सूची - I को सूची - II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए । सूची - I (ग्रन्थ) A. रागमाला B. रस कौमुदी C. राग विबोध D. चतुर्दण्डी प्रकाशिका सूची - II (रचयिता) 1. सोमनाथ 2. वेंकटरमन 3. पुण्डरीक विट्ठल 4. श्री कण्ठ कूट :
- (a)A-3, B-4, C-1, D-2
- (b)A-4, B-2, C-1, D-3
- (c)A-2, B-3, C-4, D-1
- (d)A-1, B-2, C-3, D-4
सही उत्तर — (a), A-3 B-4 C-1 D-2। चार संस्कृत संगीत-ग्रन्थ अपने रचयिताओं से इस प्रकार सुमेलित हैं: A. रागमाला → पुण्डरीक विट्ठल (3); B. रस कौमुदी → श्री कण्ठ (4); C. राग विबोध → सोमनाथ (1); D. चतुर्दण्डी प्रकाशिका → वेंकटमखी, जिन्हें यहाँ 'वेंकटरमन' दिया गया है (2)। इनमें से दो युग्म पक्के तौर पर स्थापित हैं और अकेले ही उत्तर तय कर देते हैं: राग विबोध सोमनाथ का सुविख्यात 1609 का ग्रन्थ है (C-1), और चतुर्दण्डी प्रकाशिका (लगभग 1650) वेंकटमखी की वह रचना है जिसने कर्नाटक संगीत में आज भी प्रचलित 72-मेलकर्ता राग-वर्गीकरण की नींव रखी (D-2)। केवल विकल्प (a) में ही C-1 और D-2 दोनों साथ मौजूद हैं — विकल्प (b) D-2 को तोड़ता है, तथा विकल्प (c) और (d) C-1 को तोड़ते हैं — अतः उत्तर (a) पर ही स्थिर होता है। शेष युग्म भी इसी क्रम में मिलते हैं: पुण्डरीक विट्ठल (मुगल दरबार से जुड़े 16वीं-सदी के सिद्धांतकार) ने रागमाला की रचना की, और श्री कण्ठ ने रस कौमुदी लिखी।
- (b)A-4, B-2, C-1, D-3 — C-1 (राग विबोध–सोमनाथ) को तो सही रखता है परन्तु बाकी सब बदल देता है — यह गलत ढंग से चतुर्दण्डी प्रकाशिका को श्री कण्ठ (D-3) को देता है, न कि वेंकटमखी को, और रागमाला को श्री कण्ठ (A-4) को देता है, न कि पुण्डरीक विट्ठल को।
- (c)A-2, B-3, C-4, D-1 — प्रत्येक युग्म बदला हुआ है — यह राग विबोध को वेंकटरमन (C-4) को देता है सोमनाथ के बजाय, और चतुर्दण्डी प्रकाशिका को सोमनाथ (D-1) को देता है वेंकटमखी के बजाय।
- (d)A-1, B-2, C-3, D-4 — यह गलत ढंग से रागमाला को सोमनाथ (A-1) को देता है और चतुर्दण्डी प्रकाशिका को श्री कण्ठ (D-4) को देता है; राग विबोध सोमनाथ की और चतुर्दण्डी प्रकाशिका वेंकटमखी की रचना है।
ये मध्यकालीन से आरंभिक-आधुनिक काल के चार संस्कृत संगीत-शास्त्र (सांगीतिक) ग्रन्थ हैं, प्रत्येक एक भिन्न रचयिता से जुड़ा है। राग विबोध (1609) राग-सिद्धांत तथा वीणा पर सोमनाथ की रचना है; चतुर्दण्डी प्रकाशिका (लगभग 1650) वेंकटमखी की वह महत्वपूर्ण रचना है जिसने 72 मेलकर्ता (मूल) रागों को व्यवस्थित किया — जो आज भी कर्नाटक राग-वर्गीकरण की रीढ़ है। पुण्डरीक विट्ठल, उत्तर भारतीय दरबारों से जुड़े 16वीं-सदी के सिद्धांतकार, ने रागमाला सहित कृतियों की एक चौकड़ी लिखी; और श्री कण्ठ ने रस कौमुदी की रचना की। इस प्रकार के 'ग्रन्थ ↔ रचयिता' युग्म-सूचियाँ भारतीय संगीत/संस्कृति पर UPPSC तथा UPSC में बार-बार आती हैं।
चार-युग्म वाली युग्म-सूची में विश्वसनीय तकनीक यह है कि आप जिन युग्मों के बारे में निश्चित हैं उन पर टिके रहें और शेष को समाप्त करें। यहाँ दो पाठ्यपुस्तक-मानक युग्म — सोमनाथ का राग विबोध (C-1) तथा वेंकटमखी की चतुर्दण्डी प्रकाशिका (D-2) — केवल विकल्प (a) में साथ आते हैं। उत्तर तय करने के लिए आपको पुण्डरीक विट्ठल या श्री कण्ठ के श्रेय याद रखने की भी आवश्यकता नहीं; ये दो जाने-पहचाने युग्म बाकी सभी विकल्पों को समाप्त कर देते हैं।
- राग विबोध (1609) — सोमनाथ; रागों तथा वीणा-तकनीक पर एक प्रमुख ग्रन्थ।
- चतुर्दण्डी प्रकाशिका (लगभग 1650) — वेंकटमखी (यहाँ 'वेंकटरमन' के रूप में सूचीबद्ध); कर्नाटक संगीत की 72-मेलकर्ता राग-प्रणाली की परिभाषा दी।
- रागमाला — पुण्डरीक विट्ठल, 16वीं-सदी के एक संगीत-सिद्धांतकार (उनकी कृतियों की चौकड़ी का भाग)।
- रस कौमुदी — श्री कण्ठ।

- राग विबोध (सोमनाथ) और चतुर्दण्डी प्रकाशिका (वेंकटमखी) को आपस में बदल देना — यही दो निर्णायक युग्म हैं।
- विकल्पों में 'वेंकटरमन' को वेंकटमखी के रूप में न पहचान पाना, जो मेलकर्ता योजना के रचयिता हैं।
UPPSC भारतीय संगीत/साहित्य पर 'ग्रन्थ ↔ रचयिता' युग्म-सूचियाँ पसंद करता है; UPSC भी इसी को किसी ग्रन्थ (जैसे संगीत रत्नाकर) का नाम देकर उसका रचयिता पूछकर, या इसके उलट, परखता है।
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए : सूची I I. पंडित विष्णु दिगम्बर पलुस्कर II. वेंकटमखी III. श्यामा शास्त्री IV. अमीर खुसरो सूची II A. भारतीय संगीत के राग-वर्गीकरण की योजना प्रस्तुत की B. कर्नाटक संगीत के प्रवर्तक C. हिन्दुस्तानी संगीत की ख़याल शैली के प्रवर्तक D. गीत 'वंदे मातरम्' का संगीत रचा कूट :
- (a) I-D, II-A, III-C, IV-B
- (b) I-D, II-A, III-B, IV-C
- (c) I-A, II-D, III-C, IV-B
- (d) I-A, II-D, III-B, IV-C
उत्तर(b) I-D, II-A, III-B, IV-C
समान अवधारणा — भारतीय संगीत-सिद्धांतकारों की युग्म-सूची जो इस बात पर टिकी है कि 'वेंकटमखी' राग-वर्गीकरण योजना के रचयिता हैं (II-A), जो ठीक वही चतुर्दण्डी प्रकाशिका / मेलकर्ता श्रेय है जिसकी परख यह UPPSC प्रश्न (D-2) करता है।
सूची I (पुस्तकें) को सूची II (लेखक) से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए : सूची I I. माई म्यूज़िक, माई लाइफ II. आधा गाँव III. राधा IV. द पिल्फ़रर सूची II A) लक्ष्मण गायकवाड़ B) राही मासूम रज़ा C) रमाकांत रथ D) रवि शंकर कूट :
- (a) I-C, II-B, III-D, IV-A
- (b) I-D, II-B, III-C, IV-A
- (c) I-D, II-A, III-C, IV-B
- (d) I-C, II-A, III-D, IV-B
उत्तर(b) I-D, II-B, III-C, IV-A
भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में वही 'ग्रन्थ ↔ रचयिता' सुमेलन कौशल (इसका अग्रणी युग्म संगीत-संस्मरण 'माई म्यूज़िक, माई लाइफ' → रवि शंकर है), जो इस बात को दर्शाता है कि UPPSC प्रश्न भी उम्मीदवारों से प्रत्येक संगीत-ग्रन्थ को उसके रचयिता से जोड़ने के लिए कहता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
चतुर्दण्डी प्रकाशिका, जिसने कर्नाटक संगीत के 72 मेलकर्ता राग-वर्गीकरण को प्रतिपादित किया, किसके द्वारा लिखी गई थी
- (a)सोमनाथ
- (b)वेंकटमखी
- (c)शार्ङ्गदेव
- (d)पुण्डरीक विट्ठल
उत्तर(b) वेंकटमखी — उनके लगभग 1650 के ग्रन्थ ने मेलकर्ता (मूल राग) योजना की स्थापना की जो आज भी कर्नाटक संगीत में प्रयुक्त होती है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
13वीं शताब्दी का प्रसिद्ध संगीत ग्रन्थ 'संगीत रत्नाकर' किसके द्वारा रचा गया था
- (a)सोमनाथ
- (b)शार्ङ्गदेव
- (c)वेंकटमखी
- (d)श्री कण्ठ
उत्तर(b) शार्ङ्गदेव — उनका संगीत रत्नाकर हिन्दुस्तानी व कर्नाटक दोनों परंपराओं में समादृत एक मूलभूत ग्रन्थ है।