'फवायदुल फवाद' नामक पुस्तक शेख निजामुद्दीन औलिया की बातचीत का विवरण है, इसका संकलन किया था
- (a)अमीर हसन सिजजी ने
- (b)अमीर खुसरो ने
- (c)जियाउद्दीन बरनी ने
- (d)हसन निजामी ने
सही उत्तर — (a) अमीर हसन सिजजी ने (अमीर हसन सिजजी देहलवी)। 'फवायदुल फवाद' ('हृदय के गुण/लाभ') एक मल्फूजात है — यह चिश्ती सूफी संत शेख निजामुद्दीन औलिया की मजलिसों में हुई बातचीत और उपदेशों का अभिलेख है। इसका संकलन उनके समर्पित शिष्य अमीर हसन सिजजी ने किया, जो दिल्ली के एक कवि थे और जिन्होंने लगभग 1307 से 1322 के बीच संत की मजलिसों में हुई बातचीत को लिपिबद्ध किया। यह रचना भारतीय सूफीवाद में मल्फूजात शैली का आदर्श बन गई।
- (b)अमीर खुसरो ने — गलत — अमीर खुसरो भी निजामुद्दीन औलिया के प्रसिद्ध शिष्य और मित्र थे, किन्तु वे एक कवि व संगीतकार थे (तुगलकनामा, खमसा, अनेक दीवान); उन्होंने 'फवायदुल फवाद' का संकलन नहीं किया।
- (c)जियाउद्दीन बरनी ने — गलत — जियाउद्दीन बरनी दिल्ली सल्तनत के एक इतिहासकार थे; उन्होंने 'तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही' और 'फ़तावा-ए-जहाँदारी' लिखी, यह मल्फूजात नहीं।
- (d)हसन निजामी ने — गलत — हसन निजामी 'ताज-उल-मआसिर' के लेखक थे, जो दिल्ली सल्तनत का एक प्रारंभिक इतिहास है; उन्होंने निजामुद्दीन औलिया की बातचीत को लिपिबद्ध नहीं किया।
भारतीय सूफीवाद में 'मल्फूजात' किसी संत की बातचीत और उपदेशों का अभिलेख होता है, जो सामान्यतः किसी शिष्य द्वारा लिपिबद्ध किया जाता है। 'फवायदुल फवाद' इसका क्लासिक उदाहरण है: दिल्ली के चिश्ती संत शेख निजामुद्दीन औलिया के दर्ज किए गए प्रवचन, जिनका संकलन उनके शिष्य अमीर हसन सिजजी ने 14वीं शताब्दी के आरंभ में किया। यह चिश्ती सम्प्रदाय के विचारों और दैनिक जीवन का एक प्रमुख स्रोत है।
अमीर हसन सिजजी और अमीर खुसरो दोनों ही निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे, जो विकल्प (b) को आकर्षक बनाता है। विभेदक: खुसरो को कविता और संगीत के लिए याद किया जाता है, जबकि संत की बातचीत को हसन सिजजी ने 'फवायदुल फवाद' के रूप में संकलित किया। बरनी और हसन निजामी दरबारी इतिहासकार हैं, न कि सूफी प्रवचनों के अभिलेखक।
- 'फवायदुल फवाद' शेख निजामुद्दीन औलिया की मल्फूजात (दर्ज बातचीत) है।
- इसका संकलन उनके शिष्य अमीर हसन सिजजी (अमीर हसन सिजजी देहलवी) ने लगभग 1307–1322 में किया।
- निजामुद्दीन औलिया दिल्ली के चिश्ती सूफी सम्प्रदाय के प्रमुख संत थे।
- अमीर खुसरो, एक अन्य शिष्य, कवि-संगीतकार थे, इस रचना के संकलक नहीं।

- मल्फूजात के संकलक अमीर हसन सिजजी को उनके सह-शिष्य अमीर खुसरो (कवि) से भ्रमित करना
- मल्फूजात (सूफी बातचीत) को बरनी या हसन निजामी के राजनीतिक इतिवृत्तों से मिलाना
UPPSC और UPSC 'पुस्तक–लेखक' या 'संत–शिष्य' जोड़े पूछते हैं — फवायदुल फवाद = अमीर हसन सिजजी द्वारा निजामुद्दीन औलिया की बातचीत का अभिलेखन, इस बिन्दु पर अटल रहें।
भारतीय इतिहास में सूफीवाद के सन्दर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शेख अहमद सरहिंदी इब्राहीम लोदी के समकालीन थे 2. शेख नसीरुद्दीन चिराग-ए-देहलवी, शेख निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे 3. औरंगज़ेब शेख सलीम चिश्ती के समकालीन थे 4. भारत में क़ादिरी सम्प्रदाय को सबसे पहले शेख नियामतुल्ला और मख़दूम मुहम्मद जिलानी ने प्रवर्तित किया इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- (a) 1 और 2
- (b) 1 और 3
- (c) 2 और 3
- (d) 2 और 4
उत्तर(d) 2 और 4
समान अवधारणा — शेख निजामुद्दीन औलिया का चिश्ती दायरा। इसका सही कथन 2 नसीरुद्दीन चिराग-ए-देहलवी को उनका शिष्य बताता है, वही संत–शिष्य सम्बन्ध (औलिया और उनके अनुयायी) जो 'फवायदुल फवाद' प्रश्न के मूल में है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
'फवायदुल फवाद', जो एक सूफी संत की बातचीत का अभिलेख है, किस सूफी सम्प्रदाय से जुड़ी है?
- (a)सुहरावर्दी
- (b)चिश्ती
- (c)क़ादिरी
- (d)नक्शबंदी
उत्तर(b) चिश्ती — यह दिल्ली के प्रमुख चिश्ती संत निजामुद्दीन औलिया के प्रवचनों को दर्ज करती है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
जियाउद्दीन बरनी द्वारा निम्नलिखित में से कौन-सी रचना लिखी गई?
- (a)फवायदुल फवाद
- (b)ताज-उल-मआसिर
- (c)तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही
- (d)तुगलकनामा
उत्तर(c) तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही — बरनी का दिल्ली सल्तनत का इतिवृत्त (उन्होंने फ़तावा-ए-जहाँदारी भी लिखी)।