अनुक्रम 14, 10, 6, 2,... का 14वाँ पद क्या है ?
- (a)– 34
- (b)– 42
- (c)– 38
- (d)– 46
सही — C, – 38। छपे हुए चारों पद एक निश्चित मात्रा से घटते हैं — 14 से 10 यानी −4, 10 से 6 यानी −4, 6 से 2 यानी −4 — इसलिए यह समांतर श्रेढ़ी है जिसका प्रथम पद a = 14 और सार्व अंतर d = −4 है। समांतर श्रेढ़ी का n-वाँ पद a + (n − 1)d होता है, और n के बजाय (n − 1) क्यों आता है यह पकड़ रखने लायक़ है: पहले पद पर कोई क़दम नहीं लगा है, दूसरे पर एक लगा है, इसलिए चौदहवें पर तेरह लगे हैं। मान रखने पर 14वाँ पद = 14 + 13 × (−4) = 14 − 52 = −38। यदि सूत्र पर भरोसा न हो तो गिन लीजिए: अनुक्रम चलता है 14, 10, 6, 2, −2, −6, −10, −14, −18, −22, −26, −30, −34, −38, और चौदहवीं प्रविष्टि −38 है। विकल्प-समुच्चय असामान्य रूप से अच्छा बना है, और यह देखना कि कैसे बना है, ठीक-ठीक बता देता है कि अंक कहाँ कटते हैं। तीनों ग़लत उत्तर इसी अनुक्रम के असली पद हैं, बस ग़लत क्रमांक पर लिए गए हैं: −34 तेरहवाँ पद है, −42 पंद्रहवाँ और −46 सोलहवाँ। चारों विकल्प स्वयं भी उसी −4 के अंतर वाली समांतर श्रेढ़ी में हैं, इसलिए परिमाण का अंदाज़ा लगाकर या नज़र दौड़ाकर उन्हें अलग नहीं किया जा सकता; निर्णय केवल क्रमांक की गिनती करती है। इससे यह प्रश्न विशुद्ध रूप से 'एक कम-एक ज़्यादा' वाली भूल की परीक्षा बन जाता है, जो समांतर श्रेढ़ी के प्रश्नों की सबसे आम भूल है। उत्तर देने से पहले एक त्वरित जाँच: यह अनुक्रम पाँचवें पद पर ऋणात्मक हो जाता है, क्योंकि 14 − 4(n − 1) < 0 के लिए n > 4.5 चाहिए, और पाँचवाँ पद सचमुच −2 है। −2 से −4 के नौ और क़दम चलने पर चौदहवाँ पद −38 मिलता है, जिससे उत्तर की दूसरे रास्ते से पुष्टि हो जाती है।
- (a)– 34 — तेरहवाँ पद, और वही उत्तर जो तेरह के बजाय बारह बार अंतर लगाने से मिलता है — यानी 14 + 12 × (−4) से। यह उस उम्मीदवार की भूल है जो छपे हुए चार पद गिनकर 'चौदहवें' तक पहुँचने के लिए दस क़दम और जोड़ देता है, यह भूलकर कि चौथा पद पहले ही तीन क़दम आगे है।
- (b)– 42 — पंद्रहवाँ पद, जो सूत्र में n − 1 के बजाय n रखने से मिलता है: 14 + 14 × (−4) = −42। यह पिछली भूल का दर्पण-प्रतिबिंब है और यही कारण है कि सूत्र में (n − 1) रखा ही जाता है; जो उम्मीदवार a + nd लिखेगा वह इस प्रकार के हर समांतर श्रेढ़ी प्रश्न में यहीं आ गिरेगा।
- (d)– 46 — सोलहवाँ पद, उत्तर से दो क़दम आगे। यह वही निकलता है जो उम्मीदवार दोनों चूकें एक साथ करता है — n − 1 के बजाय n लगाना और फिर गिनते समय एक क़दम और जोड़ देना — और इसे सबसे आख़िर में रखा गया है ताकि जल्दबाज़ी में तीसरे विकल्प पर रुक जाने वाला निष्कासन यहाँ तक पहुँचे ही नहीं।
समांतर श्रेढ़ी वह अनुक्रम है जिसमें हर पद अपने पिछले पद से एक निश्चित मात्रा, यानी सार्व अंतर d, से भिन्न होता है। इसके बारे में सब कुछ दो ही संख्याओं से निकलता है — प्रथम पद a और वही अंतर। n-वाँ पद a + (n − 1)d है, यानी बस a में n − 1 क़दम जोड़ देना। पहले n पदों के योग के दो समतुल्य रूप हैं — n/2 × [2a + (n − 1)d], या n/2 × (प्रथम पद + अंतिम पद), जिनमें दूसरा तब अधिक उपयोगी है जब अंतिम पद पहले से ज्ञात हो। चूँकि पद स्थिर मात्रा से बदलते हैं, समांतर श्रेढ़ी को उसके क्रमांक के सामने आलेखित करने पर सरल रेखा मिलती है, जिसकी प्रवणता d है: धनात्मक d बिना सीमा के बढ़ता है, ऋणात्मक d बिना सीमा के घटता है, और अनुक्रम शून्य को ठीक एक बार पार करता है। यहाँ a = 14 और d = −4 के साथ व्यापक पद 14 − 4(n − 1) है, जो सरल होकर 18 − 4n बनता है — यानी इस अनुक्रम का हर पद 4 के किसी गुणज से 2 कम है, और पूरा अनुक्रम इसी एक व्यंजक से दोबारा बनाया जा सकता है।
इस प्रश्न की परीक्षोपयोगी सामग्री एक ही आदत है: जब सूत्र गिनती कर सकता है तो मन में क़दम मत गिनिए। a लिखिए, d लिखिए, और मान रखिए। n छोटा होने पर अनुक्रम को पद-दर-पद बढ़ाने का लोभ प्रबल होता है, और वह ग़लत भी नहीं — n = 14 पर सूची इतनी छोटी है कि लिखी जा सकती है — पर वह धीमा है और वहीं गिनती चूकती है। एक उपयोगी अनुशासन यह है कि अंकगणित के बजाय क्रमांक की जाँच कीजिए। सूत्र को ऐसे पद पर आज़माइए जो सामने है: a + (4 − 1)d = 14 + 3 × (−4) = 2, जो छपे हुए चौथे पद से मेल खाता है, इसलिए n = 14 पर उपयोग करने से पहले ही सूत्र और गिनती, दोनों सही सिद्ध हो जाते हैं। यह भी देखिए कि विकल्प-समुच्चय क्या बता रहा है। जब चारों विकल्प ठीक सार्व अंतर के बराबर दूरी पर हों, तो इसका अर्थ है कि प्रश्न-निर्माता ने पड़ोसी पद जान-बूझकर विकल्पों में डाले हैं, और यह संकेत है कि प्रश्न घटाने के बारे में नहीं, क्रमांक के बारे में है। BPSC के प्रश्नपत्र में यह दोहरे रूप से मायने रखता है, क्योंकि ग़लत उत्तर एक-तिहाई अंक ले लेता है, और समांतर श्रेढ़ी ऐसा प्रश्न है जहाँ तीस सेकंड की जाँच जोखिम पूरी तरह मिटा देती है।
- अनुक्रम 14, 10, 6, 2, … के लिए: प्रथम पद a = 14 और सार्व अंतर d = −4, क्योंकि हर पद अपने पिछले से 4 कम है
- समांतर श्रेढ़ी का n-वाँ पद: aₙ = a + (n − 1)d; यहाँ a₁₄ = 14 + 13 × (−4) = 14 − 52 = −38
- इस अनुक्रम का व्यापक पद: 14 − 4(n − 1) = 18 − 4n, इसलिए यह पहली बार n = 5 पर ऋणात्मक होता है, जहाँ पद −2 है
- तीनों ग़लत विकल्प इसी श्रेढ़ी के 13वाँ (−34), 15वाँ (−42) और 16वाँ (−46) पद हैं, और सब उसी 4 के अंतर पर रखे हैं
- पहले n पदों का योग: Sₙ = n/2 × [2a + (n − 1)d] = n/2 × (प्रथम पद + अंतिम पद); यहाँ S₁₄ = 7 × (14 + (−38)) = −168
- BPSC में सही उत्तर पर +1 और ग़लत उत्तर पर −1/3 है, इसलिए ऐसे हर प्रश्न में क्रमांक की तीस सेकंड की जाँच कर लेना फ़ायदे का सौदा है
घटाना मामूली है; क्रमांक नहीं। 13 के बजाय 14 क़दम लगाने पर − 42 मिलता है, 12 लगाने पर − 34, और दोनों पन्ने पर विकल्प के रूप में मौजूद हैं।
- a + (n − 1)d के बजाय a + nd लगाना, जिससे हर उत्तर एक पद आगे खिसक जाता है
- अंतिम छपे हुए पद से गिनना शुरू कर देना, यह देखे बिना कि वह पहले ही चौथा पद है, पहला नहीं
- सार्व अंतर ऋणात्मक होने पर चिह्न खो देना और 14 − 52 के बजाय 14 + 52 निकाल लेना
BPSC का अभिक्षमता खंड छोटे और पूरी तरह निर्धारित प्रश्न रखता है — समांतर श्रेढ़ी का कोई पद, किसी जाल में लुप्त संख्या, कोई कूट शब्द — जहाँ सही विधि सदा छपे हुए विकल्पों में से ठीक एक ही देती है, और भ्रामक विकल्प यादृच्छिक संख्याएँ नहीं बल्कि मानक चूकों से बनी नज़दीकी चूकें होते हैं। UPSC यही सामग्री 2011 से पहले पूछता था, जब प्रथम प्रश्नपत्र में मात्रात्मक खंड होता था, और अब वह CSAT द्वितीय प्रश्नपत्र में रहती है — यानी यह कौशल ग़ायब नहीं हुआ, जगह बदल गया है।
नीचे दी गई शृंखला पर विचार कीजिए: 4/12/95, 1/1/96, 29/1/96, 26/2/96... शृंखला का अगला पद है
- (a) 24/3/96
- (b) 25/3/96
- (c) 26/3/96
- (d) 27/3/96
उत्तर(b) 25/3/96
भेस बदलकर आई समांतर श्रेढ़ी — पद हर बार ठीक 28 दिन आगे बढ़ते हैं — और विकल्प यहाँ भी चार लगातार नज़दीकी चूकें हैं, इसलिए अंक ढर्रा पहचानने से नहीं, क़दम ठीक-ठीक गिनने से मिलते हैं।
शृंखला POQ, SRT, VUW, ? में रिक्त स्थान पर आएगा
- (a) XYZ
- (b) XZY
- (c) YXZ
- (d) YZX
उत्तर(c) YXZ
वही स्थिर-अंतर वाला तर्क, अक्षरों के स्थानों पर लगाया गया: तीनों अक्षर ठीक तीन-तीन स्थान आगे बढ़ते हैं, यानी एक साथ हल की जाती तीन समांतर श्रेढ़ियाँ।
दिए गए विकल्पों में से लुप्त संख्या ज्ञात कीजिए: 28 | 20 | 7 84 | ? | 12 45 | 25 | 9
- (a) 30
- (b) 35
- (c) 20
- (d) 25
उत्तर(b) 35
अगले प्रश्नपत्र का पड़ोसी ख़ाना — BPSC के संख्या-ढर्रा वाले प्रश्न पूरी तरह निर्धारित होते हैं, जिनमें एक ही नियम हर दी गई प्रविष्टि पर बैठता है, इसलिए विधि सदा यही है कि नियम को पहले दिखने वाले पदों पर जाँचिए और तब उस पर लगाइए जो दिख नहीं रहा।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
समांतर श्रेढ़ी 7, 11, 15, 19, … का 20वाँ पद है
- (a)79
- (b)83
- (c)87
- (d)91
उत्तर(b) 83 — यहाँ a = 7 और d = 4, इसलिए 20वाँ पद 7 + 19 × 4 = 7 + 76 = 83 है; 79 उन्नीसवाँ पद है और 87 इक्कीसवाँ।
- अभ्यास — वास्तविक विगत वर्ष प्रश्न नहीं
अनुक्रम 14, 10, 6, 2, … का कौन-सा पद पहली बार ऋणात्मक होता है ?
- (a)चौथा
- (b)पाँचवाँ
- (c)छठा
- (d)सातवाँ
उत्तर(b) पाँचवाँ — व्यापक पद 18 − 4n है, जो पहली बार n = 5 पर ऋणात्मक होकर −2 देता है; चौथा पद अब भी 2 है।