2050 के लिए 'नेट-जीरो' लक्ष्य के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ? 1. इसका अभिप्राय है कि देश को 2050 तक उसके उत्सर्जन को शून्य तक नीचे लाना होगा । 2. इसका अभिप्राय है कि किसी देश के उत्सर्जन की क्षतिपूर्ति वातावरण से ग्रीन हाउस गैसों का निराकरण तथा अवशोषण से होगी । नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए । कूट :
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1 न ही 2
सही उत्तर — (b), केवल कथन 2। 'नेट-जीरो' (नेट-जीरो उत्सर्जन / कार्बन तटस्थता) का अर्थ यह नहीं है कि कोई देश अपने उत्सर्जन को बिल्कुल शून्य तक घटा दे। इसका अर्थ है कि देश जो ग्रीनहाउस गैसें अब भी उत्सर्जित करता है, उन्हें प्राकृतिक सिंक (वन, मृदा, महासागर) व निराकरण प्रौद्योगिकियों (वनरोपण, कार्बन अभिग्रहण एवं भण्डारण) के माध्यम से वातावरण से हटाई गई समतुल्य मात्रा से संतुलित — 'नेट में शून्य' — किया जाता है। अतः कथन 1 लक्ष्य का ग़लत वर्णन करता है: उत्सर्जन को शून्य तक घटाना 'ग्रॉस ज़ीरो' होगा, जो न तो आवश्यक है और न ही किसी आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए यथार्थवादी। कथन 2 सही परिभाषा देता है — अवशिष्ट उत्सर्जन की क्षतिपूर्ति GHG के निराकरण व अवशोषण से होना। अतः केवल कथन 2 सही है → विकल्प (b)। (सन्दर्भ: ग्लासगो में COP26 में, इसी परीक्षा के तुरन्त बाद, भारत ने अपना नेट-जीरो लक्ष्य वर्ष 2070 घोषित किया था।)
- (a)केवल 1 — गलत — कथन 1 नेट-जीरो को सकल/निरपेक्ष शून्य उत्सर्जन के बराबर मान लेता है, जो नेट-जीरो का अर्थ नहीं है; अवशिष्ट उत्सर्जन की अनुमति है बशर्ते वह समतुल्य निराकरण से संतुलित हो।
- (c)1 और 2 दोनों — गलत — कथन 1 ग़लत है (नेट-जीरो, शून्य उत्सर्जन के समान नहीं है), अतः 'दोनों सही' नहीं हो सकता; केवल कथन 2 ही नेट-जीरो को उचित रूप से परिभाषित करता है।
- (d)न तो 1 न ही 2 — गलत — कथन 2 नेट-जीरो की मानक, सही परिभाषा है (उत्सर्जन की क्षतिपूर्ति अवशोषण/निराकरण से होना), अतः कम-से-कम एक कथन सही तो है।
'नेट-जीरो' (जिसे कार्बन तटस्थता भी कहते हैं) वह स्थिति है जिसमें कोई देश या इकाई वातावरण में जितनी ग्रीनहाउस गैस जोड़ती है, उतनी ही मात्रा वह हटा भी लेती है। इसका अर्थ सभी उत्सर्जन को रोक देना नहीं है: भारी उद्योग, विमानन, कृषि जैसे कठिन-निराकरण उत्सर्जन जारी रहते हैं, परन्तु कार्बन सिंक व निराकरण से इन्हें निरस्त कर दिया जाता है, जिससे वातावरण में नेट वृद्धि शून्य हो जाती है। पेरिस समझौते के अनुरूप उष्णता को 1.5°C के भीतर रखने हेतु वैश्विक स्तर पर नेट-जीरो प्राप्त करने का व्यापक रूप से चर्चित लक्ष्य वर्ष 2050 है।
भ्रामक जाल 'नेट-जीरो' को 'शून्य' के रूप में पढ़ना है। कथन 1 सकल शून्य का वर्णन करता है (अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं के लिए असम्भव); कथन 2 संतुलन/भरपाई के उस विचार का वर्णन करता है जो वास्तव में नेट-जीरो को परिभाषित करता है। यह पहचानना कि नेट-जीरो निराकरण से संतुलित अवशिष्ट उत्सर्जन की अनुमति देता है, तुरन्त कथन 1 को खारिज कर देता है और कथन 2 की पुष्टि करता है, जिससे विकल्प (b) मिलता है।
- नेट-जीरो / कार्बन तटस्थता = उत्सर्जित गैसें उतनी ही मात्रा से संतुलित होती हैं जितनी हटाई जाती है (नेट वृद्धि = शून्य), न कि निरपेक्ष शून्य उत्सर्जन।
- निराकरण प्राकृतिक सिंक (वन, मृदा, महासागर) व प्रौद्योगिकियों (वनरोपण, कार्बन अभिग्रहण एवं भण्डारण, प्रत्यक्ष वायु अभिग्रहण) से आता है।
- 2050 पेरिस समझौते के 1.5°C लक्ष्य के अनुरूप व्यापक रूप से चर्चित वैश्विक नेट-जीरो लक्ष्य वर्ष है।
- भारत ने COP26, ग्लासगो (नवम्बर 2021) में — इसी परीक्षा के ठीक बाद — अपना नेट-जीरो लक्ष्य वर्ष 2070 घोषित किया।
नेट-जीरो अवशिष्ट उत्सर्जन को निराकरण से संतुलित करता है; यह 'शून्य उत्सर्जन' (कथन 1) नहीं है। केवल कथन 2 सही है, अतः विकल्प (b)।
- 'नेट-जीरो' को 'शून्य उत्सर्जन' (ग्रॉस ज़ीरो) मान लेना — नेट-जीरो निराकरण से संतुलित अवशिष्ट उत्सर्जन की अनुमति देता है
- भारत के लक्ष्य वर्ष (2070) को वैश्विक 2050 लक्ष्य से भ्रमित करना
UPSC व UPPSC नेट-जीरो/कार्बन-तटस्थता की परीक्षा कथन-आधारित परिभाषा प्रश्न और समसामयिकी (COP शिखर सम्मेलन, भारत की 2070 प्रतिज्ञा, NDCs) दोनों रूपों में लेते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन-I: यूरोपीय संसद ने हाल ही में नेट-ज़ीरो इण्डस्ट्री अधिनियम को स्वीकृति दी। कथन-II: यूरोपीय संघ का इरादा 2040 तक कार्बन तटस्थता प्राप्त करने का है और इसलिए वह उस समय तक अपनी सम्पूर्ण स्वच्छ प्रौद्योगिकी स्वयं विकसित करने का लक्ष्य रखता है। उपर्युक्त कथनों के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
- (a) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है
- (b) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, परन्तु कथन-II, कथन-I की व्याख्या नहीं करता
- (c) कथन-I सही है, परन्तु कथन-II ग़लत है
- (d) कथन-I ग़लत है, परन्तु कथन-II सही है
उत्तर(c) कथन-I सही है, परन्तु कथन-II ग़लत है
समान अवधारणा — दोनों प्रश्न 'नेट-जीरो / कार्बन-तटस्थता' लक्ष्य की समझ पर टिके हैं; UPSC प्रश्न EU के नेट-ज़ीरो इण्डस्ट्री अधिनियम और उसके कार्बन-तटस्थता (नेट-जीरो) लक्ष्य के वर्ष पर आधारित है — वही अवधारणा जिसे परिभाषित करना यह UPPSC प्रश्न माँगता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
COP26 ग्लासगो शिखर सम्मेलन में, भारत ने किस वर्ष तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का लक्ष्य घोषित किया?
- (a)2047
- (b)2050
- (c)2060
- (d)2070
उत्तर(d) 2070 — भारत का नेट-जीरो लक्ष्य वर्ष, प्रधानमंत्री द्वारा COP26 (नवम्बर 2021) में घोषित।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
'नेट-जीरो उत्सर्जन' (कार्बन तटस्थता) का अर्थ है:
- (a)सभी ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जन पूर्णतः रोक दिए जाते हैं
- (b)उत्सर्जन को वातावरण से समतुल्य मात्रा में निराकरण द्वारा संतुलित किया जाता है
- (c)केवल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन रोका जाता है
- (d)कुल उत्सर्जन ठीक 50% कम किया जाता है
उत्तर(b) उत्सर्जन को समतुल्य मात्रा में निराकरण से संतुलित किया जाता है — वातावरण में नेट वृद्धि शून्य होती है, सकल उत्सर्जन नहीं।