निम्नलिखित में से किसको नगरीकरण वक्र में त्वरित अवस्था कहा जाता है ?
- (a)प्रथम अवस्था
- (b)द्वितीय अवस्था
- (c)तृतीय अवस्था
- (d)चतुर्थ अवस्था
सही उत्तर — (b), द्वितीय अवस्था। नगरीकरण वक्र (रे एम. नॉर्थम का प्रचलित S-आकार या लॉजिस्टिक वक्र) किसी देश की नगरीय जनसंख्या के हिस्से के विकास को तीन अवस्थाओं में बाँटता है। प्रथम अवस्था — आरंभिक अवस्था — मुख्यतः ग्रामीण, कृषि-प्रधान समाज में निम्न नगरीकरण (सामान्यतः लगभग 25% नगरीय से कम) की एक लंबी अवधि है। द्वितीय अवस्था — त्वरित अवस्था — मध्य का तीव्र, तेज़ी से बढ़ता खंड है (लगभग 25% से 70% नगरीय), जब औद्योगीकरण व ग्रामीण-से-नगरीय प्रवासन नगरीय जनसंख्या को तेज़ी से ऊपर ले जाते हैं। तृतीय अवस्था — अंतिम अवस्था — जहाँ वक्र उच्च स्तर (लगभग 70% से ऊपर) पर समतल हो जाता है, और नगरीय वृद्धि धीमी पड़ जाती है। चूँकि त्वरित अवस्था वह तीव्र मध्य खंड है, यह द्वितीय अवस्था से मेल खाती है, इसलिए विकल्प (b) सही है।
- (a)प्रथम अवस्था — गलत — प्रथम (आरंभिक) अवस्था मुख्यतः ग्रामीण समाज की धीमी, निम्न-नगरीकरण अवस्था है, न कि तीव्र त्वरण की अवस्था।
- (c)तृतीय अवस्था — गलत — तृतीय (अंतिम) अवस्था वह है जहाँ वक्र उच्च नगरीकरण स्तर पर समतल हो जाता है और वृद्धि धीमी हो जाती है; यह त्वरण के विपरीत है।
- (d)चतुर्थ अवस्था — गलत — मानक नगरीकरण वक्र में केवल तीन अवस्थाएँ होती हैं (आरंभिक, त्वरित, अंतिम); कोई चतुर्थ अवस्था नहीं है।
नगरीकरण वक्र यह दर्शाता है कि समय के साथ किसी देश की नगरीय क्षेत्रों में रहने वाली जनसंख्या का अनुपात कैसे बदलता है। भूगोलवेत्ता रे एम. नॉर्थम ने इसे एक क्षीणित S-आकार (लॉजिस्टिक) वक्र के रूप में तीन अवस्थाओं के साथ प्रतिरूपित किया: (1) आरंभिक अवस्था — कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था में निम्न, धीरे-धीरे बढ़ता नगरीय हिस्सा; (2) त्वरित अवस्था — उद्योग व सेवाओं द्वारा लोगों को शहरों की ओर खींचने से तीव्र, तीखी वृद्धि; और (3) अंतिम अवस्था — परिपक्व, अत्यधिक नगरीकृत अर्थव्यवस्था में उच्च, धीरे-धीरे बढ़ता या समतल होता नगरीय हिस्सा।
कुंजी है S-वक्र की कल्पना करना: एक समतल आधार, एक तीखा उठता मध्य भाग, और एक समतल शीर्ष। 'त्वरण' उस तीखे मध्य खंड का नाम है, जो तीन अवस्थाओं में दूसरी है। भारत जैसे विकासशील देश आमतौर पर इसी त्वरण चरण में रखे जाते हैं, जहाँ नगरीय जनसंख्या सबसे तेज़ी से बढ़ती है। तीन-अवस्था संरचना को पहचानना विकल्प (d) को भी सीधे खारिज कर देता है, क्योंकि कोई चतुर्थ अवस्था नहीं है।
- नगरीकरण वक्र (नॉर्थम) एक S-आकार/लॉजिस्टिक वक्र है जिसमें तीन अवस्थाएँ हैं।
- अवस्था 1 (आरंभिक): निम्न नगरीय हिस्सा (~25% से कम), कृषि-प्रधान समाज, धीमी वृद्धि।
- अवस्था 2 (त्वरित): औद्योगीकरण व प्रवासन से तीव्र वृद्धि (~25% से 70% नगरीय)।
- अवस्था 3 (अंतिम): उच्च नगरीय हिस्सा (~70% से ऊपर), वृद्धि समतल होती है; केवल तीन अवस्थाएँ ही मौजूद हैं।
- अवस्था 1 — आरंभिक: निम्न नगरीय %, धीमी वृद्धि (कृषि-प्रधान)
- अवस्था 2 — त्वरित: तीव्र वृद्धि (~25%→70%) — उत्तर
- अवस्था 3 — अंतिम: उच्च नगरीय %, वक्र समतल होता है
तीखा मध्य खंड त्वरित अवस्था है → द्वितीय अवस्था → विकल्प (b)।
- 'चतुर्थ अवस्था' चुनना — मानक वक्र में केवल तीन अवस्थाएँ होती हैं
- त्वरित (तीखे मध्य) अवस्था को अंतिम (समतल होती) अवस्था से गड्ड-मड्ड करना
UPPSC बस्ती भूगोल को नगरीकरण वक्र के माध्यम से परखता है — याद रखें यह आरंभिक, त्वरित (मध्य/तीव्र) व अंतिम अवस्थाओं वाला एक S-वक्र है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
नॉर्थम के नगरीकरण वक्र में, वह अवस्था जिसमें नगरीय जनसंख्या हिस्सा सबसे तेज़ी से बढ़ता है, कहलाती है
- (a)आरंभिक अवस्था
- (b)त्वरित अवस्था
- (c)अंतिम अवस्था
- (d)स्थिरावस्था
उत्तर(b) त्वरित अवस्था — S-वक्र का तीखा मध्य खंड जहाँ नगरीकरण सबसे तेज़ी से बढ़ता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
रे नॉर्थम द्वारा प्रस्तावित नगरीकरण वक्र को सर्वोत्तम रूप से किस प्रकार वर्णित किया जाता है?
- (a)एक सीधी ऊर्ध्वगामी रेखा
- (b)तीन अवस्थाओं वाला एक क्षीणित S-आकार (लॉजिस्टिक) वक्र
- (c)एक U-आकार वक्र
- (d)एक घंटी-आकार वक्र
उत्तर(b) तीन अवस्थाओं वाला एक क्षीणित S-आकार (लॉजिस्टिक) वक्र — आरंभिक, त्वरित व अंतिम।