बॉन्डों से वित्तपोषित हो
- (d)जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के अंतर्गत राज्यों के लिए नियत केंद्रीय अनुदान
उत्तर(b) विभागों में पहले से बिखरे पर्यावरण-संबंधी आवंटनों को समेटने वाला एक विवरण — यह लैंगिक बजटिंग की तरह चिह्नांकन और प्रतिवेदन की क़वायद है, कोई नई निधि या धन का नया स्रोत नहीं।