'कार्बन क्रेडिट' की अवधारणा उत्पन्न हुई
- (a)अर्थ समिट, रियो-डे-जेनिरो
- (b)क्योटो प्रोटोकॉल
- (c)मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
- (d)जी - 8 समिट, हैलीजेंडम
सही उत्तर — (b) क्योटो प्रोटोकॉल। व्यापार-योग्य 'कार्बन क्रेडिट' की उत्पत्ति 1997 के क्योटो प्रोटोकॉल (UNFCCC के अंतर्गत) से हुई, जिसने विकसित (एनेक्स-I) देशों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी ग्रीनहाउस-गैस लक्ष्य लगाए और उन्हें लागत-प्रभावी ढंग से पूरा करने में मदद हेतु तीन बाज़ार-आधारित 'लचीले तंत्र' बनाए: उत्सर्जन व्यापार, स्वच्छ विकास तंत्र (CDM) और संयुक्त क्रियान्वयन (JI)। ये तंत्र एक टन CO2-समतुल्य की कमी या परिहार को प्रमाणित व व्यापार-योग्य क्रेडिट के रूप में व्यापार करने की अनुमति देते हैं — यही कार्बन-क्रेडिट प्रणाली है। अतः यह अवधारणा क्योटो प्रोटोकॉल से उत्पन्न हुई।
- (a)अर्थ समिट, रियो-डे-जेनिरो — गलत — 1992 के रियो पृथ्वी सम्मेलन ने UNFCCC (मूल ढाँचा) को जन्म दिया, परन्तु इसने कोई बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित नहीं किया और कोई व्यापार-योग्य क्रेडिट नहीं बनाया; क्रेडिट तंत्र बाद में, क्योटो में, आया।
- (c)मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल — गलत — मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों (CFC आदि) को चरणबद्ध रूप से समाप्त करता है; यह ओज़ोन परत से सम्बंधित है, ग्रीनहाउस-गैस कार्बन क्रेडिट से नहीं।
- (d)जी - 8 समिट, हैलीजेंडम — गलत — 2007 के हैलीजेंडम जी-8 शिखर सम्मेलन में जलवायु लक्ष्यों पर चर्चा हुई, परन्तु इसने कार्बन-क्रेडिट प्रणाली नहीं बनाई, जो पहले से ही 1997 के क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत मौजूद थी।
कार्बन क्रेडिट एक व्यापार-योग्य परमिट है जो एक टन कार्बन-डाइऑक्साइड-समतुल्य की कमी, परिहार या हटाव को दर्शाता है। इस विचार को क्योटो प्रोटोकॉल (1997 में अपनाया गया, 2005 में प्रभावी) द्वारा संस्थागत रूप दिया गया, जिसने एनेक्स-I देशों के लिए बाध्यकारी उत्सर्जन सीमाएँ निर्धारित कीं और उन्हें अन्यत्र उत्पन्न क्रेडिट खरीदकर लचीले ढंग से सीमाएँ पूरी करने दीं — जिससे उत्सर्जन कटौती एक बाज़ार वस्तु बन गई।
संधियों को उनके कार्य से अलग करें: रियो 1992 = UNFCCC ढाँचा (कोई बाध्यकारी कटौती नहीं); क्योटो 1997 = बाध्यकारी लक्ष्य + बाज़ार तंत्र (जहाँ कार्बन क्रेडिट जन्म लेते हैं); मॉन्ट्रियल 1987 = ओज़ोन-परत पदार्थ, कार्बन नहीं। शब्द 'उत्पन्न' इस ओर इशारा करता है कि व्यापार तंत्र वास्तव में कहाँ बनाया गया — क्योटो।
- कार्बन क्रेडिट क्योटो प्रोटोकॉल (1997 में अपनाया गया, 16 फरवरी 2005 को प्रभावी हुआ) के अंतर्गत उत्पन्न हुए।
- क्योटो के तीन लचीले तंत्र: उत्सर्जन व्यापार, स्वच्छ विकास तंत्र (CDM) और संयुक्त क्रियान्वयन (JI)।
- 1 कार्बन क्रेडिट = 1 टन CO2-समतुल्य की कमी या परिहार; CDM प्रमाणित उत्सर्जन कटौती (CER) जारी करता है।
- 1992 के रियो पृथ्वी सम्मेलन ने UNFCCC ढाँचा बनाया; मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) ओज़ोन परत की रक्षा करता है।
UNFCCC (रियो) ने ढाँचा तय किया, परन्तु व्यापार-योग्य कार्बन क्रेडिट वास्तव में क्योटो में इसके तीन बाज़ार तंत्रों के माध्यम से उत्पन्न हुए।
- मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (ओज़ोन) को जलवायु/कार्बन संधियों से भ्रमित करना
- रियो पृथ्वी सम्मेलन (UNFCCC) को कार्बन-क्रेडिट तंत्र का श्रेय देना — वह क्योटो में आया
UPPSC व UPSC बार-बार पूछते हैं 'कार्बन क्रेडिट/CDM/CER किस संधि के अंतर्गत उत्पन्न हुआ' — उत्तर क्योटो प्रोटोकॉल है; रियो (ढाँचा) और मॉन्ट्रियल (ओज़ोन) को अलग रखें।
'कार्बन क्रेडिट' की अवधारणा निम्नलिखित में से किससे उत्पन्न हुई ?
- (a) पृथ्वी सम्मेलन, रियो डी जेनेरो
- (b) क्योटो प्रोटोकॉल
- (c) मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
- (d) जी-8 समिट, हैलीजेंडम
उत्तर(b) क्योटो प्रोटोकॉल
मूलतः समान प्रश्न, समान विकल्पों व उत्तर के साथ — UPSC के 2009 प्रारंभिक परीक्षा में ठीक यही पूछा गया था, जो पुष्टि करता है कि कार्बन क्रेडिट = क्योटो प्रोटोकॉल।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कार्बन क्रेडिट के संबंध में स्वच्छ विकास तंत्र (CDM), क्योटो प्रोटोकॉल के तंत्रों में से एक है। 2. CDM के अंतर्गत, केवल एनेक्स-I देशों से सम्बंधित परियोजनाओं को ही संभाला जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 न ही 2
उत्तर(a) केवल 1
समान अवधारणा — कार्बन क्रेडिट और CDM क्योटो प्रोटोकॉल के तंत्र हैं (CDM परियोजनाएँ विकासशील, गैर-एनेक्स-I देशों में चलती हैं)।
'कार्बन क्रेडिट' के सन्दर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
- (a) कार्बन क्रेडिट प्रणाली को क्योटो प्रोटोकॉल के साथ मिलकर अनुसमर्थित किया गया था
- (b) कार्बन क्रेडिट उन देशों या समूहों को दिए जाते हैं जिन्होंने ग्रीनहाउस गैसों को अपने उत्सर्जन कोटे से नीचे घटाया है
- (c) कार्बन क्रेडिट प्रणाली का लक्ष्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की वृद्धि को सीमित करना है
- (d) कार्बन क्रेडिट का व्यापार संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा समय-समय पर निर्धारित मूल्य पर किया जाता है
उत्तर(d) कार्बन क्रेडिट का व्यापार संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा समय-समय पर निर्धारित मूल्य पर किया जाता है
उसी विषय को गहराई देता है — कार्बन क्रेडिट क्योटो प्रोटोकॉल के साथ उत्पन्न हुए और इनका मूल्य बाज़ार तय करता है, न कि UNEP द्वारा निर्धारित।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
स्वच्छ विकास तंत्र (CDM) निम्नलिखित में से किसकी विशेषता है ?
- (a)मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
- (b)क्योटो प्रोटोकॉल
- (c)पेरिस समझौता
- (d)कार्टाजेना प्रोटोकॉल
उत्तर(b) क्योटो प्रोटोकॉल — CDM इसके तीन लचीले बाज़ार तंत्रों में से एक है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एक 'कार्बन क्रेडिट' सामान्यतः किसके समतुल्य होता है ?
- (a)एक किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड
- (b)एक टन कार्बन डाइऑक्साइड-समतुल्य
- (c)एक टन कार्बन मोनोऑक्साइड
- (d)एक टन मीथेन
उत्तर(b) एक टन कार्बन डाइऑक्साइड-समतुल्य — कार्बन क्रेडिट की मानक इकाई।