सातवाहन शासकों के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं ? 1. सातवाहन नरेश प्राकृत भाषा के पोषक थे । 2. सातवाहन काल में कला के लोक पक्ष को अधिक प्रोत्साहन मिला । नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर को चुनिए । कूट :
- (a)केवल 1
- (b)1 और 2 दोनों
- (c)केवल 2
- (d)न तो 1 न ही 2
सही उत्तर — (b) 1 और 2 दोनों। कथन 1 सत्य है: सातवाहन (लगभग पहली शताब्दी ईसा पूर्व – तीसरी शताब्दी ईस्वी, दक्कन) प्राकृत के, न कि संस्कृत के, पोषक थे — उनकी राजभाषा तथा उनके गुफा अभिलेख (नासिक, नानेघाट) प्राकृत में हैं, और राजा हाल का प्रसिद्ध काव्य-संग्रह गाहा सत्तसई (गाथासप्तशती) महाराष्ट्री प्राकृत में रचित है। कथन 2 भी सत्य है: सातवाहनों के अधीन कला व स्थापत्य (अमरावती व करले, नासिक, कान्हेरी के महान स्तूप और शैल-कर्तित चैत्य, तथा बाद में सांची के प्रवेश-द्वार) मुख्यतः सामूहिक, सार्वजनिक दान से — व्यापारियों, शिल्पी-श्रेणियों (गिल्डों), भिक्षुओं, भिक्षुणियों तथा साधारण गृहस्थ श्रद्धालुओं द्वारा — फले-फूले, जिससे कला को विशुद्ध राजकीय स्वरूप की बजाय सशक्त सार्वजनिक/लोकप्रिय चरित्र मिला। चूँकि दोनों कथन सही हैं, अतः उत्तर 'दोनों 1 और 2' है।
- (a)केवल 1 — गलत — यह सत्य कथन 2 को छोड़ देता है; सातवाहन कला का सार्वजनिक/सामूहिक चरित्र (व्यापारियों, गिल्डों व गृहस्थ श्रद्धालुओं द्वारा वित्तपोषित) वास्तव में अत्यधिक प्रोत्साहित किया गया था।
- (c)केवल 2 — गलत — यह सत्य कथन 1 को छोड़ देता है; सातवाहन स्पष्ट रूप से प्राकृत के पोषक थे (राजभाषा व अभिलेख प्राकृत में; हाल की गाहा सत्तसई)।
- (d)न तो 1 न ही 2 — गलत — दोनों कथन ऐतिहासिक रूप से सही हैं, अतः 'न तो' उत्तर नहीं हो सकता।
सातवाहनों ने दक्कन (मोटे तौर पर उत्तरी दक्कन तथा पश्चिम व आंध्र के कुछ भाग) पर लगभग पहली शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईस्वी तक शासन किया, जिसमें गौतमीपुत्र सातकर्णि तथा कवि-राजा हाल जैसे शासक शामिल थे। उन्होंने प्राकृत को दरबारी व प्रशासनिक भाषा के रूप में अपनाया और बौद्ध कला के महान पोषक थे, जिनके अधीन अमरावती शैली तथा अनेक शैल-कर्तित मठ विकसित हुए, जो व्यापार व लोकप्रिय दान से भारी वित्तपोषित थे।
दोनों कथन सातवाहनों की मानक विशेषताएँ हैं, अतः किसी एक को अस्वीकार करने का प्रलोभन ही जाल है। याद रखें 'सातवाहन = प्राकृत' (हाल की गाहा सत्तसई, नानेघाट/नासिक के प्राकृत अभिलेख) और 'सातवाहन कला = सार्वजनिक/सामूहिक संरक्षण' (अमरावती, करले, नासिक में व्यापारियों व गिल्डों के दानात्मक अभिलेख)। दोनों सत्य होने के कारण केवल 'दोनों 1 और 2' ही फिट बैठता है।
- सातवाहन (लगभग पहली शताब्दी ईसा पूर्व – तीसरी शताब्दी ईस्वी) ने दक्कन पर शासन किया; उल्लेखनीय शासक गौतमीपुत्र सातकर्णि व हाल।
- उन्होंने प्राकृत को संरक्षण दिया — राजभाषा व गुफा अभिलेख (नासिक, नानेघाट) प्राकृत में हैं।
- राजा हाल की गाहा सत्तसई (गाथासप्तशती) एक प्राकृत काव्य-संग्रह है।
- बौद्ध कला (अमरावती स्तूप, करले व नासिक चैत्य) व्यापारियों, गिल्डों, भिक्षुओं व गृहस्थ श्रद्धालुओं के सार्वजनिक/सामूहिक दान से फली-फूली।

- यह मान लेना कि सातवाहनों ने संस्कृत को संरक्षण दिया — उनकी पसंदीदा भाषा प्राकृत थी
- प्राचीन कला को विशुद्ध राजकीय मान लेना — सातवाहन बौद्ध कला मुख्यतः सार्वजनिक/सामूहिक दान से वित्तपोषित थी
UPPSC व UPSC सातवाहनों की परीक्षा भाषा (प्राकृत/हाल) व कला-संरक्षण (अमरावती, गुफा-दान) के माध्यम से करते हैं — सामान्यतः 'कौन-सा कथन सही है' युग्मों के रूप में।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
प्राकृत ग्रन्थ 'गाहा सत्तसई' (गाथासप्तशती) किस सातवाहन शासक को आरोपित है ?
- (a)गौतमीपुत्र सातकर्णि
- (b)हाल
- (c)वशिष्ठीपुत्र पुलुमावी
- (d)सिमुक
उत्तर(b) हाल — वह सातवाहन राजा जिसे प्राकृत काव्य-संग्रह गाहा सत्तसई का श्रेय दिया जाता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अमरावती कला शैली मुख्यतः किस राजवंश के संरक्षण में विकसित हुई ?
- (a)कुषाण
- (b)गुप्त
- (c)सातवाहन
- (d)मौर्य
उत्तर(c) सातवाहन — अमरावती स्तूप व इसकी संगमरमर मूर्तिकला सातवाहन दक्कन में फली-फूली।