भारत के इतिहास के संदर्भ में, “कुल्यावाप” तथा “द्रोणवाप” शब्द क्या निर्दिष्ट करते हैं ?
- (a) भू-माप
- (b) विभिन्न मौद्रिक मूल्यों के सिक्के
- (c) नगर की भूमि का वर्गीकरण
- (d) धार्मिक अनुष्ठान
उत्तर: (a)
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प्राचीन भारत का इतिहास · 2012–2026 · 4 प्रश्न — UPSC की द्विभाषी प्रश्न-पुस्तिका के हिन्दी पृष्ठों से, अनुवाद नहीं।
भारत के इतिहास के संदर्भ में, “कुल्यावाप” तथा “द्रोणवाप” शब्द क्या निर्दिष्ट करते हैं ?
उत्तर: (a)
प्राचीन भारत के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं? 1. मिताक्षरा ऊँची जाति की सिविल विधि थी और दायभाग निम्न जाति की सिविल विधि थी। 2. मिताक्षरा व्यवस्था में, पुत्र अपने पिता के जीवनकाल में ही संपत्ति पर अधिकार का दावा कर सकते थे, जबकि दायभाग व्यवस्था में पिता की मृत्यु के उपरांत ही पुत्र संपत्ति पर अधिकार का दावा कर सकते थे। 3. मिताक्षरा व्यवस्था किसी परिवार के केवल पुरुष सदस्यों के संपत्ति-संबंधी मामलों पर विचार करती है, जबकि दायभाग व्यवस्था किसी परिवार के पुरुष एवं महिला सदस्यों, दोनों के संपत्ति-संबंधी मामलों पर विचार करती है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
उत्तर: (b)
कौटिल्य अर्थशास्त्र के अनुसार, निम्नलिखित में कौन-से सही हैं ? 1. न्यायिक दंड के परिणामस्वरूप कोई व्यक्ति दास हो सकता था । 2. स्त्री दास अपने मालिक के संसर्ग से पुत्र जनन पर कानूनी तौर पर मुक्त हो जाती थी । 3. यदि स्त्री दास का मालिक उस स्त्री से पैदा हुए पुत्र का पिता हो, तो उस पुत्र को मालिक का पुत्र होने का कानूनी हक़ मिलता था । उपर्युक्त कथनों में कौन-से सही हैं ?
उत्तर: (b)
क्षेत्र-पत्नी ('mistress of the field') शब्द निम्नलिखित में से किस ग्रंथ में उद्धृत है ?
उत्तर: (b)
अंग्रेज़ी संस्करण: Society, Law & Administration PYQ (English)