वैदिक कालीन प्रशासन में 'भागदुह' कौन अधिकारी था ?
- (a)राजस्व कर जमा करने वाला
- (b)समाचार पहुंचाने वाला दूत
- (c)जंगलों का प्रधान अधिकारी
- (d)जुआ विभाग का प्रधान अधिकारी
सही उत्तर — (a) राजस्व कर जमा करने वाला। उत्तर वैदिक प्रशासन में 'भागदुह' वह अधिकारी था जो राजा के हिस्से की उपज एकत्र करता था — अर्थात कर या राजस्व संग्राहक। नाम ही अर्थ बताता है: 'भाग' का अर्थ है (राजा का) हिस्सा या कर, और 'दुह' (जिसका मूल 'दुहना/निकालना' है) का अर्थ है वह जो उसे प्राप्त करता है — 'हिस्सा वसूल करने वाला'। वह राजपरिवार से जुड़े रत्निनों ('राजा के रत्न') में से एक था।
- (b)समाचार पहुंचाने वाला दूत — वैदिक ग्रंथों में दूत/समाचारवाहक 'पालागल' (या 'दूत') कहलाता था, 'भागदुह' नहीं।
- (c)जंगलों का प्रधान अधिकारी — वनों का रक्षक / राजा का आखेट-अधिकारी 'गोविकर्तन' कहलाता था; वन-सम्बन्धी कार्य 'भागदुह' के नहीं थे।
- (d)जुआ विभाग का प्रधान अधिकारी — पासे/जुए का अधीक्षक 'अक्षवाप' कहलाता था; 'भागदुह' राजस्व सम्भालता था, जुआघर नहीं।
उत्तर वैदिक काल तक राज्य-व्यवस्था में विशेषीकृत अधिकारियों का एक तंत्र बन चुका था, जिनमें से कई 'रत्निन' ('रत्न धारण करने वाले') कहलाते थे और राजा के राजसूय अभिषेक में भाग लेते थे। पुरोहित (पुजारी), सेनानी (सेनापति) और ग्रामणी (ग्राम-प्रधान) की शीर्ष त्रयी के अतिरिक्त, रत्निनों में भागदुह (कर/राजस्व संग्राहक), अक्षवाप (जुए का प्रभारी), गोविकर्तन (वन/आखेट) और पालागल (दूत) भी शामिल थे।
यह प्रश्न वैदिक पदनामों की शुद्ध शब्दावली-जाँच है। शब्द को खोलिए: 'भाग' = हिस्सा/कर, अतः 'भाग एकत्र करने वाला' अनिवार्यतः राजस्व अधिकारी ही होगा। अन्य तीन विचित्र पदनामों से न उलझें — प्रत्येक एक भिन्न, विशिष्ट विभाग (दूत, वन, जुआ) से जुड़ा है।
- भागदुह = राजा के हिस्से (भाग) का संग्राहक — कर/राजस्व संग्राहक।
- वह रत्निनों में गिना जाता था, जो राजसूय राजाभिषेक से जुड़े अधिकारी थे।
- साथी पदनाम: अक्षवाप (जुआ), गोविकर्तन (वन/आखेट), पालागल (दूत), सूत (सारथी-गायक)।
- यह पद उत्तर वैदिक काल में जनजातीय भेंट (बलि) से अधिक संगठित राजस्व-व्यवस्था की ओर हुए बदलाव को दर्शाता है।
'भाग' = राजा का हिस्सा (कर); 'भागदुह' वह अधिकारी है जो उसे एकत्र करता है।
- पदनाम को समझे बिना विकल्प-क्रम के आधार पर अनुमान लगाना — 'भाग' (हिस्सा/कर) ही संकेत है।
- भागदुह (राजस्व) को संग्रहीत्री (कोषाध्यक्ष) या अक्षवाप (जुआ) से भ्रमित करना।
UPPSC/UPSC वैदिक और मौर्य प्रशासन को पदनाम-से-कार्य सुमेलन के रूप में पूछते हैं — हर अधिकारी का पदनाम और विभाग याद करें, विशेषकर रत्निनों का।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
उत्तर वैदिक प्रशासन में जुए (पासे) की व्यवस्था का प्रभारी अधिकारी कौन था?
- (a)भागदुह
- (b)अक्षवाप
- (c)गोविकर्तन
- (d)पालागल
उत्तर(b) अक्षवाप — रत्निनों में जुआ/पासों का अधीक्षक।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
वैदिक युग में राजा की शक्ति पर अंकुश रखने वाली दो लोकप्रिय सभाएँ कौन-सी थीं?
- (a)सभा और समिति
- (b)गण और पूगा
- (c)विदथ और परिषद
- (d)रत्नि और भाग
उत्तर(a) सभा और समिति — प्रमुख वैदिक सभाएँ।