'ऑपरेशन ओलिविया' के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ? 1. यह ओडिशा के तट पर ओलिव रिडले कछुओं की सुरक्षा के लिए भारतीय तट रक्षकों की एक पहल है । 2. ऑपरेशन ओलिविया अगस्त के महिने के दौरान चलाया जाता है जो ओलिव रिडले कछुओं के घोंसले बनाने का समय होता है । नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए : कूट :
- (a)केवल 2
- (b)1 और 2 दोनों
- (c)न तो 1 न ही 2
- (d)केवल 1
सही उत्तर — (d) केवल 1। कथन 1 हर बिंदु पर सटीक है: ऑपरेशन ओलिविया भारतीय तट रक्षक का अभियान है, यह ओडिशा के तट पर संचालित होता है, और इसका उद्देश्य ओलिव रिडले समुद्री कछुओं की सुरक्षा करना है। भारतीय तट रक्षक (ICG) इसे 1980 के दशक की शुरुआत से चला रहा है, सतही जहाजों, हॉवरक्राफ्ट और डोर्नियर विमानों की उड़ानों का उपयोग कर यांत्रिक ट्रॉलरों को गहिरमाथा, ऋषिकुल्या नदी-मुख और देवी नदी-मुख के निकट कछुओं के जमावड़े व मत्स्य-निषिद्ध क्षेत्रों से दूर रखने के लिए। कथन 2 महिने पर चूक जाता है। ओलिव रिडले कछुए ओडिशा तट पर नवंबर के आसपास एकत्र होना शुरू करते हैं, और तट रक्षक की तैनाती इसी प्रजनन-व-घोंसला मौसम के साथ सर्दी से वसंत तक चलती है — अगस्त के महिने में नहीं, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून में पड़ता है जब न तो कोई जमावड़ा होता है और न ही रक्षा करने योग्य कोई अरीबादा। चूँकि कथन 1 सही है और कथन 2 नहीं, उत्तर 'केवल 1' है।
- (a)केवल 2 — यह उस एकमात्र पूर्णतः सही कथन को अस्वीकार करने और तथ्यात्मक त्रुटि वाले कथन को स्वीकार करने के लिए कहता है। कथन 1 सही ढंग से एजेंसी (भारतीय तट रक्षक), तट (ओडिशा) और प्रजाति (ओलिव रिडले) का नाम लेता है; कथन 2 इस अभियान को अगस्त के महिने में रख देता है, जो कछुओं के ओडिशा घोंसला-मौसम से बाहर है।
- (b)1 और 2 दोनों — यही योजित जाल है। जो अभ्यर्थी 'भारतीय तट रक्षक + ओडिशा + ओलिव रिडले' को परिचित व सही मान लेता है, वह प्रायः महिने की जाँच किए बिना दोनों कथनों पर सही का निशान लगा देता है। कथन 2 प्रशंसनीय शब्दों के भीतर एक ही गलत विवरण — अगस्त — छिपाए रखता है, और यही विवरण इसे गलत बनाने के लिए पर्याप्त है।
- (c)न तो 1 न ही 2 — कथन 1 सत्यापन-योग्य रूप से सही है, इसलिए 'न तो' नहीं टिक सकता। ऑपरेशन ओलिविया ओलिव रिडले कछुओं की सुरक्षा हेतु ओडिशा तट पर भारतीय तट रक्षक का एक नामित, दीर्घकाल से चल रहा अभियान है — यह परीक्षक द्वारा गढ़ा गया कोई गलत आरोपण नहीं है।
ओलिव रिडले (Lepidochelys olivacea) विश्व का सबसे प्रचुर समुद्री कछुआ है और अरीबादा — समकालिक सामूहिक घोंसला-निर्माण, जिसमें कुछ ही रातों में लाखों मादाएँ उन्हीं कुछ तटों पर आती हैं — के लिए प्रसिद्ध है। भारत के ओडिशा तट पर ऐसे तीन प्रजनन-स्थल (rookery) हैं: भितरकनिका पारितंत्र के भीतर गहिरमाथा, जो विश्व का सबसे बड़ा ज्ञात ओलिव रिडले प्रजनन-स्थल है, गंजाम ज़िले में ऋषिकुल्या नदी-मुख, और देवी नदी-मुख। इन कछुओं का सबसे बड़ा हत्यारा अवैध शिकार नहीं बल्कि तट के निकट उथले जमावड़े वाले जल में यांत्रिक ट्रॉल जालों में आकस्मिक फँसाव है। इसलिए इनकी रक्षा मूलतः एक समुद्री प्रवर्तन (enforcement) समस्या है, यही कारण है कि यह काम अकेले वन विभाग के बजाय भारतीय तट रक्षक के पास है।
दो-कथन वाले UPPSC प्रश्न लगभग हमेशा एक योजित त्रुटि से तय होते हैं, और परीक्षक प्रायः उसे मुख्य तथ्य में नहीं बल्कि किसी संख्या, तिथि या महिने में रखता है। यहाँ कथन 1 का हर पहलू सही लगने के लिए बनाया गया है — और वह सही भी है। कथन 2 फिर एक सच्चा-सा प्रतीत होने वाला ढाँचा ('घोंसला बनाने के समय के दौरान चलाया जाता है') दोहराता है और उसमें अगस्त फिसला देता है। जाँच मौसमी तर्क से होती है: ओडिशा तट पर सामूहिक घोंसला-निर्माण मानसून-पश्चात से वसंत तक की घटना है; कछुए नवंबर के आसपास आना शुरू करते हैं और अरीबादा उसके बाद के महिनों में होता है, इसलिए केवल अगस्त के महिने के लिए तय किया गया कोई अभियान एक खाली समुद्र की रखवाली करेगा। परीक्षा की शब्दावली 'Indian coast Guards' पर ध्यान दें — वास्तविक बल भारतीय तट रक्षक है, रक्षा मंत्रालय के अधीन संघ का एक अकेला सशस्त्र बल।
- ऑपरेशन ओलिविया भारतीय तट रक्षक द्वारा ओडिशा तट पर संचालित है और 1980 के दशक की शुरुआत से ओलिव रिडले कछुओं की सुरक्षा के लिए चलाया जा रहा है
- तट रक्षक की तैनाती कछुओं के प्रजनन-व-घोंसला मौसम के अनुरूप है, जो नवंबर के आसपास शुरू होकर वसंत तक फैलता है — अगस्त मानसून का महिना है और इस मौसम से बाहर है
- ओडिशा के तीन सामूहिक-घोंसला स्थल गहिरमाथा (भितरकनिका), ऋषिकुल्या नदी-मुख (गंजाम) और देवी नदी-मुख हैं; गहिरमाथा विश्व का सबसे बड़ा ज्ञात ओलिव रिडले प्रजनन-स्थल है
- समकालिक सामूहिक घोंसला-निर्माण को अरीबादा कहा जाता है; ऋषिकुल्या नदी-मुख पर 2025 में एक कीर्तिमान अरीबादा दर्ज हुआ, जिसमें लगभग सात लाख कछुए बताए गए
- मौसम के दौरान जमावड़ा क्षेत्र में यांत्रिक ट्रॉलिंग निषिद्ध है और ट्रॉलरों को टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TED) लगाना अनिवार्य है — इसे समुद्र में लागू कराना ही इस अभियान का मूल है
- ओलिव रिडले वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I और CITES के परिशिष्ट I में सूचीबद्ध है

- एजेंसी और तट सही होने के कारण 'दोनों' पर निशान लगाना, बिना महिने की जाँच किए — पूरा प्रश्न अगस्त पर टिका है
- यह मान लेना कि वन्यजीव-संरक्षण अभियान अनिवार्यतः पर्यावरण मंत्रालय या नौसेना द्वारा चलाया जाना चाहिए; समुद्र में ट्रॉलरों के विरुद्ध प्रवर्तन तट रक्षक का काम है
- ओडिशा तट पर घोंसला-मौसम (मानसून-पश्चात से वसंत तक) को मानसून के महिनों से भ्रमित करना
UPPSC अभियान को नाम देकर परखता है कि क्या आप उससे जुड़ी एजेंसी, राज्य और मौसम जानते हैं; UPSC पारिस्थितिकी और कानून को वरीयता देता है — अरीबादा किस तट पर होता है, टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस क्या करता है, और प्रजाति किस अनुसूची या CITES परिशिष्ट में आती है।
निम्नलिखित में से किस राज्य का समुद्र तट दक्षिण अमेरिका से आने वाले विशाल ओलिव रिडले कछुओं के घोंसला-स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो गया है?
- (a) गोवा
- (b) गुजरात
- (c) ओडिशा
- (d) तमिलनाडु
उत्तर(c) ओडिशा
वही तथ्य दूसरी ओर से — UPSC पूछता है कि ओलिव रिडले किस तट पर घोंसला बनाते हैं, UPPSC पूछता है कि वहाँ उनकी रक्षा कौन करता है। दोनों इसी ज्ञान पर टिके हैं कि ओडिशा का गहिरमाथा-ऋषिकुल्या-देवी विस्तार भारत का अरीबादा तट है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
गहिरमाथा, विश्व का ओलिव रिडले कछुओं का सबसे बड़ा ज्ञात सामूहिक-घोंसला स्थल (प्रजनन-स्थल), किस राज्य में स्थित है?
- (a)आंध्र प्रदेश
- (b)ओडिशा
- (c)तमिलनाडु
- (d)पश्चिम बंगाल
उत्तर(b) ओडिशा — गहिरमाथा केंद्रपाड़ा ज़िले के भितरकनिका पारितंत्र में स्थित है; ऋषिकुल्या और देवी नदी-मुख ओडिशा के अन्य दो प्रजनन-स्थल हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
'टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस' निम्नलिखित में से किसमें लगाया जाता है?
- (a)यांत्रिक मत्स्य-पोतों द्वारा प्रयुक्त ट्रॉल जाल
- (b)वन विभाग द्वारा संचालित हैचरी
- (c)तट रक्षक गश्ती पोत
- (d)अपतटीय तेल रिग
उत्तर(a) यांत्रिक मत्स्य-पोतों द्वारा प्रयुक्त ट्रॉल जाल — यह ग्रिड जाल में आकस्मिक रूप से फँसे समुद्री कछुए को बाहर निकलने देता है जबकि पकड़ी गई मछलियाँ जाल में ही रहती हैं।