भारतीय मुद्रा पर 1913 में नियुक्त रॉयल कमीशन का अध्यक्ष कौन था ?
- (a)जे. एम. कीन्स
- (b)जेम्स विल्सन
- (c)सर डब्ल्यू. आर. मेन्स्फील्ड
- (d)सर ऑस्टिन चैम्बरलेन
सही — D, सर ऑस्टिन चैम्बरलेन। 1913 में नियुक्त निकाय था भारतीय वित्त एवं मुद्रा पर रॉयल कमीशन, और वह सर्वत्र अपने अध्यक्ष के नाम से चैम्बरलेन आयोग कहलाता है। ऑस्टेन चैम्बरलेन — प्रश्नपत्र 'ऑस्टिन' छापता है — वरिष्ठ ब्रिटिश अनुदारवादी राजनेता थे, जो राजकोष के चांसलर रह चुके थे, और उन्होंने इस जाँच की अध्यक्षता की कि भारत की मौद्रिक व्यवस्था कैसे संगठित हो, विशेषकर यह कि तब चल रहा स्वर्ण-विनिमय मानक बनाए रखा जाए या नहीं। आयोग ने 1914 में रिपोर्ट दी और चालू व्यवस्था का समर्थन किया, और उसके बाद उसकी सिफ़ारिशें प्रथम विश्वयुद्ध की चपेट में बड़े पैमाने पर पीछे छूट गईं। विकल्प (a) ख़तरनाक इसलिए है कि जॉन मेनार्ड कीन्स सचमुच इसी आयोग में थे — वे उसके सबसे युवा सदस्य थे, उन्होंने उसी वर्ष, 1913 में, 'Indian Currency and Finance' प्रकाशित की थी, और उन्होंने भारत के लिए एक राज्य बैंक का प्रस्ताव रखता परिशिष्ट दिया था। किसी निकाय से जुड़ा सबसे प्रसिद्ध नाम होना और उसका नेतृत्व करना एक बात नहीं, और इस प्रकार के प्रश्न ठीक इसी भ्रम पर गढ़े जाते हैं। शेष दोनों इसी बहस के अलग दशकों के व्यक्ति हैं। जेम्स विल्सन 1859 में वायसराय की परिषद के पहले वित्त सदस्य के रूप में भारत आए, उन्होंने ब्रिटेन में 'द इकोनॉमिस्ट' की स्थापना की, 1860 में भारत में आयकर लागू किया और वह सरकारी काग़ज़ी मुद्रा चलवाई जो 1861 में आई — यानी 1913 से आधी शताब्दी पहले। सर डब्ल्यू. आर. मेन्स्फील्ड उन्नीसवीं शताब्दी का नाम है, और वह भी 1913 में नियुक्त किसी निकाय से बहुत दूर। केवल चैम्बरलेन ही वर्ष और अध्यक्ष के पद, दोनों पर बैठते हैं।
- (a)जे. एम. कीन्स — चिरपरिचित जाल, क्योंकि यह आधा सच है। कीन्स इसी आयोग के सदस्य थे, उसके सबसे युवा, और उन्होंने 1913 में 'Indian Currency and Finance' प्रकाशित की तथा भारत के लिए राज्य बैंक का प्रस्ताव रखता परिशिष्ट लिखा। उन्होंने उसकी अध्यक्षता नहीं की। जो प्रश्न पूछता है कि किसी निकाय का अध्यक्ष कौन था, वह ठीक उसके सबसे प्रसिद्ध सदस्य और उसके अध्यक्ष के बीच का भेद जाँच रहा है।
- (b)जेम्स विल्सन — विषय सही, पर आधी शताब्दी ग़लत। विल्सन वायसराय की परिषद के पहले वित्त सदस्य थे, जो 1859 में आए, और उन्होंने 1860 में भारत में आयकर लागू किया तथा उसके बाद आई सरकारी काग़ज़ी मुद्रा की शुरुआत की। उनका निधन 1860 में भारत में ही हो गया, यानी इस आयोग की नियुक्ति से पचास वर्ष से भी अधिक पहले।
- (c)सर डब्ल्यू. आर. मेन्स्फील्ड — उन्नीसवीं शताब्दी का नाम। यह यहाँ इसलिए है कि जिस अभ्यर्थी ने मुद्रा-समितियों की सूची तिथियों के बिना रट रखी है वह इसे पहचानकर यह जाँचे बिना ही उठा ले सकता है कि यह तो बिल्कुल दूसरे युग का है।
औपनिवेशिक शासन में भारत की मौद्रिक व्यवस्थाएँ समितियों और आयोगों की एक शृंखला से तय हुईं, और परीक्षा उस शृंखला को नामों सहित माँगती है। वे सब एक ही समस्या से जूझ रहे थे : रुपया चाँदी का सिक्का था, उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सोने के मुक़ाबले चाँदी का मूल्य तेज़ी से गिरा, और ब्रिटेन के प्रति भारत के दायित्व — गृह प्रभार — स्टर्लिंग में चुकाने पड़ते थे। 1892 की हर्शल समिति ने इसका उत्तर यह सिफ़ारिश करके दिया कि भारतीय टकसालें चाँदी की मुक्त ढलाई के लिए बंद कर दी जाएँ, जो 1893 में कर दिया गया। 1898 की फ़ाउलर समिति ने ब्रिटिश सॉवरेन को विधिग्राह्य मुद्रा बनाते हुए स्वर्ण मानक की सिफ़ारिश की, जिससे वह व्यवस्था बनी जो स्वर्ण-विनिमय मानक कहलाई। 1913–14 के चैम्बरलेन आयोग ने उस व्यवस्था की समीक्षा की और उसका समर्थन किया। युद्ध के बाद, हिल्टन यंग की अध्यक्षता वाले 1926 के भारतीय मुद्रा एवं वित्त पर रॉयल कमीशन ने स्वर्ण-सर्राफ़ा मानक तथा एक केंद्रीय बैंक की स्थापना की सिफ़ारिश की, और उसी सिफ़ारिश से अंततः 1934 का भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम बना, जिसके अधीन बैंक ने 1 अप्रैल 1935 को काम शुरू किया। इस शृंखला को क्रम से पढ़ लेना ही हर अलग नाम को याद रह जाने योग्य बनाता है।
इस क्षेत्र के प्रश्नों का निपटारा दो विभेद करते हैं। पहला है अध्यक्ष बनाम सदस्य, और यह आदत बनाना उपयोगी है कि जब भी किसी निकाय से कोई प्रसिद्ध नाम जुड़ा दिखे तो पूछा जाए कि उस व्यक्ति ने उसकी अध्यक्षता की थी या वे केवल उसमें बैठे थे। कीन्स और चैम्बरलेन आयोग इसका मानक उदाहरण है; आयोग चैम्बरलेन का नाम उसी कारण ढोता है जिस कारण हिल्टन यंग आयोग उनका नाम ढोता है। दूसरा है तिथि की छननी। यहाँ हर ग़लत विकल्प भारतीय मुद्रा-इतिहास का असली व्यक्ति है, पर किसी दूसरे दशक का — विल्सन 1859 से 1860 के — इसलिए सूची पहली बार सीखते समय हर नाम के आगे वर्ष लिख देना उन्हें तत्काल हटा देता है। यह याद रखना भी सहायक है कि इस काल में रॉयल कमीशन लगभग नियम से अपने अध्यक्षों के नाम पर ही जाने जाते थे, इसलिए यदि आपको याद आ जाए कि यह निकाय 'चैम्बरलेन आयोग' है तो आप प्रश्न का उत्तर पहले ही दे चुके हैं। बिहार के अभ्यर्थियों को ध्यान देना चाहिए कि समितियों की यही शृंखला कई अलग-अलग एक-पंक्ति प्रश्न देती है — किस समिति ने टकसालें बंद कराईं, किसने स्वर्ण मानक की सिफ़ारिश की, किसने केंद्रीय बैंक की — और शृंखला इतनी छोटी है कि पूरी सीखी जा सकती है।
- भारतीय वित्त एवं मुद्रा पर रॉयल कमीशन 1913 में ऑस्टेन चैम्बरलेन की अध्यक्षता में नियुक्त हुआ, जो पूर्व में राजकोष के चांसलर रह चुके थे, और उसने 1914 में रिपोर्ट दी; वह चैम्बरलेन आयोग के नाम से जाना जाता है
- जॉन मेनार्ड कीन्स उसके सबसे युवा सदस्य थे और उन्होंने 1913 में 'Indian Currency and Finance' प्रकाशित की तथा भारत के लिए राज्य बैंक का प्रस्ताव रखता परिशिष्ट दिया
- 'द इकोनॉमिस्ट' के संस्थापक जेम्स विल्सन 1859 से वायसराय की परिषद के पहले वित्त सदस्य थे, उन्होंने 1860 में भारत में आयकर लागू किया और उसके बाद आई सरकारी काग़ज़ी मुद्रा की शुरुआत की
- इस शृंखला के पहले चरण थे 1892 की हर्शल समिति, जिसकी सिफ़ारिश पर 1893 में भारतीय टकसालें चाँदी की मुक्त ढलाई के लिए बंद हुईं, और 1898 की फ़ाउलर समिति, जिसने स्वर्ण मानक की सिफ़ारिश की
- अगला रॉयल कमीशन, जिसकी अध्यक्षता 1926 में हिल्टन यंग ने की, भारत के लिए केंद्रीय बैंक की सिफ़ारिश लाया — वही सिफ़ारिश जिससे भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 बना, और जिसके अधीन बैंक ने 1 अप्रैल 1935 को काम शुरू किया

- किसी निकाय के अध्यक्ष के बजाय उसका सबसे प्रसिद्ध नाम चुन लेना; कीन्स इस आयोग के सदस्य थे, उसके प्रमुख नहीं
- मुद्रा-समितियों की सूची हर एक के साथ वर्ष जोड़े बिना सीखना, जिससे 1913 के किसी निकाय के लिए उन्नीसवीं शताब्दी के नाम भी विश्वसनीय लगने लगते हैं
- ऑस्टेन चैम्बरलेन को नेविल चैम्बरलेन से गड्डमड्ड करना; मुद्रा आयोग बड़े वाले का है, जो पहले राजकोष के चांसलर रह चुके थे
BPSC औपनिवेशिक आर्थिक इतिहास को सूखी पहचान के रूप में पूछती है — किस आयोग का अध्यक्ष कौन, किस वर्ष, और उसने क्या सिफ़ारिश की — और विकल्प-सूची में गढ़े हुए नामों के बजाय आसपास के दशकों की असली शख़्सियतें भर देती है। UPSC किसी आयोग का अध्यक्ष विरले ही पूछती है; वह पूछती है कि आयोग ने क्या सिफ़ारिश की, या उसके बजाय संस्थागत परिणाम जाँचती है, जैसे रिज़र्व बैंक कब स्थापित या राष्ट्रीयकृत हुआ।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. भारतीय रिज़र्व बैंक का राष्ट्रीयकरण 26 जनवरी 1950 को हुआ था। 2. भारत सरकार का उधार कार्यक्रम वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग संभालता है। ऊपर दिए गए इन कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर(d) न तो 1 और न ही 2
वही संस्था जिसकी ओर मुद्रा आयोगों की पूरी शृंखला बढ़ रही थी, अपनी तिथियों पर जाँची गई। रिज़र्व बैंक 1926 की हिल्टन यंग सिफ़ारिश से निकला, 1935 में खुला और 1 जनवरी 1949 को राष्ट्रीयकृत हुआ — न कि गणतंत्र दिवस 1950 को, जो कथन का जाल है।
किस आयोग ने अपने में किसी भारतीय सदस्य को न जोड़े जाने के कारण सभी राजनीतिक समूहों और दलों में असंतोष को और बढ़ा दिया?
- (a) वेल्बी आयोग
- (b) क्रिप्स मिशन
- (c) साइमन आयोग
- (d) कैबिनेट मिशन
उत्तर(c) साइमन आयोग
आयोग लगातार संस्करणों में औपनिवेशिक आयोग जाँचती है, और ध्यान दीजिए कि उसकी 2025 की विकल्प-सूची में भारतीय व्यय पर बना वेल्बी आयोग भी था — यानी वित्तीय जाँचों के उसी परिवार का एक और निकाय। इन्हें अध्यक्षों सहित तिथिबद्ध सूची के रूप में सीखना दोनों प्रश्नपत्रों में काम आता है।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
किस रॉयल कमीशन ने भारत के लिए केंद्रीय बैंक की स्थापना की सिफ़ारिश की, जिससे अंततः भारतीय रिज़र्व बैंक बना ?
- (a)चैम्बरलेन आयोग, 1913
- (b)हिल्टन यंग आयोग, 1926
- (c)फ़ाउलर समिति, 1898
- (d)हर्शल समिति, 1892
उत्तर(b) हिल्टन यंग आयोग, 1926 — औपचारिक रूप से भारतीय मुद्रा एवं वित्त पर रॉयल कमीशन, जिसकी सिफ़ारिश से भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 बना।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
वायसराय की परिषद के पहले वित्त सदस्य कौन थे, जिन्होंने 1860 में भारत में आयकर लागू किया ?
- (a)ऑस्टेन चैम्बरलेन
- (b)जेम्स विल्सन
- (c)जे. एम. कीन्स
- (d)लॉर्ड हिल्टन यंग
उत्तर(b) जेम्स विल्सन — 'द इकोनॉमिस्ट' के संस्थापक, जो 1859 में पहले वित्त सदस्य के रूप में भारत आए और अगले वर्ष आयकर लागू किया।