राजा रंजीत सिंह ने किस स्थान पर अदालत-ए-आला की स्थापना की ?
- (a)अमृतसर
- (b)लाहौर
- (c)फिरोजपुर
- (d)मुलतान
सही उत्तर — (b), लाहौर। लाहौर महाराजा रंजीत सिंह की राजधानी थी (उन्होंने 1799 में इसे जीता और 1801 में यहीं औपचारिक रूप से राज्याभिषेक करवाया), और यहीं उन्होंने अदालत-ए-आला की स्थापना की, जो सिख साम्राज्य की न्यायिक व्यवस्था की सबसे ऊँची नियमित अपीलीय अदालत थी। अदालत-ए-आला सामान्य न्यायालय पदानुक्रम के शीर्ष पर खड़ी थी, जो प्रान्तीय (नाज़िम) व जिला/परगना (कारदार) न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपीलें सुनती थी। इस न्यायालय से भी ऊपर, महाराजा स्वयं अंतिम अपीलीय न्यायालय बने रहे। चूँकि प्रश्न पूछता है कि अदालत-ए-आला कहाँ स्थापित की गई थी, उत्तर उनकी राजधानी, लाहौर है।
- (a)अमृतसर — अमृतसर सिख साम्राज्य का धार्मिक व वाणिज्यिक केन्द्र था (हरमंदिर साहिब व एक महत्वपूर्ण टकसाल का स्थल), परन्तु यह अदालत-ए-आला की सीट नहीं थी — सर्वोच्च न्यायालय राजनीतिक राजधानी, लाहौर में स्थित था।
- (c)फिरोजपुर — फिरोजपुर सतलुज के पास एक सीमांत नगर था, ब्रिटिश-नियंत्रित क्षेत्र की सीमा के निकट; यह कभी भी साम्राज्य के सर्वोच्च न्यायालय का स्थान नहीं रहा।
- (d)मुलतान — मुलतान 1818 में रंजीत सिंह द्वारा विलय किया गया एक सूबा (प्रान्त) था जिसे एक नाज़िम प्रशासित करता था; इसके प्रान्तीय न्यायालय से अपीलें ऊपर लाहौर की अदालत-ए-आला तक जाती थीं — मुलतान स्वयं उस न्यायालय की सीट नहीं था।
महाराजा रंजीत सिंह (1780–1839) ने सिख मिसलों को एकीकृत कर एक ही सिख साम्राज्य बनाया, जिसकी राजधानी लाहौर थी। उनका प्रशासन एक श्रेणीबद्ध न्यायिक व्यवस्था चलाता था: गाँव पंचायतें आधार पर स्थानीय विवाद निपटाती थीं; कारदार परगना/जिला स्तर पर न्याय देते थे; नाज़िम (प्रान्तीय गवर्नर) सूबा स्तर पर अदालतें चलाते थे; और लाहौर की अदालत-ए-आला इस ढाँचे की सबसे ऊँची अपीलीय अदालत थी। महाराजा अंतिम अपीलीय न्यायालय थे। न्याय प्रथागत कानून तथा पक्षकारों के अनुसार सिख, हिन्दू व मुस्लिम व्यक्तिगत कानून पर आधारित होता था।
जाल है अमृतसर। चूँकि अमृतसर में स्वर्ण मंदिर है और यह सिखों की आध्यात्मिक राजधानी है, छात्र स्वाभाविक रूप से रंजीत सिंह के शासन से जुड़ी किसी भी 'केन्द्रीय' चीज़ के लिए इसे चुन लेते हैं। परन्तु प्रशासनिक व न्यायिक मुख्यालय राजनीतिक राजधानी, लाहौर में बैठता था — जहाँ महाराजा का राज्याभिषेक हुआ और जहाँ उनका दरबार लगता था। धार्मिक राजधानी (अमृतसर) को शासन व न्याय की सीट (लाहौर) से अलग करें तो विकल्प (b) स्वतः स्पष्ट हो जाता है।
- रंजीत सिंह की राजधानी लाहौर थी; उनका महाराजा के रूप में राज्याभिषेक 1801 में वहीं हुआ।
- लाहौर की अदालत-ए-आला सिख साम्राज्य की सबसे ऊँची नियमित अपीलीय अदालत थी।
- यह कारदारों (जिला/परगना) व नाज़िमों (प्रान्तीय गवर्नरों) की अदालतों से आई अपीलें सुनती थी।
- महाराजा स्वयं अदालत-ए-आला से ऊपर अंतिम अपीलीय न्यायालय बने रहे।

- लाहौर (राजनीतिक/न्यायिक राजधानी) के बजाय अमृतसर (धार्मिक राजधानी) चुनना
- यह भूलना कि अदालत-ए-आला सर्वोच्च नियमित अदालत थी, जबकि महाराजा अंतिम अपीलीय प्राधिकरण थे
UPPSC व UPSC रंजीत सिंह को 'किस स्थान पर स्थापित की/राजधानी' प्रकार के प्रश्नों व शासक-संस्था सुमेलनों के माध्यम से परखते हैं — उनकी राजधानी व न्याय की सीट को लाहौर से जोड़ें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
महाराजा रंजीत सिंह के सिख साम्राज्य की राजधानी क्या थी?
- (a)अमृतसर
- (b)लाहौर
- (c)पेशावर
- (d)मुलतान
उत्तर(b) लाहौर — रंजीत सिंह ने 1799 में लाहौर पर विजय प्राप्त की और 1801 में वहीं महाराजा के रूप में राज्याभिषेक करवाया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अमृतसर संधि (1809) द्वारा, महाराजा रंजीत सिंह ने किस नदी को अपने राज्य व ब्रिटिश क्षेत्र के बीच सीमा के रूप में स्वीकार किया?
- (a)ब्यास
- (b)रावी
- (c)सतलुज
- (d)चिनाब
उत्तर(c) सतलुज — ब्रिटिश के साथ 1809 की संधि ने सतलुज को रंजीत सिंह के पूर्व की ओर विस्तार की सीमा के रूप में मान्यता दी।