वायुमण्डल में प्रकाश के प्रसार का कारण है
- (a)कार्बन-डाई-ऑक्साइड
- (b)धूल कण
- (c)हीलियम
- (d)जल वाष्प
सही उत्तर — (b) धूल कण। जब प्रकाश किसी माध्यम से होकर गुज़रता है जिसमें बारीक निलंबित कण उपस्थित हों, तो वह कई दिशाओं में पुनर्निर्देशित हो जाता है — इस प्रक्रिया को प्रकीर्णन या प्रकाश का प्रसार कहते हैं। वायुमण्डलीय धूल और एरोसोल जैसे बड़े निलंबित कण टिंडल प्रभाव उत्पन्न करते हैं, जिससे प्रकाश स्पेक्ट्रम भर में व्यापक रूप से प्रकीर्णित होकर किरण-पुंज दृश्यमान बन जाते हैं और दिन का प्रकाश विसरित हो जाता है। दिए गए विकल्पों में धूल कण ही मुख्य प्रकीर्णक हैं।
- (a)कार्बन-डाई-ऑक्साइड — गलत — CO2 वायुमण्डल की केवल एक ट्रेस गैस है; हालाँकि वायु के अणु भी प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं (रेली प्रकीर्णन), विशेष रूप से CO2 प्रकाश के सामान्य प्रसार का कारण नहीं है और यह अभीष्ट उत्तर नहीं है।
- (c)हीलियम — गलत — हीलियम एक निष्क्रिय गैस है जो अत्यंत अल्प मात्रा में उपस्थित है; सूर्य के प्रकाश को प्रकीर्णित करने में इसकी कोई सार्थक भूमिका नहीं है।
- (d)जल वाष्प — गलत — जल वाष्प प्रकाश को अवशोषित कर सकता है और बूँदों के रूप में उसे प्रकीर्णित भी कर सकता है, परन्तु वायुमण्डल में प्रकाश का सामान्य प्रसार मुख्यतः निलंबित धूल व कणिकीय पदार्थ को दिया जाता है, जल वाष्प को नहीं।
जब प्रकाश किसी बारीक निलंबित कणों वाले माध्यम से गुज़रता है, तो वह कई दिशाओं में पुनर्निर्देशित हो जाता है — इस प्रक्रिया को प्रकाश का प्रकीर्णन या प्रसार कहते हैं। वायुमण्डलीय धूल व एरोसोल जैसे बड़े निलंबित कण टिंडल प्रभाव उत्पन्न करते हैं, जो प्रकाश को स्पेक्ट्रम भर में व्यापक रूप से प्रकीर्णित करता है और किरण-पुंज को दृश्यमान तथा दिन के प्रकाश को विसरित बनाता है। (अत्यंत छोटे वायु अणु तरंगदैर्घ्य-निर्भर रेली प्रकीर्णन उत्पन्न करते हैं, जिससे आकाश नीला दिखता है — परन्तु इस प्रश्न में प्रकाश के सामान्य प्रसार का श्रेय धूल कणों को दिया गया है।)
ट्रेस गैसों को हटाएँ: हीलियम और कार्बन-डाई-ऑक्साइड अत्यंत अल्प मात्रा में उपस्थित हैं और प्रकाश के दृश्य प्रसार के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। जल वाष्प मुख्यतः अवशोषित करता है; प्रमुख प्रकीर्णक वायु में निलंबित असंख्य धूल व एरोसोल कण हैं। अतः उत्तर धूल कण है।
- निलंबित कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन को टिंडल प्रभाव (प्रकाश का प्रसार) कहते हैं।
- वायुमण्डलीय धूल व एरोसोल मुख्य प्रकीर्णक हैं जो सूर्य के प्रकाश को प्रसारित करते हैं।
- वायु अणुओं द्वारा रेली प्रकीर्णन (तीव्रता तरंगदैर्घ्य की चौथी घात के व्युत्क्रमानुपाती) आकाश को नीला और अस्त होते सूर्य को लाल दिखाता है।
- प्रकाश की किरण दृश्यमान बन जाती है (जैसे धूल भरे कमरे या कोहरे में) क्योंकि कण उसे आँख की ओर प्रकीर्णित करते हैं।

- प्रकीर्णन (प्रसार) को परावर्तन या अपवर्तन से भ्रमित करना
- यह मान लेना कि कोई विशेष गैस (CO2 या जल वाष्प) प्रसार का कारण है, जबकि निलंबित धूल कण मुख्य प्रकीर्णक हैं
UPSC/UPPSC वायुमण्डलीय प्रकाशिकी पर एक-पंक्ति प्रश्न पूछते हैं — परिघटना (नीला आकाश, लाल सूर्यास्त, दृश्यमान किरण-पुंज, विसरित दिन का प्रकाश) को कणों या अणुओं द्वारा प्रकीर्णन से जोड़ें।
वायुमण्डल में प्रकाश के प्रसार का कारण है
- (a) कार्बन-डाई-ऑक्साइड
- (b) धूल कण
- (c) हीलियम
- (d) जल वाष्प
उत्तर(b) धूल कण
बिल्कुल वही UPSC प्रश्न ('वायुमण्डल में प्रकाश के प्रसार का कारण है') — यह पुष्टि करता है कि धूल कण उत्तर हैं; UPPSC 2021 ने इसे शब्दशः दोहराया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
स्वच्छ आकाश का नीला रंग किसके कारण होता है ?
- (a)प्रकाश का परावर्तन
- (b)प्रकाश का अपवर्तन
- (c)प्रकाश का प्रकीर्णन
- (d)पूर्ण आंतरिक परावर्तन
उत्तर(c) प्रकाश का प्रकीर्णन — छोटी (नीली) तरंगदैर्घ्य वायु अणुओं द्वारा सबसे अधिक प्रकीर्णित होती हैं (रेली प्रकीर्णन)।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
टिंडल प्रभाव का सबसे अच्छा उदाहरण निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
- (a)एक इंद्रधनुष
- (b)हवा में धूल से दृश्यमान बनी प्रकाश-किरण
- (c)दर्पण-प्रतिबिंब
- (d)तारों का टिमटिमाना
उत्तर(b) हवा में धूल से दृश्यमान बनी प्रकाश-किरण — निलंबित कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन।